मंगलवार, 26 नवंबर 2019

संस्कृत व्याकरण समझने का औजार


                                                    संस्कृत व्याकरण के अङ्ग

व्याकरण के पांच अङ्ग हैं- सूत्रपाठ, धातुपाठ, गणपाठ, उणादिपाठ तथा लिङ्गानुशासन। माहेश्वर सूत्र, सूत्रपाठ, धातुपाठ, वार्तिकपाठ, गणपाठ, उणादिपाठ तथा लिङ्गानुशासन, आगम, प्रत्यय तथा आदेश को उपदेश कहा जाता है।

                 धातुसूत्रगणोणादि वाक्यलिङ्गानुशासनम्।
                 आगमप्रत्ययादेशा उपदेशाः प्रकीर्तिताः ।।

                 धातुसूत्रगणोणादि वाक्यलिंगानुशासनम्।
                 आदेशो आगमश्च उपदेशाः प्रकीर्तिता।।

इनमें सूत्रपाठ मुख्य भाग है, शेष उसके परिशिष्ट ग्रन्थ कहे जाते हैं। ये सभी रचनायें अष्टाध्यायी के सूत्रों के पूरक हैं। इन परिशिष्ट ग्रन्थों की सहायता से ही सूत्रों को लघु रूप में कह पाना सम्भव हो सका। आगे के पाठ में आप देख सकेंगे कि किस प्रकार प्रत्याहार तथा धातु आदि अन्य पाठों का उपयोग सूत्रों को छोटे आकार में बनाये रखने के लिए किया गया। जैसे- पाणिनि ने सर्वनाम संज्ञा के लिए सर्वादीनि सर्वनामानि’ (अष्टा. 1.1.27) सूत्र लिखते हैं, यहां सर्व आदि से सर्वादि गण का निर्देश किया गया है। सर्वादि गण के ज्ञान के लिए गणपाठ के सहारे की आवश्यकता होती है, यदि गण पाठ नहीं होता तो इतने कम शब्दों में सूत्रों को कहना सम्भव नहीं था। सूत्र का अर्थ ही होता है- धागा। इसके सहारे हम विभिन्न गणों, प्रत्याहार के वर्णों तक पहुँच पाते हैं। इस प्रकार सूत्र अपने छोटे आकार में रहकर भी अधिक अर्थ को कह पाता है। इसी प्रकार फणां च सप्तानाम्’ (अष्टा. 6.4.125) सूत्र में फणादि सात धातुओं का निर्देश मिलता है। इसकी जानकारी धातुपाठ से मिलती है। उणादयो बहुलम्’ (अष्टा. 3.3.1) सूत्र को समझने के लिए उणादिपाठ की शरण में जाना होता है। इस प्रकार धातुपाठ और गणपाठ  आदि उपदेश कहे जाते हैं। पाणिनि अपने सूत्र में प्रत्याहार की तरह ही  इसका भी प्रयोग करते हैं। अतः सूत्रों के साथ साथ धातुपाठ आदि का भी स्मरण करना चाहिए। 
                                                               अनुवर्तन

अष्टाध्यायी की रचना सूत्रों की शैली में हुई अतः इसे अष्टाध्यायी सूत्रपाठ भी कहा जाता है। लघुसिद्धान्तकौमुदी का निर्माण  अष्टाध्यायी के सूत्रों से ही हुआ है। सूत्र में संक्षेपीकरण को महत्व दिया जाता है। हम इसके सहारे विस्तार तक पहुंच जाते हैं। सूत्रों को याद रखना आसान होता है। यदि ये सूत्र बड़े आकार में होते तो याद रखना भी कठिन होता। एक ही शब्द को बारबार कहना और लिखना पड़ता। सूत्र में कही गयी बातों को पूरी तरह समझने के लिए हमें कुछ बुद्धि लगानी पड़ती है। पाणिनि ने यदि किसी सूत्र में एक बार कोई बात कह दी तो उसे आगे के सूत्र में पुनः नहीं कहते। वह नियम आगे के सूत्र में आ जाते हैं। इसे अनुवर्तन कहते हैं। जब कोई शब्द किसी सूत्र में दिखाई नहीं दे और अर्थ पूर्ण नहीं हो रहा हो तो उसे पहले के सूत्र में देखना चाहिए। जैसे- हलन्त्यम् (1.3.3) सूत्र में उपदेशेऽजनुनासिक इत् (1.3.2) से  उपदेशे तथा इत् इन दो पदों की अनुवृत्ति आती है। आप देख रहे होंगें कि उपदेशेऽजनुनासिक इत् के बाद की संख्या हलन्त्यम् सूत्र की है। इस प्रकार हलन्त्यम् सूत्र का अर्थ पूर्ण हो जाता है। अनुवृत्ति को समझने के लिए हमें अष्टाध्यायी की आवश्यकता होती है परन्तु लघुसिद्धान्तकौमुदी में सूत्र के नीचे अनुवृत्ति आदि प्रक्रिया को पूर्ण कर उसकी वृत्ति अर्थात् सूत्र का अर्थ लिखा हुआ है।
  
