शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

Learn Hieratic in Hindi Part -4 अन्त्येष्टि-4,पंचक मरण शान्ति

          पंचक में मृत्यु होने पर वंश के लिए अनिष्ट कारक होता है इसलिए जहाँ पर शव जलाना हो वहां भूमि शुद्धकर कुश से मनुष्याकृति की पाँच प्रतिमा बनाकर यव के आटे से उनका लेपन कर, अपसव्य हो पूजन संकल्प करें-
अद्योत्यादि॰ अमुकगोत्रस्य अमुकप्रेतस्य धनिष्ठादि पंचकेभरण- सूचितवंशानिष्ट विनाशार्थं पंचकशान्ति करिष्ये।
प्रतिमाओं को स्थापित कर पूजन करे -
1. प्रेतवाहाय नमः।।                    2. प्रेतसखायै नमः।।
3. प्रेतपाय नमः।।                        4. प्रेतभूमिपाय नमः।।
5. प्रेत हत्र्रो नमः।।
नाम मंत्र से प्रत्येक प्रतिमा को गन्ध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीपक और नैवेद्य से पूजन कर दाह से पहले शव के ऊपर रख दें-
पहली प्रतिमा-शिर पर। दूसरी दक्षिण कुक्षी पर। तीसरी बांयी कुक्षी पर। चैथी नाभी के ऊपर। पांचवी पैरों के ऊपर रख घी को आहुति दें।
1- प्रेतवाहाय स्वाहा।।     2- प्रेतसखायै स्वाहा।।
3- प्रेतपाय स्वाहा।।         4- प्रेत भूमिपाय स्वाहा।।
5- प्रेत हत्र्रो स्वाहा।।
उपर्युक्त आहुति देकर पूर्व प्रकार से शव का दाह कर अशौचान्तर (ग्यारहवें, बारहवे दिन पंचक शान्ति करे।।
कर्मकर्ता नदी, तालाब तीर्थ आदि के पास जाकर श्राद्ध भूमि को साफ कर गोबर से लीप स्नान के बाद नया यज्ञोपवीत वस्त्रा धारण करे। होम के लिए वेदी बनावे। कलश स्थापन पूर्व, दक्षिण, पश्चिम उत्तर तथा चारों के मध्य में करे। गणेश नवग्रह आदि का पूजन कर अपसव्य हो संकल्प करे-
अद्येत्यादि॰ अमुकगोत्रस्य अमुकप्रेतस्य धनिष्ठादिपंचक जनित दुर्भरण दोष-निवृत्यर्थं (सव्य हो) मम गृहे सपरिवाराणामायुरारोग्य सुख प्राप्तर्थं विष्णुपूजनपूर्वकं पंचक शांतिकर्माहं करिष्ये।
संकल्प कर भगवान विष्णु (शालिग्राम) का पूजन षोडशोपचार से कर पुनः संकल्प करे -
अद्येत्यादि॰ अमुकप्रेतस्य पंचकशांतिकर्मांगतया विहितं कलशपंचक देवतानां स्थापनं प्रतिष्ठापूजनं च करिष्ये।
जन्मोत्सवविधि
ब्राह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने हेतु निम्न सङ्कल्प करे। स्नानसøल्प- अद्येहेत्याद्युच्चाय्र्य अमुकगोत्रोऽमुकराशिरमुकशम्र्माहं आयुरभिवृद्धये संव्वत्सरावच्छिन्नसुखप्राप्ति कामस्शीतलोदकेन स्नानं करिष्ये। स्नान कर
सन्ध्यादि नित्यकर्म सम्पादित करें, यदि जन्म शनिवार या मंगलवार को हुआ हो तो तत्सूचित दोष परिहार के लिए आठ मुट्ठी धान या अन्य कोई अनाज ब्राह्मण को देकर नया वस्त्रा निम्न विनियोग मंत्र पढ़कर पहनें। परिधास्यै इत्याथर्वणऋषिः पंक्तिश्छन्दो वासोदेवता वस्त्रापरिधाने विनियोगः। ॐपरिधास्यै यशोधास्यै दीर्घायुष्ट्वाय जरदष्टिरस्मि शतं च जीवामि शरदः पुरूची रायस्पोषमभिसंब्ययिष्ये।। नया वस्त्रा धारण कर निम्न विनियोग एवं मन्त्रा पढ़कर उत्तरीय (दुपट्टा) धारण करें। यशसामेत्याथर्वणऋषिः पंक्तिश्छन्दः लिúोक्ता देवता उत्तरीयसपरिधाने विनियोगः। ॐयशसा मा द्यावापृथिवी यशसेन्द्राबृहस्पती यशो भगश्च मा विन्दद्यशो मा प्रतिपाद्यताम्। यदि दुपट्टा न हो तो कोई भी अश्वेत वस्त्रा पहन नीम, गुग्गुल, दूव, गोरोचन आदि की पोटली बना निम्न मंत्र से प्रतिष्ठा करें-ॐभूर्भुवः स्वः पोटलिके सुप्रतिष्ठिता वरदा भवत च। उक्त पोटली को दाहिने हाथ में बांध लें। पुनः गणेश पूजन करें संभव हो तो कलश स्थापन करें। पुनः प्रधान सङ्कल्प करें।
