प्रशिक्षण का शीर्षक : माध्यमिक संस्कृत शिक्षक : परम्परा एवं नवाचार का समन्वय
प्रशिक्षण स्थल : उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, नया हैदराबाद, लखनऊ
प्रशिक्षणार्थियों की संख्या : 30 माध्यमिक संस्कृत शिक्षक (लखनऊ से बाहर के जनपदों से)
प्रशिक्षक : राम, श्याम, मोहन एवं सुरेश
1. प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं कार्यविधि
प्रशिक्षण को केवल व्याख्यान आधारित न रखते हुए इसमें सैद्धान्तिक ज्ञान, व्यावहारिक अभ्यास, सहकर्मी शिक्षण डिजिटल कौशल, ग्रन्थावृत्ति, समूह-अध्ययन तथा मूल्यांकन का समन्वय रखा जाना प्रस्तावित है।
प्रशिक्षण के प्रमुख घटक निम्नवत् होंगे—
1. प्रतिदिन चार मुख्य शिक्षण सत्र होंगे। प्रत्येक सत्र 90 मिनट का होगा।
2. प्रत्येक शिक्षण सत्र के अंतिम 5 मिनट में एक प्रशिक्षु शिक्षक उस सत्र में पढ़ाई गई विषयवस्तु का सारांश प्रस्तुत करेगा।
3. भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत में रोजगार के अवसर, संस्कृत में उच्च शिक्षा तथा विद्यार्थियों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं पर तीन अलग-अलग दिनों में विशेष व्याख्यान आयोजित होंगे।
4. 30 प्रशिक्षुओं के 5-5 सदस्यों वाले कुल 6 समूह बनाए जाएंगे। प्रत्येक समूह को ऑनलाइन व्याख्यान अथवा अध्ययन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा। समूह उस सामग्री का अध्ययन करके लिखित समीक्षा प्रस्तुत करेंगे।
5. चतुर्थ दिवस पर प्रशिक्षु शिक्षकों को 15-15 मिनट का शिक्षण प्रदर्शन करना होगा।
7. पंचम दिवस पर प्रशिक्षणार्थियों की लिखित एवं व्यावहारिक परीक्षा आयोजित की जाएगी।
8. उद्घाटन एवं समापन के अवसर पर भी एक-एक प्रशिक्षु शिक्षक द्वारा प्रशिक्षण का सारांश प्रस्तुत किया जाएगा।
समय-संबंधी प्रस्ताव: चार मुख्य सत्रों के अतिरिक्त तीन दिनों में एक-एक विशेष व्याख्यान सत्र रखा गया है। इस प्रकार प्रतिदिन चार से पाँच शिक्षण सत्र होंगे। उद्घाटन एवं समापन को पृथक् औपचारिक कार्यक्रम के रूप में रखा गया है।
2. प्रतिदिन का निर्धारित समय
सभी दिनों में भोजन एवं जलपान की व्यवस्था निम्नानुसार रहेगी।
गतिविधि समय अवधि
प्रातःकालीन जलपान 8:15–8:45 बजे 30 मिनट
प्रथम सत्र 9:00–10:30 बजे 90 मिनट
मध्यावकाश 10:30–10:45 बजे 15 मिनट
द्वितीय सत्र 10:45–12:15 बजे 90 मिनट
दोपहर का भोजन 12:15–1:15 बजे 15 मिनट
तृतीय सत्र 1:15–2:45 बजे 90 मिनट
मध्यावकाश 2:45–3:00 बजे 15 मिनट
चतुर्थ सत्र 3:00–4:30 बजे 90 मिनट
सायंकालीन जलपान 4:30–5:00 बजे 15 मिनट
विशेष व्याख्यान (निर्धारित दिवसों में) 5:00–6:00 बजे 60 मिनट
विशेष व्याख्यान के दिन कुल पाँच सत्र होंगे। चौथे दिन सामूहिक शिक्षण प्रदर्शन के लिए अतिरिक्त समय तथा पाँचवें दिन परीक्षा एवं समापन के लिए अलग समय रखा जाएगा।
3. दिवसवार विस्तृत समय-सारिणी
दिवस 1 : शनिवार, 14 नवम्बर 2026
मुख्य विषय : डिजिटल साक्षरता, संस्कृत संभाषण एवं संज्ञा प्रकरण
