5-दिवसीय संस्कृत माध्यमिक शिक्षक प्रशिक्षण समय-सारिणी

 प्रशिक्षण का शीर्षक : माध्यमिक संस्कृत शिक्षक : परम्परा एवं नवाचार का समन्वय

प्रशिक्षण स्थल : उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, नया हैदराबाद, लखनऊ

प्रशिक्षणार्थियों की संख्या : 30 माध्यमिक संस्कृत शिक्षक (लखनऊ से बाहर के जनपदों से)

प्रशिक्षक : राम, श्याम, मोहन एवं सुरेश


1. प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं कार्यविधि

प्रशिक्षण को केवल व्याख्यान आधारित न रखते हुए इसमें सैद्धान्तिक ज्ञान, व्यावहारिक अभ्यास, सहकर्मी शिक्षण डिजिटल कौशल, ग्रन्थावृत्ति, समूह-अध्ययन तथा मूल्यांकन का समन्वय रखा जाना प्रस्तावित है।

प्रशिक्षण के प्रमुख घटक निम्नवत् होंगे—

1. प्रतिदिन चार मुख्य शिक्षण सत्र होंगे। प्रत्येक सत्र 90 मिनट का होगा।

2. प्रतिदिन एक प्रशिक्षु शिक्षक अपनी विद्यालयीय पाठ्यपुस्तक के किसी एक पाठ अथवा विषय का चयन करके अन्य प्रशिक्षुओं को पढ़ाएगा। इसके लिए 15 मिनट निर्धारित रहेंगे।

3. प्रत्येक शिक्षण सत्र के अंतिम 5 मिनट में एक प्रशिक्षु शिक्षक उस सत्र में पढ़ाई गई विषयवस्तु का सारांश प्रस्तुत करेगा।

4. भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत में रोजगार के अवसर, संस्कृत में उच्च शिक्षा तथा विद्यार्थियों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं पर तीन अलग-अलग दिनों में विशेष व्याख्यान आयोजित होंगे।

5. 30 प्रशिक्षुओं के 5-5 सदस्यों वाले कुल 6 समूह बनाए जाएंगे। प्रत्येक समूह को ऑनलाइन व्याख्यान अथवा अध्ययन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा। समूह उस सामग्री का अध्ययन करके लिखित समीक्षा प्रस्तुत करेंगे।

6. चतुर्थ दिवस पर सभी प्रशिक्षु शिक्षकों को 15-15 मिनट का शिक्षण प्रदर्शन करना होगा।

7. पंचम दिवस पर प्रशिक्षणार्थियों की लिखित एवं व्यावहारिक परीक्षा आयोजित की जाएगी।

8. उद्घाटन एवं समापन के अवसर पर भी एक-एक प्रशिक्षु शिक्षक द्वारा प्रशिक्षण का सारांश प्रस्तुत किया जाएगा।


समय-संबंधी प्रस्ताव: चार मुख्य सत्रों के अतिरिक्त तीन दिनों में एक-एक विशेष व्याख्यान सत्र रखा गया है। इस प्रकार प्रतिदिन चार से पाँच शिक्षण सत्र होंगे। उद्घाटन एवं समापन को पृथक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में रखा गया है।


 2. प्रतिदिन का निर्धारित समय

सभी दिनों में भोजन एवं जलपान की व्यवस्था निम्नानुसार रहेगी।

गतिविधि                                समय             

प्रातःकालीन जलपान              8:00–8:45 बजे   

प्रथम सत्र                             9:00–10:30 बजे  

मध्यावकाश / जलपान           10:30–10:45 बजे 

द्वितीय सत्र                           10:45–12:15 बजे 

दोपहर का भोजन                12:15–1:15 बजे  

तृतीय सत्र                             1:15–2:45 बजे   

मध्यावकाश / जलपान            2:45–3:00 बजे   

चतुर्थ सत्र                            3:00–4:30 बजे   

सायंकालीन जलपान             4:30–5:00 बजे   

विशेष व्याख्यान (निर्धारित दिवसों में) 5:00–6:00 बजे   


विशेष व्याख्यान के दिन कुल पाँच सत्र होंगे। चौथे दिन सामूहिक शिक्षण प्रदर्शन के लिए अतिरिक्त समय तथा पाँचवें दिन परीक्षा एवं समापन के लिए अलग समय रखा जाएगा।


