गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

कोजागर / कोजगरा

       आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इसी दिन कोजागर व्रत भी धूमधाम से मनाया जाता है। कोजागर का ही अपभ्रंश नाम कोजगरा है।  आश्विन मास की पूर्णिमा को कौमुदी भी कहा जाता है। 
       यह पूर्णिमा पहले दिन आधी रात तक हो तो पहले ही दिन व्रत करें। यदि दूसरे दिन पूर्णिमा आधी रात्रि तक हो तो दूसरे दिन व्रत करें। मिथिलांचल में इस दिन पान और मखान खाने का विधान है। नव परिणीता के मायके से मखान आता है। इस रात चंद्रमा की रोशनी में 108 बार सुई में धागा पिरोने से आंख की ज्योति बढ़ती है। पूर्णिमा की रात खीर को चांद की रोशनी में रखते हैं। सुबह इसका प्रसाद वितरित किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन रात्रि में चंद्रमा अमृत की वर्षा करती हैं। कोजगरा में लक्ष्मी तथा इंद्र का पूजन किया जाता है । पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करना और जुआ खेलने का विधान भी है। इसी दिन से कार्तिक के नियमों का प्रारंभ हो जाता है। इस दिन घरों और आवास के समक्ष मार्गों को साफ-सुथरा करना चाहिए। चंदन आदि के लेप से शरीर को सुगंधित करना चाहिए। स्त्रियों, बालकों, वृद्धों तथा मूर्खों को छोड़कर और लोगों को दिन में भोजन नहीं करना चाहिए। प्रदोष के समय द्वार की भित्ति पर हव्यवाहन, पूर्णेंदु, पत्नी के साथ रूद्र, स्कंद, नंदीश्वर मुनि,  सुरभि, निकुंभ, लक्ष्मी, इंद्र तथा कुबेर की पूजा करनी चाहिए। जिनके पास भेड़ हो वे वरुण की पूजा करें। जिनके पास हाथी हो वह विनायक की पूजा करें। जिनके पास घोड़े हो वह रेमंत की पूजा करें। जिनके पास गाय हो वे सुरभि की पूजा करें।
पूजा की विधि इस प्रकार है—
दैनिक क्रिया संपन्न कर व्रत किया हुआ व्यक्ति स्वच्छ आसन पर बैठकर गणपति आदि देवता सहित विष्णु की पूजा कर संकल्प करें। द्वार को जल से अभिसिंचित कर गंध, अक्षत से द्वारोर्ध्वभित्तिभ्यो  नमः कहकर वास्तु की पूजा करें। इस प्रकार पूजा विधि संपन्न कर कमल के आसन पर बैठी लक्ष्मी का ध्यान कर अक्षत के ढेर पर बैठी लक्ष्मी का लक्ष्म्यै नमः इस मंत्र से आवाहन कर षोडशोपचार पूजा करें । पूजा के अनंतर पुष्पांजलि देकर नमस्कार करें। 4 दांत वाले हाथी पर हाथ में वज्र लिए अनेक आभूषणों से अलंकृत शची के पति इंद्र को ध्यान करना चाहिए। नारियल और चूडा पितरों को समर्पित कर स्वयं इसका भक्षण करें। पूजा समाप्त होने के उपरांत प्रसाद ग्रहण कर बंधुओं के साथ भोजन करें। जुआ खेलना प्रारंभ करें। आधी रात में वरदान देने वाली लक्ष्मी यह देखती है कि कौन जगा हुआ है। ऐसा देखकर जो जुआ खेलता है उसे धन दूंगी यह कहती है।

स्कंद पुराण के अनुसार कोजगरा व्रत को सर्वश्रेष्ठ व्रत माना गया है।
    इसी दिन आश्वलायन शाखा वाले आश्वयुजी कर्म करते हैं।