                                                              उत्सर्ग एवं अपवाद

संस्कृत व्याकरण के शब्दों की संरचना दो भागों में विभाजित हैं 1. सामान्य संरचना। इन शब्दों के निर्माण के लिए सामान्य सूत्र बनाये गये। इसे उत्सर्ग सूत्र कहा जाता है। 2. अपवाद या विशेष। सामान्य नियम को वाधित करने के लिए अपवाद या विशेष सूत्रों का निर्माण किया गया। इस विधि से समान संरचना वाले शब्दों का निर्माण एक ही सूत्र से हो जाता है। उदाहरण के लिए अपत्य अर्थ को सूचित करने के लिए प्रातिपादिक सामान्य से अण् प्रत्यय जुड़ता है, यह सामान्य नियम कर देने पर सूत्रकार को ऐसे प्रातिपादिकों की सूची नहीं देनी पड़ती जिन्हें अण् प्रत्यय प्राप्त है अपितु केवल उन विशेषों के बारे में विधान करना शेष रहता है जो अण् प्रत्यय से भिन्न प्रत्यय द्वारा अपत्य अर्थ को सूचित करते हैं। उदाहरणार्थ तस्यापत्यम्’ (अष्टा. 4.1.22) सूत्र द्वारा सामान्य नियम कर देने पर प्रातिपादिक सामान्य से अपत्यार्थ में अण् प्रत्यय होता है, यह आवश्यक नहीं रहता कि अण् प्रत्यय प्राप्त करने वाले प्रातिपादिकों का किसी अन्य विशेष सूत्र द्वारा उल्लेख किया जाय। अपत्यार्थ को सूचित करने के लिए जिन प्रातिपादिक विशेष शब्दों का निर्माण अण् प्रत्यय से नहीं हो पाता वहीं किसी अन्य प्रत्यय का विधान करना है। जैसे- अत इञ्’ (अष्टा. 4.1.95) सूत्र द्वारा अकारान्त प्रातिपादिकों से अपत्य अर्थ में इञ्प्रत्यय का विधान करते हैं। अकारान्त प्रातिपादिक समूह का एक भाग विशेष है। अतः तत्सम्बन्धी नियम पूर्व नियम का बाधक या अपवाद होगा। यदि अकारान्त प्रातिपादिकों का भी कोई वर्ग विशेष उक्त अर्थ में अन्य प्रत्यय की अपेक्षा रखता है तो पाणिनि के सामने उन्हें सूचीबद्ध करके तत्सम्बन्धी नियम देने के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं रहता। ऐसा नियम उक्त रीति से अदन्त प्रातिपादिक-सामान्य के बारे में विहित अत इञ्इस विधि का अपवाद होगा, जैसे कि गर्गादिभ्यो यञ्’ (अष्टा. 4.1.105) गर्गादिगण के विषय में इसका अपवाद है। पाणिनि ने इस उत्सर्ग तथा अपवाद शैली से सूत्रों के आकार को छोटा रखने में सफलता तो प्राप्त किया ही, साथ ही एक ही प्रकार के अर्थ को समझाने में शब्दसमूह की विविध संरचनात्मक आकृतियों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत कर दिया। इस शैली के द्वारा हम संस्कृत शब्दों की संरचना को सरलता पूर्वक समझ पाते हैं।

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ छात्रवृत्ति आवेदन पत्र

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन भरने वाले मेरे ब्लॉग पर पधारे आत्मीय जन!