3. दिवसवार विस्तृत समय-सारिणी


दिवस 1 : शनिवार, 14 नवम्बर 2026

विषय : डिजिटल साक्षरता एवं संज्ञा प्रकरण

मुख्य लक्ष्य : संस्कृत शिक्षण में डिजिटल उपकरणों का प्रयोग तथा शुद्ध उच्चारण की वैज्ञानिक समझ विकसित करना।


समय         सत्र एवं विषयवस्तु                                                                                                 प्रशिक्षक         


8:45–9:00   उद्घाटन हेतु स्थान ग्रहण एवं स्वागत                                                                       

9:00–9:30   उद्घाटन सत्र – दीप प्रज्वलन, सरस्वती वन्दना, अतिथि उद्बोधन एवं प्रशिक्षण की रूपरेखा                                संस्थान           

9:30–9:40   एक प्रशिक्षु द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्यों एवं उद्घाटन सत्र का सारांश                        प्रशिक्षु         

9:40–10:30  संस्कृत संभाषण (भाग 1) – परिचय, अभिवादन, दैनिक शिष्टाचार एवं लट्लकार के सरल वाक्य         

10:45–12:15 लघुसिद्धान्तकौमुदी : संज्ञा प्रकरण, महेश्वर सूत्र, उच्चारण स्थान एवं प्रयत्नों सहित सूत्रों का सस्वर अभ्यास           

1:15–2:45   डिजिटल साक्षरता – देवनागरी इनपुट, यूनिकोड फॉन्ट, मोबाइल एवं लैपटॉप पर संस्कृत टाइपिंग, वॉयस टाइपिंग               

3:00–4:30   पाठ्यपुस्तक शिक्षण अभ्यास – निर्धारित पाठ्यपुस्तक के पाठों को डिजिटल सामग्री से जोड़ना एवं शिक्षण योजना तैयार करना              

4:30–5:00   सायंकालीन जलपान                                                                                                    —                 

5:00–6:00   विशेष व्याख्यान – भारतीय ज्ञान परम्परा एवं संस्कृत शिक्षा में उसका महत्त्व                                      

6:00–6:10   व्याख्यान का सारांश एवं समीक्षा हेतु समूहों को अध्ययन सामग्री के लिंक उपलब्ध कराना                                 प्रशिक्षु/समन्वयक 


प्रथम दिवस की विशेष गतिविधियाँ :

- सभी प्रशिक्षुओं का परिचय एवं संस्कृत में आत्मपरिचय।

- मोबाइल एवं लैपटॉप पर संस्कृत टाइपिंग का व्यावहारिक अभ्यास।

- छह समूहों का गठन तथा प्रत्येक समूह को अध्ययन हेतु विषय एवं ऑनलाइन लिंक आवंटित करना।

- उद्घाटन सत्र में एक प्रशिक्षु द्वारा सारांश प्रस्तुति।


दिवस 2 : रविवार, 15 नवम्बर 2026

विषय : संभाषणात्मक कौशल एवं व्यावहारिक व्याकरण

मुख्य लक्ष्य : व्याकरण को उदाहरण, गतिविधि एवं अभिनय के माध्यम से सरल और रुचिकर बनाना।

समय         सत्र एवं विषयवस्तु                                                                                                   प्रशिक्षक 

9:00–10:30  संस्कृत संभाषण (भाग 2) – कारक, विभक्तियाँ एवं दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं के संस्कृत नामों का वाक्यों में प्रयोग राम       

10:45–12:15 नीतिशतकम् – मूर्खपद्धति एवं विद्वत्पद्धति के श्लोकों का छन्दोबद्ध, लययुक्त एवं सस्वर वाचन तथा शिक्षण विधि            श्याम     

1:15–2:45   आधुनिक शिक्षण विधियाँ – आगमन-निगमन पद्धति द्वारा व्याकरण शिक्षण, उदाहरण आधारित सूत्र निर्माण एवं गतिविधियाँ          मोहन      

