बुधवार, 31 अक्तूबर 2018

संस्कृत की प्रतियोगितायें


संस्कृत शिक्षा को आकर्षक तथा इसमें गुणात्मक वृद्धि लाने के लिए प्रतियोगिता एक सशक्त माध्यम हैं। इसके निम्नलिखित सकारात्मक लाभ हैं।
1.   प्रतियोगिता छात्रों को स्व मूल्यांकन का अवसर प्रदान करती है। इस माध्यम से वह अपने ज्ञान का मूल्यांकन करता है। वह देखता है कि जनपद, राज्य और देश में उसकी स्थिति क्या है? आने वाले दिनों में इन्हीं छात्रों से उसकी प्रतिस्पर्धा होनी है अतः प्रतिस्पर्धी की तैयारी से जूझने के लिए प्रतियोगिता उसे अवसर देती है।
2.   प्रतियोगिता एक प्रतिस्पर्धी परीक्षा है। इसमें अनेक स्थानों तथा विद्यालयों के छात्र आते हैं। इसके माध्यम से छात्रों के बीच संपर्क स्थापित होता है और वे भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो जाते है।
3.   प्रतियोगिता छात्रों को प्रेरित करने और बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके द्वारा छात्र में सर्वश्रेष्ठ बनने और समकक्ष छात्रों से मुकावला करने का जोश पैदा होता है। प्रतियोगिता में रैंक रखने वाले छात्र में आत्मविश्वास की भावना विकसित होती है।
4.   छात्र अपनी वैचारिक समझ में सुधार करते हैं और वे कठिन अवधारणाओं को समझने में सक्षम बनते है।
5.   कोई भी प्रतियोगिता छात्रों के कौशल को तेज करने का मौका देती है। वे एक स्तर पर कई समस्याओं से निपटते हैं, जिनकी उन्हें अपने कक्षाओं में सामना करने की संभावना नहीं रहती है। छात्रों को अतिरिक्त ज्ञान प्राप्त होता है। वे आत्मविश्वास से जवाब देना सीखते हैं। इससे बच्चों का दिमाग तेज होता है।
6.   संस्कृत के छात्र अपने गुरु की वाहवाही से गदगद होकर आत्ममुग्ध हो जाता है। उसे यह नहीं पता होता कि हमारे समुदाय या बराबर की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र अपने विषय में कितना अधिक उच्चतर ज्ञान और तैयारी रखते हैं। विद्यालयों के अध्यापकों को भी और अधिक गंभीरता से पढ़ाने को प्रेरित करती है।
7.   अध्यापक भी प्रतिस्पर्धी हो उठते हैं। विजित छात्रों से हमें यह भी पता चलता है कि किस विद्यालय का शैक्षिक स्तर कितना उन्नत है। 
अब हम संस्कृत क्षेत्र में होने वाली प्रतियोगिताओं और उसे आयोजित करने वाली कुछ संस्थाओं के बारे में यहां चर्चा करेंगे। 

संस्कृतभारती कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों की शलाका परीक्षा कराती है। इसके लिए कक्षा 10 की पुस्तक मणिका निर्धारित है। परीक्षा तीन चरणों ( कण्ठस्थीकरण, अर्थबोध, व्याकरण) में होती है। पुरस्कार की राशि 7, 11, 15 हजार है। यह ऑफ लाइन परीक्षा एक ही दिन किसी एक स्थान पर सम्पन्न होती है। कुछ वर्षों से यह प्रतियोगिता वाराणसी में आयोजित होती रही है। यहाँ प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क भोजन तथा आवास की व्यवस्था की जाती है। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों से शुल्क नहीं लिया जाता। यह भी सच है कि जो सरकारी विद्यालयों में संस्कृत विषय लेकर पढ़ने वाले छात्र होते हैं, वे इतने सक्षम नहीं होते कि देश के किसी दूर दराज भाग से आकर इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकें।
संस्कृतभारती का वेबसाइट है- https://www.samskritabharati.in/

केन्द्रीय विद्यालय संगठन CBSC बोर्ड विगत 3 वर्षों से संस्कृत ओलम्पियाड कराने लगा है। इसमें प्रतिभाग करने के लिए जुलाई में नामांकन से आरम्भ होता है तथा जनवरी तक परीक्षा होती है। इसमें कक्षा 6 से 10 तक के छात्र प्रतिभाग कर सकते हैं। इसके लिए रू.150.00 फीस निर्धारित है। इसमें 2 चरणों में परीक्षा होती है। इसमें प्रतिभाग करने के लिए इस संस्कृत ओलम्पियाड  लिंक पर क्लिक करें-

  

पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों के छात्र अभाव ग्रस्त होते हैं। ऐसे छात्र सीबीएसई बोर्ड या संस्कृतभारती की प्रतियोगिता में भाग लेने में असमर्थ होते हैं। इन संस्थाओं द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में जाने आने का मार्ग पर छात्र को स्वयं वहन करना पड़ता है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा राज्य सरकार की संस्थाओं द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए  मार्ग व्यय ,भोजन, आवास तथा  भरपूर  पुरस्कार राशि दी जाती है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ सहित अनेक संस्थायें प्रतियोगिता का आयोजन करती है। 

उत्तराखंड संस्कृत अकादमी प्रथमा से लेकर आचार्य, बी. ए, एम. ए कक्षा तक के छात्रों के लिए वेद, व्याकरण, काव्य तथा दर्शन विषय पर शलाका परीक्षा कराती है। यह परीक्षा त्रिस्तरीय होती है। प्रथम स्तर में निर्धारित ग्रन्थ का कण्ठस्थीकरण, द्वितीय स्तर में व्याख्यान सामर्थ्य एवं तृतीय स्तर में शंका समाधान शक्ति का परीक्षण किया जाता है। प्रतियोगिता के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागी को क्रमशः रू. 7000/- रू. 5000/- रू.4000/- पुरस्कार राशि दी जाती है। प्रतियोगिता में आवेदन नबम्बर में तथा परीक्षा दिसम्बर में होती है।  इसके अतिरिक्त यह संस्था राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का भी आयोजन करती है जिसमें  जिला क्रम से चयनित होते हुए राज्य स्तर तक  पहुंचने पर अधिकतम  20000 धनराशि का पुरस्कार  दिया जाता है। इसका वेबसाइट पर क्लिक कर पूरा विवरण देखें।

⇒ उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा वाल्मीकि जयन्ती के अवसर पर प्रथमा, पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा तथा इसके समकक्ष कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के बीच संस्कृत आशुभाषण, श्लोकान्त्याक्षरी संस्कृत गीत तथा नाटक प्रतियोगिता कराती है। 
⇒ इन प्रतियोगिताओं में मंडल स्तर पर प्रथम स्थान पाये छात्र मुख्यालय लखनऊ में आकर अंतिम प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। 
⇒ संस्कृत आशुभाषण, श्लोकान्त्याक्षरी संस्कृत गीत प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागी को क्रमशः रू. 8000/- रू. 6000/- रू.4000/-  पुरस्कार राशि दी जाती है। जबकि नाटक प्रतियोगिता में प्रथमद्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त नाट्य दल को क्रमशः रू. 40000/- रू. ⇒30000/- रू.20000/-  पुरस्कार राशि दी जाती है।
⇒ मंडल स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पाये छात्रों को 800/- रू. 600/- रू.400/- पुरस्कार राशि दी जाती है। 
⇒ प्रत्येक प्रतिभागी को आने जाने का मार्ग व्यय, भोजन तथा आवास की सुविधा के साथ एक-एक पुस्तक दिया जाता है। इस प्रतियोगिता में वही छात्र भाग ले सकते हैं जो उत्तर प्रदेश के किसी विद्यालय में अध्ययनरत हो। 

संस्कृत विषयों पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का घोर अभाव है। इस दिशा में और भी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने में कई चुनौतियां हैं। सीमित संसाधनों में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता डिजिटल माध्यम से ही कराई जा सकती है। परीक्षा की शुचिता को भी ध्यान में रखना होगा। माध्यमिक स्तर तक  संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों के पास स्मार्टफोन नहीं होता। अतः आपकी या हमारी सूचना उन तक नहीं पहुंच पाती और वे प्रतिभाग भी नहीं कर पाते। 

राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान द्वारा अखिलभारतीय शास्त्रीय वाक्स्पर्धा का आयोजन किया जाता है। इसमे कुल २६ स्पर्धाएं आयोजित होती हैं। राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान के वेबसाइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध है । इसमें प्रत्येक राज्य से प्रति प्रतियोगिता में से 2 चुने हुए प्रतिस्पर्धी राष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लेते हैं । प्रतिस्पर्धी के जाने आने, भोजन आवास का व्यय भी संस्थान करता है। इसमें पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों में कक्षा 11 से आचार्य तक पढ़ने वाले छात्रों के लिए ही अवसर हैं। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागी को क्रमशः रू. 10000/- रू. 7000/- तथा रू.5000/- पुरस्कार राशि दी जाती है।

चातुर्वेद- संस्कृतप्रचार- संस्थानम् वर्ष १९९९ से प्रतिवर्ष भारतीय वैभवज्ञान परीक्षा का आयोजन करता आ रहा है।
अभी तक सामर्थ्य के अनुसार उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड, दिल्ली, के साथ नेपाल में इस परीक्षा का आयोजन हुआ है। सम्प्रति यह परीक्षा ४ वर्गों में हो रही है।
३-५ बालवर्ग, ६-८ कनिष्ठवर्ग, ९-१२ वरिष्ठवर्ग, शास्त्री-आचार्य (बी.ए.-एम.ए) स्नातकवर्ग। इसके लिए ४ पुस्तकें भी प्रकाशित हैं। जो दो वर्षों पर बदलती रहती हैं।
इस वर्ष यह परीक्षा अविरल गंगा, निर्मल गंगा नामामि गंगे, गंगा हरीतिमा योजना को समर्पित है ।

संस्कृत विषय पर सोशल मीडिया पर भी प्रतियोगितायें आयोजित होती है। इसका आरम्भ मैंने ही किया था। अब कई फेसबुक ग्रुप पर यह प्रचलित है। इसमें संस्कृतरसास्वादःविश्वहिताय संस्कृतम्  समूह प्रतियोगिता करा रहा है। देश स्तर पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में जगदीश डाभी का नाम आता है। ये Facebook पर online संस्कृतशिक्षणम् समूह बनाये हैं, जिसका लिंक है-
जगदीश डाभी अपने समूह पर भी प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। विजयी छात्रों की सूचना विश्वस्य वृत्तांतः संस्कृत दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित करा कर उनका उत्साहवर्धन करते हैं। 
संस्कृतरसामृतम् संगठन के माध्यम से बिहार के सीवान जिला में प्रति माह जमीनी स्तर पर कार्य होता है। अभी पिछले माह से इसकी शुरुआत हुई है।
ऐसे बहुत सारे हमारे साथी हर सप्ताह, हर माह संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता एवं बाल प्रतियोगिता आयोजित करते है। इसके लिए विषय तथा तिथि निर्धारित करते हैं, जो कक्षा तथा आयु वर्ग के बच्चे के अनुसार भिन्न भिन्न होते हैं।

पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में स्थापित एक पंजीकृत सोसाइटी है। इसके द्वारा भी भारत की विभिन्न भाषाओं में निबंध लेखन जैसी कुछ प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। यह संस्कृत भाषा में भी निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित कराता है। इसका लिंक है।

