सोमवार, 12 नवंबर 2018

संस्कृत बाल साहित्य

  स्वतंत्रता आंदोलन के समय पीढ़ी को राजनीतिक चेतना के लिए ही नहीं जगाया गया बल्कि साहित्य चेतना का भी उदय हुआ। यह वही दौर था जब संस्कृत में बाल साहित्य अपना आकार लेने लगा था। बच्चों तक संस्कृत शिक्षा पहुंचाने के लिए उनके योग्य साहित्य के सृजन पर ध्यान दिया गया। मैंने परिशीलनम् पत्रिका का बाल साहित्य विशेषांक प्रकाशित करने का उपक्रम शुरू करायाजो अभी प्रकाशनाधीन है। मैंने अपने यहां बाल पुस्तकालय का एक अलग से सेल गठित कियाजो अभी बहुत अधिक परवान नहीं चढ़ पाया। देश में अभी तक बच्चों के लिए एक भी संस्कृत पुस्तकालय नहीं हैजहाँ बच्चे अपने लायक संस्कृत की पुस्तकोंपत्रिकाओंदृश्य श्रव्य संसाधनों द्वारा ज्ञान में बृद्धि कर सकें। हमें बाल साहित्यकारों की समस्त रचनायें एकत्र प्राप्त हो सके। मैंने कुछेक छात्रों को संस्कृत बाल साहित्य पर शोध करने के लिए प्रेरित भी किया। आशा है आने वाले दिनों में इस दिशा में ठोस कदम उठाये जा सकेंगें।
संस्कृत क्षेत्र में बच्चों के लिए शैक्षिक सामग्री सृजन करने तथा कार्यक्रम संचालित करने वाले लोगों को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह पीढ़ियों को जगाने का काम हैजिसे तन्मयता से किया जा रहा है। हालाँकि अबतक किये अधिकांश काम व्यक्तिगत संस्थाओं और व्यक्तिगत रूचि के कारण हुए हैं। इन संस्थाओं के नाम आगे यहाँ दिये जायेंगें। बाल साहित्य प्रकाशन में सरकारी योगदान बहुत ही कम है। संस्कृत शिक्षा प्राप्त अभिभावकों तथा शिक्षकों के लिए बच्चों को समझने तथा उसके मनोविज्ञान,  विकासअधिकार, कल्पना,  संस्कार, अपराध तथा शोषण आदि विषयों को समझने के लिए साहित्य नहीं लिखा गया  है। बच्चों के लिए थोड़े बहुत कहानियाँ, कवितायें मिल जाती है। 
आधुनिक संस्कृत साहित्य के इतिहास में बाल साहित्य को लेकर बहुत अधिक सामग्री अभी तक नहीं उपलब्ध होती है। बच्चों के लिए वैज्ञानिक कथा लेखन तथा अन्य विधाओं मैं लेखन अभी शैशवावस्था में है। इधर कुछेक बाल साहित्य स्वतंत्र पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई है। बाल साहित्य लेखक के रूप में लेखक भी प्रकाश में आये हैं। अधिकांश लेखकों की रचनाओं में कुछेक बाल गीत मिल जाते हैं। जैसे हरिदत्त शर्मा की रचनाओं में। बच्चों के लिए मनमोहक कलेबर में पुस्तकें प्रकाशित हुई है परन्तु इसकी अधिक विक्री नहीं हो पाती। कारण इस प्रकार के पुस्तकों के प्रकाशन में अत्यधिक धन खर्च होता है, जिससे इसका मूल्य बढ़ जाता है। समाज की भाषा हिन्दी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषायें हैं। बचपन से संस्कृत माध्यम में शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था नहीं है अतः इसके खरीरदार भी नहीं होते।              जब से संस्कृत भाषा का आंदोलन शुरू हुआ तब से संस्कृत के प्रचारकों ने बच्चों को केंद्र में रखकर बाल साहित्य की रचनाएं आरंभ की। इसमें पंडित वासुदेव दिवेदी शास्त्री का अवदान बहुमूल्य है। बाल साहित्य को संस्कृत की मुख्यधारा में लाने का श्रेय पंडित वासुदेव द्विवेदी शास्त्री को जाता है। आपने न केवल प्रभूत बाल साहित्य की सर्जना की अपितु अनेक साहित्यकारों को इसके लिए प्रेरित भी किया। इनके द्वारा विरचित गीत  आज  हर विद्यालय के उत्सव में  बच्चों द्वारा गाया जाता है। आपने साहित्य की सभी विधाओं में बाल साहित्य की रचना की है। आपकी रचनाओं की सूची संलग्न है । आप द्वारा रचित वर्णमाला गीतावलि (हँसते खेलते संस्कृत) में पहले वर्णों से परिचय कराया गया है अनन्तर स्वर तथा व्यंजन वर्णों के गीत दिये गये हैं। इस गीत के आरम्भ में दो अक्षर वाला वर्ण पुनः तीन अक्षर वाला वर्ण है। क्रियाओं से परिचय कराने के लिए अकारदि क्रम से क्रिया पद दिये गये हैं। जैसे-
अ  अन्नम्         आ आम्रम्     इ इक्षुः      ई ईशः       उ उष्ट्रः        ऊ  उर्णा
अ अरविन्दम्    आ आगारः    इ इवारुः   ई ईशानी    उ उलूखम्    ऊ  ऊर्णायुः
अ अस्ति          आ आस्ते      इ इच्छति                  उ उदयति  
यहाँ प्रेरणार्थक क्रिया के गीत भी हैं।
क कारयति     ख खादयति   ग गूहयति   घ घ्रापयति

एक स्वर तथा व्यंजन वाले अनेक शब्द एवं क्रियायें, बारहखडी़ (स्वराक्षरी) के गीत ङभी दिये गये हैं। सबसे अंत में संयुक्ताक्षर एवं संख्यावाची संस्कृत शब्द की तालिका दी गयी है। इस प्रकार कोई बी शिशु संस्कृत माध्यम से खेल खेल में संस्कृत वर्णमाला सीख जाता है। इसके साथ ही वह दैनिक व्वहार में आन वाले शब्दों तथा क्रियाओं से भी परिचित हो जाता है। यूट्यूब पर संस्कृत वर्णमाला गीत की भरमार है।
 पंडित दिगंबर महापात्र ने पं. शास्त्री से प्रभावित होकर बाल साहित्य की रचना की। लखनऊ में डॉ. वीरभद्र मिश्र और लखीमपुर में आचार्य बाबूराम अवस्थी बाल साहित्य के सृजन में संलग्न हुए। आचार्य बाबूराम अवस्थी ने संस्कृत को समाज से जोड़ा। संस्कृत लोकगीतों का प्रणयन किया। बाल गीत लिखे। आज भी लखीमपुर में दशहरा मेले का आयोजन होता हैजिसमें संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। डॉ. वीरभद्र मिश्र का सम्पूर्ण कृतित्व महराजदीन पाण्डेय के सम्पादन में राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली से दो खंडों में प्रकाशित होकर आ चुका है। वीरभद्र रचनावली के प्रथम खंड में बाल रचनाओं का संकलन दिया गया है। वीरभद्र मिश्र संस्कृत के अनन्य साधक और प्रचारक थे। मैंने  #संस्कृतसर्जना ई-पत्रिका में इनका संस्मरण प्रकाशित किया था। आपने 1977 से 2000 ईस्वी तक सर्वगंधा नामक पत्रिका का प्रकाशन किया। आपके परिवार की भाषा संस्कृत है। रचनावली में उनके द्वारा लिखी गई कविताओं, काव्य, नाटक, गन्धवहः ( सर्वगंधा में प्रकाशित संपादकीय का संकलन) व्यंग चित्र और भद्रकोष आदि संकलित है। आप संपूर्ण जीवन संस्कृत को आधुनिक ज्ञान से पुष्ट करने का काम किया। आप प्रयोग वादी आचार्य थे। इसका दिग्दर्शन हमें इनकी रचनाओं से भी मिलता है। बाल कविता में उन्होंने नवीन विधान किया। आपने चल मम घोटक, दुग्धं पिव रे, चलति विडालः आदि लगभग 40 शिशु गीतों की भी रचना की। पत्रकारिता में भी उन्होंने नए मानदंड स्थापित किए। भद्रकोष में आज के प्रचलन में प्रयुक्त होने वाले शब्दों का संस्कृत शब्द दिया है। इसी प्रकार महाराष्ट्र में भि. वेलणकर का बालगीतम्, आन्ध्र प्रदेश में 1930 में जन्मे ओगेटि परीक्षित शर्मा का ललितगीतलहरी एवं परीक्षिन्नाटकचक्रम् प्रसिद्ध हुआ।
