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संस्कृतसर्जना के बेवसाइट पर उपलब्ध सामग्री तथा इसके अनुप्रयोग की विधि


    संस्कृतसर्जना । संस्कृत जगत का बहुचर्चित नाम । मित्रों यह पत्रिका नही संस्कृत प्रचार प्रसार का, संस्कृत के संरक्षण का, संस्कृत के शास्त्रों के संरक्षण का, संस्कृत मे नवीन प्रतिभाओं को उभारने का एक संसाधनों हॆ । एक बार अवश्य पढें । अगर आपको अच्छा लगे तो सदस्यता अवश्य ग्रहण करें ।           प्रो.मदन मोहन झा     
           संस्कृत में पत्रकारिता भी एक विधा है। इसके द्वारा हम नवीनतम जानकारी प्राप्त करते हैं। हमारी पकड़ संस्कृत भाषा में मजबूत होती है। प्रचलन में आये नवीन शब्दों का संस्कृत प्रयोग देखते हैं। पाठ्य पुस्तकें ससीम होती है, पुरानी भी परन्तु पत्र पत्रिकाएं नित्य नूतन।

    संस्कृतसर्जना का प्रतीक चिह्न



लेखकों द्वारा अक्सर पूछा जाता है कि संस्कृतसर्जना में किस प्रकार के लेख प्रकाशित किये जाते हैं?
 उत्तर पाने के लिए पत्रिका की बेवसाइट  http://www.sanskritsarjana.in/ खोलें। चित्र में लाल रंग के घेरे में अस्मद् विषये बटन दिखाया गया है। यहाँ क्लिक करने पर इस प्रकार  पत्रिका के विषयवस्तु  सामने खुलकर आयेंगें।



लेख  भेजने की पूरी प्रक्रिया जानने के लिए सामान्य निर्देशः बटन पर क्लिक करें। क्लिक करते ही ई-मेल – sanskritsarjana@gmail.com पर अपना पूरा पता एवं स्वयं का फोटो, विषय से सम्बन्धित फोटो भेजने का आग्रह प्राप्त होता है।  Kruti Dev 010 फाण्ट में टंकित word की soft copy तथा एक PDF प्रति प्रेषित करने जैसे प्रक्रिया की जानाकारी मिलती है ।



सदस्यता आमन्त्रण

संस्कृतसर्जना ई- पत्रिका के बेवसाइट पर पाठकों तथा लेखकों को निःशुल्क सदस्यता प्राप्त करने की सुविधा दी गयी है। इस पर एक बार नाम, पता, ईमेल आदि उपलब्ध करा देने पर पत्रिका के नवीन अंक आगमन की सूचना दी जा सकती है। सम्पादकीय समिति आपसे अमूल्य सुझाव प्राप्त कर सकता है। पुरस्कार योजना में सम्मिलित किया जाता है आदि। सदस्यता पाने की प्रक्रिया इस चित्र में दिखाया गया है-
मोबाइल संख्या के शुरु में 0 अंक नहीं लिखें। ईमेल में @ के आगे पीछे स्थान न दें।




ई संसाधन
    संस्कृतसर्जना पत्रिका के बेवसाइट पर ई संसाधन नामक बटन दिख रहा होगा। यहाँ पर क्लिक करने पर तीन विकल्प सामने खुलकर आता है। 1- लेखक समग्र 2- विडियो 3- आडियो। लेखक समग्र में लेखकों की रचनाएँ तथा ब्लाग के लिंक उपलब्ध हैं। विडियो एवं आडियो में चार विकल्प दिये गये हैं। 1. गीत 2. व्याख्यान  3. कविता पाठ तथा 4. सस्वर वेद पाठ। यदि आप आडियो के माध्यम से सुनना चाहते हैं तो आडियो पर क्लिक कर संस्कृत गीत, विविध विषयों पर ट्यूटोरियल या अन्य व्याख्यान सुन सकते हैं। इसी प्रकार विडियो के लिंक के भी लिंक उपलब्ध कराये गये हैं। संस्कृत सीखने के लिए उपयोगी लिंक भी शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा।
शोध पत्रिका लेख सूची
      यहाँ शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हिन्दी और संस्कृत के शोध लेखों को एकत्र कर विषयानुक्रम से उपलब्ध कराया गया है। उदाहरण- क्या आप यदि साहित्य से सम्बन्धित शोध लेख खोज रहे हैं? रुकिये, अब आपको विभिन्न शोध पत्रिकाओं को पलटकर इच्छित लेख ढूँढने की आवश्यकता नहीं है। यह लिंक तमाम पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों को एक जगह उपलब्ध करा देगा। यह इतना ही नहीं करता। यह शोध लेखों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित करता है। इसकी प्रक्रिया इस चित्र के माध्यम से समझाया जा रहा है।