इस ब्लॉग के माध्यम से छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरना बहुत ही आसान है। आप विना किसी सहायता के इसे निःशुल्क भर सकते है। इसके अतिरिक्त आपकी शिक्षा के लिए भी यहाँ जबरदस्त मैटर उपलब्ध है। इस फार्म को भरने के साथ साथ आप व्याकरण, साहित्य, कोश आदि का भी अध्ययन कर सकते हैं।
छपा हुआ फार्म यहाँ से निःशुल्क प्राप्त करें-
 उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ 

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, पंचम तल, इन्दिरा भवन, लखनऊ
शारदा संस्कृत संस्थान, जगतगंज, वाराणसी (दिनांक 20.11.2019 से)

आवेदन पत्र की तिथि 15 नवम्बर, 2019 से 15 दिसम्बर, 2019 है।

प्रथमा उत्तीर्ण करे पूर्व मध्यमा प्रथम वर्ष में अध्ययन कर रहे छात्र, पूर्व मध्यमा  द्वितीय वर्ष तथा उत्तर मध्यमा (प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) में नियमितरूप से पढ़ रहे छात्रों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गये हैं। 
उ. प्र. संस्कृत संस्थान की ऑनलाइन छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ऑनलाइन छात्रवृत्ति आवेदन करने वाले छात्र छात्रवृत्ति आवेदन पत्र मार्गदर्शक पुस्तिका को भली भाँति पढ़ लें। इसकी सहायता से आप  ऑनलाइन छात्रवृत्ति का फार्म आसानी से भर सकेंगें। मार्गदर्शक पुस्तिका यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें
प्रथमा (प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, तृतीय वर्ष) तथा माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड को छोड़कर किसी अन्य बोर्ड की कक्षा 8 से उत्तीर्ण कर पूर्व मध्यमा प्रथम वर्ष में नियमित अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से कागज पर आवेदन पत्र स्वीकार किये जायेंगें।
छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने का नियमनिर्देश तथा आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
                             
                         ऑनलाइन छात्रवृत्ति आवेदन हेतु मार्गदर्शक पुस्तिका

पात्रता-
इस छात्रवृत्ति हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र को भरने के वे छात्र/छात्राएँ पात्र हैं, जो उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ के मान्यता प्राप्त विद्यालयों से पूर्व मध्यमा (प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) तथा उत्तर मध्यमा (प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) में नियमित नामांकित हैं तथा पूर्व कक्षा में न्यूनतम 60% अंक प्राप्त किये हैं। छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के पात्र हैं। न्यूनतम 60% अंक प्राप्त शेष कक्षाओं के छात्रों से ऑफलाइन आवेदन मांगे गये हैं, जिसकी सूचना इस गाइड के अंत में दी गयी है।
आवेदन पत्र भरने के लिए आवश्यक प्रपत्र
आवेदन पत्र भरने से पूर्व निम्नलिखित प्रपत्र का फोटो (JPEJ)  अपने कम्प्यूटर में सुरक्षित कर लें।
1. आवेदक का आवक्ष फोटो (आकार 200KB)  2. आवेदक का हस्ताक्षर (आकार 100 KB)
3. उत्तीर्ण कक्षा का अंक पत्र (आकार 500 KB) 4. छात्र प्रतियोगिता प्रमाण पत्र के फोटो  आकार 500 KB)
इस ऑनलाइन आवेदन पत्र को भरने के  कुल 8 चरण हैं।
1. पंजीकरण 2. लॉग इन 3. व्यक्तिगत विवरण 4. शैक्षिक विवरण 5. बैंक विवरण 6. प्रपत्र अपलोड 7. फार्म का सत्यापन 8. फार्म का प्रिंट।  इसमें 2 चरण पंजीकरण के लिए, 4 चरण आवेदन पत्र प्रपूरित करने के लिए तथा 1 चरण फार्म को प्रिंट करने के लिए है। फार्म का प्रिंट लेना आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। आप अपने पास फार्म भरने का साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए प्रिंट ले सकते हैं। इसे PDF में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
  अब आप उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की वेबसाइट http://upsanskritsansthanam.in/ के ऑनलाइन आवेदन मीनू बटन पर जायें। इसके ड्रॉप डाउन मीनू में से  छात्रवृत्ति आवेदन पत्र  का चयन कर लिंक पर क्लिक करें। इसपर क्लिक करते ही ऊपर एक बाक्स खुलकर आएगा, जिसमें लिखा होगा- आपको उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, की वेबसाइट से हस्तानांतरित किया जा रहा है और अब आप किसी बाहरी वेबसाइट http://103.50.212.87/scholership/ का कंटेंट देखेंगे।  इसके ok बटन पर क्लिक करते ही निम्नांकित रूप से स्क्रीन खुलेगी।