इच्छाराम द्विवेदी ने बाल गीतांजलिकेशव चंद्र सेन महान एकता पुस्तक में बच्चों के लिए शिशु कथा लिखी है। दिगंबर महापात्र की रङ्गरुचिरम् तथा ललितलवङ्गम् पुस्तक में शिशुओं के लिए बाल कविता लिखी है।
हरिदत्त शर्मा ने उत्कलिकाबालगीतालीगीतकन्दलिका मैं बच्चों के गाने लायक गीतों की रचना की है। अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कनीनिकामृद्विका में बाल गीत तथा कान्तारकथा में वन्यजीवों पर आधारित कहानियां लिखी है। जनार्दन हेगड़े,  विश्वासकेशवचन्द्र दाश,  हरेकृष्ण मेहर  आदि ने प्रभूत योगदान किया। 
संस्कृत के विकास के लिए आवश्यक है कि बाल विकास पर ध्यान दिया जाय। जब बच्चों के स्कूल में शीतावकाश हो जाता है तब बाल रचना कार्यशाला किये जाने की आवश्यकता है। मैंने देखा है कि बच्चे कितनी तन्मयता और उत्साह के साथ गीतकहानियाँपत्रलेखनअभिनय पूर्वक गीत गायनक्रीडा आदि को सीखते हैं। इस अवसर पर बच्चों को छोटी छोटी कविता, कहीनियाँ लिखने को प्रेरित किया जा सकता है। लिखी कविताओं को चित्रों से सजाया जा सकता है। इन चित्रित कविताओं के प्रकाशन में अधिक खर्च नहीं आएगा।  अस्तु।
जब भी बाल साहित्य की चर्चा होती है, बरबस पंचतंत्र की कथा याद आती है। विश्वास ने भी पंचतंत्रकथा पुस्तक लिखी है। बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के लिए नीति कथा प्रकाशित किये गये। संस्कृत के लगभग प्रत्येक महाकाव्य में बाल प्रसंग मिल जाता है । रामायण में भगवान श्री राम के बाल रूप की कथा, लव कुश का वर्णन तथा महाभारत में पांडवों कौरवों और अभिमन्यु का वर्णन मिलता है। इसी प्रकार परवर्ती कवि ने भी अपने साहित्य में छिटपुट रूप से बाल रूप का वर्णन किया है। रघुवंशम् में वर्णन आता है कि जब रघु अपने धायी की उंगली पकड़कर चलने लगे। प्रणाम करने की शिक्षा से नम्र होने लगे।
उवाच धात्र्या प्रथमोदितं वचो ययौ तदीयामवलम्ब्य चाङ्गुलिम्।
अभूच्च नम्रः प्रणिपातशिक्षया  पितुर्मुदं तेन ततान सोऽर्भकः ॥
 गोस्वामी तुलसीदास भी अपनी काव्य रचना आरंभ करते समय बंदऊँ बाल रुप सोई रामू लिखते हैं। बाल रूप, बाल स्वभाव किसे नहीं पसंद है? बीसवीं शताब्दी में संस्कृत भाषा में स्वतंत्र बाल साहित्य की रचना होने लगी। बाल कविता, बाल कथा, बाल नाटक, बाल गीत की पुस्तकें अब सचित्र उपलब्ध हैं।  कुछ साहित्यकारों ने हिंदी तथा अन्य भाषाओं में लिखित बाल साहित्य का संस्कृत में अनुवाद किया है। संस्कृत बाल साहित्य पर  ऑनलाइन भी प्रभूत सामग्री उपलब्ध है। इस आलेख में मैं संस्कृत बाल साहित्य पर अब तक किए गए कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करूँगा। साथ ही कुछ बाल कविता, बाल गीत आदि भी उपस्थित करूंगा।
अंतरजाल पर उपलब्ध बाल साहित्य
नोट- जिन शब्दों को अधोरेखांकित किया गया है, उस पर क्लिक करने से आप सम्बन्धित लिंक पर पहुँच जायेंगें।
वेदिकासंस्कृत रैम्स नाम से यूट्यूब पर एक चैनल है, जिसमें बच्चों के गीत उपलब्ध होते हैं। इसे लिंक पर जाकर सुना जा सकता है।
भार्गवीवर्धन ने भी यूट्यूब पर कुछ वीडियो पोस्ट किया है, जहां पर वह बच्चों से संस्कृत गीत गाती हुई दिख रही है।
संस्कृत बाल साहित्य को समर्पित ब्लॉग के लिंक पर जायें।
सम्पदानन्द मिश्र ने संस्कृत बाल साहित्य परिषद् नाम से संस्था गठित की। उनकी अभिरुचि बाल साहित्य पर अधिक है। आपने बाल साहित्य पर शनैः शनैः आदि कई रचनाएं की है, जो प्रकाशित है। आप बाल साहित्य लेखकों की कार्यशाला का भी आयोजन कर चुके हैं।  उनके वेबसाइट का लिंक पर जायें।
इस लिंक में बच्चों के लिए संस्कृत में कहानियां दी गई है। प्रतीत होता है की इन कविताओं को बच्चों ने ही लिखा है।
इस लिंक में संस्कृत के छोटे-छोटे वाक्य दिए गए हैं। इसी वेबसाइट के लिंक में आम बोलचाल में बार बार प्रयोग करने वाले शब्दों को दिया गया है।
गूगल ग्रुप पर संस्कृते लघु कथाः का लिंक का प्राप्त होता है। यहां 2-3 छोटी-छोटी कहानियां दी गई है। लेखक अभी कहानी लिखने का प्रयास कर रहा है।
चित्रकथा (कार्टून) में संस्कृत रामायण पढ़ने के लिए लिंक पर चटका लगाकर उसके साइट पर जायें।
प्रज्ञा जरे ने यूट्यूब पर बच्चों के लिए  वर्णमाला गीत है। वेदिका के नाम से भी वर्णमाला गीत है। यहीं पर पर शरीर के अवयव के गीत, बाद्य, वाहन, मास,ऋतु आदि पर विडियो उपलब्ध है। संस्कृत प्रमोशन फान्डेशन ने भी बच्चों के लिए संस्कृत ट्युटोरियल में प्रत्येक कक्षा के लिए विडियो बनाया है। यूट्यूब पर बलदेवानन्द सागर की आवाज में कहानियाँ, अक्षर गीत, संख्या गीत के साथ विभिन्न प्रकार के एनिमेटेड संस्कृत गीत आदि उपलब्ध है। 
सोशल मीडिया पर बच्चों के कार्यक्रम
मेरे अनेक मित्र सोशल मीडिया विशेषकर फेसबुक ग्रुप पर बच्चों की गीत प्रतियोगिता कराते रहते हैं। इसके लिए परितोषिक भी दिया जाता है। ग्रुप के सदस्य गीतों, कहानियों का यहाँ प्रचार भी करते हैं। यहाँ फेसबुक समूह का नाम अंकित किया जा रहा है। इसमें बच्चों द्वारा गाये गीत प्रचूर मात्रा में मिलेंगें, जो हमें अच्छे भविष्य के संकेत देते हैं। 
1. शिशु संस्कृतम्
 2. सरलं संस्कृतम्
3. विश्वसंस्कृतकुटुम्बकम्
4.  संस्कृतरसास्वादः
इस प्रकार के अन्य भी समूह हैं। दिग्दर्शन के लिए कुछ का लिंक यहाँ दे दिया है।      
संस्कृत बाल साहित्य के प्रकाशक संस्थायें          स्थान
1. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्   नई दिल्ली
