शनिवार, 18 मई 2019

बुद्ध जयन्ती पर विशेष


मैं बुद्ध जयन्ती 2019 के अवसर पर अपने इस लेख में बौद्धों के अनात्मवाद, क्षेणवाद का विवेचन तथा जयन्त भट्ट, कुमारिल भट्ट, शंकराचार्य, दयानन्द सरस्वती, हेमचन्द्र सूरी आदि द्वारा किये गये खण्डन के बहस से अलग हटकर इस विचारधारा में विचलन को रेखांकित करने का प्रयास किया हूँ।
मुख्यो माध्यमिको विवर्तमखिलं शून्यस्य मेने जगत्
                     योगाचारमते तु सन्ति मतयस्तासां विवर्तोऽखिलः।
अर्थोऽस्ति क्षणिकस्त्वसावनुमितो बुद्ध्येति सौत्रान्तिकः
                   प्रत्यक्षं क्षणभंगुरश्च सकलं वैभाषिको भाषते॥
हे बुद्ध! आप आत्मा और पुनर्जन्म पर बिना कुछ बोले इह लोग से पधार गए। आपके जाने के बाद आप के सिद्धांतों (बौद्ध दर्शन) की स्थापना करने में लगे दार्शनिकों के विचार निरंतर बदलते रहे। आत्मा के विषय में राजा मिलिन्द के प्रश्न पर नागसेन द्वारा दिये गये उत्तर में इसे रूप,   विज्ञान,   वेदना,   संज्ञा    और    संस्कार का एक समूह (संघात) कहा गया। नैरात्म्यवाद अनात्मवाद (शून्यवाद) से आरम्भ होकर अबतक 4 बौद्ध दार्शनिक संप्रदाय तथा हीनयान (थेरवाद) इसकी वैभाषिक एवं सर्वास्तिवादी दोनों शाखाएँ , महायान (महासांघिक) तथा तंत्र - मंत्र के माध्यम से बुद्ध व उनकी पत्नी की तारादेवी के रूप में पूजा के लिए बनी वज्रयान शाखा तक आकर एक नये कलेवर में विस्तार पा रहा है।
 माध्यमिक (शून्यवाद ) के प्रवर्तक दूसरी सदी के दार्शनिक नागार्जुन के सिद्धांत को अद्वैत विज्ञानवादी वसुबन्धु ने पलट दिया। इनके सिद्धान्त को दिग्नाग ने। प्रमाणवार्तिकम्`के लेखक धर्मकीर्ति तक आते आते आत्मा की सत्ता को स्वीकार कर लिया गया। कुमारिल भट्ट तथा शंकराचार्य ने तो आपके नाम से स्थापित दार्शनिक सिद्धांतों का खण्डन या आंशिक परिष्कार ही किया। क्योंकि आप आत्मा और पुनर्जन्म पर चुप थे। आपके विचार को मानने वाले दार्शनिकों ने आत्मा की सत्ता को स्वीकार कर लिया था।
आपने जिस पाली भाषा में अपने उपदेश दिया उस भाषा का महत्व तृतीय बौद्ध संगीति तक ही रहा। चतुर्थ बौद्ध संगीति की भाषा संस्कृत हो गई। बौद्ध दर्शन की पुस्तकें भी संस्कृत भाषा में ही लिखी गई। आपके उपदेशों को जिस भाषा में संकलित किया गया, वह विमर्श की भाषा नहीं बन पायी फलतः जितना विमर्श बौद्ध दर्शन या संस्कृत में लिखे साहित्य पर हुआ, उतना पालि भाषा में लिखित साहित्य पर नहीं। आज आपके अनुयायियों को पालि भाषा अनुत्पादक लगने लगी है। उनके बौद्धिक विचार प्रदाता बौद्धिक लोग पालि में लिखित साहित्य स्वयं नहीं पढ़ते और न ही पाली भाषा पढ़ने की प्रेरणा देते है। अब वे आपके उपदेशों को सही रूप में समझने में असमर्थ हैं। आपके नाम से धंधा चलाने वालों ने नया धंधा चलाया है, जिसमें कला, भाषा तथा साहित्य की आवश्यकता नहीं है। वे लोग अंग्रेजी में लिखे साहित्य उन्हें पढ़ा रहे हैं ताकि उन्हें मनचाहा परिणाम मिल सके। आप की जीवनी जो अभी जनसामान्य में प्रचलित है, वह संस्कृत भाषा में लिखी गई और इसी भाषा के महान कवि जयदेव ने आपको नवम अवतार घोषित करते हुए गीतगोविन्दम् में स्तुति गान किया।
आपने जीवन का लक्ष्य निर्वाण बताया था लेकिन इसी भारत में अब लोग जीवन का लक्ष्य आरक्षण को मानने लगे हैं। आपने इंद्रजाल करने, मूर्ति की पूजा करने तथा जीवों की हत्या करने से मना किया था। विचारधारा में निरंतर विचलन होते रहने के कारण भैरव और भैरवी की पूजा, पंच मकार की उपासना से लेकर तमाम तरह के तांत्रिक कर्म बौद्ध धर्म में शुरू हो गये। सबसे बड़ी मूर्तियां आप की ही बनाई गई। यहां तक की पहाड़ को ही काट छांट कर मूर्ति का रूप दे दिया गया।