कई राज्यों में संस्कृत विषय पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन नहीं होता है वहां के छात्रों  को अवसर उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल  माध्यम  एक कारगर उपाय हो सकता है। देश व्यापी प्रतियोगिता के लिए एक ऐप बनाना होगा, जिसमें प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र अपना नामांकन कर सके। ऐप में कक्षा 6 से 12 तब तक की पुस्तकों का ट्यूटोरियल हो, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर सकें। इसके लिए न्यूनतम शुल्क के भी रखा जाए। तीन स्तरों पर प्रतियोगिता का आयोजन हो। प्रथम स्तर की परीक्षा पास करने के उपरांत ही कोई भी प्रतियोगी कहला सकेगा। उसका नामांकन कर प्रत्येक वर्ष जनवरी तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में प्रतियोगिता करायी जाय। इसमें 70% तक अंक पाए अथवा शीर्ष क्रम से 50 छात्रों का चयन किया जाए। इन छात्रों के मध्य प्रत्येक प्रदेश में किसी एक दिन प्रतियोगिता कराई जाए। इसमें सर्व प्रथम आए छात्र को रु 10000 की पुरस्कार राशि से पुरस्कृत किया जाए। यह पुरस्कार उन्हें छात्र को दिया जाए जो आगामी कक्षा में भी संस्कृत विषय लेकर अध्ययन करे। धनराशि की उपलब्धता अधिक होने पर समय-समय पर अधिक से अधिक छात्रों को पुरस्कृत किया जाए। जिस दिन संस्कृत क्षेत्र में अधिकाधिक प्रतियोगिताएं होने लगेगी उसी दिन संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि की होगी तथा उनके शैक्षिक स्तर में सुधार भी देखने को मिलेगा। हम यहां और भी प्रतियोगिताओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएंगे ताकि अधिकाधिक छात्र इसका लाभ ले सकें। 

देश में संस्कृत छात्रों के लिए कौन - कौन प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं? उनके नाम, उसकी प्रकृति, पुरस्कार की धनराशि तथा आयोजक संस्था के बारे में जानकारी दें। आपके द्वारा दी गई जानकारी का लाभ हजारों लोगों को प्राप्त होगा।

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2018

संस्कृत से रोजगार

भारतीय भाषाओं में संस्कृत भाषा सबकी जननी भाषा रही है। यह देववाणी सुरभारती, गीर्वाणगिरा, देवभाषा, गीर्वाणवाणी इत्यादि अनेक नामों से सुसज्जित की जाती रही है। आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में संस्कृत की स्थिति तथा इसको पढ़ने वाले छात्रों के समक्ष रोजगार की स्थिति का परिणाम अच्छा नहीं है। संस्कृत भाषा को जहां विकसित देश सीखने - सीखाने व इस भाषा के जानकर को सहजता से रोजगार देने की स्थिति में है, ठीक उसी तरह हम विकासशील देश इस भाषा के जानकार को परम्परागत नौकरी देने के अलावा नवीनतम नौकरी के अवसर देने मे अक्षम है। कहने के लिए संस्कृत कम्प्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा है-फोडर्स पत्रिका 1987 परन्तु इस क्षेत्र में संस्कृत पढ़ने वालो को नौकरी के अवसर की साक्षात् व्यवस्था नहीं है। अगर कहीं है भी वहां संस्कृत के साथ कम्प्यूटशनल संस्कृत (जे00यू0) संस्कृत पढ़ने के बाद सम्भव है। इसी प्रकार योग एक नया विषय उभरकर सामने आया है, जिससे स्व रोजगार किया जा सकता है।
नवीनतम रोजगार
इस कम्प्यूटेशनल संस्कृत से पी0एच0डी0 करने के बाद सी-डैक कम्पनी में बहुत युवा कार्यरत है। इस शिक्षा को संस्कृत विश्वविद्यालयों, संस्थान के विभिन्न केंद्रो पर समुचित रूप से पढने का पाठयक्रम लागू होना चाहिए, ताकि ये अवसर अधिक से अधिक छात्रों को मिल सके। इस भाषा की समुचित योग्यता तथा अवसर की उपलब्धता पर रोजगार के अवसर निर्भर है। भारत में रोजगार के अवसर हेतु संस्कृत की योग्यता के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा की योग्यता चार चांद लगाता है। यूं कहे अंग्रेजी को साधन बनाकर संस्कृत को साध सकते है।

  एक संस्कृत का छात्र परम्परागत संस्कृत पढ़कर मध्यमा से स्नातकोत्तर, गवेषक, की उपाधि प्राप्त करता है परन्तु बी0एड0,नेट/जे00आर0एफ0, computatioral Sanskrit पढ़ने के बाद ये रोजगार पाते है। बिना बी0एड0 नेट/जे0आर0एफ00 किये सिविल सविर्सेज के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं है। संस्कृत पढ़ने वाले छात्र को तात्कालिक लाभ यथा पूजा-पाठ-हवन-श्राद्ध, कथा वाचन आदि करवाकर रोजगार के अवसर से बचना चाहिए। छात्र भविष्योन्नमुखी दृष्टिकोण रखे। एकतरफा ज्ञान सिर्फ संस्कृत विषय का ही नहीं रखे । सामान्य अध्ययन, जी0के/जी0एस0 को भी पढ़े।  मध्यमा/मैट्रिक (समकक्षता दसवीं) से संस्कृत की वास्तविक योग्यता के साथ-साथ करेंट अफेयर्स पढ़ना शुरू कर दें । इससे रोजगार के अनेक द्वार यथा - संस्कृत समाचार वाचक, अनुवादक की नौकरी आसानी से पाया जा सकता है। IAS, IPS,IRS,IFS हेतु एक विषय ‘‘संस्कृत’’ लेकर अच्छे अंक प्राप्त किये जा सकते है। राज्यस्तरीय लोकसेवा आयोग यथा- उत्तर प्रदेश में लोअर पी सी एस, समीक्षा अधिकारी, लोअर सर्वाडिनेट आदि में एक विषय संस्कृत के रूप में ले तथा हिन्दी व्याकरण की समुचित जानकारी रखें। अगर आपने वाकई संस्कृत पढ़ा है तो हिन्दी व्याकरण वस्तुनिष्ठ, पत्र-लेखन, निबंध लेखन, संक्षेपण, गद्यांश आदि में अच्छे नम्बर लाकर एक अच्छे प्रशासक बन सकते है। संस्कृत विषय को पढ़कर अनेक परीक्षाओं में जहां सीधा लाभ होता है, वहीं अनेक परीक्षाओं में परोक्ष लाभ होता है। यदि आपने स्नातक तक अच्छे से संस्कृत व्याकरण पढ़ा है तो आपको सामान्य हिन्दी में, निबन्ध लेखन की शुद्धता में, मुख्य परीक्षा लेखन में वर्तनी शुद्धता में अप्रत्यक्ष लाभ होता है। साथ ही साथ आज सी0एस00टी0 के तहत ‘‘कम्प्रीहन्सन’’ से पूछे गये सवालों, जिसमें आप देखेगें शब्द की तीनों शक्ति, अभिधा, लक्षणा, व्यजना का सीधे प्रयोग को समझ सकते हैं। एक साधारण संस्कृत विषय में योग्यता रखने वाला छात्र तत्सम निष्ठ हिन्दी  का उत्तर , हिन्दी जानने वालों से बेहतर तेजी से, अच्छी तरह  व सहज रूप से दे सकता है। मैं आपको एक रोचक जानकारी दूं । आज आई00एस0 की नवीण पाठ्यक्रम के अनुसार लिखित परीक्षा के चतुर्थ पत्र में ‘‘नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिक्षमता’’ है। इस विषय की समझ जितना अच्छा संस्कृत विषय का जानकार को होता है, उतना अन्य विषय के लोगों को नहीं, क्योंकि संस्कृत का नींव ही आचार, विचार की शुद्धता व नैतिकता व ईमानदारी के बल पर है। मैं मानता हूं कि संस्कृत पढ़ने वालो में विचार शुद्धता के साथ-साथ सत्यनिष्ठा भी रहती है। परन्तु सिविल सेवा हेतु इन उपरोक्त गुणों के साथ प्रशासनिक क्षमता का विकास भी अनिवार्य है। नीति शास्त्र पढ़कर कोई भी तब तक नैतिक नहीं हो सकता जब तक कि व्यवहार में वह उसे न उतारे। हम कहाँ-कहाँ अनैतिक काम कर रहे है इस बात की स्पष्ट समझ नीतिशास्त्र पढ़ने के बाद हो जाएगी। नैतिक मूल्यों और मानक नियमों का एक संवर्ग है, जिसे समाज अपने ही ऊपर लागू करता है । यह व्यवहार, विकल्पों और कार्यवाईयों के मार्ग दर्शन में सहायता करता है । वास्तविकता यह है कि कोई भी मूल्य या मानक नियम अपने आप के नैतिक व्यवहार में उतारने के लिए एक ईमानदार संस्कृति (रिबस्ट कल्चर) की सख्त जरूरत होती है। ये सारे गुण अध्यात्म के सबसे करीब संस्कृत विषय और इस विषय को जानने वाला जितना अपने समाज, धर्म, मानव धर्म, राष्ट्रधर्म को समझ सकता है, अनुभूत कर सकता है, उतना अन्य प्रोफेशनल विषय के जानकर नहीं। अतः अवसर को सुअवसर में बढ़ाने का समय है। इस परीक्षा की तैयारी में एक मात्र संस्कृत विषय के योग्य बनकर आप निबंध (प्रथम पत्र), इतिहास संस्कृति (द्वितीय पत्र) तथा (चतुर्थ पत्र) में अच्छे अंक ला सकते हैं। अर्थात् ‘‘संस्कृत’’ से स्नातक करने का वास्तविक लाभ इस परीक्षा में उठाया जा सकता है। वास्तविक लाभ उठाने वाले बहुत से छात्र है। जैसे- किशोर कुणाल, मुक्तानंद अग्रवाल, वंदना त्रिपाठी आदि। जिन्होंने संस्कृत को जीया है और आज संस्कृत उन्हें समाज में जिन्दा करके मिशाल कायम किया है। घिसी-पिटी परम्परागत रोजगार के अवसर से हटकर योग्यता के आधार पर संस्कृत से नवीनतम रोजगार पायें यथा-संस्कृत सम्भाषण सीखकर अंग्रेजी मीडियम के स्कूल में अच्छी नौकरी पायें।
संस्कृत का अल्पकालीन प्रशिक्षण रोजगार का द्वार खोलता है

आज संस्कृत का कई अल्पकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हो गया, जो तीन माह से लेकर एक वर्ष का होता है। ऐसे विषयों में ज्योतिष, कर्मकाण्ड, योग, नाट्य, संस्कृत सम्भाषण आदि प्रशिक्षण हैं। इसे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान आदि संस्थायें संचालित करती है। इसमें योग्य अध्यापक सायं काल में गहन प्रशिक्षण देते हैं। 
ज्योतिष 
एक ऐसा एकलौता विषय है, जिसकी मांग सम्पूर्ण भारत में हैं। इसको करने के बाद ज्योतिष परामर्श केन्द्र खोला जा सकता है। आप दूरदर्शन में रोजगार पा सकते हैं। आज सैकड़ों चैनल हैं, जिन्हें ज्योतिषियों की आवश्यकता है। समाचार पत्रों में राशिफल से लेकर व्रत त्यौहारों के बारे में लेख प्रकाशित होते हैं। इससे आप रोजगार पा सकते हैं। ज्योतिष और कर्मकाण्ड में गहरा सम्बन्ध है। एक सफल ज्योतिषी दो- चार कर्मकाण्डियों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
कर्मकाण्ड
शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक कर्मकाण्ड के जानकारों की मांग है। कर्मकाण्ड सीखने के साथ कम्प्यूटर की जानकारी रखने से रोजगार में अपार वृद्धि होती है। आज कर्मकाण्ड का क्षेत्र संगठित रोजगार का रूप लेता जा रहा है। इसमें कम्प्यूटर, मोबाईल की महती भूमिका है। इसपर आप ऑनलाइन पूजन सामग्री की विक्री कर सकते हैं। कुछ लोगों ने अलग- अलग पूजा के लिए अलग – अलग पूजा थाल बनाकर विक्री करना आरम्भ किया है। लोगों को यदि सुविधा चाहिए तो आप सुविधा देकर ही रोजगार कर सकेंगें। वाट्सअप ग्रूप बनाकर समय – समय पर पर्व, व्रत, त्यौहार की सही जानकारी दे सकते हैं। इससे आप अपने यजमान के निकट बने रह सकते हैं।
           ओला और उबर कम्पनी के पास एक भी कार नहीं है, फिर भी यह कम्पनी दूर देश से आकर हमारे देश के अनेक शहरों में परिवहन की सुविधा देने लगी है। इसी प्रकार होटल व्यवसाय आदि की स्थिति है। ठीक उसी प्रकार आप भी तकनीक का प्रयोग करते हुए अपने घर बैठे रोजगार के लिए अवसर सृजित कर सकते हैं। आज के परिवेश में लोगों को घर बैठे सुविधायें और जानकारी मिलने लगी है। आप भी कर्मकाण्ड करने और कराने के लिए वेबसाइट बनवा सकते हैं। सोशल मीडिया पर अपने व्यवसाय के बारे में जानकारी दे सकते हैं। एक बार लोगों का विश्वास जीत लेने के बाद घन वर्षा सुनिश्चित है। 


