मंगलवार, 12 नवंबर 2019

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ छात्रवृत्ति आवेदन पत्र

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन भरने वाले मेरे ब्लॉग पर पधारे आत्मीय जन!

इस ब्लॉग के माध्यम से छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरना बहुत ही आसान है। आप विना किसी सहायता के इसे निःशुल्क भर सकते है। इसके अतिरिक्त आपकी शिक्षा के लिए भी यहाँ जबरदस्त मैटर उपलब्ध है। इस फार्म को भरने के साथ साथ आप व्याकरण, साहित्य, कोश आदि का भी अध्ययन कर सकते हैं।
छपा हुआ फार्म यहाँ से निःशुल्क प्राप्त करें-
 उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ 

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, पंचम तल, इन्दिरा भवन, लखनऊ
शारदा संस्कृत संस्थान, जगतगंज, वाराणसी (दिनांक 20.11.2019 से)

आवेदन पत्र की तिथि 15 नवम्बर, 2019 से 15 दिसम्बर, 2019 है।

उ. प्र. संस्कृत संस्थान की छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ऑनलाइन छात्रवृत्ति आवेदन पत्र मार्गदर्शक पुस्तिका यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें
छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने का नियमनिर्देश तथा आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
                             
                         ऑनलाइन छात्रवृत्ति आवेदन हेतु मार्गदर्शक पुस्तिका

पात्रता-
इस छात्रवृत्ति हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र को भरने के वे छात्र/छात्राएँ पात्र हैं, जो उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ के मान्यता प्राप्त विद्यालयों से पूर्व मध्यमा (प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) तथा उत्तर मध्यमा (प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) में नियमित नामांकित हैं तथा पूर्व कक्षा में न्यूनतम 60% अंक प्राप्त किये हैं। छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के पात्र हैं। न्यूनतम 60% अंक प्राप्त शेष कक्षाओं के छात्रों से ऑफलाइन आवेदन मांगे गये हैं, जिसकी सूचना इस गाइड के अंत में दी गयी है।
आवेदन पत्र भरने के लिए आवश्यक प्रपत्र
आवेदन पत्र भरने से पूर्व निम्नलिखित प्रपत्र का फोटो (JPEJ)  अपने कम्प्यूटर में सुरक्षित कर लें।
1. आवेदक का आवक्ष फोटो (आकार 200KB)  2. आवेदक का हस्ताक्षर (आकार 100 KB)
3. उत्तीर्ण कक्षा का अंक पत्र (आकार 500 KB) 4. छात्र प्रतियोगिता प्रमाण पत्र के फोटो  आकार 500 KB)
इस ऑनलाइन आवेदन पत्र को भरने के  कुल 8 चरण हैं।
1. पंजीकरण 2. लॉग इन 3. व्यक्तिगत विवरण 4. शैक्षिक विवरण 5. बैंक विवरण 6. प्रपत्र अपलोड 7. फार्म का सत्यापन 8. फार्म का प्रिंट।  इसमें 2 चरण पंजीकरण के लिए, 4 चरण आवेदन पत्र प्रपूरित करने के लिए तथा 1 चरण फार्म को प्रिंट करने के लिए है। फार्म का प्रिंट लेना आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। आप अपने पास फार्म भरने का साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए प्रिंट ले सकते हैं। इसे PDF में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
  अब आप उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की वेबसाइट http://upsanskritsansthanam.in/ के ऑनलाइन आवेदन मीनू बटन पर जायें। इसके ड्रॉप डाउन मीनू में से  छात्रवृत्ति आवेदन पत्र  का चयन कर लिंक पर क्लिक करें। इसपर क्लिक करते ही ऊपर एक बाक्स खुलकर आएगा, जिसमें लिखा होगा- आपको उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, की वेबसाइट से हस्तानांतरित किया जा रहा है और अब आप किसी बाहरी वेबसाइट http://103.50.212.87/scholership/ का कंटेंट देखेंगे।  इसके ok बटन पर क्लिक करते ही निम्नांकित रूप से स्क्रीन खुलेगी।

चित्र सं. 1

आवेदन पत्र के ऊपर दाहिनी तरफ लाल रंग के बटन में नियम निर्देश (छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित) एवं  उपयोगकर्ता पुस्तिका (फार्म भरने की गाइड) दी गई है। इसे स्क्रीन पर पढ़ा, डाउनलोड तथा प्रिंट किया जा सकता है। वहाँ क्लिक कर नियम निर्देश तथा उपयोगकर्ता पुस्तिका को ध्यान से पढ़ लें। यहाँ सबसे ऊपरी भाग में संस्थान का फोन नं. तथा ईमेल भी दिया गया है।
छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के लिए यहाँ सबसे पहले आपको पंजीकरण करना है। आप ऊपर दिये गये चित्र में देख रहे होंगें कि फार्म के नीचे में तीन विकल्प दिये गये हैं, जिनमें से पहला नया रजिस्ट्रेशन के लिए, दूसरा भूले हुए रजिस्ट्रेशन नंबर को दोबारा प्राप्त करने के लिए तथा तीसरा भूले हुए पासवर्ड को प्राप्त करने के लिए है। सर्वप्रथम आपको Login बटन के नीचे के पहले ऑप्शन छात्रवृत्ति के लिए यदि आपने पंजीकरण नहीं किया है तो यहाँ क्लिक करें वाले पहले विकल्प पर क्लिक करना है।  इसे क्लिक करने पर निम्नांकित रूप से फार्म खुलकर सामने आ जाएगा।
यह पंजीकरण करने के लिए मांगी गई जानकारियों का फार्म है। आपको इस ऑनलाइन छात्रवृत्ति फार्म के कुछ फील्ड में लाल रंग का तारा * दिख रहा होगा। जैसा कि पहला नाम, सरनेम आदि के आगे लगा है। यह तारा हमें बताता है कि उस फील्ड के लिए मांगी गई सूचनाएं अंकित करना अनिवार्य है। जिस फील्ड में लाल रंग का तारा नहीं लगाया गया है, उस फील्ड को भरना अनिवार्य नहीं है। जैसे - मध्य नाम।  आप उस फील्ड को छोड़ भी सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपना मध्य नाम अंकित नहीं करें। किसी के नाम को तीन भागों में लिखा जाता है तो किसी का दो भागों में। रमेश कुमार झा जैसे नाम के पहले नाम में रमेश, मध्य नाम में कुमार तथा सरनेम में झा लिखा जाता है। इस प्रकार के नाम वाले छात्र अपने मध्य नाम कुमार को अवश्य भरें। यदि किसी का नाम विना मध्य नाम वाला है जैसे-  रमेश झा । ऐसे छात्र मध्य नाम नहीं लिखें।
इसमें मध्य नाम तथा ईमेल के फील्ड को छोड़कर शेष सभी फील्ड को भरना अनिवार्य है। आपकी सहायता के लिए खाली फील्ड के नीचे निर्देश भी दिया गया है, जो फार्म भरने में आपकी सहायता करता है। आवेदन पत्र भरते समय उसकी सहायता प्राप्त करें। उन निर्देशों का अनुपालन करते हुए फार्म भरें।
अपना नाम तथा पिता का नाम भरने के बाद मोबाइल नंबर अंकित करें। इसी नं. पर एस. एम. एस. के द्वारा आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड मिलेगा। एक मोबाइल नंबर से अनेक रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड प्राप्त किये जा सकते हैं।
इसमें मांगी गई सारी जानकारियों को ध्यान से भरने के बाद नीचे दिए हुए कैप्चा कोड को जैसा दिखाया गया है, उसी रूप में लिखकर भर दें। इसके बाद नीचे Register बटन पर क्लिक करें। (यदि कैप्चा कोड समझ में नहीं आये तो बगल के लाल रंग के Reset बटन दबाकर नया कैप्चा कोड प्राप्त करें।) इसके बाद आपके द्वारा अंकित किए गए मोबाइल नंबर पर आपको अपना पञ्जीकरण संख्या और पासवर्ड मिलेगा तथा चित्र सं. 1 की तरह स्क्रीन पर लॉग इन स्क्रीन खुलकर सामने आएगा।
 अब इसमें आप अपने मोबाइल पर प्राप्त पंजीकरण संख्या के अंक को पंजीकरण संख्या के आगे के खाली स्थान पर भरें तथा इसी प्रकार से पासवर्ड को भी भर दें। इसके बाद नीचे दिया हुआ कैप्चा कोड को भरकर Login लिखे बटन को दबा दें।
नोट- इस पञ्जीकरण संख्या तथा पासवर्ड को किसी डायरी या अन्य स्थानों पर लिख कर भी रख लें, ताकि मोबाइल से पञ्जीकरण संख्या या पासवर्ड खो जाने पर इसका उपयोग किया जा सके। इस प्रकार आप अनावश्यक झंझट से बचे रह सकते हैं।  छात्रवृत्ति मिलने तक आपको इसकी बार-बार आवश्यकता होगी।
यदि आप पञ्जीकरण संख्या भूल जाते हैं तो क्या आप पञ्जीकरण संख्या भूल गए ? पुनः प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें पर क्लिक करें। यहाँ क्लिक करते ही निम्नांकित रूप से एक फॉर्म आपकी स्क्रीन पर खुलकर आएगा।
इसमें आप अपना पहला नाम, पिता का नाम, जिस नं. से पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड मिला था वह मोबाइल नं. भरते हुए कैप्चा कोड डालकर लॉग इन बटन दबाने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एस. एम. एस. के माध्यम से पुनः वही पञ्जीकरण संख्या भेज दी जाती है। आप यहाँ से लॉग इन करके आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। स्क्रीन पर भी आपका पञ्जीकरण संख्या सफलतापूर्वक आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया गया है सूचना प्रदर्शित होती है।
यदि आप किसी कारणवश पासवर्ड भूल जाते हैं तो पासवर्ड को दोबारा प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध है। पासवर्ड को दोबारा प्राप्त करने के लिए पिता का नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भरना होता है। इस प्रक्रिया को करने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर दोबारा पासवर्ड प्राप्त हो जाता है।
पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड प्राप्त होने के पश्चात् आप कभी भी लॉगआउट हो सकते हैं अर्थात् आगे फार्म भरना बंद कर सकते हैं। फार्म भरने के शेष बचे हुए कार्य को पूर्ण करने के लिए पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड अंकित कर आगे का फार्म भर सकते हैं। जब तक फार्म पूरी तरह भर नहीं जाए, बिना Logout हुए कंप्यूटर नहीं छोड़ें। ऐसा करने पर किसी अन्य के द्वारा गलत विवरण अंकित किया जा सकता है, जिससे आप छात्रवृत्ति पाने से वंचित रह सकते हैं । नीचे के चित्र में Logout बटन को गोलाकार में दिखाया गया है।
पञ्जीकरण के बाद 1.व्यक्तिगत विवरण भरने के लिए आपकी स्क्रीन इस प्रकार खुलकर सामने आएगी।



