प्यारे बच्चो! इस अभ्यास कार्य को करने से पहले इसके पीछे छिपे संस्कृत व्याकरण के एक बहुत ही सुंदर और जादुई नियम को समझ लीजिए। इसे समझ लेने पर आप कभी भी रूपों को लिखने में गलती नहीं करेंगे:
🎯 जादुई नियम (इट् आगम समानता): संस्कृत व्याकरण में जिन धातुओं में भविष्यत् काल यानी लृट् लकार बनाते समय 'इ' (इट्) का आगम होता है (जैसे— पठ् का पठिष्यति), प्रायः उन्हीं धातुओं में क्त्वा प्रत्यय लगाते समय भी 'इ' का आगम होता है (जैसे— पठित्वा)।
इसी प्रकार, जिन धातुओं में लृट् लकार में 'इ' का आगम नहीं होता (जैसे— त्यज् का त्यक्ष्यति), उनमें क्त्वा प्रत्यय में भी 'इ' नहीं जुड़ता (जैसे— त्यक्त्वा)।
📝 आपको इस अभ्यास में क्या करना है?
नीचे दी गई सारणी में आपको बाईं ओर मूल धातुएँ दी गई हैं। आपको क्रमानुसार पहले उनके सामने उनका लृट् लकार (भविष्यत् काल, प्रथम पुरुष, एकवचन) का रूप लिखना है और फिर उसके तुरंत बाद क्त्वा प्रत्यय जोड़कर बनने वाला शुद्ध रूप लिखना है। उदाहरण के लिए पहली पंक्ति (पठ्) और अंतिम पंक्ति (दृश्) को पूरा करके दिखाया गया है।
✍️ अभ्यास कार्य: लृट्-लकारे रूपं विलिख्य क्त्वा प्रत्ययं योजयत
(रिक्त स्थानों को भरकर अभ्यास करें— मोबाइल पर पूरी सारणी देखने के लिए इसे दाएं-बाएं खिसकाएं ↔)
| धातुः | लृट् - लकारे (रूपम्) | क्त्वा (प्रत्ययान्तरूपम्) |
|---|---|---|
| पठ् | पठिष्यति | पठित्वा |
| खाद् | --------------------- | -------------- |
| पत् | --------------------- | -------------- |
| हस् | --------------------- | -------------- |
| मिल् | --------------------- | -------------- |
| निन्द् | --------------------- | -------------- |
| क्रीञ् | --------------------- | -------------- |
| रुद् | --------------------- | -------------- |
| भू | --------------------- | -------------- |
| ज्ञा | --------------------- | -------------- |
| श्रु | --------------------- | -------------- |
| कृ | --------------------- | -------------- |
| नी | --------------------- | -------------- |
| पा | --------------------- | -------------- |
| स्था | --------------------- | -------------- |
| त्यज् | --------------------- | -------------- |
| ग्रह् | --------------------- | -------------- |
| स्मृ | --------------------- | -------------- |
| गम् | --------------------- | -------------- |
| स्पृश् | --------------------- | -------------- |
| लिख् | --------------------- | -------------- |
| प्रच्छ् | --------------------- | -------------- |
| क्षाल् | --------------------- | -------------- |
| चिन्त् | --------------------- | -------------- |
| भक्ष् | --------------------- | -------------- |
| प्रेष् | --------------------- | -------------- |
| सूच् | --------------------- | -------------- |
| दृश् | द्रक्ष्यति | दृष्ट्वा |
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✓ सभी धातुओं के शुद्ध पाणिनीय रूप (क्रमानुसार):
प्यारे बच्चो! इस अभ्यास कार्य में हम यह सीखेंगे कि दो अलग-अलग वाक्यों या क्रियाओं को क्त्वा प्रत्यय की सहायता से एक साथ कैसे जोड़ा जाता है और पूर्वकालिक क्रिया को अव्यय कैसे बनाया जाता है:
📝 आपको इस अभ्यास में क्या करना है?