             संस्कृत सम्भाषण सीख कर ‘‘गीता उच्चारण पाठ केंद्र’’ नवरात्रि के अवसर पर ‘‘शुद्ध उच्चारण दुर्गासप्तशती पाठ केंद्र’’ खोलकर, ज्योतिष विषय के साथ साक्षात् रोजगार के अवसर हैं। ‘‘अंकशास्त्र/अंकविज्ञान केंद्र’’ आयुर्वेद के सामान्य जानकारी से आप-आयुर्वेदिक औषधि हेतु ‘‘आयुर्वेदिक पौधे की खेती कैसे करे’’ आदि से सम्बन्धित सूचनात्मक केंद्र खोल सकते हैं। (सीमैप) से संपर्क करके बढ़ावा दे सकते है। आज का कार्पोरेट समूह अपने कर्मचारियों को ध्यान केन्द्रों में भेजने लगे हैं। निष्ठा तथा आत्मविश्वास पैदा करने वाले प्रेरक व्यक्ति की सप्ताहान्त कक्षाओं में लाखों लोगों को देखा जा रहा है। वहाँ पर संस्कृत के ग्रन्थों यथा योग वाशिष्ठ, गीता आदि के सन्दर्भों को मिलाकर अपनी दुकान चला रहे हैं।
            संस्कृत उच्चारण से मानव शरीर का तांत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है, जिससे व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश (पासिटिव चार्ज) के साथ सक्रिय हो जाता है-संदर्भ अमेरिकन हिन्दू यूनिवर्सिटी। इससे सम्बन्धित छात्र जो सिर्फ प्रतियोगिता तक शुद्ध श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता तक सीमित रह जाते है वे संस्कृत उच्चारण रोग उपचार केंद्र’’ खोल सकते है और उन्हें अच्छे-अच्छे श्लोक के माध्यम से तनाव मुक्त कर सकते है। आज इसके लिए अनेक चिकित्सक प्रयासरत हैं। केंद्र से तात्पर्य छोटा क्लिनिक/दुकान इससे आप बी0पी0, मधुमेह, कोलेस्ट्राल, अनिद्रा का समुचित उपाय संभव है।
            संस्कृत के समुन्नत ज्ञान ज्योतिष, योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, अष्टांगिक मार्ग, यम-नियम, ध्यान-प्राणायाम, आदि की सामान्य जानकारी लेकर अपना रोजगार खुद खड़ा कर सकते है। वास्तव में मनुष्य अपना शिल्पकार स्वयं है, संस्कृत अगर मातृभाषा है। सभी भाषाओं की ही नहीं, अपितु ज्ञानपरम्परा की अतुलनीय भंडार है तो रोजगार नहीं दे सकती ?नवीनतम सृजन करने की क्षमता एक मात्र इसी भाषा में है, अतः हमें नासा के एक रिपोर्ट को याद रखना चाहिए, जिसमें कहा गया है-छठी  पीढ़ी के सुपर कम्प्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित बना रहा है जिससे सुपर कम्प्यूटर अपनी अधिकतम सीमा तक उपयोग किया जा सके सीमा (2025) छठी पीढ़ी के लिए एक भाषा क्रान्ति होगी, जिसमें अग्रवाणी हमारी संस्कृत भाषा होगी। भाषा कोई भी हो सम्मानीय है। सीखना चाहिए परन्तु रोजगारपरक भाषा भारत में आज सीखने की होड़ है।
            वैश्वीकरण के युग में जहाँ भारत को विश्व सिर्फ बाजार के दृष्टिकोण से देखता है और यहां के लोग जर्मन, फ्रेंच, जैपनीज, पुर्तगीज, चायनीज सीख कर अपने को रोजगार उन्मुख बना रहे है। वहीं इन भाषाओं से मुद्रा कमाने वाले जब धन से धनपति बनते है और मानसिक भूख पैसे की समाप्त नहीं होती है तो मनोरोग के शिकार, मानसिक पीड़ा के शिकार लोग दानकर्म, चैरिटी ट्रस्ट आदि में पैसा लगाकर मन को शांत करते है। हमारी भाषा संस्कृत उन लोगों को अन्तिम तौर से मानसिक शांति, आध्यात्मिक शांति देने का कार्य अपने विभिन्न माध्यमों से करेगी। यही संस्कृत अन्तिम उद्धार की भाषा भी बनेगी। सम्पूर्ण रोजगार की भाषा भी बनेगी। अतः संस्कृत शोधर्थियों योग्य बनो। योग्यता के अवसर कदम चूम लेगें।
            संस्कृत भाषा के स्वरुप का विश्लेषण करने पर हम अतीतकालीन, मध्यकालीन और वर्तमानकालीन तीनों स्वरूपों का साक्षात्कार करते है। इस भाषा की अतीतकालीन संपदा पर हमारी भारतीय संस्कृति टिकी हुई है जिसका अक्षरशः उपभोग कर भारत आज फिर से विश्वगुरू बनने को तत्पर है। अपनी अतुलनीय असाधारण सांस्कृतिक प्रतिभा के कारण का रहस्य एक मात्र हमारी संस्कृत भाषा है।
वर्तमान परिदृश्य में संस्कृत शिक्षा
संस्कृत शिक्षा की स्थिति को लेकर आज सभी लोग चिंतित हैं। माध्यमिक विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय  तक के अध्यापक विद्यालयों में अपेक्षा से कम नामांकन को लेकर काफी परेशान है। कुछ अध्यापक नामांकन के समय सक्रिय होकर कार्यसाधक संख्या जुटा लेते हैं। अधिकारी भी संस्कृत अध्ययन केन्द्रों की लचर व्यवस्था तथा छात्र संख्या की कमी से अवगत है। दुर्भाग्य से समाज में भी इन विद्यालयों को लेकर नकारात्मक संदेश जा रहा है। संस्कृत विषय लेकर पढ़ने वालों की लगातार गिरती संख्या को लेकर कुछ लोग रोजगार पर ठीकरा फोड़ते हैं। कुछ लोग अंग्रेजी शिक्षा को कोसकर चुप हो जाते हैं।
 सबसे बड़ी समस्या सकारात्मक सोच का अभाव
वस्तुतः संस्कृत के समक्ष बहुमुखी समस्या है । उसमें सबसे बड़ी समस्या है, सकारात्मक सोच का अभाव। यदि हम शिक्षा को रोजगार से जोड़कर देखते हैं तो बहुत हद तक भ्रम में है। धनार्जन से शिक्षा का बहुत अधिक संबंध नहीं होता, क्योंकि हम यह देखते हैं कि अधिकांश धनिक कम पढ़े लिखे होते हैं। कुछ लोग कार्य विशेष में योग्यता रखने के के कारण धन अर्जित करते हैं, परंतु उन्हें शिक्षित नहीं कहा जा सकता। शिक्षित व्यक्ति को समसामयिक समस्या, जीवन जीने की कला तथा जीवन से जुड़े हर मुद्दे की समझ होती है। शिक्षा वह तत्व है, जो व्यक्ति को जीवन की प्रत्येक विधा में पारंगत बना देती है। समस्या यह है कि हम शिक्षा का उद्येश्य नौकरी पाना मान बैठे हैं। आज विश्व में कोई भी शिक्षा शत प्रतिशत रोजगार की गारंटी नहीं देती। दूसरी बात कोई भी भाषा रोजगार नहीं देती अपितु भाषा में निहित ज्ञान रोजगार देता है। अब आप पर निर्भर करता है कि आप संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान का उपयोग किस प्रकार कर पाते हैं।

संस्कृत शिक्षा का उद्येश्य एवं लाभ


हम यहाँ विचार करेंगे कि वर्तमान संस्कृत शिक्षा का उद्येश्य क्या है? नौकरी के लायक संस्कृत शिक्षा में सुधार करने के खतरे क्या है?  संस्कृत का सामाजिक योगदान या प्रासंगिकता क्या हैं।

     आज भी संस्कृत विद्यालयों का पाठ्यक्रम ऐसा है कि जिसे पढ़कर शिक्षा क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्र में रोजगार पाना मुश्किल होता है। शिक्षा क्षेत्र में भी रोजगार के बहुत ही कम अवसर उपलब्ध हैं। आज शिक्षा का नाम लेते ही रोजगार उसके साथ स्वतः जुड़ जाता है। बच्चे में गलत काम करने पर हर कोई टोकता था, कहता था तुम पढ़े लिखे हो। पर आज शिक्षा के प्रति समाज में वह सोच नहीं रहा। क्या मान लिया जाय कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य रोजगार ही है।
 देश में पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों की स्थापना शास्त्र संरक्षण को ध्यान में रख कर की गई। हजारों वर्षों से सिंचित ज्ञान संपदा को हम यूं ही भुला नहीं सकते। यह मानव सभ्यता के विकास का सबसे प्रामाणिक लिखित साक्ष्य हैं। कोई भी देश केवल आर्थिक उन्नति से ही महान नहीं होता, बल्कि जिसका गौरवमय अतीत हो, गर्व करने लायक संपदा जिसे उपलब्ध हो वह महान कहलाता है। जिस प्रकार हम अपने भौतिक धरोहरों की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार आचार - व्यवहार, कला, सांस्कृतिक विकास आदि ज्ञानरूपी धरोहर की सुरक्षा करने के लिए संस्कृत विद्यालयों की स्थापना की गई। संस्कृत शिक्षा केवल भाषा बोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें भारतीय सामाजिक ताना-बाना, यहां की परंपरा, रिश्ते, आचार-व्यवहार को समझने में मदद करती है । भारतीयों की जीवन पद्धति संस्कृत ग्रंथों की भित्ति पर ही खड़ी है। संस्कृत ग्रंथों ने हमें सदियों से पाप- पुण्य की सीख देकर सद्मार्ग पर चलना सिखाया। यहाँ व्यक्ति किसी राजदण्ड के भय से नहीं, अपितु अन्तरात्मा तक पैठ बना चुका पाप के भय से नियंत्रित रहते हैं। यह विद्या उच्च नैतिक मानदंड के पालन हेतु प्रेरित करता आया है, जिसके फलस्वरूप हमारे जीवन में पुलिस और न्यायालय का हस्तक्षेप अत्यल्प रहा। संस्कृत के ग्रंथों ने ही सदियों से ललित कलाओं द्वारा मानव को मनोरंजन का साधन भी उपलब्ध कराया। आरोग्य हो या विधि-व्यवस्था सभी क्षेत्र में संस्कृत ग्रंथों का अतुलनीय योगदान रहा है। भाषा विज्ञान, ध्वनि विज्ञान, तर्क पूर्वक निर्णायक स्थिति तक पहुंचाने में संस्कृत ग्रंथ ने नींव का कार्य किया है, जिसके बलबूते हम आज इस स्थिति तक पहुंच सके हैं। जिस दिन संस्कृत का अध्ययन और अध्यापन बंद होगा, उसी दिन भारतीय देवी-देवता, तीर्थ आदि की अस्मिता खतरे में पड़ जाएगी। यह एक ऐसी विद्या है, जो भले ही उत्पादक न दिख रही हो, परंतु सामाजिक ताना बाना को बनाए रखने और उसे सुदृढ़ करने में इसकी महती आवश्यकता है। यह भाषा धर्म (धैर्य, क्षमा, अपरिग्रह , चोरी नहीं करना आदि सद्गुण) का मूल स्रोत है। इसके साहित्य अपनी कथानकों, नायकों के चरितों के द्वारा समाज को शिक्षित करते रहा है। अब कालिदास के रघुवंशम् ही एक उदाहरण लीजिये, जिसमें स्त्रियों का स्वतंत्र अभिज्ञान तथा उच्च नैतिक मानदण्ड वर्णित है।
का त्वं शुभे कस्य परिग्रहो वा किं वा मदभ्यागमकारणं ते ।
हे शुभे! तुम कौन हो? तुम किसकी भार्या हो? मेरे निकट तुम्हारे आने का कारण क्या है?
आचक्ष्व मत्वा वशिनां रघूणां मनः परस्त्रीविमुखप्रवृत्ति ।।
यह मानकर बोलो कि इन्द्रिय निग्रही रघुवंशियों के मन की प्रवृत्ति दूसरे की स्त्री के प्रति विमुख होता है। (रघुवंशम्)
विमर्श- कस्य परिग्रहो के पूर्व वाक्य का त्वं शुभे से ज्ञात होता है कि स्त्रियों का स्वतंत्र अभिज्ञान स्थापित था। इसमें असफल रहने पर ही पुरूष की पहचान से स्त्री पहचानी जाती थी। अपनी इन्द्रियों पर पुरूष का इतना नियंत्रण होता था कि वे स्त्री को देखकर चलायमान नहीं होता था। पुनः उस समय के समाज में बलात्कार, स्त्री अधिकारों के हनन का प्रश्न ही नहीं था। कोई कानून शास्ता न होकर व्यक्ति स्वयं होते थे। उच्च चारित्रिक आदर्श, स्त्रियों की स्वतंत्रता, न्यूनतम कानून, न्यूनतम पुलिस यदि चाहिए तो संस्कृत पढ़िए। महिलाओं को सच्चा सम्मान संस्कृत पढ़कर ही दिया जा सकता है। जो संस्कृत नहीं पढ़े होते वे स्त्री को स्वतंत्र देख पुरूष और स्त्री के बीच के सम्बन्ध को चोर निगाह से देखते हैं।
संस्कृत साहित्य में प्रकृति वर्णन विपुल मात्रा में हुआ है। इसके अध्ययन करने से अध्येता सहज रूप से प्रकृति प्रेमी हो जाता है। वह जल, वायु, पृथ्वी, अंतरिक्ष को प्रदूषण मुक्त करने में अग्रेसर होता है। वह द्यौः शान्तिः, अंतरिक्ष शान्तिः की बात करने लगाता है। इसी भाषा से अन्य भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। यह क्षेत्रीय भाषा को भाषाई प्रदूषण से बचाती है। लोक कला, लोक संस्कृति को सुरक्षा कवच देती है। प्राचीन साहित्यिक व सामाजिक विचारों का इन भाषाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा। यही भाषा हमें एक राष्ट्र के रूप में जोड़ती है। भाषा के बारे में लाखों सफाई दी जाय कि भाषा केवल ज्ञान का वहन करती है परन्तु यह सच है कि यह किसी समुदाय विशेष के आचार-व्यवहार का भी वहन करती है। सनातनियों के द्वारा जब कोई धार्मिक आयोजन किया जाता है तब समाचार पत्र उसे सर्वधर्म समभाव लिखता है,जबकि मुस्लिमों के आयोजन को कौमी एकता। संस्कृत में तलाक शब्द या इसका पर्यायवाची शब्द नहीं मिलता।

