शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

पुस्तक संदर्शिका Pustak Sangdarshika

पुस्तक संदर्शिका Android App में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों तथा पाण्डुलिपियों की सूची दी गई है। यह App संस्कृत जिज्ञासुओं तथा शोधार्थियों के लिए अत्यन्त ही उपयोगी है। मैंने विगत 10 वर्षों तक अनवरत श्रम कर पुस्तकों तथा पांडुलिपियों की सूची तैयार कर रहा था। अपने यहाँ आने वाले पाठकों की सुविधा के लिए विना किसी रोकटोक और सहायता के सूचना का सरल प्रवाह का आसान तरीके उपलब्ध कराने में लगा था, ताकि पाठकों के समय की बचत की जा सके । मैंने सबसे पहले डेस्कटॉप आधारित पुस्तकालय का एक ऑफलाइन सॉफ्टवेयर बनवाया था। इसके उपयोग में पाठक दक्ष नहीं हो पा रहे थे अतः शब्दकोश क्रम में पुस्तकाकार पुस्तकों की सूची पाठकों को दी। कैटलाग तो था ही। अब पुस्तकों, लेखकों आदि की जानकारी के लिए पाठक के पास तीन विकल्प उपलब्ध हो गये।  घर बैठे या दूरदराज के पाठकों तक पुस्तकालय और यहाँ उपलब्ध पुस्तकों की जानकारी प्राप्त कराने के लिए एक वेबसाइट बनाया ताकि पाठक पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों के बारे में जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकें। वेबसाइट तो बन गया परन्तु अध्येताओं को बार-बार डाटा खर्च करना पड़ता था । यह सबके पहुँच में भी नहीं था,क्योंकि इसके लिए इन्टरनेट युक्त मोबाइल चाहिए था। रखरखाव के अभाव में यह बंद रहने लगा। मैंने सोचा क्यों न इसके लिए एक मोबाइल App बनावाया जाय। आज लगभग हर पाठक के पास android फोन होता है । क्यों न इस माध्यम से भंडार में रखी अज्ञात पुस्तकों की सूची को हर हाथ तक पहुंचा दिया जाय। दूर स्थित लोगों को भी जानकारी हो कि कहीं पढ़ने के लिए पुस्तक उपलब्ध है । वह भी बार बार विना डाटा खर्च किये। बस रास्ता मिल गया और परिणाम सम्मुख है। अब प्रो. मदनमोहन झा तथा उनके पुत्र श्री सृजन झा के सहयोग से पुस्तक संदर्शिका नामक एक  Android App  बना दिया गया। इस Android App के निर्माण में किसी से भी आर्थिक सहायता नहीं ली गयी।
पुस्तक संदर्शिका में लगभग 19000 पुस्तकें तथा 4000 पांडुलिपियों की सूची दी गई है। इसमें विविध विषयों पर हिंदी भाषा में लिखित लगभग 2000 पुस्तकों तथा संस्कृत विषय पर अंग्रेजी में लिखित 1000 पुस्तकों की सूची को भी सम्मिलित किया गया है।
देवनागरी लिपि तथा इंग्लिश में लिखित पुस्तकों के लिए 1. पुस्तक 2. लेखक 3. विषय के नाम से अलग-अलग खोज की सुविधा दी गई है। हस्तलिखित पांडुलिपियों को 1. हस्तलिपि के नाम से तथा 2. विषय के नाम से खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
जिन संस्कृत पुस्तकों की अनेक प्रतियां अथवा टीका उपलब्ध है, उसपर क्लिक करने पर लेखक एवं टीकाकार का नाम खुलता है। यहां चयन कर पुस्तक का विस्तृत विवरण प्राप्त किया जा सकता है । जिन पुस्तकों के अनेक नाम प्राप्त होते हैं, उन्हें अलग-अलग प्रदर्शित किया गया है।
पुस्तक तथा लेखक नाम के पूर्व लिखे गये आलंकारिक उपाधियों, मंगलवाची पदों यथा श्री, अथ, डॉ., आचार्य आदि को हटाकर टंकित किया गया है,तथापि असावधानीवश कुछ शेष रह गये हैं। वर्तनी की विविधता के कारण एक ही पुस्तक तथा लेखक के नाम अलग अलग  हो जाते हैं। यथा तत्त्व तत्व, चिंतन चिन्तन, रघुवंशम् तथा रघुवंशमहाकाव्यम् , रामकिशोर राम किशोर आदि । अतः वर्णक्रम से खोज करने वाले खोजकर्ता  अलग - अलग वर्तनी तथा प्रचलित नाम के वर्णक्रम में भी देखें। उपर्युक्त के समाधान तथा आपकी सुविधा हेतु कीवर्ड सर्च की सुविधा दी गयी है । उपयोगकर्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किन्हीं उपविषयों को मूल वर्ग में तो किसी उपविषय को विषय के रूप में रखा गया है। कुछ पुस्तकों को अवर्गीकृत श्रेणी में रखा गया है। विषय से खोज के क्रम में यदि पुस्तक उपलब्ध नहीं हो तो पुस्तक नाम अथवा लेखक के नाम से ढूंढना चाहिए ।
पुस्तकालय में जिन पुस्तकों की एक प्रतियां उपलब्ध हैं, वहाँ एक परिग्रहण संख्या दी गयी है। एक से अधिक प्रतियों के लिए प्रत्येक पुस्तक की पृथक् - पृथक् परिग्रहण संख्या दर्शायी गयी है। अनेक भाग वाले पुस्तकों के भाग संख्या में , चिह्न देकर अन्य भाग की संख्या लिखी है। पुस्तकों का विषय विभाजन संस्कृत वाङ्मय को केंद्र में रखकर किया गया है। यहाँ तक सम्भव हो सका इसे युक्तियुक्त तथा सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया। सम्भव है कि किसी संस्कृत पुस्तकालय के द्वारा इस प्रकार का किया गया यह प्रथम कार्य हो। मुझे खुशी है कि मैं अपने पाठक को रीडिंग टेवल पर ही पुस्तक सूची दे दिया।
आशा है सुधी उपयोगकर्ता उपयोग के द्वारा इसके सैद्धांतिक पक्ष से परिचित हो जाएंगे । इसमें अनेक त्रुटियां रह जाना स्वाभाविक है,क्योंकि हम करके सीखते हैं। भविष्य में इसमें और अधिक परिवर्तन तथा संशोधन किया जाता रहेगा। संस्कृत पुस्तकालयों को चाहिए कि वे भी पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखकर इस प्रकार का अभिनव प्रयास करेंगें।
विजेन्द्र शर्मा भारद्वाज का प्रश्न-
इस app से केवल पुस्तक व लेखक का नाम ही जान पाते हैं, अगर वो पुस्तक ही पढ़नी हो तो क्या करें इस एप्प से...?