उद्देश्य: प्रशिक्षु शिक्षक स्वयं संस्कृत टाइपिंग, डिजिटल सामग्री निर्माण, शुद्ध उच्चारण एवं संस्कृत संभाषण का अभ्यास कर सकें।
समय सत्र एवं विषयवस्तु
9:00–:05 उद्घाटन हेतु स्थान ग्रहण एवं स्वागत
9:05–9:30 उद्घाटन सत्र – दीप प्रज्वलन, सरस्वती वन्दना, अतिथि उद्बोधन एवं प्रशिक्षण की रूपरेखा
9:30–9:40 एक प्रशिक्षु द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्यों एवं उद्घाटन सत्र का सारांश प्रशिक्षु
9:40–10:40 संस्कृत संभाषण (भाग 1) – परिचय, अभिवादन, दैनिक शिष्टाचार एवं लट्लकार के क्रियापदों से वाक्य निर्माण एवं परस्पर संवाद (जोड़ों में संवाद अभ्यास)
10:45–12:15 लघुसिद्धान्तकौमुदी ग्रन्थावृत्ति एवं शुद्ध उच्चारण : महेश्वर सूत्र, प्रत्याहार, संधि प्रकरण के प्रमुख सूत्रों का उच्चारण अभ्यास (परस्पर उच्चारण अशुद्धियों का सुधार)
12:15–1:15 भोजनावकाश
1:15–2:45 डिजिटल संस्कृत प्रयोगशाला – देवनागरी इनपुट, यूनिकोड फॉन्ट, मोबाइल एवं लैपटॉप पर संस्कृत टाइपिंग, वॉयस टाइपिंग एवं डिजिटल दस्तावेज निर्माण
3:00–4:30 पाठ्यपुस्तक शिक्षण अभ्यास – निर्धारित पाठ्यपुस्तक के पाठों को डिजिटल सामग्री PPT / चार्ट से जोड़ना एवं शिक्षण योजना तैयार करना । छह समूहों का गठन तथा प्रत्येक समूह को ऑनलाइन अध्ययन हेतु विषय एवं लिंक आवंटित करना।
4:30–5:00 सायंकालीन जलपान —
5:00–6:00 विशेष व्याख्यान – भारतीय ज्ञान परम्परा – संस्कृत ग्रन्थों में निहित ज्ञान, आधुनिक शिक्षा से संबंध एवं माध्यमिक कक्षा में उसका प्रयोग
6:00–6:15 सभी प्रशिक्षु द्वारा व्याख्यान का सारांश लेखन एवं एक प्रशिक्षु द्वारा सार कथन (45 मिनट व्याख्यान + 15 मिनट प्रशिक्षु द्वारा प्रथम दिवस का सार कथन)
दिवस 1 का व्यावहारिक परिणाम :
प्रत्येक प्रशिक्षु अपने मोबाइल/लैपटॉप पर संस्कृत टाइपिंग कर सकेगा।
प्रत्येक प्रशिक्षु संस्कृत में अपना परिचय एवं दैनिक संवाद प्रस्तुत करेगा।
महेश्वर सूत्रों, संज्ञा प्रकरण एवं संधि के सूत्रों का शुद्ध उच्चारण कर सकेगा।
प्रत्येक प्रशिक्षु एक डिजिटल संस्कृत शिक्षण सामग्री तैयार करेगा।
छह समूहों का गठन करके प्रत्येक को अध्ययन सामग्री एवं ऑनलाइन व्याख्यान का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।
दिवस 2 : रविवार, 15 नवम्बर 2026
विषय : संभाषणात्मक कौशल, व्यावहारिक व्याकरण एवं संस्कृत साहित्य का गतिविधि आधारित शिक्षण।
उद्देश्य: साहित्य एवं व्याकरण को माध्यमिक स्तर पर गतिविधि एवं अभिनय के माध्यम से रोचक, सरल एवं प्रभावी ढंग से पढ़ाने का अभ्यास कराना।
समय सत्र एवं विषयवस्तु
9:00–10:30 संस्कृत संभाषण (भाग 2) – कारक, विभक्तियाँ एवं दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं के संस्कृत नामों का वाक्यों में प्रयोग
10:45–12:15 ग्रन्थावृत्ति प्रयोगशाला – नीतिशतकम्, रघुवंशम् एवं किरातार्जुनीयम् के चयनित श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, छन्दोबद्ध, लययुक्त एवं सस्वर वाचन तथा शिक्षण विधि