इस पृष्ठ में नाम, पिता का नाम तथा मोबाइल नं. भरा हुआ दिख रहा होगा क्योंकि आप इसके पहले इन सूचनाओं को भर चुके हैं। शेष खाली पड़े फील्ड के नीचे दिये गये निर्देश के अनुसार फार्म भरें। पूर्व में भरा जा चुका फील्ड को पुनः भरने से रोकने के लिए कर्सर का आकार लाल गोलाकार हो जाता है। आपकी सुविधा के लिए जिला का नाम अकारादि क्रम में लगाकर ड्राप डाउन मीनू दे दिया गया है। मांगी गई सारी जानकारियां भरने के बाद नीचे दिए हुए कैप्चा कोड को ध्यान से भरें और फिर सुरक्षित करें बटन पर क्लिक करें। कैप्चा कोड भरने में परेशानी आने पर कोड पर क्लिक कर दूसरा कोड प्राप्त कर लें।
सुरक्षित करें बटन दबाते ही अब आप देखेंगें कि फार्म के ऊपर में दिया गया 1 व्यक्तिगत विवरण का बटन हरा हो गया। इसका अर्थ है कि व्यक्तिगत विवरण वाला पृष्ठ सफलतापूर्वक भरा जा चुका है। आप जैसे-जैसे फार्म भरते जाते हैं, ऊपर का वह बटन हरा होता हुआ चला जाता है। हरे बटन पर क्लिक करने पर उसके फील्ड पर जाया जा सकता है।
इसके बाद नीचे दिए गए फार्म के अनुसार एक नया फार्म शैक्षिक जानकारी भरने के लिए स्क्रीन खुलेगी, जो इस प्रकार दिखेगी-
उत्तीर्ण कक्षा का नाम* वाले मीनू में कुल 4 कक्षाओं प्रथमा, पूर्वमध्यमा ( प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) तथा उत्तर मध्यमा (प्रथम वर्ष) का नाम दिया गया है। इन कक्षाओं में न्यूनतम 60% अंक से उत्तीर्ण छात्र छात्राएं छात्रवृत्ति का आवेदन पत्र भरने के पात्र हैं। यह छात्रवृत्ति शैक्षिक वर्ष 2019 – 20 में उत्तीर्ण विद्यार्थियो को ही दी जानी है अतः 2019 – 20 भरा हुआ मिलेगा। प्राप्तांक* भरते ही मार्कशीट का प्रतिशत* फील्ड स्वतः भर जाता है। उत्तीर्ण कक्षा के स्कूल का नाम* वाले फील्ड में आपने शैक्षिक वर्ष 2019 – 20 में जिस विद्यालय से उत्तीर्ण  किया है, उस विद्यालय का नाम लिखें। यहाँ तक आपका पिछला रिकार्ड का विवरण था। सत्र 2019-20 में विभिन्न कक्षाओं में नामांकित एवं अध्यनरत छात्र/छात्राओं का विवरण आगे के फील्ड में भरें। यदि आप सत्र 2019-20 में किसी अन्य विद्यालय से आकर वर्तमान विद्यालय में नामांकन कराया है तो स्थानांतरण प्रमाण पत्र नंबर तथा स्थानांतरण प्रमाण पत्र की तिथि वाले फील्ड को भरे जाने की आवश्यकता है। यदि आप गत सत्र में भी वर्तमान विद्यालय के ही छात्र रहे हैं तो एस फील्ड को रिक्त छोड़ दें। इसी प्रकार छात्र प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागिता प्रमाण पत्र* वाले मीनू बटन में से सही सूचना का चयन कर भरें। यहाँ आप जिस सूचना को भरते हैं साक्ष्य के लिए आगे उसका फोटो अपलोड करना होगा। कक्षा, जिसमें छात्र/छात्रा अध्ययनरत है* में उत्तीर्ण कक्षा के आगे की कक्षा का नाम ही स्वीकार करेगा।
पंजीयन क्रमांक*  तथा कक्षा में प्रवेश की तिथि* का विवरण यदि आपको ज्ञात नहीं हो तो अपने प्रधानाचार्य से पूछकर सही- सही भरें। भविष्य में आपके नामांकन की पुष्टि करायी जा सकती है।
नामांकित विद्यालय का नाम एवं पता* में पूर्व में भरे गये जनपद नाम के विद्यालयों का नाम खुलकर आता है। इस सूची में यदि आपके वर्तमान विद्यालय का नाम नहीं हो तथा यदि आपका विद्यालय उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ से मान्यता प्राप्त हो तो अन्य का चयन करें। ऐसा करते ही इस फील्ड के आगे एक अन्य फील्ड खुलकर आएगा। उसमें अपने विद्यालय का नाम एवं पता का विवरण अंकित कर दें।
 इस प्रकार सभी जानकारियां ध्यान से भरने के बाद नीचे दिया हुआ कैप्चा कोड भर के सुरक्षित करें वाली बटन को क्लिक करें। आवेदन पत्र के हर पेज के नीचे कैप्चा कोड लगाया गया है।
अब इसके बाद बैंक डिटेल भरने का स्क्रीन आपके सामने खुलकर आएगा, जो कि निम्नांकित रूप में खुलेगी-
 इसमें आई एफ एस कोड वाले फील्ड को भरने पर बैंक का नाम तथा बैंक शाखा का नाम अपने आप ही भर जाता है अतः आप एफ एस कोड फील्ड को ध्यान से भरें। आई एफ एस कोड सही भरने पर भी यदि बैंक का नाम तथा शाखा का नाम स्वतः भरकर नहीं आता है तब आप सावधानीपूर्वक बैंक का नाम तथा बैंक खाता के नाम वाले फील्ड को भर दें। यह छात्रवृत्ति सीधे छात्र/ छात्रा के खाते में जाएगी अतः आपका अपने नाम से बैंक में बचत खाता होना चाहिए। यदि आपने अभी तक अपना बैंक में खाता नहीं खुल पाया है तो Logout कर लेँ तथा बैंक में स्वयं का अथवा संयुक्त खाता खुलवा कर पुनः Login करते हुए (इस लिंक पर आकर पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड भरकर लॉगिन हो जाएं) तथा शेष बचे हुए फार्म को भरें।
बैंक की सारी जानकारी अपनी पासबुक से मिलान करते हुए ध्यानपूर्वक भर दें। उसके बाद मैं प्रमाणित करता हूं लिखे हुए वाक्य के पहले बने छोटी चौकोर खाने में सही का निशान बन जाने दे। कैप्चा कोड भरकर सुरक्षित करें बटन को दबाए। अब आपकी स्क्रीन पर फोटो, हस्ताक्षर, अंक पत्र आदि अपलोड करने के लिए निम्नांकित रूप में खुलकर सामने आएगी।
आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं को सलाह दी जाती है कि इस फील्ड को भरने के पहले अपने कंप्यूटर या मोबाइल में अपना आवक्ष फोटो (200kb), हस्ताक्षर साइज (100 केबी), अंकपत्र (साइज 500) केबी और यदि आपने किसी प्रतियोगिता में भाग लिया हो तो उसके प्रमाण पत्र का फोटो (साइज 500 केबी) जेपीजी में बनाकर अपने कंप्यूटर या मोबाइल में सुरक्षित कर लें। सभी फाइल का नाम अपने नाम से कर लें। तदनन्तर फार्म भरें।
संस्कृत की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किये छात्र उसका प्रमाण पत्र अपलोड करें। जिसने संस्कृत की प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं किया वे इसे छोड़ दें। अंकपत्र का फोटो अपलोड करते समय सुनिश्चित कर लें कि फोटो में इसे कोई भी आसानी से पढ़ सकता है। धुंधला तस्वीर वाला अंक पत्र अपलोड नहीं करें, अन्यथा आपका आवेदन निरस्त हो जाएगा। प्रपत्रों का अपलोड होना आपके इंटरनेट की स्पीड पर निर्भर करता है। इंटरनेट की स्पीड के कारण इसमें कम या अधिक समय लग सकता है, अतः सुरक्षित करें बटन दबाने के पश्चात् कुछ समय तक प्रतीक्षा करें। नेट स्पीड धीमी होने की स्थिति में आपको यह प्रक्रिया बार-बार करनी पड़ सकती है।
अपलोड करते समय ध्यान रखें कि फोटो, हस्ताक्षर, अंक पत्र एवं प्रमाण पत्र के फोटो का साइज निर्धारित केबी से अधिक नहीं होना चाहिए। यह साफ्टवेयर अधिक साइज के फोटो को स्वीकार नहीं करेगा। मैंने मार्कशीट 500 केबी से अधिक साइज का अपलोड कर दिया था। फार्म के ऊपर The mark sheet may not be greater than 500 kilobytes. सन्देश मिला। मैंने मार्कशीट का साइज 500 किलोबाइट का कम किया तब मेरा फार्म भरा जाना पूर्ण हुआ ।
अपलोड करने के लिए Choose file पर क्लिक करें और प्रपत्र अपलोड कर लें फिर कैप्चा भरकर सुरक्षित करें बटन को दबाकर अपलोड की प्रक्रिया पूरी करें।
 आप अब तक संपूर्ण आवेदन पत्र को भर चुके हैं। इसके बाद आपका फार्म सत्यापित करने के लिए निम्न रूप में खुलेगा।