App की उपयोगिता
यदि आप किसी पुस्तकालय या विद्यालय के लिए पुस्तक खरीदने की योजना बना रहे है, किसी विषय पर कौन कौन पुस्तक बाजार में उपलब्ध है, इससे पता करें आदि अनेक उपयोग हैं। आपको कई ऐसे पुस्तकों की जानकारी भी मिलेगी,जिसे पढने की सलाह आजतक आपको किसी ने नहीं दिया होगा। अनुसंधान निर्देशक तथा कक्षा में पाठ्येतर सामग्री,सहायक ग्रन्थ की जानकारी देने के लिए यहाँ से सूचना पा सकेंगें। संस्कृत में सद्यः प्रकाशित ग्रन्थों को भी सूची में स्थान दिया गया है। ग्रन्थ और ग्रन्थकार का नाम पलक झपकते आपके पास होती है। अबतक आप लोग संस्कृत के 200 से 500 पुस्तकों के नामों, लेखकों से परिचित होंगें। अब आपका दायरा बढ जाएगा।  अबतक इस प्रकार का साधन और सुविधा आपको नहीं मिली थी। शोधार्थी तथा अन्य जिज्ञासु समय निकालकर हमारे पुस्तकालय में आकर पढ सकते हैं। इसे पुस्तक का नाम इन्टरनेट पर खोजकर पढा जा सकता है। पुस्तक संदर्शिका App में तीन कारणों से पुस्तक पढने की सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी। 1- पुस्तकों की DTP (टाइप कराना) कराकर हम उन पुस्तकों को ही उपलब्ध करा सकते, जिसपर किसी का कापीराइट नहीं हो अथवा इस हेतु लेखक प्रकाशक हमें अनुमति दें। यह कार्य व्यय और श्रम साध्य है। यह कार्य कई लोग कर रहे हैं। अनेक बेवसाइट पर उपलब्ध है।
2- PDF के रूप में पुस्तकों उपलब्ध कराने के लिए भी लेखक प्रकाशक से अनुमति चाहिए। यह भी भिन्न प्रकृति का काम है। इसके लिए डाटा स्पेश चाहिए।
3- यदि कुछ पुस्तकों के लिए अनुमति मिल भी जाती है तो इससे App के Mb में वृद्धि होती। सभी उपयोगकर्ता को इसके लिए डाटा खर्च करना पडता। उतने में वे पुस्तक खरीद भी सकते हैं। मेरा लक्ष्य पुस्तक के बारे में जानकारी प्रदान करना है। अनेक पुस्तकें इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं। इस App की सहायता से कौन पुस्तक किस प्रकाशन से छपी है, पता कर खरीद लें अथवा इन्टरनेट पर जाकर पढ लें।
हमारा लक्ष्य 2 G उपयोक्ताओं तक पुस्तक सूची पहुँचाना है। हर पाठक के मोबाईल में कम स्थान ले। वह भी सिर्फ 1 बार 3 Mb डाटा खर्च कर। कई बार बडे साइज के कारण लोगों को App हटाना पडता है।
आप इस ऐप की उपयोगिता पर और भी प्रश्न कर सकते हैं।
प्रोफेसर मदनमोहन झा तथा इनके सुपुत्र श्री सृजन झा ने सर्वसुलभ इस पुस्तक संदर्शिका के द्वारा पुस्तकालय में भंडारित पुस्तकों तथा हस्तलेखों को जन-जन के Android फोन तक पहुँचाकर सबके लिए ज्ञान का द्वार उद्घाटित कर दिया है। इससे उपयोगकर्ताओं तक उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के पुस्तकालय में उपलब्ध सभी प्रकार की पुस्तकों की जानकारी पहुंचेगी। सभी पुस्तकें प्रयोग में आने लगेगी। पुस्तक खोज के क्रम में अनेकों पुस्तकों के नाम अनायास ही याद हो जायेंगें। पुस्तक संदर्शिका निर्माण में मैं निमित्तमात्र हूं । संस्कृत जगत् प्रो. झा का चिर आभारी रहेगा । मैं किन शब्दों में कृतज्ञता अर्पित करूं? 
App Download करने के लिए पुस्तक सन्दर्शिका  इस लिंक पर क्लिक करें। संस्कृत के अन्य App डाउनलोड करने के लिए search करें srujan jha