चित्र सं. 1

आवेदन पत्र के ऊपर दाहिनी तरफ लाल रंग के बटन में नियम निर्देश (छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित) एवं  उपयोगकर्ता पुस्तिका (फार्म भरने की गाइड) दी गई है। इसे स्क्रीन पर पढ़ा, डाउनलोड तथा प्रिंट किया जा सकता है। वहाँ क्लिक कर नियम निर्देश तथा उपयोगकर्ता पुस्तिका को ध्यान से पढ़ लें। यहाँ सबसे ऊपरी भाग में संस्थान का फोन नं. तथा ईमेल भी दिया गया है।
छात्रवृत्ति आवेदन पत्र भरने के लिए यहाँ सबसे पहले आपको पंजीकरण करना है। आप ऊपर दिये गये चित्र में देख रहे होंगें कि फार्म के नीचे में तीन विकल्प दिये गये हैं, जिनमें से पहला नया रजिस्ट्रेशन के लिए, दूसरा भूले हुए रजिस्ट्रेशन नंबर को दोबारा प्राप्त करने के लिए तथा तीसरा भूले हुए पासवर्ड को प्राप्त करने के लिए है। सर्वप्रथम आपको Login बटन के नीचे के पहले ऑप्शन छात्रवृत्ति के लिए यदि आपने पंजीकरण नहीं किया है तो यहाँ क्लिक करें वाले पहले विकल्प पर क्लिक करना है।  इसे क्लिक करने पर निम्नांकित रूप से फार्म खुलकर सामने आ जाएगा।
यह पंजीकरण करने के लिए मांगी गई जानकारियों का फार्म है। आपको इस ऑनलाइन छात्रवृत्ति फार्म के कुछ फील्ड में लाल रंग का तारा * दिख रहा होगा। जैसा कि पहला नाम, सरनेम आदि के आगे लगा है। यह तारा हमें बताता है कि उस फील्ड के लिए मांगी गई सूचनाएं अंकित करना अनिवार्य है। जिस फील्ड में लाल रंग का तारा नहीं लगाया गया है, उस फील्ड को भरना अनिवार्य नहीं है। जैसे - मध्य नाम।  आप उस फील्ड को छोड़ भी सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपना मध्य नाम अंकित नहीं करें। किसी के नाम को तीन भागों में लिखा जाता है तो किसी का दो भागों में। रमेश कुमार झा जैसे नाम के पहले नाम में रमेश, मध्य नाम में कुमार तथा सरनेम में झा लिखा जाता है। इस प्रकार के नाम वाले छात्र अपने मध्य नाम कुमार को अवश्य भरें। यदि किसी का नाम विना मध्य नाम वाला है जैसे-  रमेश झा । ऐसे छात्र मध्य नाम नहीं लिखें।
इसमें मध्य नाम तथा ईमेल के फील्ड को छोड़कर शेष सभी फील्ड को भरना अनिवार्य है। आपकी सहायता के लिए खाली फील्ड के नीचे निर्देश भी दिया गया है, जो फार्म भरने में आपकी सहायता करता है। आवेदन पत्र भरते समय उसकी सहायता प्राप्त करें। उन निर्देशों का अनुपालन करते हुए फार्म भरें।
अपना नाम तथा पिता का नाम भरने के बाद मोबाइल नंबर अंकित करें। इसी नं. पर एस. एम. एस. के द्वारा आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड मिलेगा। एक मोबाइल नंबर से अनेक रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड प्राप्त किये जा सकते हैं।