3:00–4:30   पाठ्यपुस्तक शिक्षण अभ्यास – गद्य एवं पद्य पाठों का रोल-प्ले, अभिनय, संवाद एवं नाट्य विधि से शिक्षण                   सुरेश     

4:30–5:00   सायंकालीन जलपान                                                                                                      —         

5:00–6:00   विशेष व्याख्यान – संस्कृत भाषा में रोजगार के अवसर :     श्याम     

द्वितीय दिवस की विशेष गतिविधियाँ :

- एक प्रशिक्षु शिक्षक द्वारा अपनी विद्यालयीय पाठ्यपुस्तक के किसी एक विषय का 15 मिनट का शिक्षण।

- प्रत्येक मुख्य सत्र के अंत में प्रशिक्षु द्वारा पाँच मिनट में पाठ्यवस्तु का सारांश।

- समूहों को रोजगार के अवसर संबंधी व्याख्यान एवं अध्ययन सामग्री की समीक्षा करने का निर्देश।


दिवस 3 : सोमवार, 16 नवम्बर 2026

विषय : क्रीड़ा आधारित शिक्षण एवं अच्-सन्धि

मुख्य लक्ष्य : संस्कृत व्याकरण को खेल, प्रतियोगिता एवं सहभागिता के माध्यम से पढ़ाने की क्षमता विकसित करना।

समय         सत्र एवं विषयवस्तु                                                                                                         प्रशिक्षक 

9:00–10:30  संस्कृत संभाषण (भाग 3) – क्तवतु प्रत्यय, लृट्लकार, भूतकाल एवं भविष्यत्काल में संवाद निर्माण                                राम       

10:45–12:15 लघुसिद्धान्तकौमुदी : अच्-सन्धि प्रकरण – यण्, गुण, वृद्धि आदि सूत्रों का सस्वर अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक में सन्धि की पहचान    श्याम     

1:15–2:45   क्रीड़ा आधारित शिक्षण – शब्द पहेली, श्लोक अन्त्याक्षरी, धातुरूप रेस एवं व्याकरण आधारित खेलों का निर्माण                    मोहन      

3:00–4:30   पाठ्यपुस्तक शिक्षण प्रयोगशाला – कारक, प्रत्यय एवं समास जैसे कठिन विषयों पर गतिविधि पत्रक तैयार करना                        सुरेश     

4:30–5:00   सायंकालीन जलपान                                                                                                            —         

5:00–6:00   विशेष व्याख्यान – संस्कृत में उच्च शिक्षा एवं विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाएँ, छात्रवृत्तियाँ एवं शैक्षणिक अवसर मोहन      


तृतीय दिवस की विशेष गतिविधियाँ :

- एक प्रशिक्षु शिक्षक द्वारा 15 मिनट का पाठ्यवस्तु शिक्षण।

- व्याकरण आधारित खेलों का समूहों में निर्माण एवं प्रदर्शन।

- समूहों द्वारा अब तक उपलब्ध कराई गई ऑनलाइन सामग्री का अध्ययन एवं समीक्षा लेखन।


 दिवस 4 : मंगलवार, 17 नवम्बर 2026

विषय : एआई तकनीक, कृदन्त प्रत्यय एवं सामूहिक शिक्षण प्रदर्शन

मुख्य लक्ष्य : एआई आधारित शिक्षण सामग्री निर्माण एवं सभी 30 प्रशिक्षुओं की शिक्षण दक्षता का परीक्षण।

समय         सत्र एवं विषयवस्तु                                                                                                                         प्रशिक्षक       

9:00–10:30  संस्कृत संभाषण (भाग 4) – क्त्वा, तुमुन् एवं ल्यप् प्रत्ययों के प्रयोग से विस्तृत वाक्य एवं लघुकथा निर्माण                                  राम             

10:45–12:15 नीतिशतकम् – अर्थपद्धति, दुर्जनपद्धति एवं सुजनपद्धति के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, भावार्थ एवं सस्वर वाचन                                    श्याम           