2. अर्वाचीन संस्कृत साहित्य परिषद्                     बड़ोदरा 
3. संस्कृत भाषा प्रचारिणी सभा                         नागपुर
4. चिन्मय मिशन                                          चेन्नई
5. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान                          लखनऊ
6. सार्वभौम संस्कृत प्रचार संस्थानम्                  वाराणसी
7. संस्कृतभारती                                          बेंगलूरु, USA, गोआ, नई दिल्ली
8. श्री अरविन्दो आश्रम                                  पदुच्चेरी
9. साहित्य एकेडमी                                      नई दिल्ली
10. लोकभाषा प्रचार समिति                          पुरी (उड़ीसा)
11. दिल्ली संस्कृत अकादमी                           दिल्ली
12. राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान                             नई दिल्ली
बाल साहित्य पर श्री अरविन्दो आश्रम बहुत पहले से काम करते रहा है। यहाँ पर श्रीमाता के सान्निध्य में जगन्नाथ वेदालंकार तथा नरेन्द्र ने सरलसंस्कृतसरणिः पुस्तक लिखा। लोकभाषा प्रचार समिति से अनेक प्रकार के शिशु साहित्य प्रकाशित हुए। यहाँ से प्रकाशित  मधुरं संस्कृतम् पुस्तक के गीतों को हर बालक गा रहा है। इसमें अनेक रचनाकारों के गीतों का संकलन है। कुछ प्रसिद्ध गीत का लेखक नाम तथा गीत का नाम अधोलिखित है-
डॉ. श्रीधरभास्कर वर्णेकर          लोकहितं मम करणीयम्
श्री मंजूनाथ शर्मा                     पठत संस्कृतम्
श्री नारायण भट्ट                      सुन्दरसुरभाषा     (मुनिवरविकसित
श्री नारायण भट्ट                      चिरनवीना संस्कृता एषा
पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री          सादरं समीहताम्
श्री ल.म. चक्रदेव                     मम माता देवता
श्री जनार्दन हेगड़े                     मृदपि च चन्दनम्
बाल इस लिंक के अतिरिक्त मेरे यूट्यूब चैनल पर भी अनेक बाल गीत मिलते हैं। आप मेरे चैनल Jagdanand Jha पर भी पधारें। यहाँ संस्कृतेन संभाषणं कुरु तथा संस्कृत बाल साहित्य पर मेरा उद्बोधन सुना जा सकता है।
बाल साहित्य के लेखकों और उनकी रचनाओं के बारे में विस्तार किया जाता रहेगा।
   1934 में अलीपुर पाकिस्तान में जन्मे ओम प्रकाश ठाकुर इंद्रधनुः में बाल गीतों की रचना की। प्रस्तुत है इनकी कुछ पंक्तियाँ-
मूषक! धाव मूषक! धाव
त्वोमेषोऽहं गृहणामि
क्षुधा बाधते मां तीव्रा
त्वामत्तुम् अभिवांछामि।
आपने क्रीत दास ईशप के विद्रोह की कथा को पुस्तक की शीर्षक से अलंकृत कर ईसप कथा निकुञ्जम् की रचना भी की, जिसमें कुल 111 लघुकथा दी गयी है। यह बच्चों के लिए उपयोगी साहित्य है।
डॉ. नवलता, डॉ. मनोरमा, विश्वास, डॉ. केशव प्रसाद गुप्त, प्रो. हरिदत्त शर्मा, प्रो. इच्छाराम द्विवेदी, प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी, डॉ. राजकुमार मिश्र सहित अनेको कवियों तथा साहित्यकारों ने अपनी सारस्वत लेखनी से बाल साहित्य की श्री में वृद्धि की है।
नन्दन पत्रिका में जय प्रकाश भारती ने हिन्दी में बाल कथायें लिखी थी। इसका मधुर शास्त्री ने संस्कृत में अनुवाद किया है। इसे संकलित कर बाल- नैतिक- कथाः नाम से पुस्तकाकार में लेखक ने प्रकाशित किया। दिल्ली संस्कृत अकादमी से प्रकाशित ते के आसन् डायनासोराः भी बच्चों के लिए ज्ञानबर्द्धक है। इस संस्था ने संस्कृत बाल साहित्य सर्जकों को प्रोत्साहित किया है।
संस्कृत में चंदा मामा, संस्कृत चंद्रिका जैसी बाल पत्रिकाओं का भी प्रकाशन हुआ। उपर्युक्त लेखकों से मेरा व्यक्तिगत लगाव है। बच्चों को आकर्षित करने के लिए संस्कृत में कॉमिक्स में प्रकाशित किये जा रहे हैं। यह ऑनलाइन तथा प्रिंट दोनों स्वरुप में मिलते हैं। सम्भाषण संदेशः पत्रिका में बच्चों के लिए कुतुककुटी (कॉमिक्स) तालक्कुटी, बालमोदनी का एक एक नियमित स्तंभ प्रकाशित होता है। यह बच्चों के लिए बहुत उपयोगी पत्रिका है।
पंडित वासुदेव द्विवेदी शास्त्री ने जिस हेतु पीढ़ी को जगाया, उसे मूर्त रूप संस्कृतभारती नामक संस्था ने दिया। इस संस्था ने बच्चों को केंद्र में रखकर विभिन्न प्रांतों से 50 से अधिक बाल साहित्य प्रकाशित किया। इसमें उन संस्कृत सेवाव्रती विद्वानों का महनीय योगदान है, जिन्होंने अपना सर्वस्व प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पाने वाले बच्चों के लिए लगाया। आज के दिन इस संस्था के द्वारा किए गए कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करता हूं। संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान ने बाल साहित्य को डिजिटल रूप दिया।
डॉ. सम्पदानन्द मिश्र आज बरबस याद आ रहे हैं। आपके द्वारा लिखित एवं प्रकाशित बाल साहित्य आधुनिक रचनाकारों के मार्गदर्शन हेतु पर्याप्त है। चित्ताकर्षक कलेवर में प्रकाशित आप की रचना किस बच्चे का मन नहीं मोहता? संस्कृतसर्जना त्रैमासिकी ई पत्रिका में मैंने आपका एक साक्षात्कार प्रकाशित किया था, जिसमें बाल साहित्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इसी पत्रिका में प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी का चतुरः काकः तथा अन्य बाल कविता भी प्रकाशित हुई। इस विषय पर आपसे घंटों बातचीत होती है । आपने संस्कृत बाल साहित्य परिषद् का गठन किया तथा कार्यशालाओं, संगोष्ठियों का भी आयोजन किया। मैंने अपने ब्लॉग में इनका सादर उल्लेख किया है।
मेरे अभिन्न मित्रों में प्रोफेसर मदन मोहन झा संस्कृत बाल साहित्य को नए आयाम दे रहे हैं। अभी तक किसी रचनाकार ने बच्चों के लिए शब्दकोश पर ध्यान नहीं दिया था। इस कमी को प्रो. मदनमोहन झा ने पूरा किया। आपने हिन्दी संस्कृत चित्रकोश नाम से एप बनाया।
संस्कृत बाल साहित्य
पुस्तक का नाम                       लेखक/ अनुवादक/ संकलनकर्ता
1.   बाल गीतावलिः                           पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