संस्कृत शिक्षा प्रणाली में आधुनिक विषयों के समावेश के खतरे

पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों में विशेषतः शास्त्रों का शिक्षण होता है। यदि हम वर्तमान प्रतियोगी परीक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम को विद्यालयों में लागू करते हैं तो शास्त्र शिक्षण का पक्ष गौण हो जाएगा। धीरे-धीरे इन विद्याओं का हस्तक्षेप बढ़ता जाएगा। अंततः शास्त्रों की शिक्षा समाप्त हो जाएगी। ज्ञान आधारित शिक्षा को सूचना आधारित शिक्षा में परिवर्तित होते देर नहीं लगेगी। ज्ञानार्जन के स्थान पर रोजगार प्राप्ति मात्र लक्ष्य शेष बचेगा। उतना और वही अध्ययन लक्ष्य होगा, जितने से रोजगार मिल जाय। इस प्रकार हम अपने पूर्वजों द्वारा संचित और प्रवर्तित विशाल बौद्धिक संपदा से वंचित हो जाएंगे। किसी भी राष्ट्र के लिए यह शुभ नहीं कहा जा सकता कि वह अपने गौरवमय अतीत को बोध कराने वाली, मानव मन में सौन्दर्य की सृष्टि करने वाली तथा अपनी दार्शनिक ज्ञान संपदा को खो दे। कवितायें एक ओर मानव को सौन्दर्य बोध कराने का कार्य करती है तो दूसरी ओर उसमें मानवोचित संवेदना को भी जागृत करती है। व्यावसायोन्मुखी शिक्षा के कारण मानवीय संवेदना की कमी होती जा रही है, जो कि किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरे की घंटी है। आज मार्ग में चोटिल हुए, अभावग्रस्त, रोगग्रस्त मानव के लिए जो संवेदना चाहिए, वह कम होती जा रही है। भ्रष्टाचार, अनैतिकता रोके नहीं रुक रही।
संस्कृत भाषा में मानव को संस्कारित करने के लिए रामायण, महाभारत जैसे असंख्य ग्रन्थ लिखे गये हैं। मंदिर, राजप्रासाद आदि लोकहितकारी कला के नमूने हैं, स्वास्थ्य रक्षण के लिए योग, आयुर्वेद जैसी असंख्य विद्याएं हैं, जो हमारे अंतर्मन तथा वाह्य शरीर को विकसित करती ही है, साथ में जीवन को भी सुगम बनाती है।

वर्तमान में ज्ञानार्जन और रोजगार के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु किये जा रहे प्रयास

विगत कुछ वर्षों में संस्कृत शिक्षा को सरल और रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से कई राज्यों में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया। इसके पाठ्यक्रम भी निर्धारित किए गए। कक्षा 10 तक तीन प्रश्न पत्र (संस्कृत व्याकरण, साहित्य आदि) विषयों के साथ गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि आधुनिक विषयों का समावेश किया गया है, ताकि वहां से उत्तीर्ण छात्र विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होकर नौकरी पा सकें। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद् का पाठ्यक्रम अत्यंत पुराना है। इसमें भी बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें मैं भी काफी प्रयास किया। सूचना के सहज प्रसार के लिए वेबसाइट का निर्माण कराया। कोमल मति के बालक दृश्य श्रव्य उपकरणों के माध्यम से संस्कृत सीख सकें, इसके भी अनेक प्रकार की पाठ्यचर्या निर्मित की जा रही है। इन संस्थाओं को तकनीक से समुन्नत किया जा रहा है, ताकि छात्र वेबसाइट के माध्यम से परीक्षा परिणाम को जान सकें। सूचनाओं का आदान प्रदान सुलभ हो सके। उपाधि की समकक्षता, परीक्षा की मान्यता आदि की सूचना रोजगार प्रदाता को आसानी से उपलब्ध हो ताकि रोजगार के अवसर अधिक से अधिक संस्थाओं में उपलब्ध हो सकें। प्राविधिक संस्कृत शैक्षिक उपकरण निर्माण कार्यशाला कानपुर से प्रेरणा लेकर देश की विभिन्न संस्थायें इस प्रकार का आयोजन करने लगी लगी है। कई अणुशिक्षण का निर्माण हुआ है। संस्कृत व्याकरण के लिए अनेक संसाधन निर्मित किये गये तथा किये जा रहे हैं। लघु चलचित्र, गीत संगीत द्वारा संस्कृत भाषा को जन जन तक पहुँचाया जा रहा है।

क्या हम बदलाव के लिए तैयार हैं?

कई बार हम कार्य करने में असफल होते हैं फिर भी वह असफलता दूसरों के लिए मार्गदर्शिका होती है। हमें शिक्षा सुधार तथा रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु नित्य नये प्रयोग को करते रहने की आवश्यकता है। हमें स्वयं के ज्ञान को अद्यतन रखना होगा। इस क्षेत्र में कार्य करने वालों की संख्या अल्प है, जबकि लक्ष्य विस्तृत। हमें अपने हितों की सुरक्षा के लिए सजग रहना होगा। अतः कुछ लोग शिक्षण, कुछ लोग संगठन और कुछ लोग प्रबोधन का कार्य करें। सभी लोगों में सामंजस्य हो। इससे परिणाम पाना सरल होगा। कई बार हम अंग्रेजी तथा तकनीकी शिक्षा के बढ़ते दायरे को देखकर समय को कोसते हैं। हमें उनके सांगठनिक स्वरूप तथा कार्य पद्धति से सीख लेने की आवश्यकता है। वे योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हैं। वे बढ़ती नगरीय संस्कृति, गांव से शहर की ओर पलायन को  ध्यान में रखकर नई आवासीय कॉलोनियों के इर्द-गिर्द अपने विद्यालय हेतु भूमि की व्यवस्था कर लेते हैं। उस क्षेत्र में अनेक संगठन कार्यरत हैं। एक संगठन अपने विद्यालयों की शाखा का विस्तार अनेकों शहर में करते हैं। वहां सामूहिक चेतना कार्य करती है। संस्कृत क्षेत्र में भी जिन शिक्षण संस्थाओं का संचालन संगठन द्वारा किया जा रहा है, उनकी स्थिति अच्छी है। जैसे आर्य समाज द्वारा संचालित विद्यालय। जब हम किसी समूह या संगठन के तहत विद्यालयों का संचालन करते हैं तो उसकी एक भव्य रूपरेखा होती है, भविष्य की चिंता होती है, जिसमें प्रचार, शिक्षा सुधार, प्रतिस्पर्धा,पूंजी निवेश होते रहता है। संगठित संस्था द्वारा विद्यालयों की श्रृंखला शुरु करने से दीर्घकालीन नीति बनाने, समसामयिक समस्या का हल ढूंढने, सामाजिक परिवर्तन लाने में सुविधा होती है। कुल मिलाकर केवल संस्कृत शिक्षा के पाठ्यक्रम मात्र में सुधार  कर देने से रोजगार के अवसर नहीं बढ़ सकते। संस्थाओं को सांगठनिक रूप देने, प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करने एवं पूंजी निवेश के उपाय ढूंढने से काफी हद तक बदलाव देखा जा सकता है।

नोट- मेरा यह लेख संस्कृतसर्जना ई-पत्रिका में प्रकाशित हो चुका है।

सोमवार, 22 अक्तूबर 2018

विभक्ति अभ्यास

नोट- यह पाठ मात्र अभ्यास करने के लिए निर्मित है। नियमों को जानने के लिए संस्कृत शिक्षण पाठशाला पर चटका लगायें। संस्कृत भाषा को समग्र रूप से सीखें।
प्रथमा विभक्‍तिः
संज्ञा-सर्वनामक्रियासहितानि वाक्यानि 
अभ्यासः – १
अधोलिखितैः पदैः उदाहरणानुगुणं संज्ञा-सर्वनामक्रियासहितानि वाक्यानि रचयत - 
पुंलिङ्गम्       एकवचनम्               द्विवचनम्       बहुवचनम्
बालकः          सः बालकः अस्ति । तौ बालकौ स्तः ।  ते बालकाः सन्ति ।
छात्रः                ----------- ------  ----------- ------- ----------- ----
शिक्षकः             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
युवकः               ----------- ------       ----------- ----------   ----------- ----
पुरुषः                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नायकः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गायकः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
अर्चकः               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पाचकः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
रजकः               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
हस्तः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
दीपः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पादः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
चषकः               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
चमसः               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सुधाखण्डः          ----------- ------  ----------  ----------          ----------- ----
दन्तकूर्चः            ----------- ------  ----------- ----------        ----------- ----
प्रकोष्ठः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वृक्षः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
देशः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
आसन्दः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मञ्चः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
ग्रन्थः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पाठः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
देवालयः            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कार्यालयः          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मार्गः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
प्रश्नः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
घटः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कूपः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
भारतीयः           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्त्रीलिङ्गम् (आ)        एकवचनम्             द्विवचनम्             बहुवचनम्
बालिका                  सा बालिका अस्ति । ते बालिके स्तः ।   ताः बालिकाः सन्ति ।
छात्रा                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शिक्षिका            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नायिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गायिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सेविका              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पाचिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
महिला              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्थालिका           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
रोटिका              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
छुरिका              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मापिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
माला                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कविता              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पेटिका               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गन्धवर्तिका        ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मशकवर्तिका      ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सिक्थवर्तिका      ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
भारतीया           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सञ्चालिका         ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
निरीक्षिका         ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
निर्देशिका          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नौका                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गदा                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पादरक्षा             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शाटिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कुञ्चिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कपाटिका           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
निधानिका         ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सन्दंशिका          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
भारतीया           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्त्रीलिङ्गम् (ई)         एकवचनम्               द्विवचनम्       बहुवचनम्
लेखनी           सा लेखनी अस्ति ।   ते लेखन्यौ स्तः ।     ताः लेखन्यः सन्ति ।
युवती                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नारी                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
जननी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नगरी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नर्तकी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
घटी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वेल्लनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नदी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कूपी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कर्तरी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मार्जनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
तन्त्री                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
दर्वी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
देवी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
द्रोणी                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
तरुणी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सुन्दरी               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
चालनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शोधनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
भगिनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गृहिणी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
अभिनेत्री           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
अङ्गुली            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
अङ्कनी             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
दूरवाणी            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पुनःपूरणी          ----------- ------  ----------- ----------         ---------------
वर्णलेखनी          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
प्रतिवेशिनी        ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कवयित्री           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पितामही           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मातामही           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----