1:15–2:45   एआई एवं ओपन रिसोर्सेज – ChatGPT से पाठ योजना, प्रश्न बैंक, योग्यता आधारित प्रश्न एवं डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करना                      मोहन            

3:00–5:30   सामूहिक माइक्रो टीचिंग (शिक्षण प्रदर्शन) – प्रत्येक प्रशिक्षु द्वारा 15 मिनट का शिक्षण, तत्पश्चात् विशेषज्ञों द्वारा प्रतिक्रिया एवं सुझाव चारों प्रशिक्षक 


चतुर्थ दिवस की विशेष गतिविधियाँ :

1. 30 प्रशिक्षुओं को चार समूहों में विभाजित किया जाएगा।

2. प्रत्येक समूह का संचालन एक प्रशिक्षक करेगा।

3. प्रत्येक प्रशिक्षु अपनी विद्यालयीय संस्कृत पाठ्यपुस्तक के किसी एक पाठ अथवा विषय का चयन करके 15 मिनट तक पढ़ाएगा।

4. प्रशिक्षक शिक्षण कौशल, विषय की स्पष्टता, संस्कृत भाषा के प्रयोग, शिक्षण विधि एवं विद्यार्थियों की सहभागिता के आधार पर मूल्यांकन करेंगे।


माइक्रो टीचिंग का समूह विभाजन

समूह   प्रशिक्षक   प्रशिक्षु संख्या शिक्षण समय          

समूह-1 राम         8                120 मिनट            

समूह-2 श्याम       8                120 मिनट            

समूह-3 मोहन        7                105 मिनट            

समूह-4 सुरेश       7                105 मिनट            

योग    4 प्रशिक्षक 30               प्रत्येक को 15 मिनट 

ध्यान देने योग्य: चौथे दिन का माइक्रो टीचिंग सत्र सामान्य 90 मिनट के स्थान पर 150 मिनट का सत्र होगा। सभी 30 शिक्षकों को 15-15 मिनट देने के लिए यह समय आवश्यक है।


 दिवस 5 : बुधवार, 18 नवम्बर 2026

विषय : आधुनिक मूल्यांकन एवं शिक्षण दक्षता का परीक्षण

मुख्य लक्ष्य : प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान, शिक्षण कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता का मूल्यांकन।


समय         सत्र एवं विषयवस्तु                                                                                                                                  प्रशिक्षक                

9:00–10:30  संस्कृत संभाषण (भाग 5) – पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र निर्माण एवं डिजिटल इंडिया जैसे समसामयिक विषयों पर संस्कृत में संभाषण, भाषण एवं वाद-विवाद         राम                      

10:45–12:15 ग्रन्थावृत्ति एवं उच्चारण – ग्रन्थों के पारंपरिक पारायण की वैज्ञानिक विधि, अर्थ सहित कंठस्थीकरण एवं विद्यार्थियों को श्लोक याद कराने की विधि        श्याम                    

1:15–2:45   नवीन मूल्यांकन प्रणाली – Google Forms, Kahoot, ऑनलाइन टेस्ट, क्विज एवं बहुविकल्पीय प्रश्नपत्र का निर्माण                                            मोहन                     

3:00–4:30   समूह समीक्षा एवं शिक्षण प्रतिपुष्टि – छह समूहों द्वारा ऑनलाइन व्याख्यान/अध्ययन सामग्री की समीक्षा प्रस्तुति तथा प्रशिक्षण के अनुभवों का आदान-प्रदान सुरेश एवं अन्य प्रशिक्षक 

4:30–5:00   सायंकालीन जलपान                                                                                                                                     —                        

5:00–6:00   अंतिम परीक्षा – लिखित परीक्षा, व्याकरण, ग्रन्थावृत्ति, शिक्षण विधि एवं डिजिटल दक्षता का मूल्यांकन                                                   चारों प्रशिक्षक          

6:00–6:30   समापन सत्र – प्रशिक्षण प्रतिवेदन, प्रशिक्षु द्वारा सारांश प्रस्तुति, प्रमाणपत्र वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन                                            संस्थान                  


पंचम दिवस की विशेष गतिविधियाँ :

- प्रत्येक समूह को अधिकतम 10 मिनट का समय देकर अपनी समीक्षा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।