आपने ब्राह्मणों को ब्राह्मण ही कहा। चाहते तो पालि के शब्द का प्रयोग कर सकते थे। आपने कहीं भी ब्राह्मणों का विरोध नहीं किया, क्योंकि आपके उपदेशों को आगे बढ़ाने में ब्राह्मणों का अहम योगदान रहा है। अब भारत में प्रजातंत्र लागू है। प्रजातंत्र तभी तक प्रासंगिक रह पाता है जब तक की परस्पर लोगों को बांटा न जाए, क्योंकि उन्हें वोट बैंक बनाना होता है। लिच्छवी गणराज्य की प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को भूल जाइए।
आप जानते होंगें कि संस्कृत भाषा का व्याकरण ने पालि भाषा को अपने आंचल में स्थान देकर पोषित किया। पालि संस्कृत की छाया बनकर सहा पीछे- पीछे चलती है। तभी हम आपके विचार को सही तरह से समझ पा रहे हैं। संस्कृत के शास्त्रों तथा विद्याओं ने आपको हमेशा रक्षित किया। पालि में आपके वचनों के अतिरिक्त और है ही क्या?
आप की विचारधारा को यदि किसी ने वास्तविक रूप से समूल नष्ट करने का काम किया तो वह था- छठी सदी का हूण शासक मिहिरकुल। इसने कश्मीर से लेकर गान्धार तक बौद्ध मठों की भयंकर तोड़फोड़ की। प्रख्यात चीनी बौद्ध यात्री ह्वेन सांग के अनुसार मिहिरकुल ने 1600 मठों को ध्वस्त कर दिया था।
बारहवीं-तेरहवीं सदी में तुर्की का शासक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने कुशीनगर की विश्व प्रसिद्ध सात मीटर लंबी सुनहरी मूर्ति को तीन टुकड़ों में तोड़कर फेंक दिया था। गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम द्वारा 450-470 ई. के बीच स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय को इसने जला दिया। कहते हैं कि मरते हुए एक भिक्षु ने जब कहा था कि ये किताबें अनमोल ख़ज़ाना है, इन्हें मत मिटाओ तो अनपढ़ सैनिकों ने कहा कि जब पढने वाले ही नहीं बचेंगे तो किताबें किस काम की? बस सब किताबें जला दी गयीं।
उदान्तपुरी (बिहार शरीफ) के प्रख्यात बौद्ध मठ को ध्वस्त कर दिया, जिसमें सैकड़ों बौद्ध भिक्षु मारे गये तथा हजारों बौद्ध ग्रंथ खून से लथ-पथ होकर बचे-खुचे बहुमूल्य बौद्ध ग्रंथों को अपने रक्त रंजित चीवरों में छिपाकर बर्मा, नेपाल तथा तिब्बत ले गये।
मुहम्मद गौरी ने सारनाथ पर हमला करके इसे नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। सूची लम्बी है।
अब आप के अनुयायी उन्हीं से गलबहियां कर रहे हैं जिसने आप के सिद्धांतों को जला डाला और अनुयायियों को मार डाला था। आप जान चुके होंगे कि बौद्ध भिक्षुओं को तलवार के दम पर भारत के बाहर किसने भगाया था ।
जब अफगानिस्तान में आप की मूर्ति तोड़ी जा रही थी तब भारत में आप अपने जन्म दिन वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को मुस्कुरा उठे थे। देखिए न कुछ लोग सनातन परंपरा से बौद्ध परंपरा को कैसे अलग कर रहे हैं। वे जिस वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को पर्व मनाते हैं, वह कालगणना सनातन परम्परा का है। आपके नाम पर स्थापित प्रतीक, आपकी मुद्राएं, जन्म जन्मांतर की कहानियां, इन्द्रादि देवता सब कुछ समान ही तो है। खैर मैं यहां आप से लंबा संवाद नहीं कर सकता। बस इतना ही कहूंगा कि आपके जाने के बाद आपको मानने वालों में निरंतर वैचारिक परिवर्तन देखा गया है। वे सनातन परम्परा में दोष ढ़ढ़ूने और काल्पनिक बातों का बदला लेने के लिए आपने सिद्धान्तों को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं। यह शुभ लक्षण नहीं है।

गुरुवार, 16 मई 2019

गौतम बुद्ध पर प्रश्नोत्तरी


जीवनी
1. गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ था?