प्रधान संकल्प अद्येहत्यादि अमुकगोत्रोऽमुकराशिरमुकशर्माहं ममायुष्याभिवृद्धये वर्षवृद्धिकर्म करिष्ये तदúत्वेन दध्यक्षतपु}ेषु आवाहितानां कुलदेवतादिषष्ठीदेवीपय्र्यन्तानां कलशे आवाहितानां ब्रह्मवरुणसहितादित्या- दिनवग्रहाणां च पूजनं करिष्ये। थाली में नया सफेद वस्त्रा फैलाकर दही एवं अक्षत लेकर निम्न कुलदेवता से षष्ठी देवी तक का पूजनार्थ आवाहन करें। ॐभूर्भुवःस्वः कुलदेवते इहागच्छेहतिष्ठ पूजार्थं त्वामावाहयामि 1 ॐभूर्भुवःस्वः स्वनक्षत्रोश अमुक इहागच्छेहतिष्ठ पूजार्थं त्वामावाहयामि 2 ॐभूर्भुवःस्वः प्रकृतिपुरुषात्मकमातापितरौ इहागच्छतं इहतिष्ठतं पूजार्थं युवामावाहयामि 3 ॐभू0 ब्रह्मन् इहागच्छेहतिष्ठ पू0 4 ॐभूः भानो इहा 0 5 ॐभूः 0 विघ्नेश इहा 0 6 ॐभूः 0 मार्कण्डेय इहा 0 7 ॐभूः 0 बले इहा 0 7 ॐभूः 0 व्यास इहा 0 8 ॐभूः 0 जामदग्न्य राम इहा 0 10 ॐभूः 0 अश्वत्थामन् इहा 0 11 ॐभूः 0 कृपाचाय्र्य इहा 0 12 ॐभूः 0 प्रह्लाद इहा 0 13 ॐभूः 0 हनुमन् इहा 0 14 ॐभूः 0 विभीषण इहा 0 15 ॐभूर्भुवःस्वः षष्ठीदेवि इहागच्छेहतिष्ठ पूजार्थं त्वामावाहयामि 16 आवाहन करें तथा षष्ठी देवी पर्यन्त का ध्यान करें। ॐभूर्भुवःस्वः कुलदेवतादिदेवताः षष्ठीदेवीपय्र्यन्ताः इहागच्छन्तु इह तिष्ठन्तु सुप्रतिष्ठिता वरदा भवन्तु ॐवरदाभयपाणय इति मार्कण्डेयध्याने विशेषः-ॐद्विभुजं जटिलं सौम्यं सुवृद्धं चिरजीविनम्। मार्कण्डेयं नरो भक्त्या पूजयेत्प्रयतः शुचिः।। इनका ध्यान कर नाममात्रा से पूजन करें-ॐकुलदेवतायै नमः ॐजन्मनक्षत्रोशाय अमुकाय नमः ॐप्रकृतिपुरुषात्मकमातापितृभ्यां नमः ॐब्रह्मणे नमः ॐभानवे नमः ॐविघ्नेशाय नमः ॐमार्कण्डेयाय नमः ॐबलये नमः ॐव्यासाय नमः ॐअश्वत्थाम्ने नमः ॐकृपाचार्याय नमः ॐप्रह्लादाय नमः ॐहनुमते नमः ॐविभीषणाय नमः ॐषष्ठीदेव्यै नमः ॐजोड़कर प्रत्येक नाम मंत्र से षोडशोपचार पूजन, आरती कर नवग्रहों का भी नाम लेते हुए पुष्पाञ्जलि समर्पित करे। पुनः मार्कण्डेय की प्रार्थना-
                        मार्कण्डेय महाभाग सप्तकल्पान्तजीवन।
                        आयुरारोग्यसिद्धîर्थमस्माकं वरदो भव।।
                        चिरजीवी यथा त्वं भो भविष्यामि तथा मुने।
                        रूपवान्वित्तवाँश्चैव श्रिया युक्तश्च सर्वदा।।
                        मार्कण्डेय नमस्तेस्तु सप्तकल्पान्तजीवन।
                        आयुरारोग्यसिद्धîर्थं प्रसीद भगवन्मुने।।
                        चिरजीवी यथा त्वं तु मुनीनां प्रवर द्विज।
                        कुरुष्व मुनिशार्दूल तथा मां चिरजीविनम्।।
पुनः षष्ठी प्रार्थना-
                        जय देवि जगन्मातर्जगदानन्दकारिणि।
                        प्रसीद मम कल्याणि महाषष्ठि नमोस्तुते।
                        रूपं देहि यशो देहि भगं भगवति देहि मे।
                        पुत्रन् देहि धनं देहि सर्वान्कामाँश्च देहि मे।।
                        त्रौलोक्ये यानिभूतानि स्थावराणि चराणि च।
                        ब्रह्मविष्णुशिवैः सार्द्धं रक्षां कुर्वन्तु तानि मे।।
प्रार्थना कर अञ्जलि से मार्कण्डेय के लिए निवेदित दूध को पांच बार पीयें।
मन्त्रा-
                        सतिलं गुडसम्मिश्रम}ल्यर्द्धमितं पयः।
                        मार्कण्डेयाद्वरं लब्ध्वा पिबाम्यायुःप्रवृद्धये।।
मुख धोकर दक्षिणा देने हेतु संकल्प करें। अद्येहेत्यादि अमुकराशिरमुकशम्र्माहं आयुरभिवृद्धये कृतायाः कुलदेवतादीनाम् आदित्यादिनवग्रहाणां च पूजायाः साद्गुण्यार्थमिमां दक्षिणां ब्राह्मणेभ्यो विभाज्य दास्ये ॐतत्सत् तथा यथोपपन्नेनान्नेन ब्राह्मणाँश्च भोजयिष्ये। अभिषेक, तिलक, मन्त्रा आदि कराकर धृतछाया, ब्राह्मणभोजन पूर्वक स्वयं भोजन करे।
                        खण्डनं  नखकेशानां  मैथुनाध्वगमौ तथा।
                        आमिषं कलह-हिंसां वर्षवृद्धौ विवज्र्जयेत्।।

                                                      इति।।