मंगलवार, 4 मार्च 2014

देव पूजा विधि Part-9 शिव-पूजन

पवित्र होकर आचमन-प्रणायाम करके संकल्प-वाक्य के अन्त में  श्रीसाम्बसदाशिवप्रीत्यर्थं गणपत्यादिसकलदेवतापूजनपूर्वंक श्रीभवानीशङ्करपूजनं करिष्ये। कहकर संकल्प करें। नीचे लिखे  आवाहन मंत्रों से मूर्तियों के समीप पुष्प छोड़ें। मूर्ति न हो तो आवाहन करके पूजन करें।
गणपति-पूजन-               आवाहयामि पूजार्थं रक्षार्थं च मम क्रतोः।
                                                इहागत्य गृहाण त्वं पूजां यागं च रक्ष मे।।
पूजन करके आगे लिखी प्रार्थना करें।
                                                लम्बोदर! नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रियम्।
                                                निर्विध्नं कुरु में देव! सर्वकार्येषु सर्वदा।
पार्वती-पूजन-     हेमाद्रितनयां देवीं वरदां शङ्करप्रियाम्।
                                    लम्बोदरस्य जननीं गौरीमावाहयाम्यहम्।।
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करें।
                                    ॐ अम्बेऽ अम्बिकेऽम्बालिके न मा नयति कश्चन।
                                    स सस्त्यश्वकः सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीम्।।
नन्दीश्वर-पूजन-ॐ आयं गौः पृश्निरक्रमीदसदन्मातरं पुरः। पितरञ्च प्रयन्त्स्वः।।
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करें।
                                                ॐ प्रैतु वाजी कनिक्रदन्नानदद्रासभः पत्वा।
                                                भरन्नग्निम्पुरीष्यम्मा पाद्यायुषः पुरा।।
वीरभद्र-पूजन-
                        ॐ भद्रं कर्णेभिः श्रृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
                        स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा सस्तनूभिव्र्यशेमहि देवहितं यदायुः।।
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करें।
            ॐ भद्रो नोऽ अग्निराहुतो भद्रा रातिः सुभग भद्रोऽ अध्वरः।
                                    भद्राऽउत प्रशस्तया।।
स्वामी कार्तिक-पूजन-ॐ यदक्रन्दः प्रथमं जायमानऽ उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्। श्येनस्य पक्षा हरिणस्य बाहूऽउपस्तुत्यं मही जातं तेऽ अर्वन्।।
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करें।
            ॐ यत्रा बाणाः सम्पतन्ति कुमारा विशिखाऽइव।
            तन्नऽ इन्द्रो बृहस्पतिरदितिः शर्म यच्छतु विश्वाहा शर्म यच्छतु।।
कुबेर-पूजन-ॐ कुविदङ्ग यवमन्तो यवं चिद्यथा दान्त्यनुपूर्वं वियूय।
                        इहेहैषां कृणुहि भोजनानि ये वर्हिषो नमऽउक्ति यजन्ति।।
पूजन करके आगे लिखी प्रार्थना करें।
            ॐ वय सोमव्रते तव मनस्तुनूषु विभ्रतः। प्रजावन्तः सचेमही।।
कीर्तिमुख-पूजन-ॐ असवे स्वाहा वसवे स्वाहा विभुवे स्वाहा विवस्वते स्वाहा गणश्रिये स्वाहा गणपतये स्वाहाऽभिभुवे स्वाहाऽभिभुवे स्वाहाऽद्दिपतये स्वाहा शूषाय स्वाहा स सर्पाय स्वाहा चन्द्राय स्वाहा ज्योतिषे स्वाहा मलिम्लुचाय स्वाहा दिवा पतये स्वाहा।।
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करें।
ॐ ओजश्च मे सहश्च मऽआत्मा च मे तनूश्च मे शर्म च मे वर्म च मेऽङ्गानि च मेऽस्थीनि च मे परू षि च मे शरीराणि च मऽ आयुश्च मे जरा च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्।।
जलहरी में सर्प का आकार हो तो सर्प का पूजन करें।
शिव का पूजन
पाद्य-ॐ नमोऽस्तु नीलग्रीवाय सहश्राक्षाय मीढुषे। अथो येऽ अस्य सत्वानोऽहं तेभ्योऽकरं नमः।। पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य-ॐ गायत्री त्रिष्टुब्जगत्यनुष्टुप्पङ्क्तîा सह। बृहत्युष्णिहा ककुप्सूचीभिः शम्यन्तु त्वा।। अघ्र्यं समर्पयामि।
