सौर ऊर्जा के प्रयोग


क्या महंगी बिजली  के कारण आपकी रुचि सौर ऊर्जा की ओर निरंतर बढ़ रहीं हैं| बिजली कटौती या बिजली की अनुपलब्धता के कारण आप बेहतर विकल्पों को खोज रहे हैं ? आपको सोलर सिस्टम निश्चित रूप से एक बहुत अच्छा विकल्प प्रदान करता है|

सोलर सिस्टम के उपकरण-  

1 -  पैनल- 
     यह सौर ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करता है। 5 वाट से 250 वाट तक का एक पैनल होता है। एक से अधिक पैनल एक साथ लगाने पर इन्हें आपस में जोड दिया जाता है। इनका मेंटिनेंस भी बेहद कम होता है।
       तार- वाट के लोड के अनुसार 2 mm से लेकर 4 mm मोटाई के तार से पैनल को इन्वर्टर या चार्ज कंट्रोलर से जोडा जाता है। यह विद्युत ऊर्जा को पैनल से लेकर इन्वर्टर या चार्ज कंट्रोलर तक पहुँचाता है। सामान्यतः 5amp के लिए 1mm के तार का प्रयोग करना चाहिए। 
     इन्वर्टर - सोलर पैनल द्वारा सोलर एनर्जी को बिजली में बदल दिया जाता है। इन्वर्टर दो तरह के मौजूद है 1- इन्वर्टर 2- हाइब्रिड इन्वर्टर। हाइब्रिड इन्वर्टर बिजली और सोलर ऊर्जा दोनों के उपयोग पर आधारित होते हैं | सौर ऊर्जा उपलब्ध होने पर यह बिजली की खपत को रोककर सोलर एनर्जी का उपयोग करता है। मान लें आपने 300 वाट का पैनल लगाया है और प्रकाश के समय 350 वाट का उपकरण चलाते है तो  बैट्री की न्यूनतम 12  प्रतिशत ग्रैविटी तक यह 50 वाट ऊर्जा बैट्री से लेकर ऊर्जा खपत को पूरा करता है।  यह प्योर साइन बेब होता है। अब इसमें भी तकनीक को उन्नत किया गया है। कुछ प्योर साइन बेब इन्वर्टर बैट्री की न्यूनतम 11.5 प्रतिशत ग्रैविटी तक विद्युत सप्लाई करता है। बाजार में दो तरह के  इन्वर्टर प्राप्त होते हैं। सामान्य सोलर इन्वर्टर तथा MPPT इन्वर्टर । MPPT इन्वर्टर सामान्य सोलर इन्वर्टर से लगभग दो गुने कीमत पर मिलता है। यह सामान्य सोलर इन्वर्टर के मुकावले लगभग 25 प्रतिशत अधिक विद्युत उत्पादन करता है।
2-  चार्ज कंट्रोलर क्या आपने अपने घर में पहले  से ही बिजली वाला इन्वर्टर लगा रखा है.  बिजली न रहने पर यह आपको सुविधा तो देता है, लेकिन यह खुद भी बिजली की खपत कर बिल बढ़ाता है।  आप केवल चार्ज कंट्रोलर लगा कर इससे बैट्री को नियत  (12) बोल्ट पर चार्ज कर सकते हैं। आप चाहें तो अपने इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर सिस्टम बना सकते हैं। इसके लिए चार्ज कंट्रोलर लगाने होंगे। कई कंपनियां इनका निर्माण कर रही हैं। इससे आप केवल बैट्री को चार्ज कर सकते हैं, जबकि इसके जगह हाइब्रिड इन्वर्टर लगाते हैं तो पैनल द्वारा उत्पादित अतिरिक्त बिजली का आप दिन में सीधे उपयोग कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि प्रत्येक सोलर इन्वर्टर में चार्ज कन्ट्रोलर लगा होता है। पैनल द्वारा उत्पादित AMP के हिसाब से सोलर इन्वर्टर तथा उसमें लगे चार्ज कन्ट्रोलर का चयन करें। यदि आपने 30 AMP तक का पैनल लगा रखा है तब 30 AMP से अधिक का चार्ज कन्ट्रोलर लगाना आवश्यक है।
            सोलर सिस्टम लगाने के पहले आप सुनिश्चित करें कि आपको कितने वाट तक की ऊर्जा की आवश्यकता है। इसी के आधार पर पैनल, तार, इन्वर्टर / चार्ज कंट्रोलर लगाने की जरूरत होगी। जितने अधिक वाट के पैनल आप लगायेंगें खर्च और बिजली बचत बढता जाएगा।
