श्लोकसंधानम् केवल श्लोकों
का संकलन नहीं है।
यह श्लोक के शुद्ध पाठ, मानक उच्चारण और उसके रस व छन्द के अनुरूप गायन
को सुरक्षित रखने का एक गंभीर प्रयास है।
हर श्लोक के साथ उसका सही
उच्चारण दिया गया है, और जिस रस व छन्द में श्लोक
रचा गया है, उसी के अनुकूल उसका गायन वाला MP3 भी जोड़ा गया है।
क्योंकि श्लोक को केवल पढ़
लेना पर्याप्त नहीं, उसे सही लय,
सही स्वर और सही उच्चारण के साथ बोलना ही
उसकी आत्मा है।
आज की लिखित परम्परा और औपचारिक
शिक्षा के दौर में भाषा के उच्चारण और लहजे के लुप्त होने का खतरा लगातार
बढ़ता जा रहा है।
ऐसे समय में श्लोकसंधानम्
श्लोकों के शुद्ध पाठ के साथ-साथ उनके सही उच्चारण की शिक्षा देने का भी
माध्यम बनता है।
आपके सुनने के लिए “मेघदूतम्” का एक पद्य यहाँ वीडियो
के रूप में प्रस्तुत है। क्लिक करें।
https://youtube.com/shorts/4AfpTHYzwy8?si=Pm8CUsjuvsgyqo9e
इसका ऑडियो श्लोकसंधानम् पर
उपलब्ध कराया जाना है।
लेकिन मन को एक पीड़ा भी है—
जिनके लिए यह सारी सामग्री
तैयार की जा रही है, उनके पास इसके उपयोग के लिए
आवश्यक संसाधन नहीं हैं।
बहुत श्रम, समय और साधना के बाद तैयार की गई सामग्री का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा है—यह एक कचोटने वाला सत्य
है।
फिर भी यह प्रयास जारी है,
क्योंकि परम्परा को जीवित रखने के लिए कभी-कभी परिणाम से पहले कर्तव्य निभाना ज़रूरी होता है।





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