शनिवार, 22 सितंबर 2012

गर्भाधान संस्कार

गर्भाधान जन्म से पूर्व के संस्कार

   गृह्य सूत्र गर्भाधान के साथ ही संस्कारों का प्रारंभ करते हैं क्योंकि जीवन का प्रारम्भ इसी संस्कार से शुरू होता है -निषिक्तो यत्प्रयोगेण गर्भः संधार्यते स्त्रिया।
      तद्‌
गर्भालम्भनंनाम कर्म प्रोक्तं मनीषिभिः। वीर मित्रोदय।

  स्त्री-पुरुष के संयोग रूप इस संस्कार की विस्तृत विवेचना शास्त्रों में मिलती है जिसमें अनेक विधि-निषेधों की चर्चा है जो मानव जीवन के लिए और आगे आने वाले संतति परम्परा की शुद्धि के लिए अत्यावश्यक है। दिव्य सन्तति की प्राप्ति के लिए बताये गये शास्त्रीय प्रयोग सफल होते हैं सन्तति-निग्रह भी होता है।