1:15–2:45 आधुनिक शिक्षण विधियाँ – आगमन-निगमन विधि, उदाहरणों से नियम की खोज, कारक एवं विभक्ति का सरल शिक्षण एवं गतिविधियाँ (प्रशिक्षुओं द्वारा स्वयं उदाहरण तैयार करना एवं लघु शिक्षण प्रदर्शन)
3:00–4:30 पाठ्यपुस्तक शिक्षण अभ्यास – गद्य एवं पद्य पाठों का रोल-प्ले, अभिनय, संवाद एवं नाट्य विधि से शिक्षण
4:30–5:00 सायंकालीन जलपान
5:00–6:00 विशेष व्याख्यान – संस्कृत में रोजगार के अवसर ।
6:00–6:15 सभी प्रशिक्षु द्वारा व्याख्यान का सारांश लेखन एवं एक प्रशिक्षु द्वारा सार कथन (45 मिनट व्याख्यान + 15 मिनट प्रशिक्षु द्वारा प्रथम दिवस का सार कथन)
द्वितीय दिवस की विशेष गतिविधियाँ :
- प्रत्येक मुख्य सत्र के अंत में प्रशिक्षु द्वारा पाँच मिनट में पाठ्यवस्तु का सारांश कथन।
- समूहों को रोजगार के अवसर संबंधी व्याख्यान एवं अध्ययन सामग्री खोजकर आलेख निर्माण का निर्देश।
दिवस 3 : सोमवार, 16 नवम्बर 2026
विषय : क्रीड़ा आधारित शिक्षण, अच्-सन्धि एवं डिजिटल शिक्षण सामग्री
मुख्य लक्ष्य : संस्कृत व्याकरण को खेल, प्रतियोगिता एवं सहभागिता के माध्यम से पढ़ाने की क्षमता विकसित करना।
समय सत्र एवं विषयवस्तु प्रशिक्षक
9:00–10:30 संस्कृत संभाषण (भाग 3) – क्तवतु प्रत्यय, लृट्लकार, भूतकाल एवं भविष्यत्काल में संवाद
10:45–12:15 लघुसिद्धान्तकौमुदी : अच्-सन्धि प्रकरण – यण्, गुण, वृद्धि आदि सूत्रों का अभ्यास । पठित श्लोकों एवं वाक्यों में सन्धि की खोजने का निर्देश देना।
1:15–2:45 क्रीड़ा आधारित शिक्षण – शब्द पहेली, श्लोकान्त्याक्षरी, धातुरूप रेस एवं व्याकरण आधारित खेलों का निर्माण (प्रशिक्षुओं द्वारा स्वयं खेल तैयार करना एवं खेल संचालित करना)
3:00–4:30 पाठ्यपुस्तक शिक्षण प्रयोगशाला – प्रत्येक प्रशिक्षु द्वारा कृत् प्रत्यय पर गतिविधि पत्रक, वर्कशीट एवं शिक्षण सामग्री तैयार करना
4:30–5:00 सायंकालीन जलपान
5:00–6:00 विशेष व्याख्यान – संस्कृत में उच्च शिक्षा एवं विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाएँ, छात्रवृत्तियाँ एवं शैक्षणिक अवसर
6:00–6:15 सभी प्रशिक्षु द्वारा व्याख्यान का सारांश लेखन एवं एक प्रशिक्षु द्वारा सार कथन (45 मिनट व्याख्यान + 15 मिनट प्रशिक्षु द्वारा प्रथम दिवस का सार कथन)
दिवस 3 का व्यावहारिक परिणाम :
प्रत्येक प्रशिक्षु कम से कम एक संस्कृत शिक्षण खेल तैयार करेगा।
प्रत्येक प्रशिक्षु एक व्याकरण आधारित वर्कशीट बनाएगा।
प्रशिक्षु कठिन सन्धि प्रकरण को खेल के माध्यम से पढ़ाने का अभ्यास करेंगे।
सरकारी योजनाओं एवं उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी देने वाला एक विद्यालय उपयोगी सूचना-पत्र तैयार करेंगे।
दिवस 4 : मंगलवार, 17 नवम्बर 2026
विषय : ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज, एआई तकनीक, कृदन्त प्रत्यय एवं सामूहिक शिक्षण प्रदर्शन
उद्देश्य: एआई और डिजिटल संसाधनों/ चार्ट आधारित शिक्षण सामग्री तैयार करना तथा प्रत्येक प्रशिक्षु की वास्तविक शिक्षण क्षमता का परीक्षण करना।
समय सत्र एवं विषयवस्तु