इस आवेदन पत्र को प्रिंट लेकर भी जांचा जा सकता है कि आवेदन भरने में कहीं कोई त्रुटि तो नहीं रह गयी?
अतः फार्म के नीचे लाल रंग का प्रिंट का जांच करें बटन दिया गया है। आप प्रिंट लेकर अथवा स्क्रीन पर ही भली भाँति पढ़ने के पश्चात् यदि कहीं संशोधन करना अपेक्षित हो तो उसमें संशोधन कर लें। अंत में कैप्चा कोड डालकर सत्यापित करें बटन पर क्लिक करें।
 सत्यापित करें  बटन पर क्लिक करते ही एक नया पृष्ठ खुलकर आता है । इसके नीचे लिखा होगा आपका फार्म सफलतापूर्वक भरा गया। अब आप का फार्म पूरी तरह से भरा जा चुका है। अब ऊपर चल रही हरी पट्टियों में जहां लिखा है प्रिंट पंजीकरण पर्ची उस पर क्लिक करें। इससे आपका भरा हुआ फार्म निम्नांकित रूप में प्रिंट होने के लिए नये विंडो में खुलेगा।
इसे प्रिंट कर अपने पास सुरक्षित रख लें। इसमें आप द्वारा दर्ज की गई सभी सूचनाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध है। अंत में Logout बटन पर क्लिक कर  Logout हो जायें। भविष्य में पंजीकरण क्रमांक तथा पासवर्ड से Login कर सकते हैं।

नोट-  प्रथमा (प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, तृतीय वर्ष) तथा माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड को छोड़कर किसी अन्य बोर्ड की कक्षा 8 से उत्तीर्ण कर पूर्व मध्यमा प्रथम वर्ष में नियमित अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से कागज पर आवेदन पत्र स्वीकार किये जायेंगें। ऐसे छात्र-छात्राओं से आवेदन पाने के लिए विद्यालयों में डाक द्वारा मुद्रित फार्म तथा नियम निर्देश भेज दिया गया है। यदि किसी छात्र/ छात्रा या विद्यालय को मुद्रित फार्म नहीं मिल सका हो तो वे संस्थान की वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। कागज पर छपे आवेदन पत्र को ठीक से भरकर अपने प्रधानाचार्य से अंकपत्र सत्यापित कराकर निदेशक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पते पर निर्धारित तिथि के पूर्व अवश्य ही भेज दें। प्रथमा द्वितीय वर्ष तथा तृतीय वर्ष के अंक पत्र के स्थान पर विद्यालय द्वारा निर्मित परीक्षाफल पंजिका की सत्यापित प्रति मान्य होगी। मुद्रित फार्म को हाथों-हाथ भी जमा किया जा सकता है  