    
सबसे पहले आप जिस भाषा में लिखित शोध लेख ढूँढना चाहते हैं उसे सैलेक्ट करें पुनः जिस विषय सम्बन्धित शोध लेख खोज रहे हैं, उसका चयन कर लें। संस्कृत के लगभग सभी विषय यहाँ प्रदर्शित हैं। अब submit पर क्लिक करें। मैंने यहाँ भाषा संस्कृत विषय नाट्यशास्त्र का चयन किया है,जिसका परिणाम निम्नानुसार है-

Action के नीचे Details पर क्लिक करने से पत्रिका का नाम, व्याख्यात्मक शीर्षक, पत्रिका वर्ष, अंक / खण्ड, आवधिकता , प्रकाशक वर्ष की जानकारी मिल जाएगी।

   




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sanskritsarjan E- magazine

 संस्कृतसर्जना  त्रैमासिकी ई. पत्रिका


http://sanskritsarjana.in/ तः हिन्दीसंस्कृतभाषयोः प्रकाशिताया अस्याः पत्रिकायाः आरम्भः जनवरी 2015 वर्षे जातः। इयं डी.202/4, कूर्माञ्चल नगर, लखनऊ नगरात्  उषा किरण महोदयायाः सम्पादने  प्रकाश्यते।  सर्जना,  संस्मरणं, साक्षात्कारः, वैचारिकनिबन्धाः, शिक्षा, तकनीकिशिक्षा, पर्यटनं. पुस्तकपरिचयः, वार्तादिविषयाः अस्याः मुख्यविषयाः।

 संस्कृतसर्जना नाम्नी ई. पत्रिकायाः प्रथमवर्षस्य द्वितीयांके एते निबन्धाः सम्मुखोपस्थितपृष्ठसंख्यानुसारेण प्रकाशिताः सन्ति।

लेखाः                                               पृष्ठम्



नैजं किंचित् 2

गुरुकुल प्रभात आश्रम एक परिचय           3
लेखनीपंचकम् 11
फेसबुकमहिमा 12
नेतृमहिमा 13
श्रीकृष्णं प्रति                                        15
यथार्थ कथा 16
भूतस्य मन्त्रः 19
डॉ वीरभद्र मिश्रः-यथा दृष्टो यथा मतः 24
असममेघालयप्रान्तयोः पर्यटनस्थलानि 27
वर्तमान शिक्षा प्रणाली में संस्कृत की आवश्यकता 29
आधुनिक परिवेश में संस्कृत के अध्ययन की भूमिका 32
साक्षात्कारः  प्रो. ओम्प्रकाश पाण्डेय 33
रामनवमी                               37
आधुनिकवैद्युतशोधोपकरणानि              39
अभिक्रमिताधिगमे सङ्गणकसहानुदेशनम् 42
भारतीयकालगणनासिद्धान्तः 42
पालि एवं बौद्ध वाङ्मय में सन्दर्भ ग्रन्थ       45
पुस्तक समीक्षा                                       49
पत्रिका परिचय                                        50

वार्ता                                                       51

 इस पत्रिका के बेवसाइट बारे में अधिक जानने के लिए चटका लगायें और पढें- संस्कृतसर्जना 

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संस्कृत सर्जना त्रैमासिक ई-पत्रिका का विषय वस्तु

               E- Mail                                             website
      
       संस्कृत सर्जना त्रैमासिक ई-पत्रिका में प्रकाशित होने वाले लेखों के विषय वस्तु को इस लेख में स्पष्ट किया जा रहा हैं। इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करना  हैं। इस पत्रिका में मुख्यतः अधोलिखित विषयों पर लेख प्रकाशित किये जाते हैं-

1- संस्मरण-

      अपने प्रयोगधर्मी गतिविधियों द्वारा  जन-जन तक संस्कृत को पहुँचाने के लिये जीवन अर्पित किये विद्वानों के प्रेरणादायी जीवन का संस्मरण।

2- साक्षात्कार

       ऐसे व्यक्ति जो अपने सार्वजनिक तथा बहुआयामी जीवन द्वारा संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर रहें हो़ उनका  समसामयिक, ज्वलंत तथा सर्वस्पर्शी विषयों पर साक्षात्कार। 

3- वैचारिक निबन्ध

      संस्कृत के विकास एवं प्रसार के लिये चिन्तन तथा युगानुरूप अनुप्रयोग करने वाले बुद्धिजीवियों के वैचारिक निबन्ध।

4- पर्व तथा उत्सव

      संस्कृत भाषा में निरुपित सद्यः आने वाले पर्वों तथा उत्सवों का जन जीवन पर पडे प्रभाव का विश्लेषण।