9:00–10:30 संस्कृत संभाषण (भाग 4) – क्त्वा, तुमुन् एवं ल्यप् प्रत्ययों के प्रयोग से विस्तृत वाक्य एवं लघुकथा निर्माण
10:45–12:15 साहित्य शिक्षण एवं चार्ट निर्माण कार्यशाला – नीतिशतकम्, रघुवंशम् एवं किरातार्जुनीयम् की सूक्तियों का चयन; आकर्षक शैक्षणिक चार्ट तैयार करना
1:15–2:45 एआई एवं ओपन रिसोर्सेज – ChatGPT से पाठ योजना, पाठ्यपुस्तक आधारित प्रश्न बैंक निर्माण, चित्र आधारित शिक्षण सामग्री, अन्य ओपन रिसोर्सेज का उपयोग एवं डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करना ।
3:00–5:30 सामूहिक माइक्रो टीचिंग (शिक्षण प्रदर्शन) – एक कक्ष में 10 प्रशिक्षु द्वारा अपनी विद्यालयीय पाठ्यपुस्तक के किसी एक विषय पर 15 मिनट का शिक्षण, तत्पश्चात् विशेषज्ञों द्वारा प्रतिक्रिया एवं सुझाव
5:30–5:45 एक प्रशिक्षु द्वारा दिनभर की गतिविधि का सार कथन
दिवस 4 का व्यावहारिक परिणाम :
प्रत्येक प्रशिक्षु एक पाठ योजना तैयार करेगा।
प्रशिक्षु अपनी पाठ्यपुस्तक के एक अध्याय पर डिजिटल/ हस्तनिर्मित सामग्री बनाएगा।
20 प्रशिक्षु 15-15 मिनट का शिक्षण प्रदर्शन करेंगे।
प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षण की भाषा, विषयवस्तु, प्रस्तुतीकरण, विद्यार्थी सहभागिता एवं शिक्षण सामग्री के उपयोग पर सुझाव दिए जाएँगे।
माइक्रो टीचिंग के लिए समय गणना: 20 प्रशिक्षु × 15 मिनट = 300 मिनट का कुल व्यक्तिगत शिक्षण समय। 10 अन्य प्रशिक्षुओं के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग कक्षों का उपयोग किया जा सकता है।
दिवस 5 : बुधवार, 18 नवम्बर 2026
विषय : आधुनिक मूल्यांकन, शिक्षण दक्षता का परीक्षण एवं प्रशिक्षण का समापन
उद्देश्य: प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान एवं कौशल का मूल्यांकन तथा विद्यालय में उसके प्रयोग की कार्ययोजना तैयार करना।
समय सत्र एवं विषयवस्तु
9:00–10:30 संस्कृत संभाषण (भाग 5) – पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र निर्माण एवं डिजिटल इंडिया जैसे समसामयिक विषयों पर संस्कृत में नाटक (रोल प्ले), भाषण एवं वाद-विवाद
10:45–12:15 छन्द ज्ञान, उच्चारण एवं स्मरण – छन्द परिचय तथा विद्यार्थियों को श्लोक याद कराने की विधि
1:15–2:45 नवीन मूल्यांकन प्रणाली – Google Forms, Kahoot के माध्यम से ऑनलाइन टेस्ट, MCQ बहुविकल्पीय प्रश्नपत्र का निर्माण, शब्दशिल्पी, श्लोकसंधानम् गेमिंग ऐप से परिचय एवं गेम आधारित मूल्यांकन तैयार करना ।
3:00–4:00 समूह समीक्षा एवं विद्यालयी कार्ययोजना – छह समूहों द्वारा ऑनलाइन व्याख्यान/अध्ययन सामग्री की समीक्षा प्रस्तुति, चार्ट प्रदर्शन एवं विद्यालय में लागू करने की योजना । (प्रत्येक समूह 10 मिनट)
4:00–4:20 सायंकालीन जलपान
4:30–5:00 अंतिम परीक्षा – लिखित परीक्षा, व्याकरण, ग्रन्थावृत्ति, शिक्षण विधि एवं डिजिटल दक्षता का मूल्यांकन
5:00–5:45 समापन सत्र – प्रशिक्षु द्वारा प्रशिक्षण का प्रतिवेदन, प्रमाणपत्र वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन ।
