सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

संस्कृत को विकासपथ पर ले जाने की योजना

संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार – प्रसार तथा सर्वतोमुखी विकास के लिए यहाँ कुल 12 मुख्य कार्ययोजनायें उद्धृत हैं, जिसे मैंने अथक परिश्रम से निर्माण किया है। योजनाओं के साथ- साथ सम्बन्धित उपयोजनायें भी लिखी हैं। इसे लागू करने में अनुमानित व्ययाकलन भी साथ ही साथ प्रस्तुत हैं। योजनाओं के अंत में प्रत्येक उपयोजनाओं का संक्षिप्त परिचय, उद्देश्य तथा इसके भावी परिणाम को भी सम्मिलित किया गया है।  योजना के निर्माण में संस्कृत के सर्वांगीण पक्ष को ध्यान में रखा गया गया है।











प्रशिक्षण योजना संख्या 1 का विस्तार











संकल्पना टिप्पणी










अवधारणा एवं संकल्पना- जगदानन्द झा