शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार

   संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार के पारम्परिक तथा आधुनिक अवसर- सम्भावनाऍ और नई दिशाऍ
 इस विषय के अन्तर्गत संस्कृत के छात्रों, शोधार्थियों तथा जन सामान्य को संस्कृत विषयक रोजगारों की जानकारी दी जा रही है।
 संस्कृत के क्षेत्र में पारम्परिक एवं आधुनिक दोनों ही दृष्िटयों से रोजगार की सम्भावानाऍ उपलब्घ है। कुछ क्षेत्र ऐसे है, जहॉ के लिए संस्कृत की औपचारिक डिग्री का होना अनिवार्य है। जबकि कुछ अन्य क्षेत्र ऐसे है जहॉ पर संस्कृत की जानकारी उसी क्षेत्र के अन्य संस्कृत न जानने वालो की तुलना में व्यक्ति को उकृद्गटता प्रदान करती है एवं आगे ले जाती है। मानविकी के विद्गायों के सन्दर्भ में संस्कृत के क्षेत्र में अन्य किसी भी विषय की तुलना में संस्कृत में संगठित एवं सरकारी क्षेत्र में रोजगार की अधिक सम्भावानाऍ उपलब्ध है। हिन्दी, प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति, भाषा विज्ञान, दर्शन धार्मिक पर्यटन आदि क्षेत्र विशेषज्ञता के लिए संस्कृत की अपेक्षा रखते है। संस्कृत के रोजगार के क्षेत्रों में योग, आयुर्वेद, पौरोहित्य, ज्योतिद्गा, आर्कियोलॉजी, पाण्डुलिपि विज्ञान, प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति प्रकाशन एवं अनुवाद, मच्चीन ट्रान्सलेशन, कम्पूटेशनल लिंग्वस्ट्रीक्स, कम्प्यूटर अनुप्रयोग सम्बन्धी कनेक्टिव और बिहेवीयरल साईन्सज, इत्यादि क्षेत्रों में संस्कृत अघ्यताओं के लिए साक्षात अवसर है। इसके अलावा इतिहास, हिन्दी, विधि शास्त्र, भाषा  विज्ञान, दर्च्चन, आयुर्वेदिक फॉर्मेसी, मनोविज्ञान, कम्प्यूटर सांइस  आदि क्षेत्रों में संस्कृत के ज्ञान से सहयोग एवं उत्कृद्गटता प्राप्त की जा सकती है। विश्व में भारत का महत्व दो रूपों में है। एक गुरू के रूप में और दूसरा सस्ता श्रम उपलब्ध करवाने वाले देश के रूप में । निश्चय ही गुरू के रूप में भारत की प्रतिद्गठा का आधार संस्कृत भाषा एवं भारत विद्यायें है।   संस्कृत के क्षेत्र में अनन्त सम्भावनाऐं हैं। योग्यता होने पर संस्कृत के माध्यम से कोई भी उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है।-
 ''एक दरिया है यहॉ पर दूर तक फैला हुआ ,आज अपने बाजुओं को देख पतवारें न देख ।''    

शनिवार, 6 अगस्त 2011

Sarasvati shodha sansthan,Lucknow

3. सरस्वती शोध संस्थान -
इस संस्थान का पुस्तकालय सुरेन्द्र नगर, चिनहट में अवस्थित है। इस पुस्तकालय की स्थापना प्रो0 उमारमन झा ने किया है, जो इसके निदेच्चक हैं। आप राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, मानित विश्वविद्यालय , लखनऊ परिसर के पूर्व प्राचार्य हैं। इन्होंने अपने ही आवासीय परिसर के एक भाग में लोकोपकार तथा भाषाई प्रचार प्रसार हेतु निज को अर्पित कर दिया है। यह पुस्तकालय यद्यपि प्रारभिकावस्था में है फिर भी गुणवत्ता की दृष्टि से पुस्तकों का संकलन बेजोड़ है। प्रो0 झा आने वाले शोधार्थियों को बहुत ही मनोयोग पूर्वक मार्ग निर्देशन करते रहते है। यहाँ लगभग 5,000 पुस्तकें, शोध पत्रिकाएँ, शोधप्रबंध, विभिन्न संस्कृत सम्मेलनों के शोधलेख तथा पाण्डुलिपियों के विवरणात्मक सूची, कोश आदि उपलब्ध हैं।

जिसका विवरण निम्नानुसार हैं -
वेद
50
कोद्गा
65
तन्त्रद्राास्त्र
230
रामायण
30
व्याकरण
176
साहित्य
300
महाभारत
70
धर्मशास्त्र
105
दर्शन
360
मैथिली साहित्य
132
शोध प्रबन्ध
85
ज्योतिद्गा
31
शास्त्र संग्रह
200
न्याय दर्शन
111
गीता
24
अभिनन्दन ग्रन्थ
56
साहित्य
587
कैटलाग
30
हिन्दी साहित्य
100
आलइण्डिया ओरिय0 कान्फ्रेन्स
25
पुराण
36