2.   संस्कृत गानमाला                         पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
3.   सरल संस्कृतगद्यसंग्रह                   पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
4.   हास्यविनोद कथासंग्रह                  पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
5.    हास्य विनोदवाटिका                   पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
6.   संस्कृतप्रहसनम्                           पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
7.   कौत्सस्य गुरुदक्षिणा                     पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
8.   बाल निबंधमाला                         पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
9.   बाल विनोदमाला                         पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
10.    बालनाटकम् भाग 1-2              पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
11.    वर्णमाला गीतावलिः                 पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
12.    भारतराष्ट्रगीतम्                       पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
13.    भोजराज्ये संस्कृतसाम्राज्यम्        पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
14.    बाल एकता                             केशव चंद्र सेन
15.    रङ्गरुचिरम्                            दिगम्बर महापात्र
16.    ललितलवङ्गम्                        दिगम्बर महापात्र
17.    उत्कलिका                               हरिदत्त शर्मा
18.   बालगीताली                           हरिदत्त शर्मा
19.    गीतकन्दलिका                         हरिदत्त शर्मा
20.   कनीनिका                               अभिराज राजेन्द्र मिश्र
21.    मृद्विका                                   अभिराज राजेन्द्र मिश्र
22.    कान्तारकथा                            अभिराज राजेन्द्र मिश्र
23.    बालगीतम्                              भि. वेलणकर
24.    इंद्रधनुः                                  ओम् प्रकाश ठाकुर
25.    ईसप कथा निकुञ्जम्                  ओम् प्रकाश ठाकुर
26.    कथामंदाकिनी                          ओम् प्रकाश ठाकुर
27.    बालकथाकौमुदी                       विश्वास
28.    बाल बाटिका                           विश्वास
29.    भारतीय स्वतंत्रता संघर्षगाथा    सत्यदेव चौधरी
30.   लक्ष्य वेधकः बुद्धिमान्                   सत्यदेव चौधरी
31.    हास्यमञ्जरी                             सम्पदानन्द मिश्र
32.   शनैः शनैः                                सम्पदानन्द मिश्र
33.   सप्तवर्णचित्रपतङ्गः                   सम्पदानन्द मिश्र

34.  लोकगीताञ्जलिः                        बाबूराम अवस्थी

35.    अभिनवा संकृत-नाट्य-मञ्जरी     अनन्त गोपाल देशपाण्डे
36.    अस्माकं पतङ्गिका          सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
37.   भुट्टाकम्                         सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
38.   चुन्नी मुन्नी च                   सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
39.   दोला                             सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
40.   गोधूमाः                         सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
41.   गोलगप्पकम्                   सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
42.   गुल्ली दण्डः च                 सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
43.   हर्षः जातः                      सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
44.   हिक् हिक् हिक्का               सम्पादक- कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अनुवाद- रंजीत वेहरा
45.   आत्माभिव्यक्तिः                 बुद्धदेव शर्मा
46.  बालगीतम्                         शशिपाल शर्मा
47.   बालकथा                           संकलनकर्ता- पुलियालिल रमेश
48.   बालगीतम्                         कृष्णलाल
49.   बालकथासप्तति                   जनार्दन हेगड़े
50.    बालकथा स्रवन्ती                जनार्दन हेगड़े
51.   अभिनवा संस्कृत नाट्य मंजरी  अनन्त गोपाल देशपाण्डे
52.    बालगीतम् अङ्कगीतम्          कृष्णलाल
53.    बालकथाः                            माधुरी
54.    बालनैतिक कथाः                  मधुर शास्त्री
55.    बालेभ्यः महाभारतनीतिकथाः मनु, अनुवादक- विद्वान् उदयन
56.   बालनाटकानि                       पूजा लाल
57.   बालश्लोकाः                          श्री अरविन्दो आश्रम
58.   भस्मासुरवधम्                      भास्कर केशव धोक
59. बोधकथाः                            अशोक कौशिक, अनुवादक- संजीव
60. चमत्कारिकः दूरभाषः             ऋषिराज जानी
61. चपलः चिन्टुः                        चारुहास पंडित, प्रभाकर वडेकर
62. डयते कथमाकाशे                  राजकुमार मिश्र
63. दशावतारकथाः                    पी. रमेश
64. दुहिता                                वरदा वसा
65. एकदा                                 केशवचन्द्र दाश
66. एहि, हसाम                         संस्कृतभारती
67. गीत संस्कृतम्                       संस्कृतभारती
68. अदृश्यम्                              राधिका रंजन दाश
69. कथा विचित्राः                      राधिका रंजन दाश


यहां अधिक नहीं लिखते हुए पं. दिगम्बर महापात्र रचित इस कविता से अपनी बात पूर्ण करता हूं-
पठ रे सुत!
देव-भाषितम्
ज्ञानगर्भितं चारुभाषितम्
पाणिनेर्मुनेः रङ्गीकृतम्
अमृतायितं मृदुसंस्कृतम्
गौरवायितम् । पठ...........
