मंगलवार, 4 मार्च 2014

देव पूजा विधि Part-10 पार्थिव-शिव-पूजन

पवित्र होकर संकल्प वाक्य के अन्त में पार्थिवलिङ्पूजनं करिष्ये कहकर संकल्प का जल छोडें।
            भूमि-प्रार्थना-सर्वाधारे धरे देवि त्वद्रूपां मृत्तिकामिमाम्।
            ग्रहीष्यामि प्रसन्ना त्वं लिङ्गार्थं भव सुप्रभे।।
            ॐ ह्रां पृथिव्यै नमः।
                        उद्धृतासि वराहेण कृष्णेन शतबाहुना।
                        मृत्तिके त्वां च गृह्णामि प्रजया च धनेन च।।
ॐ हराय नमः मृत्तिका ग्रहण करें। ॐ बं अमृताय नमः जल को अभिमन्त्रिात करें। ॐमहेश्वराय नमः मूर्ति बनाएँ। ॐ शूलपाणये नमः मूर्ति स्थापित करें।
विनियोग-
ॐ अस्य श्रीशिवपञ्चाक्षरमन्त्रास्य वामदेव ऋषिरनुष्टुप्छन्दः श्रीसदाशिवो देवता, ॐ बीजं, नमः शक्तिः, शिवाय कीलकं मम साम्बसदाशिवप्रीत्यर्थं न्यासे पूजने जपे च विनियोगः।।
अङ्न्यास-ॐवामदेवाय ऋषये नमः शिरसि। ॐअनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे। ॐ सदाशिवदेवतायै नमः हृदि। ॐ बीजाय नमः गुह्ये। ॐ शक्तये नमः पादयोः। ॐ शिवाय कीलकाय नमः सर्वांगे। ॐ नं तत्पुरुषाय नमो हृदये। ॐ मं अघोराय नमः पादयोः। ॐ शिं सद्योजाताय नमः गुह्ये। ॐ वां वामदेवाय नमः मूध्र्नि। ॐ यं ईशानाय नमः मुखे। ॐ अङ्घष्ठाभ्यां नमः। ॐ नं तर्जनीभ्यां नमः। ॐ मं मध्यमाभ्यां वषट्। ॐ शिं अनामिकाभ्यां नमः। ॐ वां कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्। ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्यां फट्। ॐ हृदयाय नमः। ॐ नं शिरसे स्वाहा। ॐ मं शिखायै वषट्। ॐ शिं कवचाय हुम्। ॐ वां नेत्राभ्यां वौषट्। ॐ यं अश्राय फट्।।
विनियोग-ॐ अस्य श्रीप्राणप्रतिष्ठामन्त्रास्य ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वराः ऋषयः ऋग्यजुः सामानिच्छन्दांसि क्रियामयवपुः प्राणाख्या देवता ॐ आं बीजं ह्रीं शक्तिः क्रौं कीलकं देवप्राणप्रतिष्ठापने विनियोगः।
प्रतिष्ठा-ॐ ब्रह्म-विष्णु-रुद्र ऋषिभ्यो नमः शिरसि। ॐ ऋग्यजुः सामच्छन्देभ्यो नमो मुखे। ॐ प्राणाख्यदेवतायै नमः हृदि। ॐ आं बीजाय नमो गुह्ये। ॐ ह्रीं शक्तये नमः पादयोः। ॐ क्रौं कीलकाय नमः सर्वांगे। इस प्रकार अङ्ग न्यास करके।
ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः सोऽहं शिवस्य प्राणा इह प्राणाः। ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः सोऽहं शिवस्य जीव इह स्थितः। ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः सोऽहं शिवस्य सर्वेन्द्रियाणि वाङ्मनस्त्वक्चक्षुः श्रोत्राघ्राणजिह्नापाणिपादपायूपस्थानि इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा।।
नीचे लिखे मन्त्र से पुष्प समर्पण करें।
ॐ भूः पुरुषं साम्बसदाशिवमावाहयामि। ॐ भुवः पुरुषं साम्बसदाशिवमावाहयामि। ॐ स्वः पुरुषं साम्बसदाशिवमावाहयामि।। इससे आवाहन करें। ॐ स्वामिन् सर्वजगन्नाथ! यावत् पूजावसानकम्।
                        तावत् त्वं प्रीतिभावेन लिङ्गेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।।
पूजन कर आगे लिखे मन्त्र से विसर्जन करें।
                        ॐ हरो महेश्वरश्चैव शूलपाणिः पिनाकधृक्।
                        शिवः पशुपतिश्चैव महादेव-विसर्जनम्।।