इसमें मांगी गई सारी जानकारियों को ध्यान से भरने के बाद नीचे दिए हुए कैप्चा कोड को जैसा दिखाया गया है, उसी रूप में लिखकर भर दें। इसके बाद नीचे Register बटन पर क्लिक करें। (यदि कैप्चा कोड समझ में नहीं आये तो बगल के लाल रंग के Reset बटन दबाकर नया कैप्चा कोड प्राप्त करें।) इसके बाद आपके द्वारा अंकित किए गए मोबाइल नंबर पर आपको अपना पञ्जीकरण संख्या और पासवर्ड मिलेगा तथा चित्र सं. 1 की तरह स्क्रीन पर लॉग इन स्क्रीन खुलकर सामने आएगा।
 अब इसमें आप अपने मोबाइल पर प्राप्त पंजीकरण संख्या के अंक को पंजीकरण संख्या के आगे के खाली स्थान पर भरें तथा इसी प्रकार से पासवर्ड को भी भर दें। इसके बाद नीचे दिया हुआ कैप्चा कोड को भरकर Login लिखे बटन को दबा दें।
नोट- इस पञ्जीकरण संख्या तथा पासवर्ड को किसी डायरी या अन्य स्थानों पर लिख कर भी रख लें, ताकि मोबाइल से पञ्जीकरण संख्या या पासवर्ड खो जाने पर इसका उपयोग किया जा सके। इस प्रकार आप अनावश्यक झंझट से बचे रह सकते हैं।  छात्रवृत्ति मिलने तक आपको इसकी बार-बार आवश्यकता होगी।
यदि आप पञ्जीकरण संख्या भूल जाते हैं तो क्या आप पञ्जीकरण संख्या भूल गए ? पुनः प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें पर क्लिक करें। यहाँ क्लिक करते ही निम्नांकित रूप से एक फॉर्म आपकी स्क्रीन पर खुलकर आएगा।
इसमें आप अपना पहला नाम, पिता का नाम, जिस नं. से पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड मिला था वह मोबाइल नं. भरते हुए कैप्चा कोड डालकर लॉग इन बटन दबाने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एस. एम. एस. के माध्यम से पुनः वही पञ्जीकरण संख्या भेज दी जाती है। आप यहाँ से लॉग इन करके आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। स्क्रीन पर भी आपका पञ्जीकरण संख्या सफलतापूर्वक आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया गया है सूचना प्रदर्शित होती है।
यदि आप किसी कारणवश पासवर्ड भूल जाते हैं तो पासवर्ड को दोबारा प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध है। पासवर्ड को दोबारा प्राप्त करने के लिए पिता का नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भरना होता है। इस प्रक्रिया को करने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर दोबारा पासवर्ड प्राप्त हो जाता है।
पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड प्राप्त होने के पश्चात् आप कभी भी लॉगआउट हो सकते हैं अर्थात् आगे फार्म भरना बंद कर सकते हैं। फार्म भरने के शेष बचे हुए कार्य को पूर्ण करने के लिए पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड अंकित कर आगे का फार्म भर सकते हैं। जब तक फार्म पूरी तरह भर नहीं जाए, बिना Logout हुए कंप्यूटर नहीं छोड़ें। ऐसा करने पर किसी अन्य के द्वारा गलत विवरण अंकित किया जा सकता है, जिससे आप छात्रवृत्ति पाने से वंचित रह सकते हैं । नीचे के चित्र में Logout बटन को गोलाकार में दिखाया गया है।
पञ्जीकरण के बाद 1.व्यक्तिगत विवरण भरने के लिए आपकी स्क्रीन इस प्रकार खुलकर सामने आएगी।