आचमन-ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव
बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। आचमनीयं जलं समर्पयामि।
स्नान-ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्कम्भसर्जनी स्थो वरुणस्यऽ ऋतसदन्यसि वरुणस्यऽ ऋतसदनमसि वरुणस्यऽ ऋतसदनमासीद।। स्नानं समर्पयामि।
दुग्ध-ॐ गोक्षीरधामन् देवेश गोक्षीरेण मयाकृतम्।
स्नपनं देवदेवेश गृहाण शिवाङ्कर।। दुग्धस्नानं सम0
पुनर्जलस्नानं सम.।
दधि-ॐ दध्ना चैव मया देव स्नपनं क्रियते तव।
गृहाण भक्तîा दत्तं मे सुप्रसन्नो भवाव्यय।। दधिस्नान समर्प0, पुनर्जलस्नानं समर्प0
घृत-ॐ सर्पिषा देवदेवेश स्नपनं क्रियते मया।
उमाकान्त गृहाणेदं श्रद्धया सुरसत्तम।। घृतस्नानं समर्पयामि, पुनर्जलं समर्पयामि।
मधु-ॐ इदं मधु मया दत्तं तव तुष्ट्यर्थमेव च। गृहाण शम्भो मे भक्तîा    मम शान्तिप्रदो भव।।
 मधुस्नान स0, पुनर्जलस्नान स0
शर्करा-ॐ सितया देवदेवेश स्नपनं क्रियते मया। गृहाण शम्भो में भक्तîा मम शान्तिप्रदो भव।। शर्करा-स्नान स0, पुनर्जल00
पञ्चामृत-ॐ पञ्चामृतं मयानीतं पयोदधिसमन्वितम्। घृतं मधु शर्करया स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।। पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान-ॐ शुद्धवालः सर्वशुद्धवालो मणिवालस्तऽ आश्विनाः। श्येतः श्येताक्षोरुणस्ते रुद्राय पशुपतये कर्णा यामाऽ अवलिप्ता रौद्रा नभोरूपाः पार्जन्याः।। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
अभिषेक-ॐ नमस्ते रुद्र मान्यव0 से मा नस्तोके0 मंत्र (कुल 16 मंत्रों से)
जलधारा छोडे़ं (इन मंत्रों को देखें परिशिष्ट/रुद्रा0/पञ्चमाध्याय)
अभिषेकं समर्पयामि।
विजया-ॐ विज्यं धनुः कपर्दिनो विशल्यो वाणवाँऽ2 उत। अनेशन्नस्य याऽ इषवऽ आभुरस्य निषं गधिः।। विजयां समर्पयामि।
वस्त्र-ॐ प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरात्न्र्योज्र्याम्। याश्च ते हस्तऽ इषवः परा ता भगवो वप।। वस्त्रोपवस्त्रां समर्पयामि।
यज्ञोपवीत-ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेनऽ आवः। स बुध्न्याऽ उपमाऽ अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः।। यज्ञोपवीतं समर्प0 यज्ञोपवीतान्ते आचमनीयं जलं सं0
गन्ध-ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च।। गन्धं समर्पयामि।
अक्षत-ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। अक्षतं समर्पयामि।
पुष्प-ॐ नमः पार्यायचावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च नमस्तीथ्र्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च।। पुष्पं समर्पयामि।
पुष्पमाला-नानापङ्कजपुष्पैश्च ग्रथितां पल्लवैरपि।
                        विल्वपत्रायुतां मालां गृहाण सुमनोहराम्।। पुष्पमाल्यां समर्पयामि।
बिल्वपत्रा-ॐ नमो बिल्मिने च कवचिने च नमो वर्मिणे च वरूथिने च नमः। श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च।।
            काशीवास निवासी च कालभैरव पूजनम्।
            प्रयागे माघमासे च बिल्वपत्रंा शिवार्पणम्।।
            दर्शनं बिल्वपत्रास्य स्पर्शनं पापनाशनम्।
            अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रंा शिवार्पणम्।।
            त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रंा च त्रिधायुधम्।
            त्रिजन्मपापसहारं बिल्वपत्रंा शिवार्पणम्।।
            अखण्डैर्बिल्वपत्रैाश्च पूजयेत् शिवशङ्करम्।
            कोटिकन्यामहादानं बिल्वपत्रंा शिवार्पणम्।।
            गृहाण बिल्वपत्राणि सपुष्पाणि महेश्वर।
            सुगन्धीनि भवानीश शिव त्वं कुसुमप्रिय।। बिल्वपत्राणि समर्पयामि।
दूर्वा-ॐ काण्डात् काण्डात्प्ररोहन्ती परुषः परुषस्परि। एवा नो दूर्वे प्रतनु सहश्रेण शतेन च।। दूर्वां समर्पयामि।
शमीपत्रा-ॐ अमङ्गलानां शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च। दुःस्वप्न नाशिनीं धन्यां प्रपद्येऽहं शमीं शुभाम्।। शमीपत्रां समर्पयामि।