लेखक- जगदानन्द झा, लखनऊ
 कृपया विना अनुमति लेख को कापी नहीं करें।

अव्ययों का अभ्यास


स्थानसूचकानि  अव्ययानि
( अत्र  तत्र   कुत्र   अन्यत्र   सर्वत्र   एकत्र )
अभ्यासः – 1
अधोलिखितप्रश्‍नानाम् उत्तरं रिक्‍तस्थानेषु लिखत -
                           अत्र                                                                  तत्र
जलकूपी कुत्र अस्ति ?     जलकूपी अत्र अस्ति ।     वृक्षः कुत्र अस्ति ?         वृक्षः तत्र अस्ति ।
लेखनी कुत्र अस्ति ?       लेखनी अत्र अस्ति ।       क्रीडाक्षेत्रं कुत्र अस्ति ?    क्रीडाक्षेत्रं तत्र अस्ति ।
स्यूतः कुत्र अस्ति ?        -----------अस्ति ।          आलिन्दः कुत्र अस्ति ?    -----------अस्ति । 
मित्रं कुत्र अस्ति ?         -----------अस्ति ।          मार्गः कुत्र अस्ति ?        ------------अस्ति । 
सखी कुत्र अस्ति ?         -----------अस्ति ।          लोकयानानि कुत्र सन्ति ? ----------- सन्ति । 
वातायनं कुत्र अस्ति ?    -----------अस्ति ।          गुरुकुलं कुत्र अस्ति ?      ------------ अस्ति ।   
द्वारं कुत्र अस्ति ?          -----------अस्ति ।          शिक्षकप्रकोष्ठः कुत्र अस्ति ? ----------- अस्ति । 
शिक्षिका कुत्र अस्ति ?    -----------अस्ति ।          पुस्तकालयः कुत्र अस्ति ?  ------------- अस्ति । 
                          कुत्र                                              अन्यत्र
जलकूपी अत्र अस्ति       जलकूपी कुत्र अस्ति?  नदी कुत्र अस्ति ?   नदी अन्यत्र अस्ति ।
मार्गः तत्र अस्ति ।         मार्गः कुत्र अस्ति ?        गृहं कुत्र अस्ति ?          गृहम् अन्यत्र अस्ति ।
माता अन्यत्र अस्ति ।      ------------ अस्ति ?  माता कुत्र अस्ति ?    ----------------  अस्ति ।
बालिकाः एकत्र सन्ति ।   ------------- सन्ति ?       पर्वतः कुत्र अस्ति ?       ------------- अस्ति ।
प्रकाशः सर्वत्र अस्ति ।     ------------- अस्ति ?      सागरः कुत्र अस्ति ?      ------------- अस्ति ।
शिक्षिका अत्र अस्ति ।     ------------- अस्ति ?      पिता कुत्र अस्ति ?        ------------- अस्ति ।
गृहम् अन्यत्र अस्ति ।      ------------- अस्ति ?      उद्यानं कुत्र अस्ति ?       ------------- अस्ति ।
बालकाः एकत्र सन्ति ।    ------------- सन्ति  ?      वनं कुत्र अस्ति ?          ------------- अस्ति ।
                         सर्वत्र                                                         एकत्र
प्रकाशः कुत्र अस्ति ?      प्रकाशः सर्वत्र अस्ति ।    बालिकाः कुत्र सन्ति ?    बालिकाः एकत्र सन्ति ।
देवः कुत्र अस्ति ?         देवः सर्वत्र अस्ति ।        बालकाः कुत्र सन्ति ?     बालकाः एकत्र सन्ति ।
प्राणवायुः कुत्र अस्ति ?  ------------- अस्ति ।       पिता कुत्र अस्ति ?        ------------- अस्ति ।
प्रदूषणं कुत्र अस्ति ?      ------------- अस्ति ।       लेखनसामग्री कुत्र अस्ति ? ------------ अस्ति ।
आकाशः कुत्र अस्ति ?     ------------ अस्ति ।        गृहाणि कुत्र भवन्ति ?    ------------ भवन्ति ।
भूमिः कुत्र अस्ति ?        ------------ अस्ति ।        औद्योगिकक्षेत्रं कुत्र भवति ? ----------- भवति ।
वातावरणं कुत्र अस्ति ?  ------------- अस्ति ।       छात्राः कुत्र तिष्ठन्ति ?     ------------ तिष्ठन्ति ।
स्वच्छता कुत्र भवेत् ?    ------------- भवेत् ।       शिक्षकाः कुत्र तिष्ठन्ति ? ------------ तिष्ठन्ति ।
अव्ययानि (मिश्राभ्यासः)
अभ्यासः - 2
यथोदाहरणम् अधोलिखितैः अव्ययपदैः प्रत्येकं त्रीणि वाक्यानि रचयत -
अत्र  - मम स्यूतः अत्र अस्ति ।     तत्र – अहं तत्र क्रीडामि ।
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सर्वत्र – ईश्वरः सर्वत्र वर्तते ।      कुत्र – सायंङ्काले भवान् कुत्र भविष्यति ? 
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उच्चैः – सिंहः उच्चैः गर्जति ।       शनैः  - वृद्धः जनः शनैः चलति ।
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शीघ्रम् – भवती शीघ्रं लिखतु ।      मन्दम् – कच्छपः मन्दं चलति ।
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अपि – भवान् अपि मया सह क्रीडतु ।
एव – भगवतः कृष्णस्य जन्म कारागृहे एव अभवत् ।  
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अद्य – मम माता अद्य बहु प्रसन्ना अस्ति ।
ह्यः – ह्यः अहं वादविवादस्पर्धायां प्रथमस्थानं प्राप्तवती ।
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श्वः – मम पिता श्वः विदेशात् आगमिष्यति ।
अधुना – मम माता अधुना विश्रान्तिं करोति ।
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कदा – भारतीयं नूतनवर्षं कदा भवति ?                    
मा – मध्याह्ने आतपे मा क्रीड ।
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पुरतः – शिक्षकस्य पुरतः छात्राः सन्ति ।                    
पृष्ठतः – विद्यालयस्य पृष्ठतः वाटिका अस्ति ।
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वामतः – शिवस्य वामतः पार्वती अस्ति ।                            
दक्षिणतः – मम दक्षिणतः वातायनम् अस्ति ।
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उपरि – वृक्षस्य उपरि खगाः निवसन्ति ।                      
अधः– उष्णकाले जनाः निम्बवृक्षस्य अधः विश्रान्तिं कुर्वन्ति ।  
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अतः – परीक्षा अस्ति अतः सः पठति ।                       
च – शिक्षिका मह्यम् अङ्कनीं लेखनीं ददाति ।
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किमर्थम् – शिशुः किमर्थं रोदिति ?                         
यत् – माता वदति यत् अध्ययनं करोतु ।
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अव्ययानि (मिश्राभ्यासः)
अभ्यासः - 3
यथोदाहरणम् अधोलिखितैः अव्ययपदैः प्रत्येकं त्रीणि वाक्यानि रचयत -
सहसा – बालकः उत्थाय सहसा धावितवान् ।              
सदा – सः सदा समयेन कार्यं करोति ।
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यद्यपि -  तथापि –
यद्यपि श्वः परीक्षा भविष्यति तथापि सः न पठति ।
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यावत् – तावत् -  
यावत् शिक्षिका न आगच्छति तावत् भवान् गृहकार्यं पूर्णं करोतु ।
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यथा – तथा –
यथा ज्येष्ठाः वदन्ति तथा कनिष्ठाः कुर्वन्ति ।
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यदा – तदा –
यदा वृष्टिः भवति तदा वातावरणे सर्वत्र शीतलता भवति ।
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इव – मम भगिनी कोकिला इव गायति ।                     
नूनम् – नूनं सः एव प्रथमस्थानं लप्स्यते यः पठिष्यति ।
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इतस्ततः – वानराः सर्वदा इतस्ततः धावन्ति ।             
कुतः – भवती एतत् नूतनवस्त्रं कुतः क्रीतवती ?