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2019

बच्चों की शिक्षा के लिए उपयोगी youtube चैनल


अधोलिखित लिंक पर अंग्रेजी के माध्यम से कारक की जानकारी उपलब्ध है।
https://www.youtube.com/channel/UC40htyARBYpi4gwDNaATUMA/featured

Eiglewings Educational Institute नामक इस चैनल में अंग्रेजी में Spoken English Class on Youtube | Daily Use English Speaking, maths आदि दिये गये हैं। Summer Camp Videsos बच्चों को खेल खेल में शिक्षा प्रदान करता है।
https://www.youtube.com/channel/UCsYpffTIU6QPek6eFKX0pRQ

अधोलिखित यूट्यूब लिंक में संस्कृत में फलों,पशुओं, पक्षियों, शरीर के अंगों, संख्यावाची शब्दों आदि के नाम चलचित्र के माध्यम से दिखाये गये हैं। आपसी सम्वाद, गीत, खेल खेल में संस्कृत, वर्णोच्चारण शिक्षण इसे रूचिकर बनाता है। https://www.youtube.com/channel/UCU1AsjB6rFJ7VgnociHSS0Q/video

अधोलिखित लिंक पर गीता द्वारा संस्कृत तथा व्याकरण के कुछ अंश दिये गये हैं। यह लिंक https://sanskrit.today/ से जुडा हुआ है।

https://www.youtube.com/c/SanskritToday?sub_confirmation=1

शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2019

URL को छोटा करने का तरीका


हाल फिलहाल मैंने एक विज्ञापन में लम्बे यूआरएल को देखा तो सिर चक्कर काट गया, लगभग 3 पंक्तियों का यूआरएल। विज्ञापन में अधिक खर्च तो हुआ ही, साथ में उपयोगकर्ताओं के लिए भी यह मुश्किल भरा रहा होगा। वैसे भी मैं जिस संस्कृत क्षेत्र से हूँ यहाँ ई- साक्षरता दर बहुत ही कम है। ऐसे लोगों के लिए पेश है किसी भी यूआरएल को संक्षेप करने का तरीका-
यूआरएल संक्षेपीकरण का अनेक लाभ है। छोटे URL को याद रखना या share करना आसान होता है। उसे देखकर आसानी से टाइप किया जा सकता है। इस संक्षिप्त किया गया URL या लिंक को जब browser पर लिखा या past किया जाता है तब वह browser की सहायता से बड़े URL तक पहुंचाता है। इस प्रक्रिया को redirect कहते है।
किसी भी URL को छोटा करने का तरीका-
आप जिस URL को छोटा बनाना चाहते हैं उसे कॉपी कर ले। इसके बाद आप https://bitly.com/ को खोलें।
 यहां आपको यूआरएल SHORTEN URL का वाक्स दिखाई देगा। इस box में अपना यूआरएल / लिंक past करे, जिसे आप छोटा करना चाहते हैं। अब SHORTEN URL ऑप्शन पर click करे । Shorten URL पर क्लिक करने के बाद उसके आगे तथा ऊपर में आपके original URL का short यूआरएल दिखाई देगा होगा।
short URL के आगे Copy पर क्लिक करके इसे copy कर ले,
इसे कॉपी करके आप कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पर क्लिक करने पर वहीं पेज खुलेगा जो आप चाहते हैं।
https://bitly.com/ की सहायता से मैंने https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSegk1-X6jyW6vzGjymxQ4qXvLSOFfPrgZEHI3_Mdy_4hGo0Dg/viewform  इस लिंक को https://bit.ly/2VyWuz2 इतना छोटा बना लिया।

twitter जैसे सोशल मीडिया तथा अन्य अनेक स्थानों पर तय शब्दों की सीमा में ही हमें अपनी बात लिखनी होती है। ऐसे स्थान के लिए शार्टनर साइट काफी मददगार होते हैं। आईये जानते हैं कि और कौन- कौन अन्य साइट हैं जिसकी मदद से किसी URL को छोटा बनाया जा सकता है। twitter http://t.co  की सुविधा देता है।