5- जनोपयोगी संस्कृत विषयक सामग्री

      जन सामान्य के दैनन्दिन उपयोग में आने वाले ज्योतिष, धर्मशास्त्रीय निर्णय, आयुर्वेद आदि विषय। 

6- शिक्षा

     छात्रों एवं संस्कृत सीखने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए  संस्कृत शिक्षा से जुड़ी सामग्री और शोध कार्य में सहायक पुस्तकें, संस्कृत सीखने के लिए पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षा के तैयारी के लिए सुझाव आदि।

7- तकनीकि शिक्षा

 आज के तकनीकि से परिचित नहीं होने के कारण संस्कृत क्षेत्र के बहुशः लोग जीवन में इसका प्रयोग नहीं कर पाते हैं। फलतः अन्तर्जाल पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर पाते है न ही अभिदान। संस्कृतज्ञ त्वरित सूचना के प्रवाह से अछूते  न रहें  एतदर्थ तकनीकि शिक्षा।
(संस्कृत विषयक सामग्री इण्टरनेट पर बहुतायत में उपलब्ध हैं, जिसकी जानकारी आम संस्कृतज्ञ को नहीं होती हैं।   इस माध्यम से एकत्रित जानकारी  यहां उपलब्ध करायी जाती हैं। )

8-पुस्तक परिचय

        कुछ लेखक अपने पुस्तक का स्वयं प्रकाशन करते हैं, उसका प्रचार नहीं हो पाता है। पुस्तक समीक्षा के माध्यम से  पुस्तक का प्रचार किया जाता है। 

9- सर्जना- 

         नयी पीढी के संस्कृत लेखकों की कथा, कविता आदि मौलिक रचना।

10-वार्ता

      सामान्यतः संस्कृत क्षेत्र की वार्तायें भी इसमें प्रकाशित होती हैं।

11- पर्यटन 

          तीर्थस्थलों  तथा अन्य पर्यटन स्थलों के बारे में सचित्र संस्कृत भाषा में लेख प्रस्तुत करना। इसमें पर्यटन स्थल पर ठहरने, गमनागमन के साधन, आसपास के दर्शनीय स्थल तथा अन्य उपयोगी सुझाव ।

12- संस्था परिचय

          संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शोध केन्द्रों, पुस्तकालयों आदि में प्रवेश के नियम, उपलब्ध संसाधन आदि की जानकारी लेख के माध्यम से जनसामान्य को उपलब्ध कराना ताकि लोग वेहतर विकल्प का चयन कर सकें। उन संस्थाओं से लाभ ले सकें।
यह पत्रिका संस्कृत के प्रचार के लिये कटिबद्ध कुछ स्वयंसेवियों द्वारा आरम्भ किया गया, जिसका मूल उद्देश्य मात्र संस्कृत भाषा का प्रचार करना हैं।

  इस पत्रिका से सम्बन्धित कुछ प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं, जिसका समाधान यहां प्रस्तुत हैं-

प्रश्न-    क्या मेरा लेख इसमें प्रकाशित हो पाएगा ? क्या शुल्क लगेगा ?
उत्तर-  इस पत्रिका में सभी लेख निःशुल्क प्रकाशित किये जाते हैं वशर्ते कि आपने इस पत्रिका की सदस्यता ले ली हो, जो कि निःशुल्क हैं। सदस्यता के लिए यहाँ क्लिक करें।

प्रश्न-   इस पत्रिका में प्रकाशित होने वाले लेख का विषय वस्तु क्या होता हैं ?
उत्तर-  शास्त्रीय शोध निबन्ध ( जो प्रायः पाठ्यक्रमों में निर्धारित हैं ) को छोड़कर सभी प्रकार के लेख इसमें प्रकाशित होते है। लेखों की भाषा संस्कृत/हिन्दी होनी चाहिये और संयत होनी चाहिए। आप अपनी कल्पना को संस्कृत भाषा में पिरोकर उपलब्ध करायें। यथा- गोरैया संरक्षण, जंगली एवं पालतू पशुओं का परिचय आदि प्रकाशित किया जायेगा। विषयवस्तु की कोई भी सीमा नहीं हैं।

प्रश्न-    क्या कलात्मक अभिरूचियों को यदि संस्कृत भाषा में लिखा जाये तो यहां प्रकाशित हो सकता हैं ?
उत्तर-  अवश्य। मान लीजिये आपकी अभिरूचि नेल पालिश, केश सज्जा, रंगोली, व्यंजन निर्माण, अचार निर्माण की विधि, गृह सज्जा, पेंटिग, कढ़ाई आदि क्षेत्रों में हैं और आपके पास इस प्रकार के चित्रों का संग्रह भी हैं। संस्कृत भाषा में उसके निर्माण की विधि, कलात्मकता, उसका सौन्दर्य वर्णन लिख कर चित्र के साथ भेजे जाने पर प्रकाशित किये जाते हैं। इसमें कलाओं को भाषायी अभिव्यक्ति दिया जाना मुख्य हैं। जैसे-आपने कहीं किसी के हाथों में मेंहदी सुसज्जित किया हो, बस उसका एक चित्र खींचकर उसका पूरा वर्णन संस्कृत में लिख कर भेजें।