(क)  563 ई०पू०            (ख) 780 ई०पू०
(ग)  175 ई०पू०            (घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : 563 ई०पू०
2. गौतम बुद्ध का जन्म स्थान का नाम क्या है?
(क)  कपिलवस्तु के लुम्बनी (ख) कुशीनगर
(ग)  वाराणसी                (घ) गया
उत्तर : कपिलवस्तु के लुम्बिनी
3. गौतम बुद्ध के बचपन का नाम क्या था?
(क)  राहुल                     (ख) गौतम
(ग)  सिद्धार्थ                   (घ) अभिनवगुप्त
उत्तर : सिद्धार्थ
 4. गौतम बुद्ध के पिता का नाम क्या था?
उत्तर : शुद्धोधन
 5. इनके माँ का नाम था?
उत्तर : महामाया / मायादेवी
6.  महात्मा बुद्ध के सौतेली माँ का नाम क्या था?
उत्तर : महा प्रजावती / गौतमी
 7. सिद्धार्थ के पत्नी का नाम क्या था?
उत्तर : यशोधरा
 8. गौतम बुद्ध के जन्म के कितने दिनों बाद इनके माता का निधन हुआ?
उत्तर : 7
9. गौतम बुद्ध के जन्म के बाद जिस माता का निधन हुआ उसका नाम क्या था?
उत्तर : महामाया
10. गौतम बुद्ध का विवाह कितने वर्ष में हुआ?
उत्तर : 16
11. गौतम बुद्ध के पुत्र का नाम क्या था?
उत्तर : राहुल
 12. गौतम बुद्ध के सारथी का नाम क्या था?
उत्तर : चन्ना / छन्दक
13. सिद्धार्थ का गोत्र क्या था?
उत्तर : गौतम
 14. गौतम बुद्ध कितने वर्ष की अवस्था में गृह त्याग कर सत्य की खोज में निकाल पड़े?
उत्तर : 29 वर्ष
 बुद्धत्व प्राप्ति
15. सिद्धार्थ के गृह त्याग की घटना को बौद्ध धर्म में क्या कहा जाता है?
उत्तर : महाभिनिष्क्रमण
16. बुद्ध के प्रथम गुरु कौन थे?
उत्तर : आलारकलाम
 17. बुद्ध ने अपने प्रथम गुरु से कौन सी शिक्षा प्राप्त की?
उत्तर : सांख्य दर्शन
 18. गौतम बुद्ध के दूसरे गुरु का नाम क्या था?
उत्तर : रुद्रक
 19. उरुवेला में कितने ब्राह्मण बुद्ध के शिष्य बने?
उत्तर : पांच
20. बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन थे?
(क)  महावीर                 (ख) गौतम बुद्ध
(ग)  शंकराचार्य              (घ) बुद्धघोष
उत्तर :  (ख) गौतम बुद्ध
21. बुद्ध के पांचों शिष्य के नाम क्या थे?
उत्तर : कौण्डिन्य, वप्पा, भादिया, अस्सागी और महानामा
22. बुद्ध को मार्ग में कौन- कौन मिले थे?
उत्तर : बूढ़ा, वीमार, मृतक, संन्यासी
 23. किस नदी के तट पर 35 वर्ष की आयु में आधुनिक बोधगया में तपस्या की?