रविवार, 18 अगस्त 2019

बन्दी नहीं, नियुक्ति है समाधान


इलाहाबाद के दैनिक समाचार पत्र हिंदुस्तान में यह समाचार छपते ही कुछ सजग संस्कृत प्रेमियों के बीच आक्रोश का उबाल आ गया। ऐसा नहीं है कि ऐसा आदेश केवल संस्कृत विद्यालय के लिए ही जारी हुआ है, चुंकि समाचार पत्र में संस्कृत विद्यालय के बारे में समाचार छप गया इसीलिए यह हमारा ध्यान आकर्षित कर गया। यू. पी. बोर्ड तथा बेसिक शिक्षा के अध्यापकों का स्थानान्तरण हो जाता है अतः वहाँ पर बन्द होने वाले स्कूल का असर और चिन्ता वहाँ के अध्यापकों को कम ही होती है।
 सरकार चाहती है कि विद्यालयों को रिफॉर्म किया जाए। जहां छात्र नहीं है, उसे बंद कर दिया जाए। इसके लिए कुछ लोग अपनी छाती पीटने लगे। दुर्भाग्य यह भी है कि संस्कृत समुदाय के लोग भी इसके लिए आवाज उठाने में या तो डरते हैं या हमेशा की तरह निष्क्रिय है । यहाँ समस्या से मुकाबला करने के बजाय अधिकांश आबादी चैन की नींद सो रही है। कुछ पीठ पीछे कर भाग रहे हैं। अंगुलि पर गिने जा सकने भर लोग यहाँ वहाँ उछल कूद कर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।  ( हाय-तौबा मचाने वाले की संख्या मुट्ठी भर है फिर भी इनका छाती पीटना मुझे अच्छा लगा)
उत्तर प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक के परम्परागत संस्कृत छात्रों की प्रथमा, पूर्व मध्यमा तथा उत्तर मध्यमा की परीक्षा कराने के लिए सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से अलग कर उ0प्र0 माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, शाहमीना रोड, लखनऊ का गठन राज्य सरकार की अधिसूचना संख्या 102 सा0/15/09/2001-25 (72)/96 दिनाँकः 17/02/2001 द्वारा किया गया। यह संस्कृत भवन, 2 शाहमीना रोड, लखनऊ २२६ ००३ पर अवस्थित है। माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद् में नए संस्कृत विद्यालय खोलने के इच्छुक लोग अक्सर मिलते रहते हैं । मैं उनसे एक ही प्रश्न पूछता हूं, आप विद्यालय क्यों खोलना चाहते हैं? वे कहते हैं मेरे यहां संस्कृत विद्यालय नहीं है। मैं लोगों को संस्कृत बढ़ाना चाहता हूं। मैं पूछता हूं आपके खोले जाने वाले विद्यालय से कितनी दूरी पर संस्कृत विद्यालय है तो अक्सर लोग 10 से 20 किलोमीटर की दूरी बताते हैं। जिन्हें नहीं पता होता है, उन्हें मैं बता देता हूं। मैं पुनः पूछता हूं कि आप की अभिरुचि लोगों को संस्कृत पढ़ाने में है अथवा विद्यालय खोलने में है? यदि लोगों को संस्कृत पढ़ाने में है तो उन्हीं विद्यालयों में नामांकन क्यों नहीं करा देते? छात्रों को अपनी ओर से सुविधाएं क्यों नहीं देते? यदि आपकी इच्छा संस्कृत की सेवा है तो वर्तमान विद्यालय को ही मजबूत कीजिए क्योंकि वही दुर्दशा ग्रस्त है। आपके यहां 10 किलोमीटर से लोग आएंगे भी नहीं। स्थानीय इतने बच्चे मिलते भी नहीं। इससे अच्छा होगा कि आप दूसरे विद्यालय में आवासीय व्यवस्था करा दें। मेरे प्रश्नों का लोग समुचित उत्तर नहीं दे पाते और अक्सर चुप हो जाते हैं। दरअसल संस्कृत विद्यालय खोलने और चलाने के पीछे कुछ और ही लक्ष्य निर्धारित होता है जिसमें संस्कृत सेवा नहीं बल्कि स्वयं की सेवा की सोच होती है। मैं कई बार लिख चुका हूं कि एक-एक व्यक्ति कई विद्यालयों का प्रबंधक बन बैठा है जिससे उसे सुधारना भी मुश्किल हो गया है।
तर्क दिया जा रहा है कि
1- बन्दी नहीं नियुक्ति आवश्यक है ।
2- पहले शिक्षक दीजिये , फिर विद्यालयों को व्यवस्थित कीजिये ।
3- 1994 से यदि संस्थान में शिक्षक नहीं है तो सभी सरकारें दोषी हैं । पर आप तो पहल कीजिए ।
4- नियुक्तियों में यदि विसंगतियां हैं उन्हें तत्काल ठीक करें ।
5- वर्षों से बिना वित्तीय मदद के चल रहे विद्यालयों को बन्द करने का विचार तुरन्त वापस लें ।
6- जब माध्यमिक में ही नियुक्ति नहीं , छात्र नहीं तो क्या आप भविष्य में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय भी बन्द करेंगे , यह सोच भी खतरनाक है ।
7- विद्यालयों को वर्षों से खण्डहर बनाकर रखा है, किसी ने मदद नहीं की, अब उन्हें अभिशाप नहीं, अनुदान दीजिये ।
8- जब प्रदेश में लाखों प्राथमिक विद्यालय चल सकते हैं जिनकी दशा किसी से छिपी नहीं , हजारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्तियां हो सकती हैं तब बचे खुचे संस्कृत विद्यालयों को बन्द करना अस्वीकार्य है ।
संस्कृत सप्ताह की शुभकामना भी और यह निर्णय भी दोनों एकसाथ उचित नहीं ।
इन सभी तर्कों में लेकिन लगा हुआ है विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति कर देने मात्र से छात्र संख्या बढ़ जाएगी इसकी संभावना नगण्य है हम लोग प्रायः समाचार पत्रों में यह खबर पढ़ते रहते हैं कि इंटर कॉलेज में पर्याप्त अध्यापकों के रहते भी छात्र नहीं है इसके पीछे कुछ और कारण है। उन कारणों पर भी विचार करना होगा। जिस इंटर कॉलेज में संस्कृत के अध्यापक हैं भी वहां के छात्र संस्कृत पढ़ना ही नहीं चाह रहे हैं। मानविकी के ऐसे तमाम विषय हैं जहां छात्रों का टोटा बना हुआ है, जबकि वहां अध्यापक भी हैं और सभी प्रकार के संसाधन भी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन विषयों को पढ़ने के बाद रोजगार के उतने अवसर उपलब्ध नहीं है जितने की विज्ञान, वाणिज्य,कानून आदि विषयों को पढ़ने के बाद।
यदि आप केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की लोक सेवा आयोग तथा विभिन्न एजेंसियों द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान दें तो आप पाएंगे कि सिविल सेवा परीक्षा में अधिकांश इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र के बच्चों का चयन होने लगा है। बैंकिंग सेक्टर में भी बीटेक किये छात्र की संख्या में इजाफा देखी जा रही है। आज जब हिंदी माध्यम के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में अपर्याप्त मात्रा में चयनित हो पा रहे हैं तो संस्कृत की स्थिति दूर की कौड़ी है। यह इसलिए क्योंकि हम अपने पाठ्यक्रम में सुधार करना नहीं चाहते । शिक्षण पद्धति में बदलाव लाना नहीं चाहते। स्वयं को रिफॉर्म नहीं करना चाहते। आप जानते होंगे कि हिंदी में करंट अफेयर्स कंटेंट का भारी अकाल रहता है। संस्कृत में तो है ही नहीं फिर प्रतियोगी परीक्षा में छात्र सफल होंगे तो कैसे? मैंने आज से 4 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के परंपरागत माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन का खाका खींचा था, वह अब लागू होने के कगार पर है। इस पाठ्यक्रम मैं हम बुर्ज खलीफा के बारे में नहीं पढ़ा सकते। ट्रेन 18 के बारे में नहीं बता सकते। यहां कालिदास पढ़ाये जाएंगे जबकि प्रतियोगी परीक्षा में समसामयिक विषयों के प्रश्न पूछे जायेंगे ।
रिफॉर्म करने के लिए जिंदगी लगानी हीं पड़ती है। माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद् कि अपनी वेबसाइट नहीं थी मैंने इसके पीछे लग कर उसका वेबसाइट बनवाया आज उसका फायदा सभी लोगों को मिल पा रहा है। यद्यपि मैं वहां का शिक्षक नहीं हूं फिर भी संस्कृत के हित के लिए काम करना पड़ता है। यदि जागरूक रहते हुए एक एक व्यक्ति एक एक कदम भी सुधारात्मक काम किया होता तो आज यह मुंह देखने को नहीं मिलता। आज से 2 माह पहले 200 से अधिक संस्कृत के शिक्षक जुटे थे जिसमें से 5 अध्यापक ऐसे नहीं मिल पाए जिन्होंने अपने जीवन काल में संस्कृत की कोई कुंजी भी लिखी हो अब आप उनकी शैक्षिक यात्रा से अवगत हो चुके होंगे। लोग तो बस झोला उठाकर सरकार की नौकरी करने चले आए। यदि संकटग्रस्त भाषा संस्कृत को बचाना है तो यहां यह सब नहीं चल पाएगा आप भी मिटेंगे और संस्कृत भी मिट जाएगी।
आवश्यकता इस बात की है कि हर एक अध्यापक को अपनी उपलब्धि दिखाने के लिए कुछ होना चाहिए। उन्हें अध्ययन शील होना चाहिए और बाल्मीकि की तरह लव कुश को पढ़ाना चाहिए। वही लव कुश आज अश्वमेध का घोड़ा रोक लिया होता।
 जो लोग संस्कृत शिक्षा से जुड़े हैं वे बैठकर एक बार सोचें कि उन्होंने जनता को दिखाने लायक क्या काम किया और उनकी अब तक की उपलब्धि क्या रही है। निष्कर्ष स्वयं सामने आ जाएगा।

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

संस्कृत प्रतियोगिता, उत्तर प्रदेश


 उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान (भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन) द्वारा वित्तीय वर्ष 2019 -20 में उत्तर प्रदेश में संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संवर्द्धन एवं संरक्षण के लिए तथा छात्रों की अन्तर्निहित शक्तियों के सर्वांगीण विकास का उद्देश्य मानते हुए एवं संस्कृत भाषा के प्रति अनुराग उत्पन्न करने के उद्देश्य से ‘संस्कृत छात्र प्रतियोगिताओं’ का आयोजन जनपदस्तर, मण्डलस्तर एवं  राज्यस्तर पर किया जा रहा है।