नीचे दी गई सारणी में आपको बाईं ओर क्रिया का मूल **लट् लकार (वर्तमान काल)** का रूप दिया गया है। उसके ठीक बगल वाले खाने में आपको उस क्रिया में **क्त्वा प्रत्यय** जोड़कर बनने वाला शुद्ध अव्यय रूप लिखना है।
इसके बाद, दाहिनी ओर दिए गए वाक्य के रिक्त स्थान में उसी क्त्वा प्रत्ययान्त शुद्ध रूप को भरकर वाक्य को पूरा करना है। उदाहरण के लिए पहली दो पंक्तियों (गच्छति और वदति) को पूरा करके दिखाया गया है।
✍️ अभ्यास कार्य: क्रियापदस्य स्थाने क्त्वान्तरूपेण रिक्तस्थानानि पूरयत
(रिक्त स्थानों में क्त्वा प्रत्ययान्त रूप भरकर वाक्य पूरे करें— मोबाइल पर पूरी सारणी देखने के लिए इसे दाएं-बाएं खिसकाएं ↔)
| लट् लकार | क्त्वा रूप | उचितरूपेण वाक्य-पूर्तिः |
|---|---|---|
| गच्छति | गत्वा | युवकः चलच्चित्रमन्दिरं गत्वा चलच्चित्रं पश्यति । |
| वदति | उदित्वा | वटुकः मन्त्रं उदित्वा आनन्दम् अनुभवति । |
| क्रीडति | --------------- | क्रीडकः -----------(क्रीडति) प्रसन्नः भवति । |
| वदति | --------------- | सज्जनः सर्वं कार्यं -----------(वदति) करोति । |
| पिबति | --------------- | अनुजः फलरसं-----------(पिबति) सन्तोषम् अनुभवति । |
| लिखति | --------------- | छात्रः वाक्यं -----------(लिखति) स्मरति । |
| नयति | --------------- | सा वस्तूनि -----------(नयति) गृहं गच्छति । |
| पश्यति | --------------- | भवान् दूरदर्शनं -----------(पश्यति) शयनं करोति । |
| मिलामि | --------------- | अहं मित्रेण -----------(मिलामि) विषयं वदामि । |
| त्यजति | --------------- | एषः अध्ययनं -----------(त्यजति) अन्यत्र न गच्छति । |
| खादति | --------------- | सा फलं -----------(खादति) व्रतम् आचरति । |
| पतति | --------------- | बालकः सोपानात्-----------(पतति) रोदनं करोति । |
| भवामि | --------------- | अहं नेता -----------(भवामि) लोककल्याणं करिष्यामि । |
| क्रीणाति | --------------- | शिक्षकः सङ्गणकं -----------(क्रीणाति) विद्यालयं गच्छति । |
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✓ सभी रिक्त स्थानों के शुद्ध क्त्वा प्रत्ययान्त पद (क्रमानुसार):
📝 अभ्यास अनुभाग (भाग २): क्रियापदस्य स्थाने क्त्वान्तरूपेण वाक्य-पूर्तिः
🎯 निर्देश: नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। वाक्यों के अंत में कोष्ठक में लट् लकार (क्रियापद) दिया गया है। आपको उसके स्थान पर 'क्त्वा' प्रत्यय का शुद्ध रूप सोचकर रिक्त स्थान की पूर्ति करनी है। सहायता के लिए प्रत्येक प्रश्न के नीचे व्याकरण का एक **संकेत कार्ड** दिया गया है:
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✓ रिक्त स्थानों में भरे जाने वाले शुद्ध क्त्वा प्रत्ययान्त पद:
प्यारे बच्चो! इस अभ्यास कार्य में हम संस्कृत भाषा के एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम का व्यावहारिक प्रयोग सीखेंगे। जब एक ही कर्ता दो कार्य करता है, तो दोनों अलग-अलग वाक्यों को मिलाकर एक वाक्य बनाया जा सकता है। इसके लिए हमें प्रथम क्रियापद (पहले होने वाले कार्य) के स्थान पर उसका 'क्त्वा' प्रत्ययान्त रूप लिखना होता है और कर्ता पद को केवल एक बार प्रारम्भ में ही लिखना होता है।
📝 उदाहरणस्वरूप समझें:
जैसे— सुनीलः सदैव हसति। वदति। (सुनील हमेशा हंसता है। बोलता है।)
यहाँ दोनों वाक्यों को क्त्वा प्रत्यय की सहायता से जोड़कर एक शुद्ध वाक्य बनाया गया है → सुनीलः सदैव हसित्वा वदति। (सुनील हमेशा हंसकर बोलता है।)
✍️ अभ्यास कार्य (भाग ३): वाक्यद्वयं संयूज्य एकवाक्यं रचयत
(प्रथम क्रियापद के स्थान पर क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग करके वाक्य पुनः लिखिए):
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
→ ........................................................................... ।
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🔑 उत्तर सूचिका (Answer Key) - संयुक्त वाक्यों के शुद्ध उत्तर देखने के लिए क्लिक करें
✓ क्त्वा प्रत्यय के प्रयोग से बने शुद्ध संयुक्त वाक्य (क्रमानुसार):