उत्तर : निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर,
24. सिद्धार्थ ने बोधगया में किस वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या की?
उत्तर : पीपल वृक्ष के नीचे
25. भगवान् बुद्ध के समय बोधगया का नाम क्या था?
उत्तर : उरुवेला
26. सिद्धार्थ को कितने वर्ष की कठिन तपस्या के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई?
उत्तर : 6 वर्ष
 27. ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ को क्या कहा गया?
उत्तर : गौतम बुद्ध और तथागत
28. गौतम बुद्ध को किस रात्रि के दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई?
उत्तर : वैशाखी पूर्णिमा
 29. गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहाँ दिया था?
उत्तर : वाराणसी के निकट सारनाथ
 30. उपदेश देने की इस घटना को क्या कहा जाता है?
उत्तर : धर्मचक्रप्रवर्तन
 31. महात्मा बुद्ध ने अपने उपदेश को किस भाषा में दिया?
उत्तर : पाली
32. भगवान बुद्ध राजगीर के किस तालाब में स्नान करते थे?
उत्तर : कालिन्दा निवापा
33. भगवान बुद्ध राजगीर के जिस पर्वत पर अपने अनुयायियों को उपदेश देते थे उसका नाम क्या था?
उत्तर : गृद्धकूट पर्वत
बौद्ध धर्म दर्शन
 34. शून्यवाद का जनक  कौन थे?
उत्तर : नागार्जुन
35. विज्ञानवाद के जनक कौन थे?
उत्तर : मैत्रेयनाथ
36. बौद्धधर्म के त्रिरत्न कौन-कौन है?
उत्तर : बुद्ध, धम्म और संघ
 37. बौद्ध धर्म में प्रविष्टि को क्या कहा जाता था?
उत्तर : उपसम्पदा
 38. बुद्ध के अनुसार देवतागण भी किस सिद्धान्त के अंतर्गत आते है?
उत्तर : कर्म के सिद्धान्त
 39. बुद्ध ने तृष्णा की घटना को क्या कहा है?
उत्तर : निर्वाण
 40. बुद्ध के अनुयायी कितने भागों में बंटे थे?
उत्तर : दो (भिक्षुक और उपासक)
41.  जिस स्थान पर बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति की थी, वह स्थान क्या कहलाया?
उत्तर : बोधगया
42. बौद्ध धर्म को अपनाने वाली प्रथम महिला कौन थी?
उत्तर : बुद्ध की माँ प्रजापति गौतमी
 43. महात्मा बुद्ध की मृत्यु की घटना को बौद्ध धर्म में क्या कहा गया है?
उत्तर : महापरिनिर्वाण
 44. महात्मा बुद्ध द्वारा दिया गया अंतिम उपदेश क्या था?
उत्तर : सभी वस्तुएँ क्षरणशील होती है अतः मनुष्य को अपना पथ-प्रदर्शक स्वयं होना चाहिए
45. गौतम बुद्ध के प्रथम उपदेश को क्या कहते है ?
उत्तर : धर्म चक्र परिवर्तन
46. गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म का सबसे अधिक प्रचार किया ?
उत्तर : कौशल में
 संगीति
 51. प्रथम बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था?
उत्तर : राजगीर
52. प्रथम बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था?
उत्तर : अजातशत्रु ( हर्यक वंश )
53. प्रथम बौद्ध संगीति के कौन अध्यक्ष थे?
उत्तर : महाकस्सप उपलि
54. प्रथम बौद्ध संगीति कब हुआ था?
 उत्तर :  483 ई० पू०
55. प्रथम बौद्ध संगीति में किस भाषा का प्रयोग हुआ?
 उत्तर : पाली भाषा
56.  बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था?
उत्तर : मगध के राजा कालाशोक
57.  बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था?
उत्तर : वैशाली
58. द्वितीय बौद्ध संगीति कब हुआ था?
उत्तर : 383 ई० पू०
56. द्वितीय बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था?
उत्तर : कालाशोक ( शिशुनाग वंश )
57. द्वितीय बौद्ध संगीति के कौन अध्यक्ष थे?
उत्तर : साबकमीर
58. द्वितीय बौद्ध संगीति में किस भाषा का प्रयोग हुआ?
उत्तर : पाली
59. तृतीय बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था?