➯ मुख्य बिन्दु-

संस्कृत प्रतियोगिताओं की कुल संख्या 4 हैं -

1. संस्कृत गीत प्रतियोगिता          2. संस्कृत नाटक प्रतियोगिता
3. आशुभाषण प्रतियोगिता          4. श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता

प्रतियोगिताओं में  कक्षा 06 से 12 तक समकक्षता प्रथमा कक्षा से  लेकर उत्तर मध्यमा कक्षा तक की कक्षाओं के छात्र / छात्रायें  प्रतिभाग कर सकते है:-

                         पुरस्कार राशि का विवरण

➯ मण्डल स्तरीय प्रतियोगिताओं की पुरस्कार राशि का विवरण

क्र.सं.     प्रतियोगिता       कक्षा 6 से 12 तक / कक्षा प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक
                                        प्रथम   द्वितीय   तृतीय         
1. संस्कृत नाटक प्रतियोगिता  5000   2500   1250   
2. आशुभाषण प्रतियोगिता      800     600      400     
3. संस्कृत गीत प्रतियोगिता     800     600      400     
4. श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता 800     600       400    

➯ राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की पुरस्कार राशि का विवरण

क्र.सं.   प्रतियोगिता    कक्षा 6 से 12 तक /कक्षा प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक
                                   प्रथम         द्वितीय      तृतीय                
1.संस्कृत नाटक प्रतियोगिता  40,000  30,000   20,000        
2.आशुभाषण प्रतियोगिता     8,000     6,000    4,000             
3. संस्कृत गीत प्रतियोगिता    8,000    6,000    4,000            
4. श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता 8,000    6,000    4,000  

राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का दिनांक एवं स्थान-

दिनांक- 13 एवं 14 अक्टूबर,2019 स्थान-  लखनऊ

➯ जनपदस्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल/छात्र एवं छात्रायें ही मण्डलस्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकेंगे। 
➯ जनपद स्तर की प्रति मण्डल स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने की अनुमति प्राप्त करने मात्र के लिए ही आयोजित होगी।
 मण्डलस्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त दल/छात्र/छात्रायें राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने हेतु अर्ह होगा।


समस्त प्रतियोगिताओं हेतु सामान्य नियम:-

1. जनपदस्तरमण्डलस्तर एवं राज्यस्तर पर उपर्युक्त चार प्रतियोगितायें आयोजित की जायेंगी। 
2. इन प्रतियोगिताओं में उ0प्र0 के सभी शासकीय/अशासकीय/प्राइवेट जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल, इण्टर कॉलेज, पब्लिक स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, विद्यामन्दिर, गुरुकुल, संगीत विद्यालय, संस्कृत विद्यालय के छात्र/छात्रायें प्रतिभाग करेंगे।
3. सभी मण्डलों के विद्यालय, आवेदन पत्र एवं नियमावली जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय/मण्डल संयोजक से प्राप्त कर सकते हैं अथवा संस्थान की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।
4. जनपदस्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु आवेदन पत्र में छात्र/छात्राओं के नाम, फोटो आदि विवरण निर्धारित संलग्न PDF प्रपत्र (पृष्ठ सं. 09 के अनुसार) पर भरकर संस्था प्रमुख से प्रमाणित कराकर जनपद स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित कराने वाले आयोजक संस्था के पास प्रतियोगिता के दो दिन पूर्व जमा करेंगे। प्रत्येक प्रतियोगिता के लिये अलग-अलग आवेदन पत्र फोटो कॉपी करके या टंकण करके भेजेंगे। विशेष परिस्थितियों में हाथ से भी लिखकर भेज सकते हैं।
5. जनपदस्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल/छात्र एवं छात्रायें ही मण्डलस्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकेंगे। जनपद स्तर की प्रतियोगिता का उद्देश्य मण्डल स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने की अनुमति प्राप्त करने मात्र के लिए ही आयोजित होगी।
6. मण्डल संयोजक मण्डलस्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान विजेता दल/छात्र/छात्राओं के आवेदन पत्रों को उपनिरीक्षक संस्कृत पाठशालाऐं से तथा स्वयं हस्ताक्षर करने के बाद ही  छात्र/छात्राओं को राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करायेंगे।
7. मण्डलस्तरीय एवं राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं नकद पुरस्कार राशि संलग्न सूची के अनुसार दी जायेगी।
8. सभी चार प्रतिभागियों के निर्णायक संस्कृत विषय के सेवारत/सेवानिवृत्त शिक्षक होंगे। संस्कृत शिक्षक की अनुपलब्धता पर संस्कृत के ज्ञाता भाषाशिक्षक को भी निर्णायक बनाया जा सकता है तथा संस्कृत नाटक के एक निर्णायक नाट्य कला के विशेषज्ञ भी हो सकते हैं।
9. किसी भी प्रतियोगिता में मण्डल संयोजक निर्णायक नहीं होंगे तथा जिस विद्यालय के प्रतिभागी जिस प्रतियोगिता में भाग लेंगे उस विद्यालय के शिक्षक उस प्रतियोगिता में निर्णायक नहीं होंगे।
10. जनपदस्तरीय प्रतियोगिता में छात्र/छात्राओं को प्रतिभाग कराने के लिए संस्था प्रमुख जिला विद्यालय निरीक्षक/मण्डल संयोजक को प्रतियोगिता की तिथि से कम से कम 5 दिन पूर्व समस्त प्रतिभागियों का विवरण छायाचित्र के साथ अपने हस्ताक्षर करके सौंप देना होगा। प्रतियोगिता से दो दिन पूर्व मण्डल संयोजक, समस्त प्रतिभागियों के आवेदन को संकलित कर जिला विद्यालय निरीक्षक के सहयोग से किसी विद्यालय में प्रतियोगिता करा सकेंगे। जिला स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित कराने के लिए संस्थान द्वारा धनराषि देय नहीं होगी।
11. मण्डल स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन हेतु आयोजक विद्यालय/संस्था को उ0प्र0 संस्कृत संस्थान की ओर से रूपये 10,000/- मात्र दिया जायेगा। प्रतियोगिता के आयोजन के तुरन्त बाद आयोजक संस्था प्रत्येक बिल बाउचर को प्रमाणित कर मण्डल संयोजक के माध्यम से/डाक द्वारा उ0प्र0 संस्कृत संस्थान को उपलब्ध करायेंगे।
12. कोई भी विद्यालय गत वर्षों में स्वयं द्वारा प्रदर्शित संस्कृत नाटक,  एकल गान की पुनरावृत्ति नहीं करेगा। किसी भी स्तर पर पुनरावृत्ति सिद्ध होने पर प्रविष्टि निरस्त कर प्रदत्त पुरस्कार वापस ले लिया जाएगा।
13. जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सभी संस्थाऐं छात्र/छात्राओं के यात्रा व्यय, आवास एवं भोजन आदि की व्यवस्था अपने स्तर से करेंगे।
14. जनपद स्तरीय, मण्डल स्तरीय एवं राज्य स्तरीय सभी प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी छात्र/छात्राओं की सुरक्षा, अनुशासन, आवागमन व उनकी वस्तुओं की सुरक्षा का दायित्व सम्बद्ध संस्थाओं का होगा।
15. राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को संस्थान के नियमानुसार यात्रा व्यय प्रदान किया जाएगा तथा भोजन व आवास की व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त अन्य धनराशि देय नहीं होगी।
16. सभी प्रतियोगिताएं मण्डल संयोजक, राज्य संयोजक तथा सम्बद्ध अधिकारियों के निर्देशन में सम्पन्न होगी तथा उनके निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। किसी भी अनुशासन हीनता की स्थिति में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
17. राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं को सम्पन्न कराने हेतु मण्डल संयोजक प्रतियोगिता सम्पन्न होने के तत्काल बाद प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों की सूची राज्य संयोजक/उ0प्र0 संस्कृत संस्थान, लखनऊ को उपलब्ध करा देंगे, जिससे प्रतियोगिताएं यथासमय सम्पन्न हो सके।
18. विशेष परिस्थितियों में जनपद मण्डल प्रतियोगिताओं की तिथि परिवर्तन अध्यक्ष उ0प्र0 संस्कृत संस्थान की अनुमति से सम्भव होगा।
प्रतियोगिताओं के अनिवार्य नियम
1. जिला स्तर पर चयनित प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी ही मण्डल की प्रतियोगिताओं में तथा मण्डल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी ही राज्यस्तर पर प्रतिभाग करेंगे।
2. सभी चार प्रतियोगिता के मूल्यांकन में निर्धारित समय, संख्या अथवा अन्य नियमों का अतिक्रमण करने पर प्रभाव के अंकों  में न्यूनता की जायेगी।
3. एक प्रतिभागी अधिकतम 02 प्रतियोगिताओं में ही प्रतिभाग कर सकता है।
4. केवल संस्कृत नाटक प्रतियोगिता में ही सी.डी./ऑडियो कैसेट एवं इलैक्ट्रानिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग कर सकते हैं। इन वस्तुओं का उपयोग केवल सहयोगी सामग्री के रूप में ही की जा सकेगी।
5. सभी प्रतियोगितायें पूर्णरूप से संस्कृत भाषा में ही होंगी। प्रतियोगिता के विषय भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं राष्ट्रीय एकता को पुष्ट करने वाले होने चाहिये तथा प्रतियोगिताओं में किसी भी प्रकार का राष्ट्रविरोध, व्यक्तिविशेष विरोध या राजनैतिक आक्षेप प्रदर्शित करना सर्वथा निषिद्ध है।
6. संस्कृत नाटक प्रतियोगिताओं में सावधानीपूर्वक सूक्ष्म यज्ञ प्रदर्शन के अतिरिक्त अत्यन्त ज्वलनशील पदार्थ, धारदार हथियार या नुकसानदेह वस्तुओं का प्रयोग करना वर्जित है।
7. प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रतिभागी को वेशभूषा, श्रृंगारसामग्री, वाद्ययन्त्र व अन्य व्यवस्थायें स्वयं करनी होगी।
8. प्रतियोगिता की सफलता एवं प्रतिभासम्पन्न छात्रों का सम्मान निर्णायक की योग्यता, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा पर ही निर्भर है। अतः निर्णायक प्रतियोगिता के नियमानुसार न्यायोचित निर्णय लें।
9. जनपद एवं मण्डल स्तर की प्रतियोगिताओं का परिणाम 02 निर्णायकों द्वारा प्रदत्त अंकों के योग के आधार पर तथा राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं का परिणाम 03 निर्णायकों के द्वारा प्रदत्त अंको के योग के आधार पर किया जायेगा। निर्णायकों का निर्णय सर्वमान्य एवं अन्तिम होगा।
10. श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में निर्धारित ग्रन्थों से अनुष्टुप्छन्द के श्लोकों को छोड़कर अन्य छन्दों के श्लोंकों के आधार पर आयोजित होगी। विषेष परिस्थिति में प्रतियोगिता के शीघ्र निर्णय हेतु निर्णायक अनुष्टुप्छन्द के आधार पर प्रतियोगिता का संचालन कर सकेंगे। इस प्रतियोगिता में साहित्य, व्याकरण तथा ज्योतिष विषयों के विषेषज्ञों को निर्णायक के रूप में रखा जाये।
11. मण्डल संयोजक एवं निर्णायक अपने स्तर पर किसी भी प्रकार के नियमों का निर्धारण नहीं करेंगे। श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में निर्णायकों द्वारा प्रतियोगिता को शीघ्र पूर्ण कराने हेतु नियमों में बदलाव किया जा सकता है। इन्हीं नियमों का पालन सभी स्तर पर किया जायेगा।
12. विशेष परिस्थितियों में नियम परिवर्तन का अधिकार अध्यक्ष/निदेशक, 0प्र0 संस्कृत संस्थान, लखनऊ के पास सुरक्षित होगा।