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इतः – इतः बालिकाः गच्छन्तु ।  ततः – ततः बालकाः गच्छन्तु ।
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कदापि – अहं कदापि असत्यं न वदामि । वृथा – धनिकाय दानं वृथा भवति ।
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पुरा – पुरा भारतवर्षे रामराज्यम् आसीत् ।  आगामि – आगामि-वर्षे भारते निर्वाचनं भविष्यति ।
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                                                      सङ्ख्या
अभ्यासः - 4
अधस्तनसङ्ख्याम् अक्षरैः त्रिवारं लिखत -
21  एकविंशतिः             ---------------------     ---------------------    --------------------   
22  द्वाविंशतिः               ---------------------     ---------------------    --------------------  
23  त्रयोविंशतिः                        ---------------------     ---------------------    -------------------- 
24  चतुर्विंशतिः             ---------------------     ---------------------    --------------------   
25  पञ्चविंशतिः             ---------------------     ---------------------    --------------------  
26   षडविंशतिः             ---------------------     ---------------------    --------------------  
 27   सप्तविंशतिः           ---------------------     ---------------------    --------------------  
28  अष्टविंशतिः             ---------------------     ---------------------    --------------------  
29  नवविंशतिः              ---------------------     ---------------------    --------------------    
30  त्रिंशत्                     --------------------     ---------------------    --------------------   
31  एकत्रिंशत्                ---------------------     ---------------------    --------------------   
32  द्वात्रिंशत्                 ---------------------     ---------------------    --------------------   
33  त्रयस्त्रिंशत्               ---------------------     ---------------------    --------------------   
34  चतुस्त्रिंशत्               ---------------------     ---------------------    --------------------   
35 पञ्चत्रिंशत्                ---------------------     ---------------------    -------------------- 
36  षट् त्रिंशत्               ---------------------     ---------------------    -------------------- 
37  सप्तत्रिंशत्                ---------------------     ---------------------    --------------------  
38  अष्टात्रिंशत्               ---------------------     ---------------------    --------------------   
39  नवत्रिंशत्                ---------------------     ---------------------    --------------------  
40  चत्वारिंशत्              ---------------------     ---------------------    --------------------          
41    एकचत्वारिंशत्      ---------------------     ---------------------    --------------------   
42    द्विचत्वारिंशत्     ---------------------     ---------------------    --------------------   
43    त्रिचत्वारिंशत्        ---------------------     ---------------------    -------------------- 
44    चतुश्चत्वारिंशत्      ---------------------     ---------------------    -------------------- 
45    पञ्चचत्वारिंशत्      ---------------------     ---------------------    --------------------                                             
46    षट्चत्वारिंशत्       ---------------------     ---------------------    --------------------
47    सप्तचत्वारिंशत्       ---------------------     ---------------------    -------------------- 
48    अष्टचत्वारिंशत्       ---------------------     ---------------------    --------------------   
49    नवचत्वारिंशत्       ---------------------     ---------------------    -------------------- 
50    पञ्चाशत्                ---------------------     ---------------------    --------------------  
अभ्यासः - 5
 (क्‍तान्तानि, तुमुन्नन्तानि च )
अधस्तनधातुभ्यः लृट् लकारे रूपं विलिख्य क्त्वा, तुमुन् प्रत्ययं योजयित्वा उचितरूपाणि लिखत -
धातुः         लृट् - लकारे                    क्त्वा                             तुमुन्
पठ्           पठिष्यति                         पठित्वा                             पठितुम्
खाद्         ---------------------       --------------                   ---------------------
पत्    ---------------------             --------------                   ---------------------
हस्    ---------------------             --------------                   ---------------------
मिल्    ---------------------           --------------                   ---------------------
निन्द्    ---------------------           --------------                   ---------------------    
क्रीञ्    ---------------------           --------------                   ---------------------   
रुद्    ---------------------             --------------                   ---------------------    
भू    ---------------------               --------------                   ---------------------    
ज्ञा   ---------------------                --------------                   ---------------------       
श्रु     ---------------------              --------------                   ---------------------    
कृ    ---------------------               --------------                   ---------------------   
नी    ---------------------              --------------                   ---------------------   
पा    ---------------------              --------------                   ---------------------
स्था    ---------------------            --------------                   ---------------------      
त्यज् ---------------------               --------------                   ---------------------    
ग्रह्    ---------------------             --------------                   ---------------------  
स्मृ    ---------------------              --------------                   ---------------------   
गम्    ---------------------             --------------                   ---------------------
स्पृश्   ---------------------             --------------                   ---------------------  
लिख्    ---------------------           --------------                   ---------------------
प्रच्छ्    ---------------------           --------------                   ---------------------
क्षाल्    ---------------------           --------------                   ---------------------
चिन्त्        ---------------------        --------------                   ---------------------  
भक्ष्      ---------------------          --------------                   ---------------------   
प्रेष्    ---------------------             --------------                   ---------------------   
सूच्  ---------------------                --------------                   ---------------------
दृश्                        
द्रक्ष्यति                     दृष्ट्वा                                               द्रष्टुम्    
अभ्यासः - 6
लट्               क्त्वा                      क्रियापदस्य स्थाने क्त्वान्तरूपेण रिक्तस्थानानि पूरयत -
गच्छति         गत्वा                           युवकः चलच्चित्रमन्दिरं----------(गच्छति) चलच्चित्रं पश्यति ।
वदति                उदित्वा                       वटुकः मन्त्रं -----------(वदति) आनन्दम् अनुभवति ।
क्रीडति              ---------------              क्रीडकः -----------(क्रीडति) प्रसन्नः भवति ।