आभूषण-ॐ वज्रमाणिक्यवैदूर्यमुक्ताविदु्रममण्डितम्। पुष्पराग समायुक्तं भूषणं प्रतिगृह्यताम्।। आभूषणं समर्पयामि।
सुगन्ध तैल-(अतर) ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं ज्याया हेतिं परिबाधमानः। हस्तध्नो विश्वा वयुनानि विद्वान् पुमान् पुमा सं परिपातु विश्वतः।। सुगन्धतैलं समर्पयामि।
धूप-ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्तकेशाय च नमः सहश्राक्षाय च शतधन्वने च नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मीढुष्टमाय चेषुमते च।।
धूपमाघ्रापयामि।
दीप-ॐ नमऽ आशवे चाजिराय च नमः शीघ्रîाय च शीव्याय च नमऽ ऊम्र्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च।। दीपं दर्शयामि।
(हाथ धोकर) नैवेद्य-ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुध्न्याय च।। नैवेद्यं निवेदयामि।
पानीय जल-ॐ-नमः सोभ्याय च प्रतिसर्याय च नमो याम्याय च क्षेम्याय च नमः श्लोक्याय चावसान्याय च नमऽ उर्वर्जाय च खल्याय च।। मध्ये पानीयं जलं समर्पयामि।
ऋतुफल-ॐ फलानि यानि रम्याणि स्थापितानि तवाग्रतः। तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि-जन्मनि।। ऋतुफलं समर्पयामि।
अ. ऋतुफल-ॐ कूष्माण्डं मातुलुङ्गं च नारिकेलफलानि च। रम्याणि पार्वतीकान्त! सोमेशं प्रतिगृह्यताम्।। अखण्डऋतुफलं समर्पॉ।
ताम्बूल-पूगीफल- ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः। यथा शमसद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामेऽ अस्मिन्ननातुरम्।। ताम्बूलपूगीफलं समर्पयामि।
दक्षिणा-न्यूनातिरिक्तपूजायां सम्पूर्णफलहेतवे। दक्षिणां काञ्चनीं देव स्थापयामि तवाग्रतः।। द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि।
आरती-              कर्पूरगौरं  करुणावतारं  संसारसारं  भुजगेन्द्रहारम्।
                        सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
शिव-स्तुति-असितगिरिसमं स्यात्कज्जलं सिन्धुपात्रो
                        सुरतरुवरशाखा लेखनीपत्रामुर्वी।
                        लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं
                        तदपि तवगुणानामीशपारं न याति।।
श्मशानेष्वाक्रीडा स्मरहर पिशाचाः सहचरा-
            श्चिताभस्मालेपः श्रगपि नृकरोटीपरिकरः।
            अमङ्ल्यं शीलं तव भवतु नामैवमखिलं
            तथापि स्मतर्¤णां वरद परमं मङ्लमसि।।
            पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः।
            त्राहि मां पार्वतीनाथ! सर्वपापहरो भव।।
            कालहर कण्टकहर दुःखहर दारिद्रîहर
आगे लिखे मन्त्र से गाल बजाते हुए बम् बम् बोल कर जलहरी का जल नेत्रों पर लगाएँ।
                        निरावलम्बस्य ममावलम्बं विपाटिताशेषविपत्कदम्बम्।
                        मदीयपापाचलपापशम्बं प्रवर्ततां वाचि सदैव बम्-बम्।।
पञ्चांग-प्रणाम, मन में स्मरण, नेत्रों से दर्शन और वाणी से नामोच्चार करते हुए, दोनों हाथ जोड़ कर मस्तक झुका कर प्रणाम करें।
प्रदक्षिणा
                        यानि कानि च पापानि ज्ञाताज्ञातकृतानि च।
                        तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।
क्षमा-प्रार्थना-प्रपन्नं पाहि मामीश! भीतं मृत्युग्रहार्णवात्।।
                        आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
                        पूजाञ्चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर!।।
                        अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेकं शरणं मम।
                        तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष रक्ष महेश्वर।।
                        अनेन पूजनेन श्रीसाम्बसदाशिवः प्रीयताम्।