इस पृष्ठ में नाम, पिता का नाम तथा मोबाइल नं. भरा हुआ दिख रहा होगा क्योंकि आप इसके पहले इन सूचनाओं को भर चुके हैं। शेष खाली पड़े फील्ड के नीचे दिये गये निर्देश के अनुसार फार्म भरें। पूर्व में भरा जा चुका फील्ड को पुनः भरने से रोकने के लिए कर्सर का आकार लाल गोलाकार हो जाता है। आपकी सुविधा के लिए जिला का नाम अकारादि क्रम में लगाकर ड्राप डाउन मीनू दे दिया गया है। मांगी गई सारी जानकारियां भरने के बाद नीचे दिए हुए कैप्चा कोड को ध्यान से भरें और फिर सुरक्षित करें बटन पर क्लिक करें। कैप्चा कोड भरने में परेशानी आने पर कोड पर क्लिक कर दूसरा कोड प्राप्त कर लें।
सुरक्षित करें बटन दबाते ही अब आप देखेंगें कि फार्म के ऊपर में दिया गया 1 व्यक्तिगत विवरण का बटन हरा हो गया। इसका अर्थ है कि व्यक्तिगत विवरण वाला पृष्ठ सफलतापूर्वक भरा जा चुका है। आप जैसे-जैसे फार्म भरते जाते हैं, ऊपर का वह बटन हरा होता हुआ चला जाता है। हरे बटन पर क्लिक करने पर उसके फील्ड पर जाया जा सकता है।
इसके बाद नीचे दिए गए फार्म के अनुसार एक नया फार्म शैक्षिक जानकारी भरने के लिए स्क्रीन खुलेगी, जो इस प्रकार दिखेगी-
उत्तीर्ण कक्षा का नाम* वाले मीनू में कुल 4 कक्षाओं प्रथमा, पूर्वमध्यमा ( प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) तथा उत्तर मध्यमा (प्रथम वर्ष) का नाम दिया गया है। इन कक्षाओं में न्यूनतम 60% अंक से उत्तीर्ण छात्र छात्राएं छात्रवृत्ति का आवेदन पत्र भरने के पात्र हैं। यह छात्रवृत्ति शैक्षिक वर्ष 2019 – 20 में उत्तीर्ण विद्यार्थियो को ही दी जानी है अतः 2019 – 20 भरा हुआ मिलेगा। प्राप्तांक* भरते ही मार्कशीट का प्रतिशत* फील्ड स्वतः भर जाता है। उत्तीर्ण कक्षा के स्कूल का नाम* वाले फील्ड में आपने शैक्षिक वर्ष 2019 – 20 में जिस विद्यालय से उत्तीर्ण  किया है, उस विद्यालय का नाम लिखें। यहाँ तक आपका पिछला रिकार्ड का विवरण था। सत्र 2019-20 में विभिन्न कक्षाओं में नामांकित एवं अध्यनरत छात्र/छात्राओं का विवरण आगे के फील्ड में भरें। यदि आप सत्र 2019-20 में किसी अन्य विद्यालय से आकर वर्तमान विद्यालय में नामांकन कराया है तो स्थानांतरण प्रमाण पत्र नंबर तथा स्थानांतरण प्रमाण पत्र की तिथि वाले फील्ड को भरे जाने की आवश्यकता है। यदि आप गत सत्र में भी वर्तमान विद्यालय के ही छात्र रहे हैं तो एस फील्ड को रिक्त छोड़ दें। इसी प्रकार छात्र प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागिता प्रमाण पत्र* वाले मीनू बटन में से सही सूचना का चयन कर भरें। यहाँ आप जिस सूचना को भरते हैं साक्ष्य के लिए आगे उसका फोटो अपलोड करना होगा। कक्षा, जिसमें छात्र/छात्रा अध्ययनरत है* में उत्तीर्ण कक्षा के आगे की कक्षा का नाम ही स्वीकार करेगा।
पंजीयन क्रमांक*  तथा कक्षा में प्रवेश की तिथि* का विवरण यदि आपको ज्ञात नहीं हो तो अपने प्रधानाचार्य से पूछकर सही- सही भरें। भविष्य में आपके नामांकन की पुष्टि करायी जा सकती है।
नामांकित विद्यालय का नाम एवं पता* में पूर्व में भरे गये जनपद नाम के विद्यालयों का नाम खुलकर आता है। इस सूची में यदि आपके वर्तमान विद्यालय का नाम नहीं हो तथा यदि आपका विद्यालय उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ से मान्यता प्राप्त हो तो अन्य का चयन करें। ऐसा करते ही इस फील्ड के आगे एक अन्य फील्ड खुलकर आएगा। उसमें अपने विद्यालय का नाम एवं पता का विवरण अंकित कर दें।
