गुरुवार, 16 मई 2019

श्रीमद्भागवत की टीकायें


श्रीमद्भागवत महापुराण महर्षि  वेदव्यास द्वारा रचित ग्रन्थ है।  इसमें 12 स्कन्ध 335 अध्याय और 18 हजार श्लोक हैं। इस पुराण में वेदों, उपनिषदों व दर्शन शास्त्र की विस्तारपूर्वक व्याख्या की गई है। इसे सनातन धर्म तथा संस्कृति का विश्वकोष भी कहा जाता है। भारतीय सनातन संप्रदाय के विभिन्न संतों ने श्रीमद्भागवत पर अपने-अपने सिद्धान्त के अनुसार अनेक टीकाओं का निर्माण किया। इनमें किसी टीकाकार द्वारा श्रीमद्भागवत का सार प्रतिपादित किया गया तो किसी ने स्कन्ध विशेष की ही व्याख्या की है। इसकी भाषा जटिल है। कहा जाता है कि विद्वानों की परीक्षा भागवत में होती है। विद्यावतां भागवते परीक्षा। अतः कुछ टीकाकारों ने कूट शब्दों को विशिष्ट रूप से व्याख्यायित किया है। भागवत पर की गयी कुछ प्रसिद्ध टीकाओं के विवरण निम्नानुसार हैं-
1- श्रीमद्भागवत की सबसे प्राचीन संस्कृत टीका भावार्थ दीपिकाहै, जो अद्वैत सिद्धान्त पर आधारित प्रसिद्ध
एवं सर्वाधिक प्रमाणिक टीका है। इसके रचयिता श्रीधरस्वामीहैं। इसकी रचना 13 वीं शताब्दी में की गयी। यह सभी सम्प्रदायों में मान्य टीका है। इनके बारे में कहा जाता है कि श्रीधरः सकलं वेत्ति श्रीनृसिंहप्रसादतः।
 2- विशिष्टाद्वैत सिद्धान्त पर आधारित 14 वीं शती के ‘‘सुदर्शनसूरि’’ विरचित शुकपक्षीया टीकाहै जो अन्य संस्कृत टीकाओं की अपेक्षा संक्षिप्त मानी जाती है।
3- श्री सुर्दशनसूरि के शिष्य राघवाचार्य विरचित ‘‘भागवत चन्द्रचन्द्रिका’’ विशिष्टाद्वैत सिद्धान्त पर आधारित संस्कृत की टीका है।
4- श्री माधवाचार्य विरचित द्वैत सिद्धान्त पर आधारित ‘‘भागवततत्पर्यनिर्णय’’ टीका ।
5- श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध पर सनातन गोस्वामी के द्वारा दशम स्कन्ध पर ‘‘बृहद्वैष्णवतोषणी’’ लिखित टीका ।
6- रूपगोस्वामी तथा सनातन गोस्वामी के भ्रात्रेय जीवगोस्वामी द्वारा विरचित ‘‘क्रमसन्दर्भ ’’ नामक टीका ।
7- विश्वनाथ चक्रवती के द्वारा विरचित ‘‘सारार्थ दर्शिनी’’ टीका ।
8- पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक 16वीं शती के बल्लभाचार्य जी के द्वारा लिखित ‘‘सुबोधनी’’ संस्कृत टीका । यह शुद्धाद्वैत मतानुसारणी टीका मानी जाती है। इन्होंने श्रीधर स्वामी कृत भावार्थ दीपिका टीका का खंडन किया है।
9- निम्बार्क सम्प्रदाय के आचार्य शुकदेवजी की ‘‘सिद्धान्त प्रदीप’’ टीका।
10- 16वीं शती में माध्व संप्रदाय के आचार्य विजयध्वजतीर्थ  के द्वारा रचित ‘‘पदरत्नावली’’ टीका ।
11- वंशीधर विरचित ‘‘भावार्थ दीपिकाप्रकाश’’
12- गंगासहाय विरचित ‘‘अवन्वितार्थ प्रकाशिका’’
13- राधारमण गोस्वामी प्रणीत ‘‘दीपिनी’’
14- पुरूषोत्तमचरण गोस्वामी विरचित ‘‘सुबोधिनीप्रकाश’’
15- गोस्वामी श्रीगिरिधर लालकृत ‘‘बालप्रबोधिनी’’,
16- भगवतप्रसादाचार्य विरचित ‘‘भक्तमनोरंजनी’’,
17- दशम  स्कन्ध के पूर्वार्द्ध पर पद्यप्रदान टीका श्री हरिविरचित ‘‘हरिभक्तरसायन’’ है।
18- सनातन गोस्वामी कृत ‘‘बृहद्वैष्णवतोषिणी’’ टीका ।
19- श्री हरि का हरिभक्ति रसायन नामक पद्यमयी टीका।
20- रामनारायण विरचित ‘‘भावभावविभाविका’’ टीका।
21- श्रीरामचन्द्र डोंगरेजी के प्रवचन पर आधारित ‘‘भागवतरहस्य’’, एवं
22- श्रीअखण्डानन्द सरस्वती कृत ‘‘भागवतदर्शन’’ आदि कृतियाँ सुप्रसिद्ध हैं
इसके अतिरिक्त भी विविध टीकाएं हैं। जिनके द्वारा श्रीमद्भागवत के रहस्य को स्पष्ट किया गया।

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