उत्तर : पाटलिपुत्र
60. तृतीय बौद्ध संगीति कब हुआ था?
उत्तर : 250 ई० पू०
61. तृतीय बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था?
उत्तर : अशोक
62. तृतीय बौद्ध संगीति के कौन अध्यक्ष थे?
उत्तर :  मोगलिपुत्ततिस्ता
63. तृतीय बौद्ध संगीति में किस भाषा का प्रयोग हुआ?
उत्तर : पाली
64. चतुर्थ बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था?
उत्तर : कुण्डलवन (कश्मीर)
65. चतुर्थ बौद्ध संगीति कब हुआ था?
उत्तर : प्रथम ई० पू०
66. चतुर्थ बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था?
उत्तर : कनिष्क ( कुषाण वंश )
67. चतुर्थ बौद्ध संगीति के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष कौन थे?
उत्तर :  अध्यक्ष = वासुमित्र उपाध्यक्ष = अश्वघोष
68. चतुर्थ बौद्ध संगीति में किस भाषा का प्रयोग हुआ?
उत्तर : संस्कृत
69. बौध धर्म के ग्रन्थ को क्या कहते है ?
उत्तर :  त्रिपिटक
70. विनय पिटक का विषय वस्तु क्या है?
उत्तर : बौद्ध संघ के नियम
71. सुत्त पिटक  में क्या है?
 उत्तर : बौद्ध संघ के उपदेश
72. अभिधम्म पिटक में क्या है?
 उत्तर : दार्शनिक विवेचना की गयी
73. बौद्ध प्रतीक
1) गौतम बुद्ध का जन्म का प्रतीक  -  कमल व हाथी
2) गौतम बुद्ध का ग्रह त्याग का प्रतीक  -  घोड़ा
3) गौतम बुद्ध का ज्ञान का प्रतीक  -  पीपल
4) गौतम बुद्ध का निर्वाण का प्रतीक  -  पद्म चिन्ह
5) गौतम बुद्ध की मृत्यु का प्रतीक  -  स्तूप
6) गौतम बुद्ध के यौवन का प्रतीक  -  सांड
7) धर्म की मधुर, गहरी और संगीतमय शिक्षा का प्रतीक - श्वेत शंख
8) बौद्ध धर्म के सिद्धांतों की विजय का भी प्रतीक – विजयी ध्वज।
74. विश्व का सबसे बड़ा स्तूप कौन सा है ?
उत्तर : सांची का स्तूप ( मध्यप्रदेश मे ) अशोक द्वारा बनवाया गया
75. गौतम बुद्ध के सबसे प्रिय और आत्मीय शिष्य कौन थे?
उत्तर : आनंद
 76. भारत से बाहर बौद्ध धर्म को फैलाने का श्रेय किस राजा को जाता है?
उत्तर : सम्राट अशोक
 77. बुद्ध के प्रथम दो अनुयायी कौन कौन थे?
उत्तर : काल्लिक तपासु
78.  बुद्ध की प्रथम मूर्ति कहाँ बना था?
उत्तर : मथुरा कला
 79. सबसे अधिक संख्या में बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण किस शैली में किया गया था?
उत्तर : गांधार शैली
80. बौद्ध का परम धर्म लक्ष्य है?
उत्तर : निर्वाण
81. बौद्धों का सर्वाधिक पवित्र त्यौहार कौन है?
उत्तर : वैशाख पूर्णिमा
82.  वैशाख पूर्णिमा किस नाम से विख्यात है?
उत्तर : बुद्ध पूर्णिमा
 83. अनीश्वरवाद को मानने वाले कौन-कौन धर्म है?
उत्तर : बौद्ध एवं जैन धर्म
 84. बुद्ध ने किसकी प्रमाणिकता को नकार दिया था?
उत्तर : ईश्वर की
 85. सम्राट अशोक को बौद्ध धर्म में किसने दीक्षित किया था?
उत्तर : मोगलीपुत्त तिस्स
86. बुद्ध के अनुयायी कितने भागों में बंटे थे ?
 उत्तर : दो (भिक्षुक और उपासक)
 87. बुद्ध ने तृष्णा की घटना को क्या कहा है ?
उत्तर :  निर्वाण।
88. बुद्ध ने किस डाकू को उपदेश दिया?
उत्तर : अंगुलिमाल
89. राजगीर के किस स्थान पर प्रथम बौद्ध संगीति हुई?