नपुंसकलिङ्गम् एकवचनम्               द्विवचनम्                     बहुवचनम्
पुस्तकम्           तत् पुस्तकम् अस्ति । ते पुस्तके स्तः । तानि पुस्तकानि सन्ति ।
पुष्पम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पत्रम्                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वस्त्रम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कङ्कणम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
करवस्त्रम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पात्रम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
उपनेत्रम्            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
विमानम्            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कङ्कतम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
फेनकम्              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
क्रीडनकम्          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कारयानम्          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
फलम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शास्त्रम्              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शस्त्रम्               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
काष्ठम्               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्वेदकम्            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
राङ्कवम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
आच्छादकम्       ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
दूरदर्शनम्          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
उत्तरीयम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मित्रम्               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
व्यजनम्             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वातायनम्          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
द्वारम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सुभाषितम्         ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गृहम्                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नगरम्               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वाक्यम्             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मन्दिरम्            ----------- ------  ----------- ----------         ---------------
द्वितीया विभक्‍तिः
कर्तृ-कर्म-क्रियासहितानि वाक्यानि 
अभ्यासः – १
अधोलिखितैः पदैः उदाहरणानुगुणं कर्तृ-कर्मक्रियासहितानि वाक्यानि रचयत - 
पुंलिङ्गम्                 एकवचनम्      द्विवचनम्       बहुवचनम्
पाठः             सः पाठं पठति । सः पाठौ पठति ।            सः पाठान् पठति ।
श्लोकः                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मन्त्रः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
प्रश्नः                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
ग्रन्थः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
विषयः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
अध्यायः           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
देवालयः        माता--------------गच्छति ।          माता---------------- गच्छति ।      
ग्रामः                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
आपणः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
विदेशः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
प्रकोष्ठः              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
विद्यालयः          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वित्तकोषः          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
चिकित्सालयः     ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
महाविद्यालयः    ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कार्यालयः          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
हस्तः                एषः------------------पश्यति ।      
कटः                  -----------     -----------    ------------
मञ्चः                 -----------     -----------    ------------
स्यूतः                -----------     -----------    ------------
चमसः               -----------     -----------    ------------
चषकः               -----------     -----------    ------------
आसन्दः             -----------     -----------    ------------
करदीपः            -----------     -----------    ------------
दण्डदीपः           -----------     -----------    ------------
सुधाखण्डः          -----------     -----------    ------------
स्त्रीलिङ्गम्              एकवचनम्                         द्विवचनम्       बहुवचनम्
पत्रिका             छात्रः पत्रिकां पठति ।     छात्रः पत्रिके पठति । छात्रः पत्रिकाः पठति ।
वार्ता                 -----------     -----------    ------------
कथा                  -----------     -----------    ------------
गीता                 -----------     -----------    ------------
कविता              -----------     -----------    ------------
संहिता               -----------     -----------    ------------
सूचना               -----------     -----------    ------------
हास्यकणिका      -----------     -----------    ------------
वाटिका                   सः ---------------पश्यति ।           
माला                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पेटिका               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मापिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्थालिका           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शाटिका             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
छुरिका              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
शृङ्खला            ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कपाटिका           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पाठशाला          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
उत्पीठिका          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
निधानिका         ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
संवादशाला        ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गन्धवर्तिका        ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
सिक्थवर्तिका      ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मशकवर्तिका      ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
स्त्रीलिङ्गम्       एकवचनम्                          द्विवचनम्                      बहुवचनम्
अङ्कनी          छात्रा अङ्कनीं क्रीणाति ।  छात्रा अङ्कन्यौ क्रीणाति ।  छात्रा अङ्कनीः क्रीणाति ।
कूपी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
घटी                  ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
लेखनी               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कर्तरी                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मार्जनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वेल्लनी              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
दूरवाणी             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
वर्णलेखनी          ----------- ------  ----------- ----------         ---------------
पुनःपूरणी          ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नदी              बाला------तरति ।   बाला----------तरति ।   बाला----------तरति ।
स्त्रीलिङ्गम्                 एकवचनम्            स्त्रीलिङ्गम्                 एकवचनम्  
अष्टाध्यायी        छात्रा अष्टाध्यायीं पठति ।      काशी           पिता काशीं गच्छति ।
सप्तदशी             -----------------   पुरी                               ----------- ------
सप्तशती             ----------- ------  नगरी                            ----------- ------
कादम्बरी           ----------- ------ देहली                            ----------- ------
अभ्यासदर्शिनी    ----------- ------ राजधानी                       ----------- ------ 
सिद्धान्तकौमुदी   ----------- ------ उज्जयिनी                       ----------- ------
कौशलबोधिनी    ----------- ------- वाराणसी                       ----------- ------
नपुंसकलिङ्गम्     एकवचनम्                     द्विवचनम्                            बहुवचनम्
पुस्तकम्            पिता पुस्तकं क्रीणाति ।    पिता पुस्तके क्रीणाति ।   पिता पुस्तकानि क्रीणाति ।
शास्त्रम्              सा-------जानाति ।  सा--------जानाति ।    सा---------जानाति ।
फलम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पर्णम्                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
पुष्पम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
चित्रम्               ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गृहम्                 ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
गीतम्                ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
काव्यम्              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
राज्यम्              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
मन्दिरम्             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नाटकम्             ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
फेनकम्              ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
कङ्कतम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
करयानम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
करवस्त्रम्           ----------- ------  ----------- ----------         ----------- ----
नपुंसकलिङ्गम्                   
नगरम्               सः नगरं गच्छति ।                       रघुवंशम्        सा रघुवंशं पठति ।
बिहारम्          ----------- ---------                        मेघदूतम्            ---------------------
महाराष्ट्रम्          ---------------------                     महाभारतम्        ----------- ----------        
हिमाचलम्         ----------- ----------                     शाकुन्तलम्         ----------- ---------
राजस्थानम्        ----------- ----------                     रामायणम्         --------------------
अभ्यासः - २
आवरणे प्रदत्तस्य पदस्य द्वितीयाविभक्त्यन्तरूपेण रिक्तस्थानानि पूरयत -
सेवकः ------------------ (आसन्दः) आनयति ।                     
पिता ------------------ (कार्यालयः) गच्छति ।
मित्रं ------------------  (सन्देशः) प्रेषयति ।             
आचार्यः ------------------  (विषयः) जानाति ।
शोधार्थी ------------------  (लेखः) लिखति ।                       
विशेषज्ञः ------------------ (प्रश्नः) पृच्छति ।
अतिथिः ----------------- (पुष्पगुच्छः) स्वीकरोति ।             
रक्षकः ------------------ (चोरः) गृह्णाति ।
वटुकः ------------------- (मन्त्रः) वदति ।                           
शिष्यः ------------------ (ग्रन्थः) स्मरति ।
छात्रः ------------------ (सूचना) विस्मरति ।                       
सिंहः ------------------  (गुहा) प्रविशति ।
निरीक्षकः ------------------ (कक्ष्या) आगच्छति ।                
प्रमुखः -----------------  (कार्यशाला) सञ्चालयति ।
गृहिणी ------------------  (कपाटिका) क्रीणाति ।                 
सेवकः ------------------ (आधानिका) स्थापयति ।
प्रमुखः------------------ (संस्था) सञ्चालयति ।                     
सम्पादकः ----------------- (पत्रिका) सम्पादयति ।
माता------------------ (पाकशाला) प्रविशति ।                    
सञ्चालकः ------------------ (सभा) सञ्चालयति ।
सेविका------------------ (योजिनी) आनयति ।                    
भगिनी ----------------- (प्रतिवेशिनी) आह्वयति ।
शिशुः------------------- (अङ्गुली) स्पृशति ।                       
प्राचार्यः ------------------ (भवती) जानाति ।
अधिकारी------------------ (दैनन्दिनी) उद्घाटयति । 
बालः ------------------ (कूपी) स्वीकरोति ।
अग्रजः ------------------ (दूरवाणी) करोति ।                      
प्रवाचकः --------------- (आकाशवाणी) गच्छति ।
भ्राता ------------------ (घटी) क्रीणाति ।                            
सेविका ------------------  (कर्तरी) ददाति ।
विजेता ------------------ (पदकम्) धरति ।                     
मतदाता ----------------- (अभिज्ञानपत्रं) दर्शयति ।
अभिनेता------------------ (नाटकं) करोति ।            
ज्येष्ठः ------------------  (काव्यं) शृणोति ।
भक्तः------------------ (पुष्पं) चिनोति ।                              
गायिका ------------------ (गीतं) गायति ।
चित्रकारः ------------------  (चित्रं) रचयति ।                     
बाला ------------------  (फलम्) आनयति ।
पण्डितः------------------- (शास्त्रं) जानाति ।                       
सः ------------------ (फेनकं) स्वीकरोति ।
वैदेशिकः------------------  (देहली) आगच्छति ।                 
कर्मकरः ------------------ (कटः) प्रसारयति ।
विदूषकः------------------ (हास्यकणिका) वदति ।               
प्रबन्धकः ------------------ (वित्तकोषः) गच्छति ।
ग्राहकः ------------------ (पत्रिका) क्रीणाति ।                     
विक्रेता ------------------ (फलं) ददाति ।
पितामही ------------------ (कथा) श्रावयति ।                     
नेता ---------------------- (विदेशः) गच्छति ।
सा ------------------ (द्विचक्रिका) चालयति ।                      
नर्तकी ------------------ (कण्ठहारः) पश्यति ।
नटी------------------ (शाटिका) धरति ।                             
अर्चकः ----------------- (गन्धवर्तिका) ज्वालयति ।
विद्यार्थी------------------ (संहिता) पठति ।             
भवान् ------------------ (अध्यायः) स्मरति ।
भवती ------------------ (शृङ्खला) आनयति ।                    
आपणिकः ------------------  (स्यूतः) ददाति ।
बालिका ------------------ (पाञ्चालिका) आनयति ।            
अभिनेत्री ------------------ (वाहनं) चालयति ।
लुण्ठाकः ------------------ (छुरिका) प्रदर्शयति ।                  
सः ------------------ (स्यूतः) आनयति ।
तृतीया विभक्‍तिः
साधनार्थे
अभ्यासः – १
अधोलिखितेषु पदेषु तृतीयाविभक्तिं प्रयुज्य उदाहरणानुगुणं वाक्यानि रचयत - 
पुंलिङ्गम्                 एकवचनम्                         नपुंसकलिङ्गम्                  एकवचनम्
चषकः           सः चषकेण जलं पिबति ।                  पात्रम्         सः पात्रेण जलम् आनयति ।
स्यूतः                ----------- -------------------          जलम्                ----------- -------------------
दण्डः                 ----------- -------------------          वस्त्रम्                ----------- -------------------
चमसः               ----------- -------------------          पुष्पम्                ----------- -------------------
कंसः                  ----------- -------------------          यानम्                ----------- -------------------
कर्णः(द्वि.)          ----------- -------                         धनम्                 ----------- -------------------
दन्तः(बहु.)         ----------- -------------------          मुखम्                ----------- -------------------
हस्तः                 ----------- -------------------          नेत्रम् (द्वि.)         ----------- -------------------
घटः                  ----------- -------------------          शस्त्रम्               ----------- -------------------
कण्ठः                ----------- -------------------          काष्ठम्               ----------- -------
दीपः                 ----------- -------                       दुग्धम्                ----------- -------------------
गुडः                  ----------- -------------------          शास्त्रम्              ----------- -------------------
अञ्चलः              ----------- -------                         कङ्कतम्           ----------- -------------------
करदीपः            ----------- -------------------          करवस्त्रम्           ----------- -------------------
दन्तफेनः            ----------- -------                          इन्धनम्             ----------- -------------------
दन्तकूर्चः            ----------- -------------------         उपनेत्रम्           ----------- -------------------
अश्वशकटः         ----------- -------------------          विमानम्            ----------- -------------------
धूमशकटः          ----------- -------------------          लवित्रम्             ----------- -------------------
शाकशकटः         ----------- -------------------          फेनकम्              ----------- -------------------
वृषभशकटः        ----------- -------                      वार्तापत्रम्          ----------- -------------------
सुधाखण्डः          ----------- ----------------            क्रीडनकम्          ----------- -------------------
शिलाखण्डः        ----------- -------------------          सीवनयन्त्रम्       ----------- -------------------
आच्छादकम्       ----------- -------    कण्ठहारः       महिला कण्ठहारेण अलङ्करोति ।                       
स्त्रीलिङ्गम्                  एकवचनम्           स्त्रीलिङ्गम्                   एकवचनम्
माला            पितामही मालया जपं करोति ।             लेखनी अहं लेखन्या उत्तरं लिखामि ।
गदा                  ----------- -------------------          घटी                  ----------- -------
नौका                 ----------- -------                       द्रोणी                 ----------- -------------------
जिह्वा              ----------- -------------------          गोणी                ----------- -------------------
मापिका             ----------- -------------------          कूपी                  ----------- -------------------
पेटिका               ----------- -------------------          ईली                  ----------- -------------------
छुरिका              ----------- -------------------          दर्वी                  ----------- -------------------
स्थालिका           ----------- -------------------          मार्जनी              ----------- -------------------
कुञ्चिका             ----------- -------------------          कर्तरी                ----------- -------------------
नासिका             ----------- -------------------         चालनी              ----------- -------------------
शृङ्खला            ----------- -------------------          शोधनी              ----------- -------------------
रन्ध्रिका             ----------- -------------------          अङ्कनी             ----------- -------------------
नलिका              ----------- -------------------          अङ्गुली            ----------- -------------------
शाटिका             ----------- -------------------          वेल्लनी              ----------- -------
पादरक्षा(द्वि.)     ----------- -------                         दूरवाणी          ----------- -------------------
पाञ्चालिका        ----------- -------------------          वर्णलेखनी          ----------- -------
द्विचक्रिका         ----------- -------                         पुनःपूरणी            ----------- -------------------
गन्धवर्तिका        ----------- -------------------         नखकृन्तनी         ----------- ------------------
अग्निशलाका       ----------- -------------------          बाष्पस्थाली       ----------- -------भाववाचकक्रियाविशेषणपदानां तृतीयाविभक्‍तिः भवति ।
अभ्यासः – २
तृतीयाविभक्तेः भाववाचकरूपैः अधस्तन-वाक्यानि पूरयत -
सः (प्रयत्‍नः) ------------------- भाषणं करोति ।                   
एषः (परिश्रमः) ---------------- कार्यं सम्पादयति ।
एषः(आनन्दः) ------------------- गीतं गायति ।                   
सा (आग्रहः) -------------- प्रतिदिनं भजनं करोति ।
एषा (इच्छा) ------------------- सर्वान् पाठयति ।               
भवान् (आशा) ------------------- मा तिष्ठतु ।
भवती (श्रद्धा) ------------------- अध्ययनं करोति ।    
त्वं (भक्‍तिः) -------------------- ध्यानं  करोषि ।
अहं (प्रीतिः) ------------------- सर्वं साधयामि ।       
कः (आकृतिः) ------------------- विशालः अस्ति ?
सर्वे (उत्साहः) ------------------- कार्यं कुर्वन्ति ।                  
वयं (वार्ता) ------------- बहून् विषयान् जानीमः ।
इयं (शान्तिः) ------------------- वार्तालापं करोति । 
सः (विचारः) ------------------- श्रेष्ठः अस्ति ।
प्रमुखः (नीतिः) -------------------- सर्वत्र व्यवहरति ।           
संस्था (कार्यपद्धतिः) ------------------विकासति ।
का सर्वदा (स्वाभिमानम्) ------------------- तिष्ठति ?          
शिष्यः (जिज्ञासा) ------------------ प्रश्नं पृच्छति ।
सखी (मोहः) ------------------- कार्यं न करोति ।                 
कथम् (अभ्यासः) ---------------- सर्वं सम्भवति?
सर्वेषां (क्रीडा) ------------------- आनन्दः भवति एव ।      
मन्त्री (चर्चा) ------------------- सर्वान् तोषयति?
निदेशकः (इतिवृत्तम्) -------------- सर्वम् अवगच्छति ।   
सर्वः (तर्जनम्) ------------------ खिन्नः भवति ।
अहं (विश्वासः) ------------------- कार्यं करोमि ।                     
सर्वे (सुखम्) ------------जीवन्ति ।
मित्रं (दुःखम् ) ------------------- रोदिति ।                              
सा (आत्मविश्वासः) -------------------- क्रीडति ।