- समीक्षा में अध्ययन सामग्री की उपयोगिता, संस्कृत शिक्षण में उसकी प्रासंगिकता एवं विद्यालय स्तर पर उसके व्यावहारिक उपयोग को सम्मिलित किया जाएगा।

- सभी प्रशिक्षुओं की अंतिम परीक्षा आयोजित की जाएगी।

- समापन सत्र में एक प्रशिक्षु शिक्षक पूरे पाँच दिवसीय प्रशिक्षण का सारांश प्रस्तुत करेगा।


4. चारों प्रशिक्षकों को विषयवार कार्य आवंटन

प्रशिक्षण में विषयों की निरंतरता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए चारों प्रशिक्षकों का कार्य निम्नानुसार निर्धारित किया जा सकता है।

प्रशिक्षक आवंटित प्रमुख विषय                       उत्तरदायित्व                                                                       

राम       संस्कृत संभाषण एवं भाषा कौशल             पाँचों दिनों में संभाषण प्रशिक्षण, संवाद निर्माण, संस्कृत भाषण एवं विशेष व्याख्यान 

श्याम     ग्रन्थावृत्ति, व्याकरण एवं शुद्ध उच्चारण लघुसिद्धान्तकौमुदी, महेश्वर सूत्र, सन्धि, नीतिशतकम् एवं पारायण                     

मोहन      डिजिटल साक्षरता, एडटेक एवं एआई           यूनिकोड, डिजिटल टूल्स, एआई, ऑनलाइन मूल्यांकन एवं ई-कंटेंट निर्माण                  

सुरेश     पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण एवं नवाचार     आगमन-निगमन विधि, रोल-प्ले, खेल आधारित शिक्षण, पाठ योजना एवं माइक्रो टीचिंग         

इस व्यवस्था में चारों प्रशिक्षक अपने-अपने विषय के विशेषज्ञ के रूप में पूरे प्रशिक्षण में निरंतरता बनाए रख सकेंगे। चतुर्थ दिवस को सभी चारों प्रशिक्षक अलग-अलग समूहों का मूल्यांकन करेंगे।


5. छह समूहों का गठन एवं समीक्षा कार्य

30 प्रशिक्षुओं को छह समूहों में पाँच-पाँच सदस्यों के अनुसार विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह को एक विषय आवंटित करके संबंधित ऑनलाइन व्याख्यान अथवा अध्ययन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।


समूह   विषय                                     समीक्षा में सम्मिलित किए जाने वाले बिन्दु                         

समूह-1 भारतीय ज्ञान परम्परा                     संस्कृत ग्रन्थों में निहित ज्ञान एवं विद्यालयी शिक्षा में उपयोग   

समूह-2 संस्कृत एवं आधुनिक ज्ञान परम्परा         भारतीय ज्ञान परम्परा का आधुनिक शिक्षा से संबंध                    

समूह-3 संस्कृत में रोजगार के अवसर               शिक्षण, अनुवाद, कम्प्यूटेशनल संस्कृत, प्रकाशन आदि                 

समूह-4 संस्कृत में उच्च शिक्षा                  शास्त्री, आचार्य, शोध, विश्वविद्यालय एवं अन्य उच्च शिक्षा के अवसर 

समूह-5 विद्यार्थियों के लिए सरकारी योजनाएँ      छात्रवृत्ति, संस्कृत अध्ययन प्रोत्साहन एवं अन्य शैक्षणिक योजनाएँ  

समूह-6 संस्कृत शिक्षण में डिजिटल एवं एआई संसाधन डिजिटल सामग्री, ऑनलाइन अध्ययन एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग           

समीक्षा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया :

1. प्रत्येक समूह को संबंधित विषय की ऑनलाइन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।

2. समूह के सभी पाँच सदस्य सामग्री का अध्ययन करेंगे।

3. समूह सामूहिक रूप से लगभग 2–3 पृष्ठ की लिखित समीक्षा तैयार करेगा।

4. समीक्षा में विषय का सार, प्रमुख निष्कर्ष, उपयोगिता एवं माध्यमिक स्तर पर उसके अनुप्रयोग को सम्मिलित किया जाएगा।

