सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

नासदीय सूक्त

सृष्टि की परिकल्पना, वैचारिक आधार सूक्तों में प्राप्त होता है। नासदीय सूक्त में सृष्टि की परिकल्पना है। रक्त सम्बन्धों में विवाह निषेध यम यमी सम्वाद में प्राप्त होता है।
                        इस देश में अक्ष सूक्त को बार-बार पढ़ना जरूरी है जहां जुंआ लाटरी द्वारा पूरा पेमेंन्ट समाप्त करते है। संज्ञान सूक्त-संगठन के सूक्त है। ऋग्वेद के दशवे मण्डल में बहुत सूक्त आये। ऋग्वेद में भक्ति भी है परन्तु प्रेमाभक्ति नहीं है। बल्कि पुत्र-पिता के बीच सम्बन्ध (भक्ति) है। पिता पुत्र के कल्याण हेतु सर्वदा संनद्ध रहता है। गतिशील समाज का संस्थान कैसे निर्मित हुआ इसका आकर्षक चित्र ऋग्वेद में है।
1.   याज्ञवल्क्य, गुरू से मतभेद हो गया। इन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की रचना,