वदति                ---------------                 सज्जनः सर्वं कार्यं -----------(वदति) करोति ।
पिबति               ---------------                 अनुजः फलरसं-----------(पिबति) सन्तोषम् अनुभवति ।
लिखति              ---------------                 छात्रः वाक्यं -----------(लिखति) स्मरति ।
नयति                ---------------                 सा वस्तूनि -----------(नयति) गृहं गच्छति ।
पश्यति              ---------------                 भवान् दूरदर्शनं -----------(पश्यति) शयनं करोति ।
मिलामि             ---------------                 अहं मित्रेण -----------(मिलामि) विषयं वदामि ।
त्यजति              ---------------                 एषः अध्ययनं -----------(त्यजति) अन्यत्र न गच्छति ।
खादति              ---------------                 सा फलं -----------(खादति) व्रतम् आचरति ।
पतति                ---------------                 बालकः सोपानात्-----------(पतति) रोदनं करोति ।
भवामि              ---------------                 अहं नेता -----------(भवामि) लोककल्याणं करिष्यामि ।
क्रीणाति             ---------------                 शिक्षकः सङ्गणकं -----------(क्रीणाति) विद्यालयं गच्छति ।
जानाति             ---------------                 सेवकः ------------(जानाति) कार्यं करोति ।
करोति               ---------------                 पाचकः भोजनं -----------(करोति) शयनं करोति ।
शृणोति              ---------------                 शिष्यः श्लोकं -----------(शृणोति) अनुवदति ।
ददाति               ---------------                 राजा वस्त्रं -----------(ददाति) सर्वान् उपकरोति ।
प्रेषयति             ---------------                 सः सन्देशं -----------(प्रेषयति) सर्वान् सूचयति ।
स्थापयति          ---------------                 भगिनी स्यूतं -----------(स्थापयति) आगच्छति ।
स्मरति              ---------------                 सा सर्वं -----------(स्मरति) वदति ।
गृह्णाति              ---------------                 आरक्षकः दुर्जनं -----------(गृह्णाति) ताडयति ।
क्रीणाति             ---------------                 माता शाकं -----------(क्रीणाति) पचति ।
सूचयति             ---------------                 पिता सेवकं -----------(सूचयति) गच्छति ।
रोदिति              ---------------                 बालिका -----------(रोदिति) श्रान्ता भवति ।
निन्दति              ---------------                 दुष्टः सर्वान्-----------(निन्दति) स्वस्य कार्यं साधयति ।
तिष्ठति               ---------------                 शिक्षकः -----------(तिष्ठति) पाठयति ।
क्षालयति           ---------------                 कर्मकरः जलेन प्रकोष्ठं -----------(क्षालयति) स्वच्छीकरोति ।
पृच्छति              ---------------                 अर्चकः -----------(पृच्छति) कार्यं करोति । 
अस्ति                ---------------                 सा वैद्या -----------(अस्ति) समाजसेवां करोति ।
अभ्यासः - 7
प्रथमक्रियापदस्य स्थाने क्त्वान्तरूपं योजयित्वा एकवाक्यं निर्माय पुनः लिखत -
सुनीलः सदैव हसति । वदति ।                     सुनीलः सदैव हसित्वा वदति ।
छात्राः पठन्ति । गच्छन्ति ।                       ----------- ----------- ---
लिखं लिखति । गृहं गच्छति ।                    ----------- ----------- ---
महेशः भोजनं करोति । नाटकं पश्यति ।       ----------- ----------- ---
सः श्लोकान् स्मरति । प्रसन्नः भवति ।           ----------- ----------- ---
सेविका जलं पिबति । तृप्ता भवति ।            ----------- ----------- ----
सा उत्तरं वदति । उपविशति ।                   ----------- ----------- ---
निशा उद्याने भ्रमति । श्रान्ता भवति ।          ----------- ----------- ---
रामः सीतां त्यजति । दुःखम् अनुभवति ।      ----------- ----------- ---
माला धनं ददाति । प्रसन्ना भवति ।              ----------- ----------- --
महेन्द्रः क्रीडति । गृहं गच्छति ।                  ----------- ----------- ----
सः गणितं जानाति । छात्रान् पाठयति ।        ----------- ----------- ---
एषः आपणं गच्छति । लेखनीं क्रीणाति ।        ----------- ----------- ---
बालः देवं नमति । आशीर्वादं प्राप्नोति।          ----------- ----------- ---
उषा धावति । प्रथमस्थानं प्राप्नोति ।            ----------- ----------- ---
भ्रमरः भ्रमति। मधु पिबति ।                       ----------- ----------- --
भीमः शत्रुं पश्यति । तस्य पृष्ठतः धावति ।      ----------- ----------- --
माता चिन्तयति । अनुमतिं ददाति ।             ----------- ----------- --
कथाकारः कथां कथयति । प्रसिद्धः भवति ।    ----------- ----------- --
नर्तकी गीतं शृणोति । नृत्यं करोति ।             ----------- ----------- --
सः मां पृच्छति । गृहात् बहिः गच्छति ।           ----------- ----------- - 
अभ्यासः - 8
लट्               तुमुन्             आवरणे प्रदत्तस्य क्रियापदस्य तुमुनन्तरूपेण रिक्तस्थानानि पूरयत -
गच्छामि            गन्तुम्            अहं बहिः गन्तुम्          (गच्छामि) नूतनं वस्त्रं धरामि ।
पठति                ---------------     सः पुस्तकं -----------(पठति) ग्रन्थालयं गच्छति ।
पतति                ---------------     वानरः कदापि -----------(पतति) न शक्नोति ।
क्रीडति              ---------------     क्रीडकः प्रतिदिनं -----------(क्रीडति) क्रीडाङ्गणं गच्छति ।
वदति                ---------------     नेता ----------- (वदति) मञ्चं प्रति गच्छति ।
आह्वयति          ---------------     अधिकारी सेवकम् -----------(आह्वयति) पिञ्जं नुदति ।
पिबति               ---------------     मित्रं प्रतिदिनं चायं -----------(पिबति) आपणं गच्छति ।
मिलति              ---------------     पुत्रः जनकेन सह -----------(मिलति) गृहम् आगच्छति ।
नयति                ---------------     चालकः वाहनं बहिः-----------(नयति) इच्छति ।
पश्यति              ---------------     सा नृत्यं -----------(पश्यति) कार्यक्रमं गच्छति ।
 भवति              ---------------     छात्रः शिक्षकः -----------(भवति) परिश्रमं करोति ।
त्यजति              ---------------     सज्जनः दुर्गुणं -----------(त्यजति) सर्वदा प्रयत्नं करोति ।
 खादन्ति            ---------------     बालाः चाकलेहं -----------(खादन्ति) कोलाहलं कुर्वन्ति ।
 जानाति            ---------------     अनुजा उत्तरं -----------(जानाति) प्रश्नं पृच्छति ।
 कुर्वन्ति             ---------------     सर्वे भोजनं -----------(कुर्वन्ति) भोजनालयं गच्छन्ति ।
शृण्वन्ति            ---------------     जनाः व्याख्यानं -----------(शृण्वन्ति) सभागारं गच्छन्ति ।
ददाति               ---------------     मुख्यातिथिः पुरस्कारं-----------(ददाति) उत्तिष्ठति ।
 प्रेषयति            ---------------     स्वामी सेवकं आपणं-----------(प्रेषयति) आह्वयति ।
 प्रक्षालयति        ---------------     माता वस्त्रं -----------(प्रक्षालयति) क्षालनयन्त्रं क्रीणाति ।
स्थापयति          ---------------     धनिकः धनं -----------(स्थापयति) वित्तकोषं गच्छति ।
 उत्तिष्ठति           ---------------     रुग्णः -----------(उत्तिष्ठति) न शक्नोति ।
 उपविशति         ---------------    कर्मकरः -----------(उपविशति) कटं प्रसारयति ।
 स्मरति             ---------------     वटुकः मन्त्रं -----------(स्मरति) वेदपारायणं करोति ।
 आगच्छन्ति       ---------------    मम विद्यालयं सर्वे-----------(आगच्छन्ति) इच्छन्ति ।
 नमति               ---------------     भक्तः देवं  -----------(नमति) मन्दिरं गच्छति ।
 गृह्णाति             ---------------     युवकः कन्दुकं -----------(गृह्णाति) कूर्दते ।
 क्रीणाति            ---------------     पुत्रः लेखनीं -----------(क्रीणाति) धनं स्वीकरोति ।
 सूचयति            ---------------     प्रधानाचार्या  विषयं -----------(सूचयति) शिक्षिकाम् आह्वयति ।
 पृच्छति             ---------------     छात्रः प्रश्नं -----------(पृच्छति) उत्तिष्ठति ।
अभ्यासः – 9
अधस्तनसङ्ख्याम् अक्षरैः अनेकवारं लिखत -
51    एकपञ्चशत्            ---------------------     ---------------------   