¶प्रतियोगिताओं के मुख्य नियम
1. संस्कृत नाटक प्रतियोगिता के नियम:-
(क) संस्कृत नाटक के मूल्यांकन में अभिनय (40 अंक), उच्चारण (20 अंक), वेष भूषा (20 अंक), विषयवस्तु व प्रभाव  (20 अंक), कुल योग 100 अंकों का होगा।
(ख) संस्कृत नाटक की अवधि अधिकतम 30 मिनट होगी।
(ग) संस्कृत नाटक दल में वादकों सहित न्यूनतम 08 प्रतिभागी या अधिकतम 12 प्रतिभागी होंगे।
(घ) संस्कृत नाटक दल  के आवेदन पत्र के साथ नाटक की स्क्रिप्ट (आलेख) संलग्न करें।
2. एकल गीत प्रतियोगिता के नियम:-
(क) संस्कृत एकल प्रतियोगिता के मूल्यांकन में (संगीत) स्वर एवं ताल (40 अंक), उच्चारण (20 अंक), गीत की विषय वस्तु (20 अंक),  प्रस्तुति (20 अंक) कुल 100 अंक होंगे।
(ख) एकल गीत की अवधि अधिकतम 05 मिनट की होगी।
(ग) गीत को कंठस्थ कर गायन करना होगा।
(घ) गीतों का चयन प्रतिभागी संस्थान द्वारा संलग्नक पत्र में दिये गये गीत में से भी कर सकते हैं। यदि प्रतिभागी स्वयं गीत का चयन करते हैं तो विद्यालय नाम सहित चयनित गीत की 03 टंकित प्रति प्रस्तुति से पूर्व उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य होगा।
(ङ) गीत प्रतियोगिता में स्तोत्र गायन वर्जित होगा।
3.  आशुभाषण प्रतियोगिता के नियम:-
(क) आशुभाषण प्रतियोगिता के मूल्यांकन में विषयवस्तु (50 अंक), भाषा शुद्धता (30 अंक) एवं प्रस्तुति (20 अंक) कुल 100 अंक होंगे।
(ख) आशुभाषण की अवधि 03 मिनट होगी।
(ग) निर्धारित विषयों में से एवं कक्षा के अनुसार ही आशुभाषण प्रतियोगिता होगी। इसके लिए कक्षा 6 से 12 (प्रथमा से उत्तर मध्यमा) तक का एक ही वर्ग होगा।
आशुभाषण प्रतियोगिता आयोजन की विधि:- प्रतियोगिता आयोजक निम्नलिखित विषयों की पर्चियाँ बनाकर तथा उन्हें मोड़कर एक पात्र में रखेंगे एवं उनमें से एक पर्ची प्रतिभागी उठाएगा और निर्णायक को दिखाने के बाद उसी विषय पर अपना संस्कृत में भाषण देना आरम्भ करेगा। प्रतिभागियों की संख्या 10 से अधिक होने पर पर्चियां बनाते समय पूर्वोक्त विषयों की पुनरावृत्ति क्रम से करें।
                                       आशुभाषण प्रतियोगिता के विषय
कक्षा 6 से 8 तक (प्रथमा) के छात्र/छात्राओं के लिए विषय
1.संस्कृतेविज्ञानम्। 2. प्रमुखपर्वाणि। 3. विद्याधनंसर्वधनप्रधानम्। 4. संस्कृतभाषायाःमहत्त्वम्। 5. शिक्षणसंस्थासुनैतिकशिक्षा। 6. नदीनांरक्षणम्। 7. राज्ञीलक्ष्मीबाई। 8. गीतायाःमहत्त्वम्। 9. महाकविःवाल्मीकिः। 10. मातृ देवोभव। 11. आचार्य देवोभव।