       जहां घर की छत पर सूरज की सीधी धूप आती हो, वहाँ पैनल को स्टैण्ड के सहारे लगाया जाता है। पैनल  एक तार के साथ चार्जर (इन्वर्टर /चार्ज कंट्रोलर ) जुडा रहता है, जिसका कनैक्शन सीधे बैटरी के साथ होगा। जब-जब सोलर पैनल काम करेगा तो बैटरी भी चार्ज होती रहेगी। एक बार बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाए तो उसके बाद पूरे घर को हाइब्रिड इन्वर्टर से ही पैनल के वाट के हिसाब से बिजली की सप्लाई मिलती रहेगी।  कड़ी धूप (25 डिग्री सेल्सियस) में यह तेजी से काम करते हैं, जबकि कम धूप होने पर इनकी कार्य क्षमता कुछ कम हो जाती है। बारिश के दिनों में धूप छांवके कारण कम काम करते हैं। फिर भी पूष, माघ (दिसम्बर- जनवरी) के मुकाबले अधिक बिजली बनाता है। कम विद्युत उत्पादन की स्थिति में बिजली से चलाया जा सकता है।
सोलर पैनल के प्रकार-
पैनल- मोनो मोनोक्रिस्टलाइनपीवी सेल और मल्टी मल्टीक्रिस्टलाइन पीवी सेल
मोनोक्रिस्टलाइन पीवी सेल एकमात्र सिलिकॉन क्रिस्टल से बनता हैं, जबकि मल्टीक्रिस्टलाइन पीवी सेल में कई सिलिकॉन क्रिस्टल का संयोजन होता हैं| एक मोनोक्रिस्टलाइन पीवी, सौर ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करने में अधिक सक्षम होता है| मोनोक्रिस्टलाइन पीवी को, समान ऊर्जा रूपांतरण करने के लिए, मल्टीक्रिस्टलाइन पीवी सेल की तुलना में कम सतह/छत क्षेत्र की भी आवश्यकता होती हैं| इस प्रकार यह एक मल्टीक्रिस्टलाइन पीवी सेल की तुलना में अधिक महंगा भी होता हैं| दोनों के बीच चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप पीवी की स्थापना कितने सतह क्षेत्र में करना चाहते हैं|
सौर पैनल की कीमत वाट के हिसाब से तय होती है, अगर आप कम वाट का पैनल खरीदेंगे तो आपको पैनल महंगा पड़ेगा| सोलर पैनल 5 वॉट से 250 वॉट तक के होते हैं। एक अच्छा आयातित पीवी मॉड्यूल का मूल्य करीब 40-50 रुपये प्रति वाट पड़ता है (आप कितनी मात्रा और वाट में सौर पैनल खरीद रहे हैं उस पर कीमत निर्धारित होती है)| सोलर पैनल की आयु करीब 25 साल होती है। सोलर पैनल को  घर में रखे सोलर चार्ज कंट्रोलर/ इन्वर्टर से जोड़ा जाता है। सोलर चार्ज कंट्रोलर की कीमत 1000 रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक की होती है,जबकि 800 से 1200 VA तक के इन्वर्टर की कीमत 4000 रुपये से लेकर 6 हजार रुपये तक की होती है। आपको अपने घर की छत या बालकनी पर सोलर पैनल लगाने होंगे। भारत में निर्मित अच्छे गुणपूर्णता पीवी मॉड्यूल का मूल्य करीब 40-42 रुपये प्रति वाट होता है । अगर हम बैटरीज की लागत जानना चाहते हैं, तो इसकी लागत Ah से तय होती है। सामान्यतः 150Ah की कीमत 12000 से 15000  होगी। बैटरी दो तरह के होते हैं। सामान्य और सोलर । सोलर सिस्टम के लिए सोलर बैट्री का उपयोग करना चाहिए। यदि ट्यूबलर बैट्री का उपयोग किया जाय तो यह और अधिक टिकाऊ होता है। ऑपरेटिंग लागत में बैटरी का प्रतिस्थापित (बदलने का) खर्च अलग हैं। 300 वॉट के सोलर पैनल वाले इन्वर्टर सिस्टम एवं 150Ah की बैट्री से एक पंखा, एक LED बल्ब व टीवी चलाया जा सकता है। सोलर पैनल दिन में 6 घंटे में 150Ah बैट्री को चार्ज कर देता है। 150Ah बैट्री के फुल चार्ज होने पर आपका इन्वर्टर करीब 100 वाट के उपकरण को 12 घंटे चला सकता है। 
                    यदि आप शहरी क्षेत्र में हैं और बिजली से इन्वर्टर के सहारे बैट्री को चार्ज करते है आपके लिए बेहतर होगा आप सोलर पैनल के साथ हाइब्रिड इन्वर्टर लगायें । निश्चित रूप से यह आपके जेब के बोझ को कम करेगा,क्योंकि बैट्री पर तो आप खर्च कर ही रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी यह किफायती है ।  यदि दो चार घर मिलकर लगायें तो और सस्ता पडेगा। आफिस के लिए इससे सर्वोत्तम साधन हो ही नहीं सकता।
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