 इस प्रकार सभी जानकारियां ध्यान से भरने के बाद नीचे दिया हुआ कैप्चा कोड भर के सुरक्षित करें वाली बटन को क्लिक करें। आवेदन पत्र के हर पेज के नीचे कैप्चा कोड लगाया गया है।
अब इसके बाद बैंक डिटेल भरने का स्क्रीन आपके सामने खुलकर आएगा, जो कि निम्नांकित रूप में खुलेगी-
 इसमें आई एफ एस कोड वाले फील्ड को भरने पर बैंक का नाम तथा बैंक शाखा का नाम अपने आप ही भर जाता है अतः आप एफ एस कोड फील्ड को ध्यान से भरें। आई एफ एस कोड सही भरने पर भी यदि बैंक का नाम तथा शाखा का नाम स्वतः भरकर नहीं आता है तब आप सावधानीपूर्वक बैंक का नाम तथा बैंक खाता के नाम वाले फील्ड को भर दें। यह छात्रवृत्ति सीधे छात्र/ छात्रा के खाते में जाएगी अतः आपका अपने नाम से बैंक में बचत खाता होना चाहिए। यदि आपने अभी तक अपना बैंक में खाता नहीं खुल पाया है तो Logout कर लेँ तथा बैंक में स्वयं का अथवा संयुक्त खाता खुलवा कर पुनः Login करते हुए (इस लिंक पर आकर पंजीकरण संख्या तथा पासवर्ड भरकर लॉगिन हो जाएं) तथा शेष बचे हुए फार्म को भरें।
बैंक की सारी जानकारी अपनी पासबुक से मिलान करते हुए ध्यानपूर्वक भर दें। उसके बाद मैं प्रमाणित करता हूं लिखे हुए वाक्य के पहले बने छोटी चौकोर खाने में सही का निशान बन जाने दे। कैप्चा कोड भरकर सुरक्षित करें बटन को दबाए। अब आपकी स्क्रीन पर फोटो, हस्ताक्षर, अंक पत्र आदि अपलोड करने के लिए निम्नांकित रूप में खुलकर सामने आएगी।
आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं को सलाह दी जाती है कि इस फील्ड को भरने के पहले अपने कंप्यूटर या मोबाइल में अपना आवक्ष फोटो (200kb), हस्ताक्षर साइज (100 केबी), अंकपत्र (साइज 500) केबी और यदि आपने किसी प्रतियोगिता में भाग लिया हो तो उसके प्रमाण पत्र का फोटो (साइज 500 केबी) जेपीजी में बनाकर अपने कंप्यूटर या मोबाइल में सुरक्षित कर लें। सभी फाइल का नाम अपने नाम से कर लें। तदनन्तर फार्म भरें।
संस्कृत की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किये छात्र उसका प्रमाण पत्र अपलोड करें। जिसने संस्कृत की प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं किया वे इसे छोड़ दें। अंकपत्र का फोटो अपलोड करते समय सुनिश्चित कर लें कि फोटो में इसे कोई भी आसानी से पढ़ सकता है। धुंधला तस्वीर वाला अंक पत्र अपलोड नहीं करें, अन्यथा आपका आवेदन निरस्त हो जाएगा। प्रपत्रों का अपलोड होना आपके इंटरनेट की स्पीड पर निर्भर करता है। इंटरनेट की स्पीड के कारण इसमें कम या अधिक समय लग सकता है, अतः सुरक्षित करें बटन दबाने के पश्चात् कुछ समय तक प्रतीक्षा करें। नेट स्पीड धीमी होने की स्थिति में आपको यह प्रक्रिया बार-बार करनी पड़ सकती है।
अपलोड करते समय ध्यान रखें कि फोटो, हस्ताक्षर, अंक पत्र एवं प्रमाण पत्र के फोटो का साइज निर्धारित केबी से अधिक नहीं होना चाहिए। यह साफ्टवेयर अधिक साइज के फोटो को स्वीकार नहीं करेगा। मैंने मार्कशीट 500 केबी से अधिक साइज का अपलोड कर दिया था। फार्म के ऊपर The mark sheet may not be greater than 500 kilobytes. सन्देश मिला। मैंने मार्कशीट का साइज 500 किलोबाइट का कम किया तब मेरा फार्म भरा जाना पूर्ण हुआ ।
अपलोड करने के लिए Choose file पर क्लिक करें और प्रपत्र अपलोड कर लें फिर कैप्चा भरकर सुरक्षित करें बटन को दबाकर अपलोड की प्रक्रिया पूरी करें।
 आप अब तक संपूर्ण आवेदन पत्र को भर चुके हैं। इसके बाद आपका फार्म सत्यापित करने के लिए निम्न रूप में खुलेगा।