5. पाँचवें दिन प्रत्येक समूह अपनी समीक्षा प्रस्तुत करेगा।


6. प्रशिक्षु शिक्षकों की सहभागिता एवं मूल्यांकन


प्रशिक्षण को सहभागितापूर्ण बनाने के लिए निम्नलिखित व्यवस्था प्रस्तावित है।


क्र.सं. गतिविधि                                                                  अवधि / आवृत्ति                                          

1       प्रत्येक सत्र के अंत में पाठ का सारांश                                   5 मिनट प्रति सत्र                                       

2       प्रशिक्षु द्वारा विद्यालयीय पाठ्यवस्तु का शिक्षण                         प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं पंचम दिवस में एक-एक प्रशिक्षु 

3       भारतीय ज्ञान परम्परा, रोजगार एवं उच्च शिक्षा/सरकारी योजनाओं पर व्याख्यान तीन विशेष व्याख्यान                                     

4       समूह अध्ययन एवं लिखित समीक्षा                                            छह समूह                                                 

5       सभी प्रशिक्षुओं का शिक्षण प्रदर्शन                                       चतुर्थ दिवस, 15 मिनट प्रति प्रशिक्षु                    

6       अंतिम लिखित एवं व्यावहारिक परीक्षा                                       पंचम दिवस                                               


7. आवश्यक व्यवस्थाएँ

प्रशिक्षण के सुचारु संचालन के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएँ भी की जाएगी।


(क) आवास एवं भोजन

- 30 प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए संस्थान के उपलब्ध अतिथि कक्षों में आवास की व्यवस्था।

- प्रतिदिन प्रातः जलपान, दोपहर का भोजन एवं सायंकालीन जलपान।

- प्रशिक्षणार्थियों को अध्ययन सामग्री, नोटबुक एवं आवश्यक लेखन सामग्री उपलब्ध कराना।


(ख) डिजिटल एवं शिक्षण संसाधन

- प्रशिक्षण कक्ष में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, इंटरनेट एवं ध्वनि व्यवस्था।

- प्रशिक्षुओं को मोबाइल अथवा लैपटॉप के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर।

- ऑनलाइन अध्ययन सामग्री एवं व्याख्यान के लिंक साझा करने के लिए एक WhatsApp समूह।

- माइक्रो टीचिंग के लिए अलग-अलग कक्षों की व्यवस्था।


(ग) प्रशिक्षण अभिलेख

- प्रतिदिन उपस्थिति पंजिका।

- प्रत्येक प्रशिक्षु के शिक्षण प्रदर्शन का मूल्यांकन प्रपत्र।

- छह समूहों की लिखित समीक्षा।

- अंतिम परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएँ एवं मूल्यांकन अभिलेख।

- प्रशिक्षण के अंत में प्रमाणपत्र।


1\. उद्घाटन दिवस: उद्घाटन कार्यक्रम प्रथम मुख्य सत्र 9:00 से 10:30 बजे तक पूरा 90 मिनट चलेगा। इस दिन जलपान 8:00 से 8:30 बजे तक रखा जा सकता है।

2\. प्रतिदिन का सारांश: प्रत्येक 90 मिनट के सत्र के अंतिम पाँच मिनट सारांश प्रस्तुति के लिए आरक्षित रहें। यह समय सत्र की कुल अवधि में ही शामिल रहेगा।

3\. प्रतिदिन प्रशिक्षु का शिक्षण: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय दिवस तथा पंचम दिवस में चतुर्थ सत्र के भीतर एक प्रशिक्षु को 15 मिनट पढ़ाने का अवसर दिया जाए। इससे प्रतिदिन सहकर्मी शिक्षण का अभ्यास भी होगा। चौथे दिन सभी 30 प्रशिक्षुओं का शिक्षण प्रदर्शन होगा।

4\. विशेष व्याख्यान: तीन विशेष व्याख्यानों को सामान्य चार सत्रों से अतिरिक्त पाँचवें सत्र के रूप में रखा जाए। इनके लिए संबंधित विषय विशेषज्ञ को आमंत्रित किया जा सकता है। 

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