दिवस 5 का व्यावहारिक परिणाम :
- प्रत्येक प्रशिक्षु एक ऑनलाइन टेस्ट तैयार करेगा।
- समीक्षा में अध्ययन सामग्री की उपयोगिता, संस्कृत शिक्षण में उसकी प्रासंगिकता एवं विद्यालय स्तर पर उसके व्यावहारिक उपयोग को सम्मिलित किया जाएगा।
- सभी प्रशिक्षुओं की अंतिम परीक्षा आयोजित की जाएगी।
- समापन सत्र में एक प्रशिक्षु शिक्षक पूरे पाँच दिवसीय प्रशिक्षण का सारांश प्रस्तुत करेगा।
4. चारों प्रशिक्षकों को विषयवार कार्य आवंटन
प्रशिक्षण में विषयों की निरंतरता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए चारों प्रशिक्षकों का कार्य निम्नानुसार निर्धारित किया जा सकता है।
प्रशिक्षक आवंटित प्रमुख विषय उत्तरदायित्व
राम संस्कृत संभाषण एवं भाषा कौशल पाँचों दिनों में संभाषण प्रशिक्षण, संवाद निर्माण, संस्कृत भाषण एवं विशेष व्याख्यान
श्याम ग्रन्थावृत्ति, व्याकरण एवं शुद्ध उच्चारण लघुसिद्धान्तकौमुदी, महेश्वर सूत्र, सन्धि, नीतिशतकम् एवं पारायण
मोहन डिजिटल साक्षरता, एडटेक एवं एआई यूनिकोड, डिजिटल टूल्स, एआई, ऑनलाइन मूल्यांकन एवं ई-कंटेंट निर्माण
सुरेश पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण एवं नवाचार आगमन-निगमन विधि, रोल-प्ले, खेल आधारित शिक्षण, पाठ योजना एवं माइक्रो टीचिंग
इस व्यवस्था में चारों प्रशिक्षक अपने-अपने विषय के विशेषज्ञ के रूप में पूरे प्रशिक्षण में निरंतरता बनाए रख सकेंगे। चतुर्थ दिवस को सभी चारों प्रशिक्षक अलग-अलग समूहों का मूल्यांकन करेंगे।
5. छह समूहों का गठन एवं समीक्षा कार्य
30 प्रशिक्षुओं को छह समूहों में पाँच-पाँच सदस्यों के अनुसार विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह को एक विषय आवंटित करके संबंधित ऑनलाइन व्याख्यान अथवा अध्ययन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।
समूह विषय समीक्षा में सम्मिलित किए जाने वाले बिन्दु
समूह-1 भारतीय ज्ञान परम्परा संस्कृत ग्रन्थों में निहित ज्ञान एवं विद्यालयी शिक्षा में उपयोग
समूह-2 संस्कृत एवं आधुनिक ज्ञान परम्परा भारतीय ज्ञान परम्परा का आधुनिक शिक्षा से संबंध
समूह-3 संस्कृत में रोजगार के अवसर शिक्षण, अनुवाद, कम्प्यूटेशनल संस्कृत, प्रकाशन आदि
समूह-4 संस्कृत में उच्च शिक्षा शास्त्री, आचार्य, शोध, विश्वविद्यालय एवं अन्य उच्च शिक्षा के अवसर
समूह-5 विद्यार्थियों के लिए सरकारी योजनाएँ छात्रवृत्ति, संस्कृत अध्ययन प्रोत्साहन एवं अन्य शैक्षणिक योजनाएँ
समूह-6 संस्कृत शिक्षण में डिजिटल एवं एआई संसाधन डिजिटल सामग्री, ऑनलाइन अध्ययन एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग
समीक्षा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया :
1. प्रत्येक समूह को संबंधित विषय की ऑनलाइन सामग्री का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।
2. समूह के सभी पाँच सदस्य सामग्री का अध्ययन करेंगे।
3. समूह सामूहिक रूप से लगभग 2–3 पृष्ठ की लिखित समीक्षा तैयार करेगा।