Akhil Bhartiya Sanskrit Parishd,Lucknow

अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्‌ :- परिचय तथा इतिहास
इस परिषद्‌ के पुस्तकालय की स्थापना सन्‌ 1958 में की गई। इससे अनेक गणमान्य विद्वज्जनों का जुड़ाव रहा है। इसका एक स्वर्णिम इतिहास है। प्रो0 सुब्रह्मण्य अय्यर, डॉ0 सत्यव्रत सिंह, डॉ0 अतुल चन्द्र बनर्जी, डॉ0 हेमचन्द्र जोशी तथा डॉ0 मंगलदेव शास्त्री के पुस्तकीय संग्रह से संपोषित एवं विभिन्न माध्यमों से प्राप्त इस पुस्तकालय में दुष्प्राप्य या अप्राप्य लगभग 18000 ग्रन्थ संकलित है। यहां लगभग 15000 महत्वपूर्ण और प्राचीन पाण्डुलिपियां हैं। कुछ पाण्डुलिपियां 600 वर्द्गा से अधिक पुरानी हैं। लगभग 2500 पाण्डुलिपियां द्राारदालिपि में है। पुस्तकालय के लगभग 5,000 हस्तलिखित ग्रन्थों की विवरणात्मक सूची पाँच खण्डों में प्रकाशित हो चुकी है। परिषद्‌ द्वारा प्रकाशित पुस्तिका ''संघर्षों उपलब्धियों की कहानी में'' इसका पूरा परिचय प्रदान किया गया है। यहां पर श्री रमेश श्रीवास्तव कार्यरत हैं। इसका पता है-
अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्‌
सेक्टर बी0, अलीगंज, लखनऊ
फोन-0522-2333962,4045295

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

U.P.sanskrit sansthana, Lucknow Library

  1. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पुस्तकालय :- परिचय तथा इतिहास
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संस्कृत, पाली तथा प्राकृत भाषा के पुस्तकालय हैं:- उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पुस्तकालय, अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्‌ का पुस्तकालय तथा सरस्वती शोध संस्थान, सुरेन्द्र नगर, लखनऊ का पुस्तकालय । इन पुस्तकालयों में सामान्य जिज्ञासुओं से लेकर बुद्धिजीवियों तक के लिए अध्ययन सामग्री प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है । आपमें यदि 5000 वर्षों तक के चिन्तन परम्परा के समृद्ध रूप को एकत्र देखने और पढने की ललक हो, भारत के प्राचीन साहित्य, धर्म, संस्कृति, रंगकर्म, शिल्प, गणित, आयुर्विज्ञान, भाषायी तथा साहित्यिक इतिहास के प्रति जिज्ञासा हो तो ये पुस्तकालय आपके लिए उपयुक्त होगें। यहां बैठकर संस्कृत भाषा सीख सकते हैं तथा इसके द्वारा तमाम ग्रन्थों को मूल रूप में पढ भी सकते हैं ।
      ये पुस्तकालय जन सामान्य संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु दृढ़ संकल्पित है। इन पुस्तकालयों का क्रमशः परिचय इस प्रकार है।

1. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पुस्तकालय :- परिचय तथा इतिहास
      यह पुस्तकालय लखनऊ के न्यू हैदराबाद में अवस्थित है। इसकी स्थापना 16 जून 1978 को की गई। रायल होटल के एक छोटे से कक्ष से प्रारम्भ होकर आज यह बहुत ही विशालकाय हो चुका है। न्यू हैदराबाद में यह पुस्तकालय सन्‌ 1983 से संचालित हुआ। अनेक पुस्तकदाताओं के सहयोग, क्रय, पुरस्कार द्वारा प्राप्त तथा विभिन्न संस्थाओं से निःशुल्क प्राप्त पुस्तकों से समृद्ध इस पुस्तकालय में सम्प्रति लगभग 20,000 पुस्तकें हैं।
      पुस्तकालय के सुलभ संचालन हेतु इसे तीन भागों में विभक्त किया गया है। (क) संस्कृत, पाली तथा प्राकृत भाषा की पुस्तकें।
                        
2. राजा राम मोहनराय पुस्तकालय प्रतिष्ठान द्वारा पुस्तकीय सहायता प्राप्त बाल पुस्तकालय
3. शोध पत्रिका तथा पाण्डुलिपि का विभाग
इस पुस्तकालय में पाण्डुलिपियों का एक अलग विभाग है, जिसमें लगभग 8000 दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ संरक्षित है। इनमें से लगभग 5,000 पाण्डुलिपियों की विवरणिका तैयार कर 'पाण्डुलिपि विवरणिका' नाम से प्रकाशित किया गया है।
यह पुस्तकालय शोधार्थियों के लिए अद्यतन सामग्री उपलब्ध कराता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता अधुनान्त प्रकाशित मौलिक साहित्यों का संकलन तथा संस्कृत भाषा पर आधारित कम्प्यूटर द्वारा पुस्तक खोज प्रणाली का साफ्टवेयर है। इस पुस्तकालय में देश के विभिन्न भाग से शोधार्थी जन आते रहते हैं। विशेषतः लखनऊ के आस-पास स्थित विश्वविद्यालयों के शोधार्थी, प्रबुद्ध नागरिक, विशिष्ट विद्वान्‌ लाभान्वित होते हैं। इस पुस्तकालय में दो कर्मचारी कार्यरत हैं।           1. सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष -श्री जगदानन्द झा तथा 2. जेनीटर -श्री पृथ्वी पाल