प्रश्न-    क्या हम अपने पालतू पशुओं के रूप सौन्दर्य,संस्मरण का भी वर्णन यहां प्रकाशित करा सकते हैं ?
उत्तर-   जी हाँ, यदि आपके घर में कोई पालतू पशु हो तो उसकी दिनचर्या, संस्मरण, व्यवहारों आदि का वर्णन संस्कृत  भाषा में लिखे होने पर सचित्र प्रकाशित किये जाते है।

प्रश्न-    अपनी रचना या लेख के साथ और क्या-क्या चीज भेजा जाना आवश्यक है ?
उत्तर-  आपके अपने ई-मेल से लेख या रचना भेजा गया हो। 2. लेखक का फोटो, संक्षिप्त परिचय तथा विषयवस्तु से  सम्बद्ध छाया चित्र साथ में भेजा जाना चाहिए। 3. यह पत्रिका किसी के यशोगान या प्रचार का माध्यम नहीं हैं। अतः इस प्रकार के लेखों/रचनाओं से बचना चाहिए।

प्रश्न-     क्या हम अपने क्षेत्र के विद्यालयों/संस्कृत प्रचार में संलग्न संस्थाओं का परिचय भेज सकते हैं ?
उत्तर-   आप अपने क्षेत्र के उन सभी विद्यालयों, संस्थाओं, व्यक्तियों के बारे में लेख दे सकते हैं। जिनकी जानकारी पाकर   लोग उनसे जुड़ सके। क्षेत्र विशेष में संस्कृत शिक्षा की स्थिति आदि पर भी आप लेखन कर सकते हैं।

प्रश्न-     क्या इसमें हास्य विनोद, चुटकुले, सुभाषित आदि भी प्रकाशित किये जाते हैं ?
उत्तर-   जी इतना ही नहीं आप अपना संस्मरण, यात्रा वृतान्त, आदतें भी संस्कृत में लिख कर भेजे इसमें अवश्य  प्रकाशित किया जायेगा। जैसे-आपने अपने कुछ मित्रों के साथ कोई सुखद यात्रा की हो, उस सुखद संस्मरण  को संस्कृत में लिख कर चित्र के साथ भेजे। हास्य विनोद चुटकुले आदि तो प्रकाशित किये ही जाते हैं।

प्रश्न-    मेरे क्षेत्र में स्थानीय मेला लगता हैं। कभी वह धार्मिक उत्सव का मेला होता हैं तो कभी वाणिज्यिक। क्या मैं उन  मेलों के बारे में अपना लेख आपके पत्रिका में प्रकाशनार्थ भेज सकता हूँ।
उत्तर-   आप जो कुछ भी कल्पना कर सकते हों, जो कुछ भी घटित हो रहा हो उसका सचित्र वर्णन भेज सकते हैं। शर्त  यह हैं कि उसकी भाषा संस्कृत होनी चाहिये यदि आपके क्षेत्र में कोई मधुमक्खी पालन, बकरी, मत्स्य आदि  पालन का व्यवसाय किया हो उसके बारे में भी आप पूरी जानकारी संस्कृत भाषा के माध्यम से भेज सकते हैं।

प्रश्न-    क्या यह पत्रिका डाक द्वारा मेरे पते पर आ सकती है? इसे मंगवाने के लिए क्या करना होगा और क्या 
       चार्ज  लगेगा?  बहुश: शुभकामना: महोदय, एषा पत्रिका अस्माकं पार्श्वे कथम् आगमिष्यति ।।
उत्तर-   यह एक ई- पत्रिका है। इसे आप अपने मोबाइल/लैपटाप/कम्प्यूटर पर ऑनलाइन पढ सकते हैं। इसे कागज पर  प्रिंट नहीं किया जाता। इस पत्रिका का कोई मान्य नियम नहीं हैं। न ही यह किसी भी सर्जनात्मक परिधि से बंधा है। बस भाषा अश्लील न हो, किसी को ठेस न पहुंचाने वाली हो, इस प्रकार समस्त रचनाओं का यहां स्वागत है।

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वैचारिक लेख, कर्मकाण्ड,ज्योतिष, आयुर्वेद, विधि, विद्वानों की जीवनी, 15 हजार संस्कृत पुस्तकों, 4 हजार पाण्डुलिपियों के नाम, उ.प्र. के संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों आदि के नाम व पता, संस्कृत गीत
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