इस आवेदन पत्र को प्रिंट लेकर भी जांचा जा सकता है कि आवेदन भरने में कहीं कोई त्रुटि तो नहीं रह गयी?
अतः फार्म के नीचे लाल रंग का प्रिंट का जांच करें बटन दिया गया है। आप प्रिंट लेकर अथवा स्क्रीन पर ही भली भाँति पढ़ने के पश्चात् यदि कहीं संशोधन करना अपेक्षित हो तो उसमें संशोधन कर लें। अंत में कैप्चा कोड डालकर सत्यापित करें बटन पर क्लिक करें।
 सत्यापित करें  बटन पर क्लिक करते ही एक नया पृष्ठ खुलकर आता है । इसके नीचे लिखा होगा आपका फार्म सफलतापूर्वक भरा गया। अब आप का फार्म पूरी तरह से भरा जा चुका है। अब ऊपर चल रही हरी पट्टियों में जहां लिखा है प्रिंट पंजीकरण पर्ची उस पर क्लिक करें। इससे आपका भरा हुआ फार्म निम्नांकित रूप में प्रिंट होने के लिए नये विंडो में खुलेगा।
इसे प्रिंट कर अपने पास सुरक्षित रख लें। इसमें आप द्वारा दर्ज की गई सभी सूचनाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध है। अंत में Logout बटन पर क्लिक कर  Logout हो जायें। भविष्य में पंजीकरण क्रमांक तथा पासवर्ड से Login कर सकते हैं।

नोट-  प्रथमा (प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, तृतीय वर्ष) तथा माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड को छोड़कर किसी अन्य बोर्ड की कक्षा 8 से उत्तीर्ण कर पूर्व मध्यमा प्रथम वर्ष में नियमित अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से कागज पर आवेदन पत्र स्वीकार किये जायेंगें। ऐसे छात्र-छात्राओं से आवेदन पाने के लिए विद्यालयों में डाक द्वारा मुद्रित फार्म तथा नियम निर्देश भेज दिया गया है। यदि किसी छात्र/ छात्रा या विद्यालय को मुद्रित फार्म नहीं मिल सका हो तो वे संस्थान की वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। कागज पर छपे आवेदन पत्र को ठीक से भरकर अपने प्रधानाचार्य से अंकपत्र सत्यापित कराकर निदेशक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पते पर निर्धारित तिथि के पूर्व अवश्य ही भेज दें। प्रथमा द्वितीय वर्ष तथा तृतीय वर्ष के अंक पत्र के स्थान पर विद्यालय द्वारा निर्मित परीक्षाफल पंजिका की सत्यापित प्रति मान्य होगी। मुद्रित फार्म को हाथों-हाथ भी जमा किया जा सकता है