अष्टाध्यायी कंठस्थ पाठ
प्रतियोगिता
स्मृति, साधना
और भारतीय ज्ञान-परम्परा का जीवंत उत्सव
भारतीय
ज्ञान-परम्परा में स्मरण (कंठस्थ पाठ) को केवल अध्ययन का माध्यम नहीं, बल्कि बौद्धिक और आध्यात्मिक साधना माना गया है।
इसी
परम्परा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने का कार्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा
आयोजित अष्टाध्यायी कंठस्थ पाठ प्रतियोगिता के माध्यम से किया जा रहा है।
यह
प्रतियोगिता स्मृति, अनुशासन और शास्त्रीय ज्ञान
की एक असाधारण परीक्षा है,
जो
प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता की सीमाओं को चुनौती देती है।
अष्टाध्यायी : संस्कृत व्याकरण की आधारशिला
पाणिनि
द्वारा रचित अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण का सर्वाधिक प्रामाणिक और सुव्यवस्थित
ग्रंथ है।
लगभग
चार हज़ार सूत्रों से युक्त यह ग्रंथ केवल नियमों का संकलन नहीं,
बल्कि
भाषा-विज्ञान की एक अद्भुत बौद्धिक संरचना है।
इसी
ग्रंथ को अक्षरशः, क्रमबद्ध और शुद्ध उच्चारण
के साथ कंठस्थ करना इस प्रतियोगिता की मूल चुनौती है।
प्रतियोगिता का
उद्देश्य
इस
प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं है,
बल्कि—
*
पारंपरिक संस्कृत शिक्षा में छिपी प्रतिभाओं को पहचानना
*
कंठस्थ पाठ की प्राचीन परम्परा को सुदृढ़ करना
*
स्मरण,
उच्चारण और बौद्धिक समझ का संतुलित विकास करना
यह
मंच उन साधकों के लिए है
जो
ज्ञान को केवल पढ़ते नहीं,
बल्कि
उसे अपने चिंतन और व्यक्तित्व का हिस्सा बनाते हैं।
मूल्यांकन
प्रणाली (Scoring System)
प्रतियोगिता
का मूल्यांकन 100 अंकों के स्पष्ट और सुविचारित ढाँचे पर आधारित है—
*
70 अंक —
कंठस्थ पाठ (स्मरण की शुद्धता और निरंतरता)
*
20 अंक —
उच्चारण की स्पष्टता, शुद्धता और पाठ की गति
*
10 अंक —
ग्रंथ से संबंधित सामान्य ज्ञान
यह
संरचना यह दर्शाती है कि
स्मरण-शक्ति
इस प्रतियोगिता का केंद्र है, किन्तु उसके साथ उच्चारण
और वैचारिक समझ भी अनिवार्य है।
चयन प्रक्रिया :
तीन चरणों में परीक्षा
प्रतियोगिता
की चयन प्रक्रिया
तीन
क्रमिक चरणों में संपन्न होती है—
1. सूत्र-प्रारम्भ चरण
निर्णायक
किसी एक सूत्र का उच्चारण करते हैं और प्रतिभागी को वहीं से आगे पाठ सुनाना होता
है।
2. शलाका परीक्षा
यह
प्रतियोगिता का सबसे कठिन और निर्णायक चरण माना जाता है।
ग्रंथ
का कोई भी पृष्ठ खोलकर किसी भी स्थान से पाठ प्रारम्भ कराया जाता है।
यह
चरण प्रतिभागी के सम्पूर्ण कंठस्थ ज्ञान की वास्तविक परीक्षा है।
3. प्रश्न-उत्तर चरण
ग्रंथ
पर आधारित पाँच प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके लिए
कुल 10 अंक निर्धारित हैं।
निर्णायक मंडल
की भूमिका
पूरी
प्रतियोगिता का मूल्यांकन दो विषय-विशेषज्ञ न्यायाधीशों के पैनल द्वारा किया जाता
है।
*
परीक्षा की अवधि पूर्व-निर्धारित नहीं होती
*
समय का निर्धारण प्रतिभागी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है
*
निर्णय पूरी तरह विषयगत विशेषज्ञता और निष्पक्ष मूल्यांकन पर आधारित होता है
मुख्य प्रतियोगिता तक पहुँचने की प्रक्रिया
राज्य-स्तरीय
मुख्य प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले प्रतिभागियों को एक ऑनलाइन क्वालिफाइंग
परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसी प्रारंभिक चरण के माध्यम से योग्य
प्रतिभागियों का चयन किया जाता है।
सफलता के मूल
आधार
इस
प्रतियोगिता में सफलता तीन मूल स्तंभों पर आधारित है—
1.
अष्टाध्यायी का पूर्ण और क्रमबद्ध कंठस्थ पाठ
2.
शुद्ध,
स्पष्ट और संतुलित उच्चारण
3.
ग्रंथ और उसके संदर्भों की गहरी समझ
निष्कर्ष : ज्ञान की सही परिभाषा
अष्टाध्यायी
कंठस्थ पाठ प्रतियोगिता हमें एक गहरे प्रश्न पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है—
क्या
ज्ञान केवल सूचना है, या वह ऐसा तत्व है जो स्मृति,
साधना और अस्तित्व में रच-बस जाए?
यह प्रतियोगिता भारतीय ज्ञान-परम्परा के इसी जीवंत उत्तर का प्रतिनिधित्व करती है।





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