चतुर्थी विभक्‍तिः
दानार्थे
अभ्यासः – १
अधोलिखितेषु पदेषु चतुर्थीविभक्‍तिं प्रयुज्य उदाहरणानुगुणं वाक्यानि रचयत - 
पुंलिङ्गम्                 एकवचनम्              द्विवचनम्                 बहुवचनम्
बालकः          सः बालकाय जलं ददाति। सः बालकाभ्यां जलं ददाति। सः बालकेभ्यः जलं ददाति।
छात्रः                -----------     -----------    ----------
शिक्षकः             -----------     -----------    ----------
युवकः               -----------     -----------    ----------
पुरुषः                -----------     -----------    ----------
नायकः              -----------     -----------    ----------
गायकः              -----------     -----------    ----------
अर्चकः               -----------     -----------    ----------
पाचकः              -----------     -----------    ----------
रजकः               -----------     -----------    ----------
नपुंसकलिङ्गम्          एकवचनम्                    द्विवचनम्                          बहुवचनम्
पुस्तकम्          सः पुस्तकाय शतं ददाति । सः पुस्तकाभ्यां शतं ददाति ।  सः पुस्तकेभ्यः शतं ददाति ।
पुष्पम्                -----------     -----------    ----------
पत्रम्                 -----------     -----------    ----------
वस्त्रम्                -----------     -----------    ----------
फलम्                -----------     -----------    ----------
पात्रम्                -----------     -----------    ----------
फेनकम्              -----------     -----------    ----------
उपनेत्रम्            -----------     -----------    ----------
विमानम्            -----------     -----------    ----------
कङ्कतम्           -----------     -----------    ----------
करवस्त्रम्           -----------     -----------    ----------
क्रीडनकम्          -----------     -----------    ----------
कारयानम्          -----------     -----------    ----------
कङ्कणम्           -----------     -----------    ----------
स्त्रीलिङ्गम्              एकवचनम्                                           
बालिका                     सा बालिकायै धनं ददाति ।       
छात्रा                -----------     -----------    ----------
शिक्षिका            -----------     -----------    ----------
नायिका             -----------     -----------    ----------
गायिका             -----------     -----------    ----------
सेविका              -----------     -----------    ----------
पाचिका             -----------     -----------    ----------
महिला              -----------     -----------    ----------
स्त्रीलिङ्गम्              एकवचनम्                                                     
नारी               सा नार्यै धनं ददाति ।
द्विवचनम्
सा नारीभ्यां धनं ददाति ।
बहुवचनम्
सा नारीभ्यः धनं ददाति ।                        
देवी                  -----------     -----------    ----------
जननी                -----------     -----------    ----------
नर्तकी                -----------     -----------    ----------
गृहिणी              -----------     -----------    ----------
युवती                -----------     -----------    ----------
तरुणी                -----------     -----------    ----------
सुन्दरी               -----------     -----------    ----------
भगिनी              -----------     -----------    ----------
अभिनेत्री           -----------     -----------    ----------
कवयित्री           -----------     -----------    ----------
पितामही           -----------     -----------    ----------
प्रतिवेशिनी        -----------     -----------    ----------
अभ्यासः – २
अधोलिखितेषु वाक्येषु आवरणे प्रदत्तस्य शब्दस्य चतुर्थीविभक्‍तिरूपेण रिक्तस्थानं पूरयत -
राष्ट्रपतिः (सैनिकः)  -------------------- पदकं ददाति ।         
छात्रः (शिक्षकः) -------------------  लेखनीं ददाति ।
बालः (प्रमुखः)  --------------------  पुष्पगुच्छं ददाति ।        
अपराधी (आरक्षकः) -------------------  उत्कोचं ददाति ।
कर्मकरः (आपणिकः)  --------------------  धनं ददाति ।        
भक्ताः (मन्दिरम्) -------------              कार्यं कुर्वन्ति।
युवकाः (मित्रम्) --------------------  भोजनं यच्छन्ति ।        
अध्यक्षः (कलाकारः) -------------------  प्रेरणां  ददाति 
निर्देशकः (नायिका) -------------------- आलेखं ददाति ।       
ज्येष्ठा (सेविका) ----------------------  वेतनं ददाति ।
प्रधानाचार्यः (बालिका) --------------- पुरस्कारं ददाति ।     
सख्यः (गृहिणी)  ---------------------- धनं यच्छन्ति ।
युवकः (भगिनी) ---------------------  मधुरं ददाति ।            
पिता ( पुत्री )  ----------------------  चाकलेहं ददाति ।
भवती ( सखी )  ---------------------  उपहारं ददाति ।         
अहं (नलिनी) ----------------------  लेखनीं ददामि ।
पञ्चमी विभक्‍तिः (विभागार्थे)
अभ्यासः - १
 अधोलिखितेषु पदेषु पञ्चमीविभक्‍तिं  प्रयुज्य उदाहरणानुगुणं वाक्यानि रचयत - 
पुंलिङ्गम्                 वचनम्                   
बालकः                 सः बालकात् जलं स्वीकरोति ।      
सः बालकाभ्यां जलं स्वीकरोति ।      सः बालकेभ्यः जलं स्वीकरोति ।
छात्रः                -----------     -----------    ----------
शिक्षकः             -----------     -----------    ----------
युवकः               -----------     -----------    ----------
पुरुषः                -----------     -----------    ----------
नायकः              -----------     -----------    ----------
गायकः              -----------     -----------    ----------
अर्चकः               -----------     -----------    ----------
पाचकः              -----------     -----------    ----------
रजकः               -----------     -----------    ----------
नपुंसकलिङ्गम्          वचनम्                   
पुस्तकम्                     सः पुस्तकात्  ज्ञानं प्राप्‍नोति।     
सः पुस्तकाभ्यां ज्ञानं प्राप्‍नोति ।  सः पुस्तकेभ्यः ज्ञानं प्राप्‍नोति ।
पुष्पम्                -----------     -----------    ----------
वनम्                 -----------     -----------    ----------
फलम्                -----------     -----------    ----------
पात्रम्                -----------     -----------    ----------
फेनकम्              -----------     -----------    ----------
विमानम्            -----------     -----------    ----------
कारयानम्          -----------     -----------    ----------
करवस्त्रम्           -----------     -----------    ----------
स्त्रीलिङ्गम्              एकवचनम्                              द्विवचनम्                         
बालिका             सा बालिकायाः ज्ञानं प्राप्‍नोति । सा बालिकाभ्यां ज्ञानं प्राप्‍नोति । 
बहुवचनम्
सा बालिकाभ्यः ज्ञानं प्राप्‍नोति ।