उत्तर : सप्तपर्णि गुफा
90. भगवान् बुद्ध ने राजगीर में किस वन में विहार करते थे?
उत्तर : वेणुवन
91. महात्मा बुद्ध का निर्वाण कब हुआ था ?
उत्तर : 483 ई०पू०
92. महात्मा बुद्ध का निर्वाण किस स्थान पर हुआ था ?
उत्तर : कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
93. महात्मा बुद्ध के निर्वाण के समय उनकी आयु कितनी थी?
उत्तर : 80 वर्ष
94. तीर्थस्थल
भगवान बुद्ध के अनुयायिओं के लिए विश्व भर में पांच मुख्य तीर्थ मुख्य माने जाते हैं :
(1) लुम्बिनी -  जहां भगवान बुद्ध का जन्म हुआ।
(2) बोधगया जहां बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त हुआ।
(3) सारनाथ जहां से बुद्ध ने दिव्यज्ञान देना प्रारंभ किया।
(4) कुशीनगर जहां बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ।
(5) संकिसा (फर्रुखाबाद जिले के वर्तमान गांव बसंतपुर)  – भगवान् बुद्ध सोने की सीढ़ी से स्वर्ग से उतरे थे।
कौशाम्बी – प्लक्ष नामक गुहा में बुद्ध कई बार आए थे।
अजन्ता – बौद्ध धर्म से सम्बन्धित चित्रण एवं शिल्पकारी के उत्कृष्ट नमूने मिलते हैं।
एलोरा - गुफाओं में भगवान बुद्ध की कई प्रतिमाओं के साथ ही दीवार पर बौद्ध धर्म से जुड़ी कई पेंटिग्स भी बनाई गई हैं।
95. स्तूप
सांची स्तूप -      सांची, रायसेन, मध्य प्रदेश
धमेख स्तूप         -सारनाथ, उत्तर प्रदेश
चौखण्डी स्तूप   -   सारनाथ
केसरिया स्तूप - (पश्चिमी चंपारणके पास), बिहार
रामाभार स्तूप  -    कुशीनगर
भरहुत स्तूप – सतना, मध्य प्रदेश (पुष्यमित्र शुंग द्वारा सम्भवतः १८५ ईसापूर्व के बाद निर्मित किया गया था।)
96. अन्य स्तूप
पावागढ़, वैशाली, कपिलवस्तु, रामग्राम, राजगृह, बेटद्वीप (बेट-द्वारका) कुशीनगर तथा राजगृह ।
97. आनन्द को स्तूप बनाने के उपदेश देने का वर्णन किस पुस्तक में है?
दीघनिकाय 14/ 5 /11
98. सारनाथ को किसने नष्ट भ्रष्ट किया?
उत्तर : मुहम्मद गोरी ने
99. बुद्ध प्रतिमाओं में मुद्राएं
1. ध्यानमुद्रा    - पैरों की पलथी, दोनों हाथ नाभी के पास, हथेलियां एक दूसरे पर रखी होती हैं।                                                                                              
2. धर्मचक्र-प्रवर्तन-मुद्रा  - पलथी, दोनों हाथ विशिष्ट प्रकार से छाती के पास मिले हुए। यहां हाथों की अंगुलियों की    
                                   स्थिति ध्यान देने योग्य है।                                                                    
3. भूमिस्पर्शमुद्रा  - पलथी, बायां हाथ पलथी पर, दाहिने हाथ की हथेली खुली हुई, अंगुलियों से भूमिस्पर्श।                                                                     
4 . वरदाभय  -  खड़े या बैठी स्थिति में दाहिने हाथ अभयमुद्रा में तथा बायें हाथ का वरदमुद्रा में रहना। ये दोनों 

                      मुद्रायें एक   ही साथ  दिखालाई पड़ती हों, ऐसी बात नहीं। दाहिना हाथ अभय  मुद्रा में तथा बायें 

                      में वस्त्रन्त या भिक्षापात्र भी दिखलाते    हैं।
5. महापरिनिर्वाण-मुद्रा  - दो शालवृक्षों के बीच में लगी शय्या पर दाहिना हाथ सिरहाने लेकर उसी करवट लेटे
             हुए बुद्ध । इसी मुद्रा में उन्होंने महानिर्वाण  प्राप्त  किया था।