कक्षा 9 से 12 तक (उत्तर मध्यमा) के छात्र/छात्राओं के लिए विषय
01.कन्यारक्षणं शिक्षणं च। 02. विश्वयोगदिवसः। 03. उत्तरप्रदेशे तीर्थस्थलानि। 04. उत्तरप्रदेशे संस्कृतपरम्परा।     05. संस्कृतेन आजीविका। 06. भगतसिंहः। 07. गंगास्वच्छताभियानम्। 08. रामायणस्यमहत्त्वम्। 09. अखिलभारतीयसेवायाम् उत्तरप्रदेशस्य योगदानम्। 10. आपदानिवारणोपायाः। 11. संस्कृतभाषायां पत्रकारिता।

4. श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता के नियम:-
(क) श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में समस्त प्रतिभागी छात्र गोलाकार में बैठेंगे। प्रथम श्लोक का उच्चारण किसी एक निर्णायक द्वारा किया जायेगा। यदि किसी श्लोक का अन्तिम व्यंजन वर्ण म् होता है तो प्रतिभागी उसके पूर्ववर्ती व्यंजन वर्ण से श्लोक बोलेंगे। शेष अन्तिम व्यंजन के आधार पर प्रतियोगिता संचालित होगी। गोलाकार में बैठे एक प्रतिभागी के बाद दूसरे प्रतिभागी, दूसरे प्रतिभागी के बाद तीसरे प्रतिभागी के क्रम से यह प्रतियोगिता अनवरत चलेगी।
(ख) यदि किसी श्लोक के अन्त में ङ, , , , , , , थ वर्ण आते हैं तो उसके पूर्ववर्ती हलन्त वर्ण से आगामी प्रतिभागी श्लोकोच्चारण करेगा।
(ग) विशेष परिस्थिति में निर्णायक श्लोक के अन्तिम स्वर वर्ण से प्रतियोगिता का संचालन कराने का निर्णय ले सकता हैं।
(ङ) एक प्रतिभागी के श्लोकोच्चारण करने तथा श्लोक के अन्तिम अक्षर से आगामी प्रतिभागी के श्लोकोच्चारण आरम्भ किये जाने के मध्य अधिकतम एक मिनट का समय दिया जायेगा। एक मिनट के अन्दर किसी प्रतिभागी द्वारा श्लोकाच्चारण आरम्भ नहीं करने की स्थिति में उसका एक अवसर समाप्त माना जायेगा। निर्णायक समय सीमा को और भी कम कर सकेंगे।
(च) श्लोकान्त्याक्षरी में आवश्यक होने पर प्रतिभागी को श्लोक का स्रोत बताना होगा। अन्यथा उसका द्वारा उच्चारित श्लोक को निर्णायक अमान्य घोषित करेंगे।
(छ) श्लोकों के अषुद्ध उच्चारण करने की स्थिति में निर्णायक वैकल्पिक श्लोक बोलने हेतु अवसर दे सकेंगे। किसी प्रतिभागी द्वारा निरन्तर अषुद्ध उच्चारण करने पर उसके अवसरों में कटौती की जा सकेगी।
(ज) प्रत्येक प्रतिभागी को तीन अवसर प्रदान किये जायेंगे। प्रतियोगिता के अन्तिम चरण में निर्णायकों द्वारा पृथक्-पृथक्छन्दों, श्लोक के अन्तिम स्वर सहित व्यंजन वर्ण के आधार पर, श्लोक के किसी पाद के अन्तिम अक्षर से प्रतियोगिता के संचालन का निर्देश दे सकते हैं। अतः प्रतिभागी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए पूर्णतः तैयार होकर आयें।
(झ) प्रतियोगिता के अन्त में अवशिष्ट 03 प्रतिभागियों में से किसी 01 के बाहर होने पर उसे तृतीय स्थान तथा 02 में से एक के बाहर होने पर उसे द्वितीय स्थान अन्त में अवषिष्ट प्रतिभागी को प्रथम स्थान दिया जायेगा।
श्लोक के अन्त में संयुक्त वर्ण आने पर संयुक्ताक्षर के अन्तिम अक्षर से आगामी प्रतिभागी श्लोक बोलेंगे। यथा - विद्या में य अक्षर से।
(ञ) श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में एक श्लोक को एक ही बार उच्चारण किया जायेगा।

श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता के लिए निर्धारित ग्रन्थ एवं ग्रन्थकारों के नाम
    ग्रन्थों के नाम                  ग्रन्थकारों के नाम             ग्रन्थों के नाम                ग्रन्थकारों के नाम
1.रघुवंशमहाकाव्यम् -      कालिदास                       7. श्रीमद्भगवद्गीता           - महर्षि व्यास
2. मेघदूतम्        -           कालिदास                       8. वाल्मीकीयरामायणम्-  महर्षि वाल्मीकि
3. नीतिसंग्रहमित्रलाभ-     नारायण पण्डित/ विष्णु शर्मा 9. नैषधीयचरितम्        - श्रीहर्ष                  
4. प्रतापविजयः   -           ईशदत्त                           10. शिशुपालवधम्           - माघ
5. चन्द्रालोक       -           जयदेव                           11. किरातार्जुनीयम्         - भारवि
6.मुहूर्तचिन्तामणि            -           रामदैवज्ञ             12. कुमारसंभवम्           -   कालिदास

प्रतिभागियों के लिए निर्देश:-
श्लोकान्त्याक्षरी, आशुभाषण एवं संस्कृत गीत प्रतियोगिताओं के लिए एक आवेदन पत्र पर एक ही छात्र का आवेदन करे। नाटक प्रतियोगिता के लिए एक आवेदन पत्र पर सभी प्रतिभागियों का नाम लिखा जाये। नाटक प्रतियोगिता में वादकों, निर्देषकों सहित कुल प्रतिभागियों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख किया जाये।

संस्कृत नाटक के लिए सहायक ग्रन्थों की सूची:-
1. नाट्यनीराजनम् – बाबूराम अवस्थी                             2. बालनाटकम् - पं0 वासुदेव द्विवेदी शास्त्री
3. एकांकी संस्कृत नवरत्न मंजूषा - नारायण शास्त्री कांकर         4. एकांकाष्टकम् – डॉ.केशव राम शर्मा
इसके अतिरिक्त अन्य कोई भी नाटक किये जा सकेंगे।

संस्कृत गीत के लिए सहायक ग्रन्थों की सूची:-
1. अलकनन्दा – सच्चिदानन्द काण्डपाल,                   2. समुज्ज्वला – इच्छाराम द्विवेदी
3.  लोकगीतांजलि – बाबूराम अवस्थी                     4. संस्कृत गीत मालिका - मनोरमा
5. गीतकन्दलिका - हरिदत्त शर्मा                            6. वाग्वधूटी - अभिराजराजेन्द्र मिश्र
7. संस्कृत गान माला - पं0 वासुदेव द्विवेदी शास्त्री      8. इन्द्रधनुः - ओम प्रकाश ठाकुर

संस्कृत गीतों को लिखित रूप में प्राप्त करने लिए अधोलिखित लिंक पर क्लिक करें-