छात्रा                -----------     -----------    ----------
शिक्षिका            -----------     -----------    ----------
नायिका             -----------     -----------    ----------
गायिका             -----------     -----------    ----------
सेविका              -----------     -----------    ----------
पाचिका             -----------     -----------    ----------
महिला              -----------     -----------    ----------
स्त्रीलिङ्गम्              एकवचनम्               द्विवचनम्                         
नारी                सा नार्याः धनं प्राप्‍नोति । सा नारीभ्यां धनं प्राप्‍नोति ।      
बहुवचनम्
सा नारीभ्यः धनं प्राप्नोति ।
देवी                  -----------     -----------    ----------
जननी                ----------- ------  ----------- ----------        
नर्तकी                -----------     -----------    ----------
गृहिणी              -----------     -----------    ----------
युवती                -----------     -----------    ----------
तरुणी                -----------     -----------    ----------
सुन्दरी               -----------     -----------    ----------
भगिनी              -----------     -----------    ----------
अभिनेत्री           -----------     -----------    ----------
कवयित्री           -----------     -----------    ----------
पितामही           -----------     -----------    ----------
मातामही           -----------     -----------    ----------
प्रतिवेशिनी        -----------     -----------    ----------
अभ्यासः - २
अधोलिखितेषु वाक्येषु आवरणे प्रदत्तस्य शब्दस्य यथोचितविभक्‍तिरूपेण रिक्‍तस्थानं पूरयत -
सः (स्यूतः)-------------------- धनं निष्कासयति ।                 
मशी ( लेखनी ) -------------------- स्रवति ।
चायं (चषकः)  -------------------- पतति।                           
द्वारपालः (प्रकोष्ठः)  ---------------- आसन्दम् आनयति ।
जलं (घटः)  -------------------- स्रवति ।                             
भवान् (शीतकम्)  ------------------  शाकं निष्कासयति ।
भक्तः (मन्दिरम्) ----------------- गृहं गच्छति।                    
मालाकारः (लता) -----------------  पुष्पाणि अवचिनोति ।
सर्वदा (नलिका)-------------------- जलं पतति                  
अनुजा ( कपाटिका )  ------------------ वस्त्रं स्वीकरोति ।
छात्रः (परीक्षा)  -------------------- भयं करोति ।                
भ्राता ( वाटिका )  -------------------- अत्र आगच्छति ।
अर्चकः (काशी)  -------------------- प्रस्थानं करोति ।           
एषा ( वीथी )  -----------------निर्गच्छति ।
षष्ठी विभक्‍तिः
अभ्यासः – २
अधोलिखितपदानां त्रिषु वचनेषु षष्ठीविभक्त्यन्तानि रूपाणि लिखत -
पुंलिङ्गम्       एकवचनम्               द्विवचनम्                 बहुवचनम्
वृक्षः             वृक्षस्य                              वृक्षयोः         वृक्षाणाम्
शिष्यः            -----------                    -----------        -----------
छात्रः             -----------                    -----------        -----------
ग्रामः               -----------                    -----------        -----------
पुत्रः                -----------                    -----------        -----------
गायकः              -----------                    -----------        -----------
बालकः           -----------                    -----------        -----------
शिक्षकः          -----------                    -----------        -----------
विद्यालयः        -----------                    -----------        -----------
नपुंसकलिङ्गम् एकवचनम्               द्विवचनम्                 बहुवचनम्
फलम्            फलस्य                    फलयोः                   फलानाम्
गृहम्                 -----------                    -----------        -----------
पर्णम्                 -----------                    -----------        -----------
वनम्                 -----------                    -----------        -----------
चित्रम्               -----------                    -----------        -----------
राज्यम्              -----------                    -----------        -----------
नगरम्               -----------                    -----------        -----------
भवनम्              -----------                    -----------        -----------
नाटकम्             -----------                    -----------        -----------
मन्दिरम्            -----------                    -----------        -----------
पुस्तकम्             -----------                    -----------        -----------
स्त्रीलिङ्गम्     एकवचनम्               द्विवचनम्                 बहुवचनम्
बालिका         बालिकायाः              बालिकयोः               बालिकानाम्
शिष्या               -----------                    -----------        -----------
छात्रा                -----------                    -----------        -----------
वैद्या                 -----------                    -----------        -----------
कथा                  -----------                    -----------        -----------
अनुजा               -----------                    -----------        -----------
महिला              -----------                    -----------        -----------
गायिका             -----------                    -----------        -----------
नायिका             -----------                    -----------        -----------
सेविका              -----------                    -----------        -----------
शिक्षिका            -----------                    -----------        -----------
पुत्री              पुत्र्याः                          पुत्र्योः           पुत्रीणाम्
घटी                  -----------                    -----------        -----------
नदी                  -----------                    -----------        -----------
सखी                 -----------                    -----------        -----------
देवी                  -----------                    -----------        -----------
कूपी                  -----------                    -----------        -----------
जननी                -----------                    -----------        -----------
तरुणी                -----------                    -----------        -----------
युवती                -----------                    -----------        -----------
भगिनी              -----------                    -----------        -----------
नगरी                -----------                    -----------        -----------
नर्तकी                -----------                    -----------        -----------
लेखनी               -----------                    -----------        -----------
अङ्कनी             -----------                    -----------        -----------
कर्मकरी             -----------                    -----------        -----------
अभिनेत्री           -----------                    -----------        -----------
अभ्यासः – ३
अधः प्रदत्तानां पदानां साहाय्येन उदाहरणानुगुणं वाक्यानि लिखत -
रामः                                         दशरथः                         रामस्य पिता दशरथः ।
कृष्णः                                        वसुदेवः                         ----------- ----------- -          
गणेशः               पिता                 शिवः                            ----------- ----------- -          
लवः                  पुत्रः                  रामः                             ----------- ----------- -          
मेघनादः                                    रावणः                          ----------- ----------- -
अर्जुनः                                       पाण्डुराजः                     ----------- ----------- -
दशरथस्य पुत्रः रामः ।                             उमा                               शिवः
----------- ----------- -                  सीता                                           रामः
----------- ----------- -                  सुभद्रा                 पतिः                            अर्जुनः
----------- ----------- -                  कौसल्या                          त्‍नी                            दशरथः
----------- ----------- -                  अहल्या                                        गौतमः 
----------- ------------                   सत्यभामा                                     कृष्णः
शिवस्य  पत्‍नी उमा ।                     उमायाः पतिः शिवः ।
----------- ----------- -------           ----------- ----------- -----------
----------- ----------- -------           ----------- ----------- -----------
----------- ----------- -------           ----------- ----------- -----------
----------- ----------- -------           ----------- ----------- -----------
----------- ----------- -------           ----------- ----------- -----------

माद्री                                         नकुलः                           माद्र्याः पुत्रः नकुलः ।                          
कुन्ती                                         अर्जुनः                           ----------- -----------
पार्वती               पुत्रः                 गणेशः                           ----------- -----------
कैकेयी                                       भरतः                            ----------- -----------
गान्धारी                                    दुर्योधनः                                    ----------- -----------
मन्दोदरी                                   मेघनादः                        ----------- -----------
पञ्चतन्त्रस्य लेखकः विष्णुशर्मा ।                           पञ्चतन्त्रम्                  विष्णुशर्मा       
----------- ----------- -------              गोदानम्                                                प्रेमचन्दः
----------- ----------- -------           महाभाष्यम्          लेखकः                       पतञ्जलिः
----------- ------------------           रामायणम्                                   वाल्मीकिः
----------- ----------- -------           महाभारतम्                               व्यासः           
----------- ----------- -------           मेघदूतम्                                    कालिदासः        
अभ्यासः – ४
अधोलिखितानां प्रश्‍नानाम् उत्तराणि लिखत -
कस्य शिष्यः अर्जुनः ?      (द्रोणाचार्यः)                  कस्याः जलं पवित्रम् ?       (गङ्गा)
----------- ----------- -                       ----------- -----------
कस्य गुरुः बलरामः ?      (भीमः)                          कस्याः जलं शुद्धम् ?         (गोदावरी)
----------- ----------- -                       ----------- -----------
कस्य गुरुः विश्वामित्रः ?  (रामः)                           कस्याः जलं प्रदूषितम् ?   (यमुना)
----------- ----------- -                       ----------- -----------
कस्य गुरुः सान्दिपनिः ?  (कृष्णः)                          कस्याः जलं  स्वच्छम् ?   (कावेरी)
----------- ----------- -                       ----------- -----------
कस्य गुरुः परमहंस ?      (विवेकानन्दः)                 कस्याः जलं शुष्कम् ?      (सरस्वती)        
            ----------- -----------
कस्य राजधानी देहली ?                          (भारतम्)    ----------- -----------
कस्य राजधानी पटना ?                           (बिहारम्)         ----------- -----------
कस्य राजधानी मुम्बई ?                          (महाराष्ट्रम्)       ----------- -----------
कस्य राजधानी राची ?                           (झारखण्डम्)     ----------- -----------
कस्य राजधानी जयपुरम् ?                       (राजस्थानम्)    ----------- -----------
कस्य राजधानी लखनऊ ?                        (उत्तरप्रदेशः)     ----------- -----------
कस्य राजधानी गान्धिनगरम् ?                 (गुजरातम्)       ----------- -----------
कस्य राजधानी तिर्वनन्तपुरम् ?                (केरलम्)           ----------- -----------
कस्य राजधानी बेङ्गलुरुः?                      (कर्नाटकम्)       ----------- -----------
कस्य राजधानी शिमला ?                        (हिमाचलम्)     ----------- -----------
कस्य राजधानी भोपालम् ?                      (मध्यप्रदेशः)      ----------- -----------
        