52    द्विपञ्चशत्              ---------------------     ---------------------  
53    त्रिपञ्चशत्             ---------------------     ---------------------   
54    चतुःपञ्चशत्           ---------------------     ---------------------   
55   पञ्चपञ्चशत्             ---------------------     ---------------------   
56   षट्पञ्चशत्              ---------------------     ---------------------   
57   सप्तपञ्चशत्             ---------------------     ----------------------
58   अष्टपञ्चशत्             ---------------------     ----------------------
59   नवपञ्चशत्             ---------------------     ----------------------
60   षष्टिः                     ---------------------     ----------------------
61   एकषष्टिः                ---------------------     ----------------------
62   द्विषष्टिः                  ---------------------     ----------------------
63   त्रिषष्टिः                  ---------------------     ----------------------
64   चतुष्षष्टिः               ---------------------     ----------------------
65    पञ्चषष्टिः               ---------------------     ----------------------
66   षट्षष्टिः                 ---------------------     ----------------------
67   सप्तषष्टिः                ---------------------     ----------------------
68   अष्टषष्टिः                ---------------------     ----------------------
69  नवषष्टिः                  ---------------------     ----------------------
70  सप्ततिः                   ---------------------     ----------------------
71  एकसप्ततिः               ---------------------     ----------------------
72  द्विसप्ततिः                ---------------------     ----------------------
73  त्रिसप्ततिः                ---------------------     ----------------------
74  चतुस्सप्ततिः             ---------------------     ----------------------
75  पञ्चसप्ततिः              ---------------------     ----------------------
76  षट्सप्ततिः               ---------------------     ----------------------
77  सप्तसप्ततिः               ---------------------     ----------------------
78  अष्टसप्ततिः               ---------------------     ----------------------
79  नवसप्ततिः              ---------------------     ----------------------
80  अशीतिः                 ---------------------     ----------------------
81 एकाशीतिः               ---------------------     ----------------------
82  द्व्यशीतिः                 ---------------------     ----------------------
83  त्र्यशीतिः                 ---------------------     ----------------------
84  चतुरशीतिः              ---------------------     ----------------------
85  पञ्चाशीतिः              ---------------------     ----------------------
86  षडशीतिः                ---------------------     ----------------------
87  सप्ताशीतिः               ---------------------     ----------------------
88  अष्टाशीतिः              ---------------------     ----------------------
89  नवाशीतः                ---------------------     ----------------------
90  नवतिः                    ---------------------     ----------------------
91  एकनवतिः               ---------------------     ----------------------
92  द्विनवतिः                 ---------------------     ----------------------
93  त्रिनवतिः                ---------------------     ----------------------
94  चतुर्नवतिः               ---------------------     ----------------------
95  पञ्चनवतिः               ---------------------     ----------------------
96  षण्ण्वतिः                ---------------------     ----------------------
97  सप्तनवतिः               ---------------------     ----------------------
99  नवनवतिः               ---------------------     ----------------------
100 शतम्                  ---------------------     ---------------------- 

ल्यप्
अभ्यासः – 10
उपसर्गाः  २२ भवन्ति । ते च  अधोलिखितानि सन्ति -
प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, , नि, अधि, अति, अपि, सु, उत्,
अभि, प्रति,परि उप ।
उदाहरणानुगुणम् उपसर्गयुक्तानि क्रियापदानि लिखत -
अनु + गम् =  अनुगच्छति            
अव + गम् = --------------------      प्र + क्षाल् = -----------  
वि + लिख् = -------------------       अप + सृ = ------------
निर् + गम् = -------------------    आ + गम् = ---------------------       
प्रति + वद् = ------------        उत् + गम् = --------------------
सम् + भू = ---------------------    अधि + वस् = --------------------     
परि + त्यज्  = ----------------     उप + विश् = --------------------       
अनु + गम् = ----------- -  नि + मिल् = ------------
अभ्यासः - 11
अधस्तन-क्रियापदानां पुरतः ल्यप् - रूपं लिखत -
प्रक्षालयति – प्रक्षाल्य       -----------------     -----------------
परित्यजति – परित्यज्य   -----------------     -----------------
विस्मरामि – विस्मृत्य      -----------------     -----------------           
विजानाति -  विज्ञाय        -----------------     -----------------           
अनुभवति -  अनुभूय        -----------------     -----------------           
उपविशति -  उपविश्य     -----------------     -----------------           
प्रणमति  -   प्रणम्य          -----------------     -----------------           
विलिखति -  विलिख्य     -----------------     -----------------           
आगच्छति  -  आगत्य      -----------------     -----------------           
अवगच्छति – अवगत्य     -----------------     -----------------           
उपकरोति  - उपकृत्य       -----------------     -----------------           
अनुसरति  -  अनुसृत्य       -----------------     -----------------           
स्वीकरोमि  - स्वीकृत्य     -----------------     -----------------           
अनुगच्छति  - अनुगत्य     -----------------     -----------------           
उत्तिष्ठति  -   उत्थाय        -----------------     -----------------           
अभ्यासः - 12
अधस्तन-वाक्यद्वयं ल्यप् - प्रत्ययेन योजयत
बालकः हस्तौ प्रक्षालयति । भोजनं करोति । ----------- ----------- ----------- --------
सैनिकः गृहं परित्यजति । देशं रक्षति ।        ----------- ----------- ----------- --------
जनः नृपं प्रणमति । पुरस्कारं स्वीकरोति ।   ----------- ----------- ----------- --------
अहं धनं विस्मरामि । आपणं गच्छामि ।      ----------- ----------- ----------- --------
सः विषयं विजानाति । बोधयति ।             ----------- ----------- ----------- --------
सा कष्टम् अनुभवति । श्रान्ता भवति ।         ----------- ----------- ----------- --------
मुनिः व्याघ्रचर्मणि उपविशति । ध्यानं करोति । ----------- ----------- ----------- -----
सा लेखं विलिखति । प्रकाशनाय ददाति ।     ----------- ----------- ----------- --------
छात्रः विद्यालयम् आगच्छति । पठति ।        ----------- ----------- ----------- --------
सा उपविशति । उत्तरं वदति ।                   ----------- ----------- ----------- --------
सा दोषम् अवगच्छति । क्षमां प्रार्थयते ।       ----------- ----------- ----------- --------
सः गणितम् अवगच्छति । सर्वान् बोधयति । ----------- ----------- ----------- --------
सज्जनः दुर्जनान् उपकरोति । गच्छति ।        ----------- ----------- ----------- --------
बुद्धिमान् नियमम् अनुसरति । विजयं प्राप्नोति । -----------   -----------
अहं धनं स्वीकरोमि । विपणीं गच्छामि ।        -----------    -----------
व्याधः हरिणम् अनुगच्छति । बाणं चालयति ।  ----------- ----------- -----------
छात्रः उत्तिष्ठति । प्रश्नं पृच्छति ।                  ----------- ----------- -----------