4. समीक्षा में विषय का सार, प्रमुख निष्कर्ष, उपयोगिता एवं माध्यमिक स्तर पर उसके अनुप्रयोग को सम्मिलित किया जाएगा।
5. पाँचवें दिन प्रत्येक समूह अपनी समीक्षा प्रस्तुत करेगा।
6. प्रशिक्षु शिक्षकों की सहभागिता एवं मूल्यांकन
प्रशिक्षण को सहभागितापूर्ण बनाने के लिए निम्नलिखित व्यवस्था प्रस्तावित है।
क्र.सं. गतिविधि अवधि / आवृत्ति
1 प्रत्येक सत्र के अंत में पाठ का सारांश 5 मिनट प्रति सत्र
2 प्रशिक्षु द्वारा विद्यालयीय पाठ्यवस्तु का शिक्षण प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं पंचम दिवस में एक-एक प्रशिक्षु
3 भारतीय ज्ञान परम्परा, रोजगार एवं उच्च शिक्षा/सरकारी योजनाओं पर व्याख्यान तीन विशेष व्याख्यान
4 समूह अध्ययन एवं लिखित समीक्षा छह समूह
5 सभी प्रशिक्षुओं का शिक्षण प्रदर्शन चतुर्थ दिवस, 15 मिनट प्रति प्रशिक्षु
6 अंतिम लिखित एवं व्यावहारिक परीक्षा पंचम दिवस
7. आवश्यक व्यवस्थाएँ
प्रशिक्षण के सुचारु संचालन के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएँ भी की जाएगी।
(क) आवास एवं भोजन
- 30 प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए संस्थान के उपलब्ध अतिथि कक्षों में आवास की व्यवस्था।
- प्रतिदिन प्रातः जलपान, दोपहर का भोजन एवं सायंकालीन जलपान।
- प्रशिक्षणार्थियों को अध्ययन सामग्री, नोटबुक एवं आवश्यक लेखन सामग्री उपलब्ध कराना।
(ख) डिजिटल एवं शिक्षण संसाधन
- प्रशिक्षण कक्ष में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, इंटरनेट एवं ध्वनि व्यवस्था।
- प्रशिक्षुओं को मोबाइल अथवा लैपटॉप के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर।
- ऑनलाइन अध्ययन सामग्री एवं व्याख्यान के लिंक साझा करने के लिए एक WhatsApp समूह।
- माइक्रो टीचिंग के लिए अलग-अलग कक्षों की व्यवस्था।
(ग) प्रशिक्षण अभिलेख
- प्रतिदिन उपस्थिति पंजिका।
- प्रत्येक प्रशिक्षु के शिक्षण प्रदर्शन का मूल्यांकन प्रपत्र।
- छह समूहों की लिखित समीक्षा।
- अंतिम परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएँ एवं मूल्यांकन अभिलेख।
- प्रशिक्षण के अंत में प्रमाणपत्र।
1\. उद्घाटन दिवस: उद्घाटन कार्यक्रम प्रथम मुख्य सत्र 9:00 से 10:30 बजे तक पूरा 90 मिनट चलेगा। इस दिन जलपान 8:00 से 8:30 बजे तक रखा जा सकता है।
2\. प्रतिदिन का सारांश: प्रत्येक 90 मिनट के सत्र के अंतिम पाँच मिनट सारांश प्रस्तुति के लिए आरक्षित रहें। यह समय सत्र की कुल अवधि में ही शामिल रहेगा।
3\. प्रतिदिन प्रशिक्षु का शिक्षण: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय दिवस तथा पंचम दिवस में चतुर्थ सत्र के भीतर एक प्रशिक्षु को 15 मिनट पढ़ाने का अवसर दिया जाए। इससे प्रतिदिन सहकर्मी शिक्षण का अभ्यास भी होगा। चौथे दिन सभी 30 प्रशिक्षुओं का शिक्षण प्रदर्शन होगा।
4\. विशेष व्याख्यान: तीन विशेष व्याख्यानों को सामान्य चार सत्रों से अतिरिक्त पाँचवें सत्र के रूप में रखा जाए। इनके लिए संबंधित विषय विशेषज्ञ को आमंत्रित किया जा सकता है।