सप्तमी विभक्‍तिः  
अभ्यासः – ३
अधोलिखितपदानां त्रिषु वचनेषु सप्तमीविभक्त्यन्तानि रूपाणि लिखत -
पुंलिङ्गम्       एकवचनम् द्विवचनम्  बहुवचनम्
स्यूतः                स्यूते         स्यूतयोः          स्यूतेषु
ग्रामः                 -----------     -----------    ----------
वृक्षः                  -----------     -----------    ----------
मार्गः                 -----------     -----------    ----------
कूपः                  -----------     -----------    ----------
चषकः               -----------     -----------    ----------
प्रकोष्ठः              -----------     -----------    ----------
आसन्दः             -----------     -----------    ----------
आपणः              -----------     -----------    ----------
तडागः               -----------     -----------    ----------
नपुंसकलिङ्गम् एकवचनम्      द्विवचनम्   बहुवचनम्
पात्रम्                पात्रे             पात्रयोः         पात्रेषु               
चित्रम्               -----------     -----------    ----------
फलम्                -----------     -----------    ----------
गृहम्                 -----------     -----------    ----------
नगरम्               -----------     -----------    ----------
राज्यम्              -----------     -----------    ----------
मन्दिरम्                        -----------     -----------    ----------
पुस्तकम्             -----------     -----------    ----------
स्त्रीलिङ्गम्        एकवचनम्      द्विवचनम्    बहुवचनम्
लता                   लतायाम्         लतयोः        लतासु
नौका                 -----------     -----------    ----------
पेटिका               -----------     -----------    ----------
वाटिका             -----------     -----------    ----------
स्थालिका           -----------     -----------    ----------
कपाटिका           -----------     -----------    ----------
उत्पीठिका          -----------     -----------    ----------
नदी                  नद्याम्               नद्योः     नदीषु   
द्रोणी                 -----------     -----------    ----------
कूपी                  ----------- ------  ----------- ----------        
लेखनी               ----------- ------  ----------- ----------         
नगरी                -----------     -----------    ----------
अङ्गुली           -----------     -----------    ----------
राजधानी           -----------     -----------    ----------
अभ्यासः – ४
आवरणे प्रदत्तस्य पदस्य सप्तमीविभक्त्यन्तरूपेण रिक्तस्थानानि पूरयत -
छात्रः  (विद्यालयः) विद्यालये पठति ।                             
कृष्णफलकं (प्रकोष्ठः) --------------------  अस्ति ।
रसगोलकम् (आपणः) --------------------भवति ।                
अध्यापिका (विद्यालयः) --------------------पाठयति । 
वैद्यः (चिकित्सालयः) --------------------उपविशति ।           
ग्रन्थः (ग्रन्थालयः) ----------- ------भवति ।
पुस्तकं (पुस्तकालयः) -------------------- भवति ।                
पिता (कार्यालयः) --------------------कार्यं करोति ।
विद्युत्कोषः (करदीपः) -------------------- भवति ।              
देवः (देवालयः) -------------------- विराजते ।
कुञ्चिका (तालः) -------------------- अस्ति ।            
जनाः घटीं (हस्तः) -------------------- धरन्ति ।       
तैलं (दीपः) -------------------- अस्ति ।                              
माता (पाकशाला) पाकशालायाम् अन्‍नं पचति ।   
माला (कण्ठः) -------------------- शोभते ।                          
वार्ता (पत्रिका) -------------------- अस्ति ।
स्थालिका (पाकशाला) -------------------- अस्ति।               
माला (वाटिका) -------------------- अस्ति ।
पाचकः  (पाकशाला) --------------------  पचति ।               
पुष्पं (वाटिका) -------------------- अस्ति । 
लेखनी (उत्पीठिका) -------------------- अस्ति ।                   
लता  (वाटिका) -------------------- अस्ति ।
पुष्पाणि (लता) -------------------- सन्ति ।              
धनं (कपाटिका) -------------------- अस्ति ।              
अश्वः ( अश्वशाला) -------------------- अस्ति ।                    
लेखनी (पेटिका) -------------------- अस्ति ।
छात्रः (पाठशाला) -------------------- पठति ।                     
कार्यक्रमः ( सभा) -------------------- अस्ति ।          
नासाभरणं (नासिका) --------------------  अस्ति ।               
पुस्तकं ( कपाटिका) -------------------- अस्ति ।       
वस्त्रं ( निधानिका) -------------------- अस्ति ।                     
माता (गृहम्) -------------------- वसति ।   
बालकः (गृहम्) -------------------- वसति ।            
जलं ( पात्रम्) -------------------- अस्ति ।               
देवः (मन्दिरम्) -------------------- अस्ति ।             
कूपी (गृहम् ) --------------------  अस्ति ।               
पाठः (पुस्तकम्) --------------------  अस्ति ।                       
श्लोकः (पुस्तकम्) --------------------  अस्ति ।
लता ( उद्यानम् ) -------------------- अस्ति ।                       
धेनुः (गृहम् ) -------------------- अस्ति ।    
सुगन्धः (पुष्पम् ) -------------------- अस्ति ।                       
उत्साहः (हृदयम् ) -------------------- अस्ति ।         
लक्ष्यं ( जीवनम् ) -------------------- अस्ति ।                      
नौका (नदी) नद्याम् अस्ति ।
कार्यक्रमः ( दूरदर्शनम् ) -------------------- अस्ति ।             
कमलं ( सरोवरः) -------------------- अस्ति ।
अङ्गुलीयकम्  (अङ्गुली ) -------------------- अस्ति ।         
मीनः (नदी) -------------------- अस्ति ।                  
ओदनं ( द्रोणी) -------------------- अस्ति ।              
सूची (घटी ) -------------------- अस्ति ।                 
जलं (द्रोणी ) -------------------- अस्ति ।                            
सूत्रं (सूची) -------------------- अस्ति ।       
सूपः (दर्वी) -------------------- अस्ति ।                              
पुष्पं (वेणी) -------------------- अस्ति ।
औषधं ( कूपी ) -------------------- अस्ति ।             
देवालयः ( नगरी ) -------------------- अस्ति ।        
कार्यक्रमः ( आकाशवाणी) -------------------- अस्ति ।          
मीनाः (जलम्) --------------------  जीवन्ति ।          
विश्वनाथः (काशी) --------------------  अस्ति ।                   
रामजन्मभूमिः (अयोध्या) ----------------- अस्ति ।
                                        उपपदविभक्‍तयः
विभक्‍तिः द्विधा भवति – कारकविभक्‍तिः , उपपदविभक्‍तिः च । यत्र कर्ता,कर्म,करणम्,सम्प्रदानम्,अपादानम्,अधिकरणं चेत्येतानि अधिकृत्य विभक्‍तिः प्रवर्तते तत्र कारकविभक्‍तिः इत्युच्यते । परन्तु यत्र पदानां सामीप्यत्वात् विभक्‍तिः प्रवर्तते तत्र उपपदविभक्‍तिः कथ्यते । अधः विद्यमानानि पदानि अधिकृत्य इत्थम् उपपदविभक्‍तिः प्रवर्तते । यथा -
द्वितीया – परितः (अभितः/सर्वतः), धिक्,  प्रति, उभयतः, विना
तृतीया – हीनः (रहित), विना, अलम्, सह (साकम्, सार्धम्), सदृशः, अङ्गविकारे – नेत्रेण काणः। पादेन खञ्जः।
चतुर्थी – दानार्थे, रुच् योगे, कुप्यति / क्रुध्यति, स्पृह्यति (इच्छति) नमः, अलम्, स्वाहा, स्वस्ति
पञ्चमी – विना, मा, बहिः, पूर्वम्, बिभेति, रक्षति
षष्ठी – उपरि, अधः, पुरतः, पृष्टतः, (निर्धारणे – कवीनां कालिदासः श्रेष्ठः ।)
सप्तमी – स्निह्, विश्वस्, कुशल,निपुण, (तेनाली रामः न्याये चतुरः।)
अभ्यासः - १
उपपदविभक्तिः (मिश्राभ्यासः)
अधः प्रदत्तानां स्थूलाक्षराणां पदानां योगे यथोचितां उपपदविभक्‍तिम् उपयुज्य रिक्‍तस्थानेषु लिखत -
पिता (कार्यालयः)--------------------- प्रति गच्छति ।            
छात्रः (विद्यालयः) ---------------------प्रति गच्छति ।
(ज्ञानं) ---------------------  विना जीवनं नास्ति ।                
(जलं) --------------------- विना जीवनं नास्ति ।
(देवालयः) --------------------- परितः वृक्षाः सन्ति ।           
(विद्यालयः) -------------------- उभयतः यानानि सन्ति ।
(वाटिका) --------------------- परितः लताः सन्ति ।             
(नदी) --------------------- उभयतः ग्रामाः सन्ति ।
(मन्दिरम्) --------------------- उभयतः पुष्पाणि सन्ति ।      
(कार्यालयः) --------------------- उभयतः जनाः सन्ति ।
धिक् ------------------- 
( चोरः)  धिक् ------------------ ! 
(मूर्खः)  धिक् -------------------- ! 
(कृपणा) अलम्  ----------------- ।
(कोलाहलः)  अलम्  --------------। 
(चर्चा)  अलम्  ------------------ । (विवादः)
शिक्षिका (छात्रः) -------------- कुप्यति   
अधिकारी (सेवकः)------------- क्रुध्यति । 
माता (पुत्री) -------------क्रुध्यति
सः भिक्षुकः (नेत्रम्) ------------ काणः अस्ति ।                     
सा महिला (पादः) --------------- खञ्जा अस्ति ।
कन्या (जनकः) --------------------- सह गच्छति ।                
राकेशः (अध्यापिका) --------------------- सह वदति ।
सः (अनुजा) --------------------- सह क्रीडति ।                     
पुत्री (अम्बा) --------------------- सह वसति ।
(विद्या) ----------------   हीनः छात्रः न शोभते ।              
(गुणाः) --------------------- हीनः छात्रः न शोभते ।
अहं (मित्रम्) --------------------- सह क्रीडामि ।                   
त्वं (भगिनी) --------------------- सह भ्रमसि ।
(गृहिणी) ---------------------- विना गृहं न शोभते ।          
(देशभक्ताः) ------------------- विना देशः न शोभते ।
पुत्रः (पिता) -------------- सदृशः उन्नतः अस्ति ।      
आम्रम् (अमृतम्) ---------------- सदृशं मधुरम् ।
तापी नदी (गङ्गा) -------------- सदृशी प्रसिद्धा नास्ति ।  
(जननी) ---------------- सदृशी वात्सल्यमयी नान्या ।
वृक्षः (मनुष्यः) --------------------- फलं ददाति ।                  
देवः (भक्तः) --------------------- वरं ददाति ।
शिक्षकः (छात्रा) --------------------- पुस्तकं ददाति ।            
त्वं (अनुजः) --------------------- सह क्रीडसि ।
पिता (पुत्रः) --------------------- चाकलेहं ददाति ।               
अहं (मित्रम्) --------------------- सह नृत्यामि ।
(देवः) --------------------- नमः ।                           
निर्वाहकः (प्रयाणिकः) ----------------- चिटिकां ददाति।
मनुष्यः (उन्नतपदम्) --------------- स्पृह्यति ।           
बुद्धिमान् छात्रः (प्रथमस्थानम्) -------------- स्पृह्यति ।
(शिवः) --------------------- नमः ।     
(दुर्गा) --------------------- नमः ।      
(पार्वती) ------------------ नमः ।
(अग्निः) ------------------ स्वाहा ।  
(त्वम्) ----------------- स्वस्ति ।           
(अनलः) ------------------ स्वाहा । 
(पावकः) ------------------ स्वाहा ।  
(वह्निः) ------------------ स्वाहा ।      
(भवत्) ----------------- स्वस्ति ।
(भवती) ----------------- स्वस्ति ।    
(शिष्यः) ----------------- स्वस्ति ।      
(शिष्या) ----------------- स्वस्ति ।
(पुत्री) ----------------- स्वस्ति ।              
(भक्तः) ----------------- स्वस्ति । 
(भक्ता) ----------------- स्वस्ति ।    
(गणेशः) ---------------- मोदकं रोचते ।
 (अहम्) -------------- संस्कृतं रोचते । 
(सः) ---------- क्रीडाः रोचन्ते ।
(सा) -------------- गानं रोचते ।         
(त्वम्) ------------- नृत्यं रोचते ।
(कः) --------------- अध्ययनं रोचते ?
(प्रयत्न)------------------ विना सफलता असम्भवा ।  
(गृहम्) ------------------ बहिः आतपः अस्ति ।        
माता (मासः)----------------पूर्वं शाटिकां क्रीतवती ।            
सः (अन्धकारः) ----------------बिभेति ।  
(वैशाखः) ---------------- पूर्वं चैत्रमासः भवति ।                  
(दीपोत्सवः) ---------------- पूर्वं विजयादशमी भवति ।
(परीक्षा) ---------------- पूर्वम् अध्ययनं भवति ।                  
(सोमवासरः) ---------------- पूर्वं रविवासरःभवति ।
मूषकः (मार्जालः) ----------------  बिभेति ।                    
मार्जालः (शुनकः)----------------  बिभेति ।
बालकः (सर्पः) ----------------  बिभेति ।                             
छात्राः (प्रधानाचार्या) ----------------  भयं कुर्वन्ति ।
देवः भक्तं (सङ्कटम्) ------------- रक्षति ।                          
वृक्षः सर्वान् (आतपः) ------------- रक्षति ।
पिता पुत्रं  (दुर्व्यसनम्) ------------- रक्षति ।             
माता पुत्रीं (दुष्टः) ------------- रक्षति ।
देवः भक्तं (दुर्जनम्) ------------------ रक्षति ।                       
(वृक्षः) ------------------ उपरि खगाः वसन्ति ।
भवत्याः लेखनी (उत्पीठिका) ------------------ अधः अस्ति । 
(गृहं) ------------------ पुरतः मार्गः अस्ति ।
भिक्षुकः (कारयानं) ------------------ पृष्टतः धावति ।              
कवीनां कालिदासः श्रेष्ठः ।        
सुनिलः (नृत्यम्) ------------------ निपुणः अस्ति ।  
रत्नाकरः (चित्रकला) ------------------ कुशलः अस्ति ।
माता (पुत्रः) ------------------ स्निह्यति ।                                 
पिता (पुत्री) ------------------ विश्वसिति ।           
तेनाली-रामः न्याये चतुरः।                                   
राजनेता (भाषणम्) ------------------ चतुरः।     
रावणः -------------- (रामः) सह युद्धं कृतवान् ।                   
अर्जुनः ------------------ (कर्णः) सह युद्धं कृतवान् ।         
सा --------------- (शर्करा) विना दुग्धं न पिबति ।                 
गुरुः शिष्यं  ------------------(पापम्) रक्षति । 
(त्वं) ------------------- नृत्यं रोचते किम् ।                       
(अस्मद्) --------------- नृत्यम् अत्यन्तं रोचते ।
अलम् अधिक -(चिन्तनम्)---------------------- ।               
---------------- (पृथ्वी) परितः अन्तरीक्षम् अस्ति ।